बुधवार, फ़रवरी 18, 2009

पाइल्स यानि बवासीर के बहुत रोगी आते हैं

आदरणीय सर, नमस्ते
मैं जिस जगह योग सिखाता हूं मेरे देखने में पाइल्स यानि बवासीर के बहुत रोगी आते हैं जिनमें कुछ को खून आता है कुछ को बादी बवासीर होती है। मरीज योगाभ्यास करने के साथ चाहते हैं कि कोई दवा भी दे दी जाए ताकि खून आना बंद हो जाए और जो कैंची से काटने जैसा दर्द होता है वह बंद हो जाए तब तो योगाभ्यास करें। लेकिन मैं तो आयुर्वेद का जानकार नहीं हूं तो आप बताएं कि क्या करना सही रहेगा। क्या कोई ऐसी दवा है जिसे मैं बना कर रख लूं और किसी भी व्यक्ति को दे सकूं यानि कि किसी को नुकसान न करे? सुझाव दीजिये। धन्यवाद
अंशुमान श्रीमाली,मैक्सिको
अंशुमान जी पहले तो हमारी शुभकामनाएं स्वीकारिये के आप योग का प्रचार विदेश में कर रहे हैं और हमारे पश्चिमी भाई बहनों को भी इस जीवन शैली से लाभान्वित करने में समय दे रहे हैं। आप साधुवाद के पात्र हैं। आपका कहना बिलकुल सही है यदि कोई बवासीर जैसी बीमारी से पीड़ित होता है तो उसे चलना उठना बैठना सभी कष्ट देता है वह योगाभ्यास में ध्यान न दे पाएगा अतः सर्वप्रथम उसे औषधि दे कर इस योग्य करा जाए कि वह आराम से अभ्यास के लिये प्रस्तुत तो हो सके। लीजिये आपके लिये अत्यंत उपयोगी योग प्रस्तुत है जो बना कर रख लीजिये लेकिन निःशुल्क अथवा न्यूनतम मूल्य पर वितरित करें ताकि योग के साथ साथ ही आयुर्वेद की भी पताका आप लहरा सकें। आप निम्न औषधियां बना लीजिये-
१ . शुद्ध रसौत(मुसब्बर) + नागकेशर + कलमी शोरा + निशोथ + शुद्ध गेरू ; इन सबको बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लीजिये। इस मिश्रण में गेंदे(मराठी में इसे झेंडू कहते हैं) के फूलों का रस ऊपर तक डाल दें, सूख जाने पर फिर से डाल दें इस प्रकार गेंदे के फूलों के रस को सात बार डाल कर सुखाइये। यह रस डाल कर सुखाना आयुर्वेद की भाषा में "भावना देना" कहलाता है। इसी प्रकार से मूली के रस की सात भावनाएं दीजिये। यह काम थोड़ा सा श्रम लेता है लेकिन जादू सा असर दिखाने वाली औषधि तैयार हो जाती है। दो रत्ती यानि कि २५० मिग्रा. वजन की गोलियां बना लीजिये व छाया में सुखा लीजिये। दिन में दो बार दो-दो गोली पानी से दीजिए। खाली पेट न दें।
२ . यदि अत्यधिक रक्त का फ़व्वारा सा छूट रहा हो तो इस योग को बना कर प्रयोग करें हानिरहित योग है इसलिये निर्भय हो कर प्रयोग करिये कोई नुकसान न होगा। सामान्य रक्त आने पर तो ऊपर बताया योग ही बहुत कारगर है उसे कम न समझियेगा। पीपल की लाख + कहरवा पिष्टी + अकीक पिष्टी + रसौत(मुसब्बर) प्रत्येक पचास ग्राम और शंखजीरा का चूर्ण दो सौ ग्राम लेकर कस कर साथ में घोंट लीजिये इस मिश्रण को दोपहर में व शाम में एक चम्मच(चायवाला) पानी के साथ दीजिये और चमत्कार देखिये लोग आयुर्वेद का गुणगान करते नहीं थकेंगे।
बाकी पथ्य परहेज आदि तो आप स्वयं जानते ही होंगे।

1 आप लोग बोले:

Abhishek ने कहा…

सबसे पहले मेरा प्रणाम स्वीकार करे, आजकल इस बबासीर रोग से काफी ब्यक्ति पीडीत है ,पर आयुर्वेदिक दावा के बारे में न जानने के कारन न जाने कितना पैसा और समय खर्च कर डालते हें पर फिर भी परेशानी पूरी दूर नहीं होती ,मै एक २० साल का युबक हूँ पर अपनी इन सारी संस्कृति पर मेरी काफी आस्था और गर्ब है ,आप लोगों द्वारा प्रदत इन जानकारी के लिए धन्यवाद .............