भारतीय चिकित्सा पद्धति से, बिना साइड इफेक्ट के इलाज के लिये विख्यात है आयुर्वेद। अगर आपकी या आपके किसी परिचित की भी कोई समस्या हो तो बिना संकोच rudrakshanathshrivastava7@gmail.com पर मेल करके हमें बताएं। आपको निःशुल्क लेकिन बेहतरीन इलाज के रास्ते डा.रूपेश श्रीवास्तव सुझाएंगे। आयुषवेद पर आने और इसे पढ़ने के लिये आपका आभार।

Saturday, May 17, 2008

यह ब्रेन ट्यूमर की समस्या तो नहीं है ????

डाक्टर साहब नमस्ते, मेरी उम्र २८ वर्ष है। मैं विवाहित महिला हूं। मेरे सिर के समस्त दाहिने भाग की नसों में व गर्दन में बहुत तेज दर्द होता है जिससे मैं बहुत परेशान हूं। सर, मैंने कई डाक्टरों की दवाएं खा ली हैं लेकिन जब दर्द निवारक दवा खा लेती हुं तो कुछ दिन ठीक रहता है। यह कोन सा रोग है? सिर के बांए हिस्से में कोई परेशानी नहीं है। इस दर्द से मैं बहुत सहमी व डरी हुई हुं। यह ब्रेन ट्यूमर की समस्या तो नहीं है। आप इस समस्या का निदान बताने की कृपा करें। मैं सदा आपकी आभारी रहूंगी, सर कोई अच्छा सा उपचार बताना व रोग का नाम भी बताना।
प्रिया,नोएडा
प्रिया बहन, आपने ज्यादा बात अपने दर्द के बारे में नहीं बता पायी है कि किस समय बढ़्ता है या किस समय अपने आप कम हो जाता है अथवा क्या इस दर्द के साथ आपको उल्टी जैसा भी महसूस होता है, मासिक धर्म सामान्य है अथवा नहीं, क्या पूर्वकाल में भीषण जुकाम सर्दी हुई थी। आपको क्या किसी ने ब्रेन ट्यूमर के बारे में कहा है या ये मात्र आपका ही विचार है? क्या किसी कारणवश विशेष चिन्ता है या मानसिक श्रम करना पड़ता है या रात्रि जागरण करना पड़ता है? कितने समय से इस तरह का दर्द हो रहा है? कील ठोंकने जैसा दर्द होता है या कुछ विशेष अनुभूति होती है? आप परेशान न हों फिलहाल तो मुझे ऐसा नहीं प्रतीत हो रहा कि आपको ब्रेन ट्यूमर जैसी कोई समस्या है ये महज आपका भ्रम है, मेरे अनुसार आप "अर्धावभेदक" नामक शिरोरोग से पीड़ित हैं। आप निम्न उपचार लीजिये और दिन में सोना सर्वथा बंद कर दें तथा अत्यधिक पति संसर्ग से भी बचें --
१ . त्रिफला चूर्ण ३० ग्राम + चिरायता १० ग्राम + हल्दी १० ग्राम + नीम की छाल १० ग्राम + गिलोय(गुडूची या गुरिच) १० ग्राम लेकर गुड़ मिला कर काढ़ा बनाएं यानि चाय की तरह से पका लें और सुबह शाम इसका हलके गर्म-गर्म ही आधा कप सेवन करें।
२ . गूलर(ऊमर या उम्बर) के फलों को पीस कर सिर पर मोटा सा लेप दिन में कई बार करा करें
३ . महालक्ष्मीविलास रस एक-एक गोली सुबह शाम दूध के साथ दीजिये। खाली पेट न दें।
४ . गोदन्ती भस्म २५० मिग्रा. + प्रवाल पिष्टी २५० मिग्रा. + छोटी इलायची के पीसे हुए बीज १२५ मिग्रा मिला कर एक मात्रा बनाएं तथा इस दवा को सुबह ही सूरज निकलने से पहले ही ६० ग्राम दही के साथ खा लें था ऐसा रोज सुबह तीन दिन तक लगातार करें फिर बंद कर दें।
५ . षड्बिन्दु तेल की छ्ह बूंदे दोनो नासिका छिद्रों में तथा कानों में तीन-तीन बूंदे सुबह शाम डाला करें।
इस उपचार को दो माह तक जारी रखें। मांसाहार त्याग दें। अवश्य लाभ होगा चिन्ता न करें।

skin specialist called it as vitiligo यानि कि त्वचा पर सफेद दाग.....


sir,my son is 6 yr old .for the last 4 months white round circles/patch/spot are found on his face,body.his lip has changed towhite.consulted skin specialist,called it as vitiligo,not much benefitis recd. few more spots are developing.please give the proper remedy.iam very much worried.
Beena Tompe

बीना बहन, आपके बच्चे की समस्या को गहराई से समझा और आपको भी बताना चाहता हूं जो कि आपके चिकित्सक ने बताया है कि इस बीमारी का नाम अमुक है। यह मात्र एक त्वचा रोग है जो कि पीड़ादायक तो नहीं होता किन्तु सोन्दर्यनाशक अवश्य होता है। इसलिये माता पिता तथा स्वयं रोगी भी अत्यंत चिंतित रहते हैं। Vitiligo नाम से बताई गयी बीमारी में त्वचा के पिगमेंट यानि रंगत देने वाली कोशिकाओं का नाश होने लगता है और इससे चेहरा,नासिका, गुप्तांग, नेत्रगोलक का अंदरूनी भाग तथा बाल प्रभावित हो सकते हैं। आपके बच्चे को होने वाली समस्या के अनेक कारण हो सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि ये बीमारी कोई असाध्य रोग हो, इसलिये आप चिन्ता न करते हुए धैर्य रखें बच्चा ठीक हो जाएगा। इस रोग के निवारण के लिए सर्वप्रथम रोगी का पेट साफ कराना तथा शोधन करना अनिवार्य होता है वरना कोई भी उपचार उचित लाभ नहीं देता है। अतः बच्चे को प्रारंभ में दस्त कराने की दवा बताउंगा इससे जुलाब होने पर आप घबराएं नहीं ये बस उपचार का हिस्सा है।
१ . इच्छाभेदी रस की आधी गोली रात को पानी दें लेकिन उससे पहले दिन में मूंग की दाल की खिचड़ी गाय का घी मिला कर खिलाएं। तीन दिन तक।
२ . गंधक रसायन २५० मिग्रा. + स्वर्णमाक्षिक भस्म १२५ मिग्रा. + गिलोय सत्व २५० मिग्रा. मिला कर शहद के साथ दो बार दीजिये। सुबह नाश्ते के बाद।
३ . आरोग्यवर्धिनी बटी दो गोली + तालकेश्वर रस एक गोली + प्रवाल पिष्टी १२५ मिग्रा. + रस माणिक्य बारीक घोंटा हुआ १२५ मिग्रा + बाकुची चूर्ण एक ग्राम + एक ग्राम त्रिफला चूर्ण मिला कर एक खुराक बनाएं तथा मंजिष्ठादि कषाय + खदिरारिष्ट के दो ढक्कन दवा से साथ में मिला कर पेस्ट जैसा बना लें व दिन में दो बार भोजन के बाद दें।
४ . सोने से आधे घंटे पहले महातिक्त घृत + सोमराजी घृत समान मात्रा में मिला कर एक चम्मच दूध के साथ दें।
५ . दिन में तीन बार चालमोगरा तेल + पंचतिक्त घृत + नीम का तेल + बाकुची का तेल बराबर मात्रा में मिला कर लगाएं।
एक बात का ध्यान रखिये कि यह एक जिद्दी किस्म का रोग है इसलिये अधीरता से लाभ नहीं होता है, न्यूनतम एक से दो साल तक औषधियां देना लाभप्रद होगा। तीखे भोजन से परहेज कराएं तथा चायनीज व्यंजन आदि बंद कर दें।







My son is suffering sweating in hand and feet & low weight ( under weight).

My son is suffering sweating in hand and feet & low weight ( under weight) who is 10 years old , his weight is 22 Kg, normal hight, taking normal diet, but he is under weight. I request you please advice me homeo and aurvedic medicine for weight gain and sweating . I want to increase his weight, he is very thin, Child Physician said he is normal. He take milk with bananas.
please advice me diet also.
reply in hindi
Thanks with regards,
नोएडा पावर,उत्तर प्रदेश
भाईसाहब, आपके बच्चे की समस्या को ध्यान से देखा। आपको बताना चाहता हूं कि हमारे डा.रूपेश श्रीवास्तव आपको मात्र आयुर्वेद का उपाय बताते हैं, होम्योपैथी उनका क्षेत्र नहीं है। आपने एक बात लिखा है कि बच्चे को पीडियाट्रिशियन ने देखा और नार्मल बताया है। क्या आपको उसकी बात पर विश्वास नहीं हो पा रहा है? एक बात स्पष्ट करना चाहता था कि हर व्यक्ति को उसका बच्चा कमजोर ही दिखता है, शरीर की काठी यदि दुबली पतली है तो ये बात चिन्ता का विषय तो हरगिज़ नहीं होना चाहिये बशर्ते कोई बीमारी या असामान्य लक्षण न दिखाई दे। यदि आपके बच्चे को पसीना आने की समस्या अधिक है व आपको वजन कम प्रतीत होता है तो सर्वप्रथम देख लीजिये कि आप उसे जो कुछ भी पौष्टिक से पौष्टिक पदार्थ खाने को दे रहे हैं चाहे वह केला और दूध हो या अन्य कुछ भी वह उसे पच रहा है या नहीं। लीजिये आपके कहे अनुसार समाधान प्रस्तुत है...
१ . आरोग्यवर्धिनी बटी एक गोली दोपहर भोजन के बाद पुनर्नवारिष्ट के एक चम्मच से साथ निगलवाएं।
२ . स्नान करने के लिये साबुन के स्थान पर मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग करवाएं।
३ . अश्वगंधादि चूर्ण आधा चम्मच अश्वगंधारिष्ट के दो चम्मच के साथ दिन में दो बार दें।
४ . अग्नितुण्डी बटी दिन में दो बार एक गोली गर्म जल से दें।
बच्चे की सारी समस्याएं समाप्त हो जाने के बाद भी आप उसे अश्वगंधारिष्ट के दो चम्मच दिन में दो बार सामान्य पुष्टिकारक पेय के तौर पर दे सकते हैं। भोजन में तेज मिर्च मसालेदार भोजन न दें, बाजारू खाद्य पदार्थों का परहेज़ कराएं तथा बाजार में बिकने वाले साफ़्टड्रिन्क व चाकलेट विशेष तौर पर न दें बाकी सामान्य आहार दीजिए।

Friday, May 16, 2008

I am suffering from Gilberts syndrome ( hyper bilirubinemia) and LEFT VENTRICULAR HYPERTROPHY

Dear Sir,
my age is 33 y, male, weight 67 kg, hight 175 cm. I am suffering from gilberts syndrome ( hyper bilirubinemia) which is constant 2.4 mg from last 5 years. colour of urine, skin , eye is light yellow. i am feeling some pain and swelling at right side of liver portion AND I AM TAKING NORMAL DITE. Gastroentrologist doctor said you are ok but i request you, pl advise me for some medicine.
After ECG test doctor said you are suffering from LEFT VENTRICULAR HYPERTROPHY , my BP was 140/90 always from long time 5 years approx but this time i am taking Cardiopril 2.5 mg cap. one cap daily then my BP is normal. when stop cardiopril , I feel weakness, headache, pain left side solder, angryness, darkness fron of my eye ever time when passing urine and also feel chakkar at that time and problem in breathing after some hard work.
this time I am taking cardiopril but i want to stop alopathic medicine.
ERYTHROCYTE
5.7
4.5-5.5 ML/
C.MM
MCH ( MEAN CORPUSCULAR HAEMOGLOBIN
26.3
27-32 PG
TLC
4200
4000-11000/
C.MM
LYMPHOCYTES
42
20-40 %
PLATELET
173000
150000 - 400000/CMM
MPV ( MEAN PLATELET VOLUME)
11
6.5 - 10.5 fl
PDW ( PLATELET DISTRIBUTION WIDTH)
14
6 - 11 fl
SUGAR FASTING
102
70- 105 MG%
SUGAR PP
130
90-160 MG %
SERUM BILIRUBIN TOTAL
2.11
DIRECT
0.48
INDIRECT
1.63
SGPT
39
-- Thanking you,M.gupta

गुप्ता साहब,आपने जिस तरह से अपनी बीमारी को बताया है उससे साफ पता चल रहा है कि आपके ऊपर एलोपैथी के तमामोतमाम प्रयोग करे जाते रहे हैं और आप पैथोलाजिस्ट्स और एलोपैथी के व्यवसायिक डाक्टरों के चंगुल में बुरी तरह से फंसे रहे हैं। आपके शरीर को इन लोगों ने दवाओं की प्रयोगशाला या ऐसा कहें कि गोदाम बना डाला है और आपकी मानसिक दशा ऐसी कर दी है कि कुछ भी हो तो आप विशेषज्ञ के पास भागते हैं। सच तो ये है कि आज जब मैंने चिकित्सा शास्त्र को इतना जान लिया है तो सीना ठोंक कर कह सकता हूं कि दवाएं तो मात्र आपके शरीर में आरोग्य के लिये दस प्रतिशत कार्य करती हैं बाकी कार्य आपका शरीर स्वयं करता है। अब मेहरबानी करके जो बता रहा हूं उन दवाओं को विश्वासपूर्वक लें और हर माह यकीन के लिये टैस्ट कराना बंद कर दें, देह में आरोग्य आप स्वयं महसूस कर सकते हैं उसके लिये किसी परीक्षण की जरूरत नहीं होती है।
मुझे आपको परहेज बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि मैं अनुमान लगा सकता हूं कि आपकी क्या हालत बना रखी है डाक्टरों ने मिलकर। अब जो औषधियां बता रहा हूं उन्हें नियम से लेना प्रारंभ करिये यकीन मानिये कि आप कुछ दिनों में खुद ही कह सकेंगे कि मैं स्वस्थ महसूस कर रहा हूं।
१ . कागजी नींबू का रस छह ग्राम + शहद छह ग्राम + छोटी पीपर का चूर्ण ५०० मिग्रा. + काली मिर्च का चूर्ण ५०० मिग्रा + सोंठ का चूर्ण ५०० मिग्रा ; इन सबको मिला कर दिन में तीन बार सेवन करें। खाली पेट न लें ,भोजन के आधे घंटे बाद ले सकते हैं।
२ . नवायस लौह दो गोली(५०० मिग्रा) + पुनर्नवा मंडूर ५०० मिग्रा + शंख भस्म २५० मिग्रा + आरोग्यवर्धिनी बटी एक गोली को एक साथ लेकर दो चम्मच पुनर्नवासव+ दो चम्मच कुमार्यासव मिला कर दिन में दो बार लें।
३ . भुनी हुई कुटकी का चूर्ण ५०० मिग्रा + ५०० मिग्रा मिश्री को गुनगुने जल से दिन में दो बार लें।
४ . हृदयार्णव रस एक गोली + प्रभाकर बटी एक गोली अर्जुनारिष्ट के दो चम्मच के साथ दिन में दो बार लें।
५ . शुद्ध शिलाजीत आधा ग्राम दिन में दो बार दूध के साथ लीजिये।
इस उपचार को लगातार तीन माह तक जारी रखिये और मुझे सूचित करिए। मात्र पंद्रह दिनों में ही आप अनुकूल परिवर्तन का अनुभव करने लगेंगे। cardiopril को पहले एक-एक दिन के अंतर पर खाएं फिर एक सप्ताह बाद दो-दो दिन के अंतर पर और इसी प्रकार तीसरे सप्ताह तीन दिन के अंतर पर और चौथे सप्ताह चार दिन के अंतर पर फिर बंद कर दें।

मुझे खूनी बवासीर है तथा गुदा में एक मस्सा भी है।

डाक्टर साहब नमस्ते,मेरी आयु २८ वर्ष है। डा.साहब जी मेरी परेशानी यह है कि मुझे खूनी बवासीर है तथा गुदा में एक मस्सा भी है। पेट में ज्यादातर कब्ज रहती है और मेरा पेट भी भारी होता जा रहा है। जब कब्ज हो जाती है तो पाखाना के समय काफी खून जाता है। अतः आपसे निवेदन है कि कोई अच्छी सी दवाई देने की कृपा करें। जिससे कि मुझे इस रोग से मुक्ति मिल जाए। मैं आपका सदा आभारी रहूंगा।
विपिन, उत्तर प्रदेश
विपिन भाई, मैं आपकी तकलीफ़ को भली प्रकार से समझ रहा हूं कि आप कितनी तकलीफ़ से गुजर रहे हैं। सच तो ये है कि आपकी मुख्य समस्या खूनी बवासीर न हो कर कब्जियत है और इसी के कारण आपको खूनी बवासीर हुई है। अब बेफिक्र हो जाइए क्योंकि अब न तो कब्ज की समस्या रहेगी और न ही बवासीर रहने वाली है; दर्द, मस्सा, खून जादू की तरह से गायब हो जाएगा बस आप इन दवाओं को नियम से लीजिये और दवा के सेवन के दौरान मिर्च-मसालेदार आहार, मांसाहार बंद कर दें व बाजारू भोजन से परहेज करें।
१ . रात्रि भोजन के बाद में एक चम्मच गंधर्व हरीतकी चूर्ण को गर्म जल से लें। ये नित्य प्रति पंद्रह दिन तक लें।
२ . सोलहवें दिन से इस दवा से स्थान पर इसी प्रकार से इतनी ही मात्रा में त्रिफ़ला चूर्ण लेना प्रारंभ करें और ऊपर बताई दवा बंद कर दें।
३ . इन्ही दवाओं के साथ ही दिन में तीन बार अर्शकुठार रस एक गोली + अर्शोघ्नी बटी एक गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लें।
४. नीम के तेल १०० मिली+ १० ग्राम पिपरमिंट + २० ग्राम कपूर मिला कर रख लें मिश्रित होने के बाद दो भाग कर लें एक भाग से एक-एक बूंद बताशे में भर कर दिन में तीन बार जल से लें तथा दूसरा भाग मल त्याग करने के बाद गुदा के प्रभावित स्थान पर लगाएं यदि कदाचित जलन हो तो उसे एक दो दिन सहन कर लीजिये फिर जलन न होगी।
५ . शुभ्रा भस्म आधा-आधा ग्राम दिन में तीन बार ठंडे दूध से लें ।

६. मेदोहर गुग्गुलु दो-दो गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लें।

मेरा शरीर बहुत दुबला-पतला है,हीनभावना से ग्रसित हूं।

मेरी आयु २५ वर्ष है। डा.साहब जी मेरी परेशानी यह है कि मेरा शरीर बहुत दुबला-पतला है। जिसके कारण मैं हीनभावना से ग्रसित हूं। मेरे शरीर को देखकर मेरी संग सहेलियां भी मेरा मजाक उड़ाती हैं जिसके कारण मुझे अपने आप पर बहुत गुस्सा आता हैं तथा मुझे भूख भी खुल कर नहीं लगती हैं। एक या दो रोटी खाकर ही पूरा दिन गुजर जाता है। कुछ खाने का मन ही नहीं करता है। मैंने काफ़ी दवाएं खा ली हैं। किसी से कुछ फ़ायदा नहीं होता है। दो तीन साल पहले मैं काफ़ी स्वस्थ थी। अब मेरे साथ यह क्या हो रहा है ये मेरी समझ में नहीं आ रहा है। डा.साहब मेरे चेहरे पर झाईयां भी हो रही हैं तथा मुझे लिकोरिया की भी प्राब्लम है जिसके कारण मैं बहुत परेशान हूं। डा.साहब मैं चारों तरफ से निराश होकर अब आपसे आशा करती हूं कि अब आप ही मेरी इस समस्या का निदान आयुर्वेद में ढ़ूंढ कर मेरी सहायता जरूर करेंगे। डाक्टर साहब मुझे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा भी बहुत आता है। गुस्सा शान्त हो जाने के बाद मैं बहुत पश्चाताप भी करती हूं।
अतः आपसे नम्र निवेदन है कि आप जल्दी से जल्दी मेरा उपचार भेजने की कृपा करें। धन्यवाद
जयलता, ग्रेटर नोएडा(गौतम बुद्ध नगर)
जयलता बहन, मैंने आपकी समस्या को देखा किन्तु कुछ बातें यदि स्पष्ट हो जातीं तो मुझे आसानी होती जैसे कि क्या आप विवाहित हैं या अविवाहित? आप क्या करती हैं कुछ नौकरी या अध्ययन आदि? लिकोरिया की समस्या कितने समय से है? लिकोरिया में आने वाला स्राव किस तरह का है श्वेत या लाल,पतला स्राव है या गाढ़ा? शाकाहारी हैं या मांसाहारी? लेकिन कोई बात नहीं यदि आप इन बातों को बताने से रह भी गयी हैं तब भी आयुर्वेद के महासागर से आपके लिये औषधिरत्न लेकर आपको स्वास्थ्य लाभ दिया जा सकता है। आप निम्न दवाएं नियमित रूप से लीजिये और तनिक भी चिन्ता न करिये बीमारिया यदि आती हैं तो ये बस आपके साथ हुई कुछ दैहिक या मानसिक अनियमितता का परिणाम होती हैं इनसे निराश न होकर बल्कि सुधार करके मुक्त हो जाना उचित है। आप यदि कोई कार्य कर लेती हैं तो उस पर पश्चाताप मत करिये। जिन बातों पर गुस्सा आया था उन पर विचार करिये कि हो सकता है आपका गुस्सा करना उचित रहा हो। इन औषधियों को कम से कम दो माह तक लीजिये और फिर हुए बदलाव मुझे सूचित अवश्य करें दवा के सेवन के दौरान मिर्च-मसालेदार आहार, मांसाहार बंद कर दें व बाजारू भोजन से परहेज करें।
१ . प्रदर हर लौह १ गोली + प्रदरान्तक रस १ गोली सुबह शाम दूध में शहद मिला कर लें।
२ . अशोकारिष्ट दो चम्मच दिन में दो बार भोजन करने के बाद लीजिये।
३ . अश्वगंधारिष्ट के दो चम्मच के साथ दिन में दो बार एक-एक चम्मच अश्वगंधादि चूर्ण भोजन के बाद लीजिये।
४ . सप्ताह में एक बार रात में खाने के बाद त्रिफला चूर्ण दो चम्मच गर्म जल से लीजिये ताकि कब्जियत न रहे और पेट साफ होता रहे।
इस प्रकार आप इस उपचार को दो माह लें और यदि आवश्यकता लगे तो आगे भी जारी रखिये कोई नुकसान नहीं होगा। आपकी चेहरे की झाईयां कहां गायब हो गयी लोगों को आश्चर्य होगा। विश्वास रखते हुये औषधि नियम से सेवन करें।

Thursday, May 15, 2008

मेडिकल सांइस का इससे बड़ा धोखा और क्या हो सकता है??????

my E.C.G. is diagnosed as complete heart block pl. advise desi treatment.
सुभाष शर्मा
सुभाष जी,मुझे आश्चर्य है कि आपका E.C.G. हार्ट में शत-प्रतिशत ब्लाकेज बता रहा है लेकिन आप न सिर्फ जीवित हैं बल्कि स्वयं मुझसे सलाह मांग कर इलाज भी चाहते हैं। आप क्या इस मेडिकल सांइस के धोखे को अब तक समझ नहीं पाए कि यदि आपका शत-प्रतिशत ब्लाकेज है तो आप कितनी देर तक जीवित रह सकते हैं। दरअसल होता ये है कि व्यवसायिक चिकित्सा से जुड़े लोगों के घर का चूल्हा तो आपके ही धन से जलता है, जीवन में धन से पूरी करी जाने वाली सारी जरूरतें आप ही अपने पैसे से पूरी करते हैं। एक बात ये लोग समझते हैं कि यदि मरीज को डराया नहीं जाए तो उससे पैसा आसानी से निकाला नहीं जा सकता। इसलिये यदि ब्लाकेज है और आपको तकलीफ़ है तो शत-प्रतिशत ब्लाकेज बता देने में हर्ज़ ही क्या है मरीज सुनते ही डर जाएगा फिर उसे बाईपास सर्जरी के लिए राजी कर लिया जाएगा, ऐसे में आप कर्ज़ लें या चोरी करें उन्हें इस बात से कोई लेना-देना नहीं होता। जैसे किराने की दुकान पर विक्रेता तराजू में हेराफेरी करके कम सामान तौल कर आपसे ज्यादा पैसा ले लेता है ठीक वैसी ही सोच इन व्यवसायिक चिकित्सकों की होती है। ये भी पैथोलाजिकल टैस्ट्स में हेराफेरी करवा के मनमाने रिजल्ट्स निकलवा लेते हैं क्योंकि पैथोलाजिस्ट, कैमिस्ट और डाक्टर सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे तो हैं। आप बिलकुल मत डरिये और नीचे लिखे उपचार को नियम से एक साल तक लीजिये और स्वस्थ होने के बाद जिस चिकित्सक नें आपको ऐसा बताया है उसे दिखाइये ----
१ . अर्जुन की छाल का जवकुट यानि मोटा-मोटा चूर्ण ३ ग्राम व २५ ग्राम मिश्री लेकर २५० ग्राम दूध में उबालें और इसी दूध का प्रतिदिन प्रातः व सांयकाल सेवन करें।२ . अर्जुनारिष्ट + अश्वगंधारिष्ट दोनो को मिला कर दो चम्मच बराबर जल मिला कर दिन में दो बार भोजन के बाद लें।३ . अकीक पिष्टी १०० मिग्रा. + मुक्तापिष्टी १२५ मिग्रा. + जहरमोहरा पिष्टी २०० मिग्रा + अर्जुन की छाल का महीन चूर्ण २५० मिग्रा. + प्रभाकर बटी २५० मिग्रा की एक गोली + सितोपलादि चूर्ण एक ग्राम ; इन सबको मिला कर कुल मात्रा की तीन बराबर पुड़िया बनाएं व दिन में तीन बार शहद के साथ सेवन कराएं, दवा को इसी अनुपात में बना कर रख लें व नियमित रूप से न्यूनतम छह माह सेवन कराएं यदि अधिक दिन भी सेवन कराया तो कोई नुकसान नहीं होगा। ये एकदम निरापद एवं हानिरहित उपचार हैं।

Tuesday, May 13, 2008

मम्मी के हाथों पैरों की सभी हड्डियों की गाठों में बहुत तेज दर्द रहता है।


डाक्टर साहब, नमस्ते
मेरी मम्मी बहुत परेशान हैं। मेरी मम्मी के हाथों पैरों की सभी हड्डियों की गाठों में बहुत तेज दर्द रहता है। हाथ व पैरों की उंगलियां भी टेढ़ी हो गयी हैं। जिसके कारण उठने बैठने में बहुत परेशानी होती है । हमने बहुत इलाज करा लिया है लेकिन कहीं से भी कोई फ़ायदा नहीं हो रहा है। कोई डाक्टर कहते हैं कि गांठों में यूरिया जमा है और कोई डाक्टर कहते हैं कि गठिया बाय हैं। मेरी मम्मी पिछले पंद्रह साल से परेशान हैं उन्हें अंग्रेजी दवा बिलकुल सूट नहीं करती हैं । अतः आपसे निवेदन है कि आप मेरी मम्मी को आयुर्वेद की अच्छी भले ही मंहगी हो कोई दवा देने की कृपा करें। जिससे मेरी मम्मी को इस बीमारी से आपके द्वारा जीवनदान मिल सके। आपके इस अहसान से हम सदा आपके ऋणी रहेंगे। आपसे आशा है कि आप इस परेशानी में मेरा साथ जरूर देंगे। अपना फोन नं. बताने की कृपा करें। आपका सदा आभारी रहूंगा।
सतीश कुमार,नोएडा
सतीश जी माताजी के प्रति आपका गहरा प्रेम आजकल के समय में बच्चों में जरा कम ही देखने में आता है। आपकी माताजी की बीमारी पर बहुत सारे चिकित्सक तमाम दवाओं के प्रैक्टिकल कर चुके हैं और रोग जीर्ण हो चुका है किन्तु निराशा की बात नहीं है। आपको धैर्य रखना होगा। जिस प्रकार गंदे कपड़े पर रंग नहीं चढ़ता उसी तरह से बिना शरीर का शोधन करे उत्तम से उत्तम दवा भी अपना असर नहीं दिखा पाती है। आयुर्वेद की भाषा में आपकी माताजी को हुई बीमारी "आमवात" कहलाती है। सर्वप्रथम आपकी माताजी के शरीर का विधिवत शोधन किया जाए तब जाकर ऐसी स्थिति बनेगी कि उन्हें दवाएं असर करेंगी। इस लिये इस क्रम में उन्हें निम्न उपचार दें----
१ . निशोथ + सेंधा नमक + सोंठ बराबर मात्रा में मिला कर एक माशा चूर्ण कांजी(एक खट्टा सा पेय) के साथ दिन में दो बार दें, खाली पेट न दें। इससे उन्हें दस्त होंगे और देह में संचित विषपदार्थ मल के द्वारा निकल जाएंगे। दस्तों से घबराने की आवश्यकता नहीं है किन्तु यदि अधिक हों तो मात्रा कम कर दें।
इस चूर्ण को एक सप्ताह तक लेकर बंद कर दें इसके बाद नीचे लिखी दवा का तीन दिन बाद सेवन कराएं।
२ . एरण्ड तेल दो चम्मच + रास्नासप्तक क्वाथ दो चम्मच मिला कर दिन में दो बार दें । इसे भी खाली पेट न दें और एक सप्ताह तक देने के बाद बंद कर दें जैसे कि ऊपर की दवा बंद करी हैं।
३ . सोंठ १ तोला + गोखरू १ तोला मिला कर ३२ तोला जल में पकाएं और आठ तोला जल यानि कि एक-चौथाई रह जाने के बाद छान कर प्रतिदिन दो बार चार-चार तोला करके पिलाएं । ये रोज ताजा बनाएं। नाश्ते के बाद ही दें यानि खाली पेट दवा नहीं देना है।
४ . चित्रकादि बटी एक-एक गोली दिन में तीन बार गर्म जल से दें।
५ . वातारि गुग्गुलु एक गोली + आमवातारि रस दो गोली + महायोगराज गुग्गुलु दो गोली + वातगजांकुश रस एक गोली को रास्नादि क्वाथ के दो चम्मच के साथ दिन में तीन बार दें।
६ . समीर गज केशरी रस एक गोली + अश्वगंधादि गुग्गुलु दो गोली दिन में तीन बार अदरख के रस तथा शहद को मिला कर निगलवाएं।
७ . विषगर्भ तेल से मालिश करवाएं और फिर ऊपर से कपड़ा लपेट दें ताकि हवा न लग पाए।
माताजी को गर्म जल, बाजरा, मूंग, जौ, करेला, परवल, तोरई, लहसुन,प्याज, हींग, सोंठ, गोमूत्र, मूली, एरण्ड का तेल, दूध का सेवन कराएं। गुड़ , अधिक जागना, बासी व गरिष्ठ भोजन, मांस, मछली,मल-मूत्र के वेग को रोकना, उड़द का सेवन न करें। दवाओं का सेवन कम से कम छह मास से साल भर तक कराएं जल्दबाजी न करें।
मेरा फोन नं. है 09224496555

Monday, May 12, 2008

बच्चा बिस्तर में पेशाब कर लेता है...

डा.साहब नमस्ते
मेरे बच्चे की उम्र छह साल है। वो पूरी तरह से स्वस्थ है किन्तु समस्या ये है कि वह सोने पर बिस्तर में पेशाब कर लेता है, जबकि उसे रात को सोने से पहले पेशाब करवा कर सुलाती हूं। कई चिकित्सकों ने दवाएं दी है किन्तु बाद में वे ये ही कह कर दिलासा दे देते हैं कि बड़े होने पर ये समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी। क्या वाकई कोई उपचार नहीं है और मुझे उसके कितने बड़े होने तक इंतजार करना होगा? यदि आयुर्वेद में कोई तरीका हो तो बताइये।
रचना भागवत,झांसी
रचना बहन,आपके बच्चे की समस्या कोई नयी समस्या नहीं है अक्सर बच्चे बिस्तर गीला कर देते हैं। इसे आयुर्वेद में कौमारचर्या के अंतर्गत एक रोग "शैय्यामूत्र" स्वीकारा गया है। ये सत्य है कि उम्र बढ़ने पर ये समस्या खत्म हो जाती है किन्तु कभी-कभी ये बच्चों में पंद्रह वर्ष तक देखा गया है। इसलिये आप प्रतीक्षा किये बिना धैर्यपूर्वक निम्न दवा को बना कर उसे सेवन कराएं और चमत्कार देखिये कि कैसे शीघ्र ही आपका बच्चा इस परेशानी से निकल आता है --
गूलर के पेड़ की भीतरी छाल ५० ग्राम + पीपल की छाल ५० ग्राम + अर्जुन की छाल ५० ग्राम + सोंठ ५० ग्राम + राई(मोहरी या काली सरसों) २५ ग्राम + काले तिल १०० ग्राम ; इन सबको मिला कर भली प्रकार से महीन कर लें। यदि संभव हो तो इसमें शिलाजीत ५० ग्राम मिला कर दो-दो रत्ती की गोलियां बना लें। इससे बच्चे को दवा लेने में आसानी होगी साथ ही आपका बच्चा एकदम स्वस्थ और पुष्ट बना रहेगा।

Sunday, May 11, 2008

गर्भाशय भ्रंश(Prolepse of Uterus)बताया गया है, मैं सर्जरी नहीं चाहती...

डा.साहब नमस्ते
मुझे टैस्ट करने के बाद गर्भाशय भ्रंश यानि Prolepse of Uterus बताया गया है और कहा गया है कि इस बीमारी का सर्जरी के अलावा कोई उपचार नहीं है। मुझे सर्जरी कराने में डर लग रहा है और साथ ही ये बहुत मंहगा उपचार है। इसलिये आपसे निवेदन है कि आयुर्वेद का कोई उपाय बताएं ताकि सर्जरी न करानी पड़े और मैं सहज ही गर्भ धारण कर सकूं। बड़ी मेहरबानी होगी मैं जो धन सर्जरी में खर्च होने जा रहा है उसका आधा तो खुशी से दे सकती हूं।
प्रार्थना मेहता,झालावाड़
प्रार्थना बहन, आप बिलकुल चिंतामुक्त हो जाइए आपको सर्जरी कराने की आवश्यकता हरगिज़ न्हीं होगी बस मुझे थोड़ा सा समय उपचार के लिये दे दीजिये; रही बात कि आप मुझे धन देना चाहती हैं तो स्पष्ट करना चाहता हूं कि ये सेवाकार्य है मैं किसी प्रकार का शुल्क नहीं स्वीकारता, हां यदि आप मां बनने के बाद अपने बच्चे के नाम से मेरे इस सेवा अभियान को जारी रखने के लिये कुछ दान करना चहें तो उसे सहर्ष स्वीकार सकता हूं,अग्रिम धन्यवाद। अब आपके लिये जो औषधि लिख रहा हूं उसके सारे घटक आपको आयुर्वेदिक दवाओं का कच्चा माल बेंचने वाले पंसारियों के पास से आराम से प्राप्त हो जाएगा----
१ . माजूफल + मुलायम सुपारी + बड़ी इलायची + कचूर + धाय के फूल + तज + छोटी हरड़ + फिटकरी + गुलाब के फूल + सुपारी का फूल + बड़ी हरड़ का बक्कल + गुड़मार ; इन सभी बारह वस्तुओं को पचास-पचास ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें। एक साफ धोए हुए पतले मलमल के कपड़े में इस मिश्रित चूर्ण की २५ ग्राम मात्रा लेकर पतले डोरे से बांध कर योनि में स्थापित करें तथा तीन घन्टे बाद निकाल लें। इस प्रकार आप तीन माह तक करें और पति संसर्ग से परहेज करें। यकीन मानिये कि आपकी समस्या कहां गायब हो गयी ये चिकित्सकों को भी आश्चर्य लगेगा।
२ . सुपारी पाक एक-एक चम्मच सुबह शाम सेवन करें।
३ . अशोकारिष्ट दो-दो चम्मच दिन में तीन बार बराबर जल मिला कर लिया करें।
तैलीय,मिर्च-मसालेदार आहार से बचें। कोई वजन उठाने का कार्य भी न किया करें। प्राणायाम करना चाहें तो किसी योग्य आचार्य से सीख कर ही करें।

Saturday, May 10, 2008

कब्ज़ियत,बवासीर और गॉल ब्लैडर में १४ मिमी. पथरी है

सर,मैं एक कम्प्यूटर आपरेटर हूं, मुझे कब्ज़ियत रहा करती है साथ ही मुझे बवासीर की भी समस्या है। मुझे गॉल ब्लैडर में १४ मिमी. पथरी है। कोई उपाय बताएं।
अमित कुमार
अमित जी,आपने ये नहीं बताया कि आपको बवासीर में रक्त आता है या नहीं मस्से बाहर हैं अथवा नहीं किन्तु मैं आपको ऐसा उपचार बताता हूं जो कि हर परिस्थिति में कारगर रहेगा। आप पहले दो दिन आधा-आधा दिन का उपवास रखें यानि कि बस रात्रि में भोजन करें व दोपहर में फलों का रस अथवा नींबू पानी पीकर रहें। दो दिन बाद आप निम्न उपचार लेना प्रारम्भ करें..
१ . गंधर्व हरीतकी एक चम्मच गुनगुने पानी में घोल कर रात्रि भोजन के आधे घंटे बाद लें। इस दवा को यदि आज लिया है तो बीच में एक दिन छ्ड़ दें व अगले दिन लें यानि कि एक दिन का अवकाश देकर दवा पंद्रह दिन तक लें।
२ . नीम का तेल १०० मिली. ले लीजिये व उसमें २० ग्राम कपूर(जो हिन्दू लोग पूजा आदि में प्रयोग करते हैं) तथा १० ग्राम पिपरमिन्ट(जिसे पान में ठन्डक के लिये बहुत थोडी सी मात्रा में डाला जाता है); इस मिश्रण को एक कांच की शीशी में भर कर टाइट ढक्कन लगा कर धूप में एक दिन के लिये रख दीजिये और फिर इस दवा के दो बराबर भाग कर अलग-अलग शीशियों में भर लीजिये एक भाग को मलहम की तरह लगाने के लिये प्रयोग कीजिये और दूसरे भाग में से एक-एक बूंद दवा दिन में तीन बार एक चम्मच शक्कर में मिला कर खा लीजिये और ऊपर से पानी पी लीजिये।
३ . गोक्षुरादि गुग्गुलु २ गोली + लघु सूतशेखर रस २ गोली सुबह शाम जल के साथ एक माह तक सेवन करिये।
आपकी तीनो समस्याएं- कब्जियत, बवासीर और गॉल ब्लैडर स्टोन सब समाप्त हो जाएंगे। खाने में ध्यान रखिये कि पत्तेदार साग सेवन न करें साथ ही मिर्च-मसालेदार तैलीय भोजन से परहेज करें। जल अधिक पिया करें।

My husbend’s penis-foreskin not move a bit back and he is diabetic.......

Dear Dr., namaste, My husbend is suffering from yeast problem. he is diabetic and sugar variate between 200 to 300. his penis forsikn not move a bit back and when he intercourse then forskin get many cuts. he feel too much itching on is penis and when he itch it then some thick white paste came out from under forskin i think its yeast. pls help me and tell me what is this diseases and what medicine he should take pls tell as early as possible.
thanks.
trisha_ash2001@yahoo.com
Dear sister Trisha, I think the term you are using "yeast" is for 'SMIGMA' .First of all he is a diabetic, it must be undercontrol and the next problem is foreskin of his organ is not moving back during intercourse; this is called "निरुद्ध प्रकश" in ayurved and a minor surgery like circumcision will solve this problem.