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Hello sir main saudi arabia main job karta hoon meri problem sex se related hai .sir maine do baar sex kiya hai dono bar main 4 sec ke anda...
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नमस्कार महोदय उम्र २९ वर्ष वजन ४३ केजी कद १६५सेमि ५'५'' दुबला शरीर, अविवाहित, अध्यनरत महोदय मै बहुत हि दुबला व कमजोर हू. कृपया मोटा होने ...
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सर जी नमस्ते मैं अपनी समस्या बताने में हिचकिचा रहा था लेकिन जब आपने आश्वासन दिया कि नाम प्रकाशित नहीं करा जाएगा और पहचान गुप्त रखी जाएगी तो...
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डॉक्टर सहाब उम्र के शुरूआती दोर से १ साल पहले तक (१४-२२) मैंने अत्याधिक हस्तमैथुन किया.जिस वजह से में शारीरिक और मानसिक रूप से काफी क्षीण हो...
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डॉ साहब ,आपको सादर नमस्कार . मैंने आपके बहुत सारे ब्लोग्स पढ़े हैं । वहाँ से प्रेरित होकर मई भी आप को मेल कर रहा हू आशा रख...
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मेरा नाम योगेश है और मेरी उम्र 26 वर्ष है! मै आपको ये बताना चाहता हूँ कि मुझे काफी समय से कब्ज की समस्या तो रहती है लेकिन मेरी मुख्य समस्या ...
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सर, ऐसी परिस्थिति में हूं कि रहा भी नहीं जा रहा है और कहा भी नहीं जा रहा है। बहुत हिम्मत जुटा कर लिख रहा हूं मेरी नयी-नयी शादी हुई है लेकिन ...
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यह सभी वर्गों के पुरुषों के लिये अत्यंत उत्तम स्वास्थ्यवर्धक वटी ( टैबलेट) है जो कि बेहद प्रभावी तथा बहुमूल्य जड़ी-बूटियों का बेहतरीन मिश्र...
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Tuesday, April 17, 2012
Angina pectoris के दर्द से परेशान हूँ, ऑपरेशन नहीं करवाना चाहता ।
Thursday, April 05, 2012
मेरी ढीली योनि और पति के छोटे लिंग के कारण सेक्स प्रॉब्लेम है सेक्स लाइफ सत्यानाश हो रही है
आदरणीय डॉक्टर साहब, मैं एक पत्रकार हूं एक स्त्री होने के नाते कई बातें छिपा कर रखनी होती हैं लेकिन वकील और डॉक्टर से बातें छिपाने पर नुक्सान ही होता है। हमारी सेक्स लाइफ़ शुरू होने से पहले ही सत्यानाश हो चुकी है। मैं हॉस्टल में रहा करती थी और आजकल के प्रभाव में लैपटॉप पर पोर्न फ़िल्में देख कर मुझे masturbation की आदत लग गयी थी जिसे शादी तय होने से पहले बड़ी मुश्किल से छोड़ पायी । शादी के बाद पता चला कि मेरे पति के सेक्स ऑर्गन का साइज एरेक्टेड कंडीशन में चार इंच है और कुछ पतला मरियल सा है। मुझे बड़ी निराशा हो रही है पति तो अपनी संतुष्टि के लिये कुछ दिन मेरे साथ सेक्स करते रहे लेकिन उन्होंने मुझसे कहा कि मेरा सेक्स ऑर्गन एकदम ढीला पिलपिला सा है। अब मैं उन्हें क्या बताऊं कि ये किन हरकतों का नतीजा है। हम दोनो को सेक्स में जरा भी आनंद नहीं आ रहा है जिस कारण धीरे-धीरे कुछ अजीब सा तनाव रहने लगा है। अब हम एक एक महीने तक सेक्स नहीं करते तो आप समझ सकते होंगे कि हम किस हाल में आ चुके हैं जबकि हमारी शादी को मात्र एक साल हुआ है । आपसे रिक्वेस्ट है कि आप हम दोनो के लिये कुछ आयुर्वेदिक उपचार बताएं। मैं आपसे फोन पर भी बात करना चाहती हूं कि दवाएं किस तरह मंगवायी जाएं और उनकी कितनी कीमत होगी।
मोनिका राजवंशी
बहन मोनिका जी, आपने अपनी गलती को समझ कर छोड़ दिया ये अच्छा करा वरना योनि में संक्रमण आदि होने से आप भारी मुसीबत में पड़ सकती थीं। ध्यान रखने की बात है कि स्त्री योनि के कसाव से ही यौन सुख है। आपने परिवार की मर्यादा को बना कर रखा है इसके लिए मैं आपकी प्रशंसा करता हूं। आप दोनों की समस्या को आपने विस्तार से लिखा है । आप निम्न उपचार लें
माजूफल + मुलायम सुपारी + बड़ी इलायची + कचूर + धाय के फूल + तज + छोटी हरड़ + फ़िटकरी + गुलाब के सूखे फूल + सुपारी के सूखे फूल + बड़ी हरड़ का छिलका + गुड़मार ; इन सभी बारह जड़ी-बूटियों को आयुर्वेदिक कच्चा माल बेचने वाले के पास से ले लीजिये सभी को बराबर मात्रा में ले लीजिये यानि कि सभी ५०-५० ग्राम ले लीजिये। इन सबको बारीक पीस लीजिये व साफ़ मलमल के महीन कपड़े में २० ग्राम की मात्रा को एक पोटली की तरह से बांध लीजिये व उसे योनि में इस तरह स्थापित करिए कि पोटली का धागा बाहर लटका रहे ताकि निकालने में सुविधा हो। यह काम अत्यंत हल्के हाथ से करें अन्यथा यदि खरोंच आदि आ गयी तो तकलीफ़ बढ़ सकती है। रात में सोते समय रख लीजिये व सुबह निकाल कर स्नान कर लीजिये। साथ ही एक एक गोली सुबह-शाम चंद्रप्रभा वटी पानी के साथ भोजन के बाद लेती रहें। इस उपचार को कम से कम चालीस दिन तक लीजिये।
आपके पति के लिये उन्हें निम्न उपचार दें
Friday, March 30, 2012
शुगर की समस्या के कारण नपुंसकता सी आ गयी है
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| नपुंसकता |
Wednesday, March 28, 2012
कमर व हाथ की उंगलियों के जोड़ों में दर्द रहता है और बांया हाथ सुन्न हो जाता है
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| Rheumatic pain, वातरोग |
मेरी उम्र अड़तीस साल है, लगभग पांच महीने से मेरे घुटने ,कंधे, गर्दन के बांये हिस्से, रीढ़ की हड्डी के (निचले ) अंतिम सिरे, छाती (बांयी) के अन्दर, कमर व शरीर व हाथ की उंगलियों के जोड़ों में दर्द रहता है और बांया हाथ सुन्न हो जाता है | मैं बहुत परेशान हूँ , कृप्या मेरी समस्या का समाधान बताइये |
अजय कुमार ( दिल्ली )
Tuesday, March 27, 2012
मुझे जीवन भर ब्लडप्रेशर की गोली न खानी पड़े
सर मैं एक टीचर हूं। मेरी उम्र तैंतालीस साल है। पिछले छह महीनों से ब्लड प्रेशर बढ़ा रहा करता है, नींद न आकर बल्कि अजीब सी नशे जैसी हालत रहती है और सिर भारी बना रहता है, चक्कर से आते रहते हैं, दिल की धड़कन जरा सी आहट या शोर पर बहुत ही तेज हो जाती है, हर बात पर चिड़चिड़ाहट होती है। कुल मिला कर आपसे ये निवेदन है कि आप कुछ ऐसा उपचार बताएं कि मुझे जीवन भर ब्लडप्रेशर की गोली न खानी पड़े और मैं जैसे अपने स्कूल के बच्चों में एक प्रिय टीचर थी वैसी दोबारा बन सकूं अब तो मुझे बच्चों का जरा सा भी शोर पसंद नहीं आता पहले मैं बाकी टीचरों को कहती थी कि जिन्हें पंछियों की चहचहाहट पसंद न हो, बच्चों का शोर पसंद न हो वे मेरी नजर में टीचर बनने लायक नहीं होते लेकिन अब तो मेरी ही हालत ऐसी हो रही है।
शमीम मोमिन
मुंबई
बहन जी आपकी बातों को गम्भीरता से समझ पा रहा हूँ। अक्सर हम अन्जाने में आहार-विहार-आचार-विचार की गड़बड़ी के चलते ऐसी परेशानियों में फँस जाते हैं और समझ नहीं पाते कि इनका मूल कारण क्या है। आपका पत्र बहुत लम्बा है इसलिये संक्षेप में ले रहा हूँ। आप निम्न उपचार लीजिये-
मुक्तापिष्टी + जहरमोहरा पिष्टी + अकीक पिष्टी + जटामाँसी + आँवला + अश्वगंधा प्रत्येक २० ग्राम + शुद्ध शिलाजीत ५० ग्राम + सर्पगंधा १०० ग्राम लीजिये व इन सबका अत्यंत सूक्ष्म चूर्ण बना लीजिये तथा सुबह शाम इस मिश्रण में से आधा छोटा चम्मच दिन में दो बार सारस्वतारिष्ट के दो चम्मच के साथ लीजिये।
ब्राह्मी बटी(बुद्धिवर्धक) एक गोली + स्मृतिसागर रस एक गोली दिन में दो बार पानी के साथ लीजिये।
आपकी समस्या दो दिन के भीतर ही कम होना शुरू हो जाएगी लेकिन आप इस औषधि को चालीस दिन तक लगातार लीजिये।
यदि कोई भी शंका या परेशानी हो तो आप सीधे मुझसे ई-मेल (aayushved@gmail.com) या मोबाइल नंबर09224497555 पर संपर्क करें।
लिंग के छोटे और पतले आकार के कारण सेक्स में संतुष्टि नहीं हो रही है
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| लिंग का छोटा व पतला होना |
Monday, March 19, 2012
मुझे पेट में duodenal ulcer हुआ है जिसके कारण मुझे जलता हुआ सा दर्द महसूस होता था
डॉक्टर साहब नमस्कार, मुझे पेट में बहुत परेशानी हुआ करती थी। मैंने डॉक्टरी जाँच करवायी तो मुझे बताया गया कि मुझे पेट में duodenal ulcer हुआ है जिसके कारण मुझे जलता हुआ सा दर्द महसूस होता था। काफी कमजोरी आ गयी है। पेट में अंदर कई जगह घाव हो गए हैं ऐसा डॉक्टर ने बताया है। मैं आपको अपनी रिपोर्ट्स भेज रहा हूं। आप रिपोर्ट देख कर आयुर्वेद की दवा बताएं ताकि मुझे जल्दी से आराम मिल सके। मेरी उम्र ४२ साल है और मैं मांसाहार पसंद करता हूं लेकिन जब से डॉक्टर ने मना करा है बंद कर दिया है। मैं ठीक तो हो जाउंगा न । दवाएं मंहगी हों तो भी चलेगा लेकिन मुझे पूरी तरह ठीक होना है। आप अपनी दवाएं दीजिये।
रोमेश बत्रा
मुरादाबाद
रोमेश जी आपकी रिपोर्ट्स देखीं हैं। आपकी खाने की आदत ने आपके स्वास्थ्य का सत्यानाश कर रखा है। आप ऐलोपैथी का उपचार लेकर स्वस्थ हो जाएंगे लेकिन जब तक आपका आहार-विहार नहीं बदलता आप दोबारा इन्हीं समस्याओं से परेशान रहेंगे। आप ऐसा मत सोचिए कि स्वास्थ्य पैसे की बात है। आप खुद सोचिए कि डेढ़ इंच की जीभ के स्वाद के लिये आप कितनी परेशानी उठा रहे हैं। आप निम्न उपचार लीजिये लेकिन अपनी जीभ पर सख्ती से नियंत्रण करिये कि मिर्च-मसालेदार भोजन, मांसाहार से परहेज कर सकें।
सूतशेखर रस १५ ग्राम + धात्री लौह २५ ग्राम + अम्लपित्तान्तक लौह १५ ग्राम + लीलाविलास रस २० ग्राम + आमलकी रसायन ३० ग्राम + स्वर्णमाक्षिक भस्म २५ ग्राम + प्रवाल पिष्टी २० ग्राम + अभ्रक भस्म शतपुटी १५ ग्राम + मुक्ताशुक्ति पिष्टी २५ ग्राम + जवाहरमोहरा खताई पिष्टी २५ ग्राम + गिलोयसत्व २५ ग्राम + अविपत्तिकर चूर्ण ६० ग्राम इन सभी बारह औषधियों को दी गयी मात्रा में मिला कर रख लीजिये और इसमें से दिन में तीन बार सुबह दोपहर शाम चाय का आधा चम्मच मिश्रित औषधि को आंवला स्वरस + गिलोय स्वरस + शहद(मिठास के लिये आवश्यकतानुसार) मिलाकर दो चम्मच के साथ लीजिये।
यकीन मानिये कि आपके डॉक्टर आश्चर्य करेंगे कि रोग किधर छूमंतर हो गया बस परहेज सख्ती से करिये।
यदि कोई औषधि न मिले तो हमें भेजने को कहें अन्यथा स्वयं शुद्धता से निर्माण करें। आयुषवेद परिवार औषधियों का बाजारी उत्पादन नहीं करता बल्कि रोगी की जरूरत पर बनाया करता है। यदि कोई भी शंका या परेशानी हो तो आप सीधे मुझसे ई-मेल (aayushved@gmail.com) या मोबाइल नंबर 09224497555 पर संपर्क करें।
Friday, March 16, 2012
दो साल से जोड़ों में दर्द की शिकायत है
सर, मेरी माता जी की उम्र ४७ साल है और उन्हें दो साल से जोड़ों में दर्द की शिकायत है। अक्सर उनके घुटनों और कुहनी के जोड़ों में दर्द के साथ सूजन भी दिखती है। कई बार वो बताती हैं कि उन्हें पूरे शरीर में नसों में चुभता हुआ सा दर्द हो रहा है। कई डाक्टरों को दिखाया है लेकिन उन्होंने पेनकिलर ही दिये हैं। पेनकिलर खा-खाकर माता जी का पेट भी खराब रहने लगा है। सारी रिपोर्ट्स आपको मेल कर रहा हूँ कोई स्थायी उपचार बताइये।
जयवंत पगारे
जयवंत जी, आपकी माताजी की आपने जो रिपोर्ट भेजी हैं उनसे आयुर्वेद में बीमारी का निदान करने में कोई सहायता सामान्यतः नहीं मिल पाती है। कई बार रक्त परीक्षण में जब "कम्प्लीट हेमोग्राम" निकलवाया जाए तो वात की विकृति का अनुभव करा जा सकता है। आप माताजी को निम्न उपचार नब्बे दिनों तक दें और उसके बाद मुझे मेरे ई-मेल (aayushved@gmail.com) या मोबाइल नं. 09224496555 पर सूचित करिये।
१) महावातविध्वंसन रस एक गो्ली + योगराज गुग्गुल एक गोली + शुद्ध कुचला चूर्ण एक रत्ती + आमवातेश्वर रस एक गोली + विषमुष्टिका बटी एक गोली की एक खुराक बनाइये और इसे सुबह शाम नाश्ते व भोजन के बाद महारास्नादि काढ़े के दो चम्मच के साथ दीजिये ।
२) घुटनों पर मालिश के लिये तेल बना लीजिये जो कि इस विधि से तैयार करिये-
धतूरे के चार पत्ते + कुचला चूर्ण पाँच ग्राम + अश्वगंधा चूर्ण पाँच ग्राम + रास्ना चूर्ण पाँच ग्राम लेकर २०० मिली.तिल का तेल + २०० मिली.पानी मिला कर धीमी आँच पर आग पर तब तक पकाइये जब तक सारा पानी भाप बन कर उड़ न जाए और तेल में पत्ते, चूर्ण पक न जाएं।
३) विषमुष्टिकावलेह एक छोटा चम्मच रात्रि भोजन के आधे घंटे बाद गर्म मीठे दूध के साथ दीजिये । सादा दूध भी बिना शक्कर मिलाए दे सकते हैं।
Saturday, March 10, 2012
हाथी पाँव की समस्या
आपसे निवेदन है की कोई तत्काल लाभ देने वाला आयुर्वेदिक उपचार बताईये खर्च कितना भी हो दवा महँगी भी हो तो चलेगा मे खरीद सकता हु।
सोहन लाल शर्मा पीसाँगन (अजमेर)
प्रिय शर्मा जी आपकी परेशानी को देखा और समझा, एक बात आपको साफ़ बता देना सही मानता हूँ कि आप यदि ऐसा समझ रहे हैं कि कई साल की समस्या कुछेक दवाएं खाने से जादू से छू मंतर हो सकती हैं तो ये गलत है | आपको धैर्य पूर्वक दवाएं लेनी होंगी | दवा के सस्ते या मंहगे होने से उसके गुणों पर कोई असर नहीं पड़ता है यदि धन से ही स्वास्थ्य ख़रीदा जा सकता तो कोई भी अमीर आदमी कभी बीमार ही नहीं होता | निम्न दवाएं नियमित रूप से लीजिये | यदि कोई दवा न मिले तो हमें बताइए |
१ . नित्यानन्द रस १ गोली + श्लीपदगजकेसरी वटी १ गोली + आरोग्यवर्धिनी १ गोली ,इन तीनों गोलियों को सुबह नाश्ते के बाद तथा रात में भोजन के आधे घंटे बाद ले लें । इस दवा को लाभ हो जाने के बाद भी लगातार तीन माह पूरे हो जाने तक जारी रखियेगा ।
२ . रात को सोने से पहले मेदोहर विडंगादि लौह की दो गोलियां गुनगुने जल से लें तथा यह भी तीन माह जारी रखियेगा ।
३ . सोंठ + छोटी पीपर(लेंडी पीपर या पिप्पली) + त्रिफला चूर्ण को बराबर वजन में सरसों के तेल में मिला कर लेप बना लें और प्रभावित अंगों पर लगाएं ।
४ . वृद्धिबाधिका बटी १-१ गोली सुबह शाम खाली पेट लिया करें ।
Wednesday, March 07, 2012
क्या आप निम्न सेक्स समस्याओं से परेशान हैं?
Monday, March 05, 2012
शक्ति बढ़ाने के घरेलू उपाय
21. ढाकः- ढाक के 100 ग्राम गोंद को तवे पर भून लें। फिर 100 ग्राम तालमखानों को घी के साथ भूनें। उसके बाद दोनों को बारीक काटकर आधा चम्मच सुबह और शाम को दूध के साथ खाना खाने के दो-तीन घंटे पहले ही इसका सेवन करें। इसके कुछ ही दिनों के बाद वीर्य का पतलापन दूर होता है तथा सेक्स क्षमता में बहुत अधिक रुप से वृद्धि होती है।
• 22. जायफलः- 15 ग्राम जायफल, 20 ग्राम हिंगुल भस्म, 5 ग्राम अकरकरा और 10 ग्राम केसर को मिलाकर बारीक पीस लें। इसके बाद इसमें शहद मिलाकर इमामदस्ते में घोटें। उसके बाद चने के बराबर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। रोजाना रात को सोने से 2 पहले 2 गोलियां गाढ़े दूध के साथ सेवन करें। इससे शिश्न (लिंग) का ढ़ीलापन दूर होता है तथा नामर्दी दूर हो जाती है।
• 23. इलायचीः- इलायची के दानों का चूर्ण 2 ग्राम, जावित्री का चूर्ण 1 ग्राम, बादाम के 5 पीस और मिश्री 10 ग्राम ले लें। बादाम को रात के समय पानी में भिगोकर रख दें। सुबह के वक्त उसे पीसकर पेस्ट की तरह बना लें। फिर उसमें अन्य पदार्थ मिलाकर तथा दो चम्मच मक्खन मिलाकर विस्तार रुप से रोजाना सुबह के वक्त इसको सेवन करें। यह वीर्य को बढ़ाता है तथा शरीर में ताकत लाकर सेक्स शक्ति को बढ़ाता है।
• 24. सेबः- एक अच्छा सा बड़े आकार का सेब ले लीजिए। इसमें हो सके जितनी ज्यादा से ज्यादा लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग शीशी में भरकर रख लें। पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इस तरह से बदल-बदलकर 40 दिनों तक 2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है।
• 25. अजवायनः- 100 ग्राम अजवायन को सफेद प्याज के रस में भिगोकर सुखा लें। सूखने के बाद उसे फिर से प्याज के रस में गीला करके सुखा लें। इस तरह से तीन बार करें। उसके बाद इसे कूटकर किसी शीशी में भरकर रख लें। आधा चम्मच इस चूर्ण को एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ मिलाकर खा जाएं। फिर ऊपर से हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करें। इस दौरान संभोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यह सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला सबसे अच्छा उपाय है।
Sunday, March 04, 2012
शक्ति बढ़ाने के घरेलू उपाय
• 12. उंटगन के बीजः- 6 ग्राम उंटगन के बीज, 6 ग्राम तालमखाना तथा 6 ग्राम गोखरू को समान मात्रा में लेकर आधा लीटर दूध में मिलाकर पकाएं। यह मिश्रण लगभग आधा रह जाने पर इसे उतारकर ठंडा हो जाने दें। इसे रोजाना 21 दिनों तक समय अनुसार लेते रहें। इससे नपुंसकता (नामर्दी) रोग दूर हो जाता है।
• 13. तुलसीः- आधा ग्राम तुलसी के बीज तथा 5 ग्राम पुराने गुड़ को बंगाली पान पर रखकर अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं। इस मिश्रण को विस्तारपूर्वक 40 दिनों तक लेने से वीर्य बलवान बनता है, संभोग करने की इच्छा तेज हो जाती है और नपुंसकता जैसे रोग भी दूर हो जाते हैं।
• 14. गोखरूः- सूखा आंवला, गोखरू, कौंच के बीज, सफेद मूसली और गुडुची सत्व- इन पांचो पदार्थों को समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। एक चम्मच देशी घी और एक चम्मच मिश्री में एक चम्मच चूर्ण मिलाकर रात को सोते समय इस मिश्रण को लें। इसके बाद एक गिलास गर्म दूध पी लें। इस चूर्ण से सेक्स कार्य में अत्यंत शक्ति आती है।
• 15. सफेद मूसलीः- सालम मिश्री, तालमखाना, सफेद मूसली, कौंच के बीज, गोखरू तथा ईसबगोल- इन सबको समान मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस एक चम्मच चूर्ण में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ पीना चाहिए। यह वीर्य को ताकतवर बनाता है तथा सेक्स शक्ति में अधिकता लाता है।
• 16. हल्दीः- वीर्य अधिक पतला होने पर 1 चम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसका विस्तृत रुप से इस्तेमाल करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है।
• 17. उड़द की दालः- आधा चम्मच उड़द की दाल और कौंच की दो-तीन कोमल कली को बारीक पीसकर सुबह तथा शाम को लेना चाहिए। यह उपाय काफी फायदेमंद है। इस नुस्खे को रोजाना लेने से सेक्स करने की ताकत बढ़ जाती है।
• 18. जायफलः- जायफल 10 ग्राम, लौंग 10 ग्राम, चंद्रोदय 10 ग्राम, कपूर 10 ग्राम और कस्तूरी 6 ग्राम को कूट-पीसकर इस मिश्रण के चूर्ण की 60 खुराक बना लें। इसमें से एक खुराक को पान के पत्ते पर रखकर धीरे-धीरे से चबाते रहें। जब मुंह में खूब रस जमा हो जाए तो इस रस को थूके नहीं बल्कि पी जाएं। इसके बाद थोड़ी सी मलाई का इस्तेमाल करें। यह चूर्ण रोजाना लेने से नपुंसकता जैसे रोग दूर होते हैं तथा सेक्स शक्ति में वृद्धि होती है।
• 19. शंखपुष्पीः- शंखपुष्पी 100 ग्राम, ब्राह्नी 100 ग्राम, असंगध 50 ग्राम, तज 50 ग्राम, मुलहठी 50 ग्राम, शतावर 50 ग्राम, विधारा 50 ग्राम तथा शक्कर 450 ग्राम को बारीक कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर एक-एक चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम को लेना चाहिए। इस चूर्ण को तीन महीनों तक रोजाना सेवन करने से नाईट-फाल (स्वप्न दोष), वीर्य की कमजोरी तथा नामर्दी आदि रोग समाप्त होकर सेक्स शक्ति में ताकत आती है।
• 20. गाजरः- 1 किलो गाजर, चीनी 400 ग्राम, खोआ 250 ग्राम, दूध 500 ग्राम, कद्यूकस किया हुआ नारियल 10 ग्राम, किशमिश 10 ग्राम, काजू बारीक कटे हुए 10-15 पीस, एक चांदी का वर्क और 4 चम्मच देशी घी ले लें। गाजर को कद्यूकस करके कडा़ही में डालकर पकाएं। पानी के सूख जाने पर इसमें दूध, खोआ और चीनी डाल दें तथा इसे चम्मच से चलाते रहें। जब यह सारा मिश्रण गाढ़ा होने को हो तो इसमें नारियल, किशमिश, बादाम और काजू डाल दें। जब यह पदार्थ गाढ़ा हो जाए तो थाली में देशी घी लगाकर हलवे को थाली पर निकालें और ऊपर से चांदी का वर्क लगा दें। इस हलवे को चार-चार चम्मच सुबह और शाम खाकर ऊपर से दूध पीना चाहिए। यह वीर्यशक्ति बढ़ाकार शरीर को मजबूत रखता है। इससे सेक्स शक्ति भी बढ़ती है।
Saturday, March 03, 2012
शक्ति को बढ़ाने वाले घरेलू उपाय
• 1. आंवलाः- 2 चम्मच आंवला के रस में एक छोटा चम्मच सूखे आंवले का चूर्ण तथा एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर दिन में दो बार सेवन करना चाहिए। इसके इस्तेमाल से सेक्स शक्ति धीरे-धीरे बढ़ती चली जाएगी।
• 2. पीपलः- पीपल का फल और पीपल की कोमल जड़ को बराबर मात्रा में लेकर चटनी बना लें। इस 2 चम्मच चटनी को 100 मि.ली. दूध तथा 400 मि.ली. पानी में मिलाकर उसे लगभग चौथाई भाग होने तक पकाएं। फिर उसे छानकर आधा कप सुबह और शाम को पी लें। इसके इस्तेमाल करने से वीर्य में तथा सेक्स करने की ताकत में वृद्धि होती है।
• 3. प्याजः- आधा चम्मच सफेद प्याज का रस, आधा चम्मच शहद तथा आधा चम्मच मिश्री के चूर्ण को मिलाकर सुबह और शाम सेवन करें। यह मिश्रण वीर्यपतन को दूर करने के लिए काफी उपयोगी रहता है।
• 4. चोबचीनीः- 100 ग्राम तालमखाने के बीज, 100 ग्राम चोबचीनी, 100 ग्राम ढाक का गोंद, 100 ग्राम मोचरस तथा 250 ग्राम मिश्री को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। रोजाना सुबह के समय एक चम्मच चूर्ण में 4 चम्मच मलाई मिलाकर खाएं। यह मिश्रण यौन रुपी कमजोरी, नामर्दी तथा वीर्य का जल्दी गिरना जैसे रोग को खत्म कर देता है।
• 5. कौंच का बीजः- 100 ग्राम कौंच के बीज और 100 ग्राम तालमखाना को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। फिर इसमें 200 ग्राम मिश्री पीसकर मिला लें। हल्के गर्म दूध में आधा चम्मच चूर्ण मिलाकर रोजाना इसको पीना चाहिए। इसको पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है तथा नामर्दी दूर होती है।
• 6. इमलीः- आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन बीजों को तीन दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी शीशी में रख लें। आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें। इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है।
• 7. बरगदः- सूर्यास्त से पहले बरगद के पेड़ से उसके पत्ते तोड़कर उसमें से निकलने वाले दूध की 10-15 बूंदें बताशे पर रखकर खाएं। इसके प्रयोग से आपका वीर्य भी बनेगा और सेक्स शक्ति भी अधिक हो जाएगी।
• 8. सोंठः- 4 ग्राम सोंठ, 4 ग्राम सेमल का गोंद, 2 ग्राम अकरकरा, 28 ग्राम पिप्पली तथा 30 ग्राम काले तिल को एकसाथ मिलाकर तथा कूटकर बारीक चूर्ण बना लें। रात को सोते समय आधा चम्मच चूर्ण लेकर ऊपर से एक गिलास गर्म दूध पी लें। यह रामबाण औषधि शरीर की कमजोरी को दूर करती है तथा सेक्स शक्ति को बढ़ाती है।
• 9. अश्वगंधाः- अश्वगंधा का चूर्ण, असगंध तथा बिदारीकंद को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण दूध के साथ सुबह और शाम लेना चाहिए। यह मिश्रण वीर्य को ताकतवर बनाकर शीघ्रपतन की समस्या से छुटकारा दिलाता है।
• 10. त्रिफलाः- एक चम्मच त्रिफला के चूर्ण को रात को सोते समय 5 मुनक्कों के साथ लेना चाहिए तथा ऊपर से ठंडा पानी पिएं। यह चूर्ण पेट के सभी प्रकार के रोग, स्वप्नदोष तथा वीर्य का शीघ्र गिरना आदि रोगों को दूर करके शरीर को मजबूती प्रदान करता है।
Tuesday, September 01, 2009
चश्मा लगता है.....
Mera naam mayank upadhyay hai.
Main B.Tech 1st year me hoo.. aur Indian Air Force me Jaana Chahta hoo.......par mujhe chashma laga hai........ -3.5 D ka.....aur ye badhta hi jaa rha hai..... kripya mujhe mere chashme se chutkaara dilaiye....... kuch aushadhiyaa bhi bata deejiye yogaasano ke saath sath........ dhanyawaad
प्रिय मयंक जी
नमस्कार
आपने नज़र की कमजोरी के बारे में लिखा है। आपने बताया कि दिन ब दिन ये कमजोरी बढ़ रही है तो कुछ औषधियां इस प्रकार लीजिये--
१. षड्बिन्दु तेल --- नाक में दिन में दो बार दोनो छिद्रों में तीन-तीन बूंद डालिये और कुछ देर तक सिर को पीछे की तरफ़ रख कर लेटिये ताकि तेल बाहर न आ जाए ध्यान रखे कि इसे मुंह में मत खींचियेगा नुकसान तो नहीं होगा लेकिन कम लाभ होगा इसे खुद ऊपर चढ़ने दीजियेगा।
२. सप्ताम्रत लौह ---- २५० मिग्रा. दिन में दो बार शहद में मिलाकर चाटिये।
इस उपचार को कुछ माह लगातार लीजिये किसी जादुई चमत्कार की अपेक्षा न करें लाभ महसूस होने में छह माह तक लग जाते हैं।
गैस,धड़कन, पसीना, थकान, टेन्शन, शारीरिक व मानसिक कमजोरी,, शारीरिक व मानसिक कमजोरी,
विष्णु
प्रिय विष्णु जी
नमस्कार
आपने अपनी समस्या के जिन लक्षणों को बताया है उससे बिलकुल स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि ये मात्र पित्त विकार है जो कि जीर्ण हो जाने के कारण आपको अधिक कष्ट दे रहा है।। आपने कहा कि काम धंधे के कारण परहेज संभव नहीं है तो ये बात विचित्र है कि आप अपने काम को शरीर से अधिक महत्त्व दे रहे हैं। जब शरीर स्वस्थ नहीं रहेगा तो काम क्या मन और आत्मा से कर सकते हैं इस लिये भाई हम तो मानते हैं कि पहले शरीर स्वस्थ रखिए वरना मेहनत करके कमाया हुआ पैसा बीमारी के इलाज में चला जाता है। आप तेज-मिर्चमसाले दार खाना न खाएं, बासी भोजन न करें, शराब तम्बाकू आदि के सेवन से बचें, चाय काफ़ी आदि भी आपको नुकसान अक्रेंगे, बाजारू ठंडे पेय न लें ये आपके लिये विष समान हैं। आप निम्न औषधियां लीजिये-
१. गिलोय सत्व ५०० मिग्रा + प्रवाल पिष्टी १२५ मिग्रा + एक चम्मच गुलकंद दिन में दो बार लीजिये।
२. अश्वगंधारिष्ट दो दो चम्मच दिन में दो बार भोजन के आद बराबर पानी मिला कर लीजिये।
इस उपचार को चालीस दिन तक न्यूनतम लीजिये।
प्लीहा बढ़ी हुई है, बांयी किडनी में २० मि.मी. की पथरी है
MERA NAAM RAJPAL HAI & MAIN UNMARRIED HOON. MAIN BAHUT PARESHAN HOON . MERI PLEEHA (SPLEEN) BADI HUI HAI . MERI LEFT KIDNEY MEIN 20 MM KI PATHRI & GALL BLADDER MEIN 14 MM KI PATHRI HAI. MERA HIMOGLOBIN (9.0) BHI BAHUT KAM HAI . SARIR KAM KARTE HUE JALDI TAKH JATA HAI . URIN YELLOW DARK & JALAN KE SATH THODA AATA HAI .. NIGHT MEIN NEEND BHI BAHUT KAM AATI HAI .CHEHRA NISTEJ & GAL ANDER DHASE HAI .DOCTOR SAHEB , PLEASE MERI PROBLEMS SOLVE KIJIYA. KOI UCHIT SAMADHAN BATIYA.
RAJPAL
प्रिय राजपाल जी,आपकी समस्या कि आपकी प्लीहा बढ़ी हुई है, बांयी किडनी में २० मि.मी. की पथरी है, पित्ताशय में १४ मि.मी. की पथरी है, हीमोग्लोबिन ९ है, जल्द थकान हो जाती है, पेशाब गाढ़ा पीला और जलन के साथ कम मात्रा में होता है, रात में नींद बहुत ही कम आती है, चेहरा निस्तेज है और गाल अंदर धंसे हुए हैं। राजपाल जी आपकी समस्या एक ही है न कि कई सारी; ये एक ही समस्या के अनेक लक्षण हैं। आप निम्न औषधियां लीजिये-
१. कलमी शोरा २० ग्राम + पपड़िया नौशादर २० ग्राम + मीठा सोडा(खाने वाला सोडा) २० ग्राम लेकर बारीक पीस लीजिये। इस मिश्रण में से ३ ग्राम दवा पुनर्नवासव के दो चम्मच के साथ दिन में दो बार लीजिये।
२.रसराज रस आधी रत्ती दिन में दो बार शहद से लीजिये।
३. मुक्ता शुक्ति भस्म २ रत्ती + पीपल चूर्ण दो ग्राम दूध में मिला कर दिन में दो बार सेवन करें।
इस उपचार को दो माह तक नियमित लीजिये आपको आनंददायक परिणाम देखने को मिलेगा।
Sunday, August 23, 2009
दोनो पैरोँ मेँ भयंकर दर्द रहता है,दर्द एड़ी से शुरु होता है फिर सूजन आ जाता है
आशू सिंह
आशू सिंह जी,आपकी माता जी के ऊपर अब तक चिकित्सकों ने ढेर सारे प्रयोग कर डाले हैं यानि कि आपकी माताजी एक प्रायोगिक जन्तु की भांति कष्ट भोगती रही हैं मुझे उनसे हार्दिक सहानुभूति है। आपने जो लक्षण लिखे हैं उनके आधार पर ये शत-प्रतिशत वात का ही विकार है। आप उन्हें निम्न औषधियां दीजिये-
१. रास्ना घनसत्व ५ ग्राम + एकांगवीर रस १० ग्राम + योगराज गुग्गुलु १० ग्राम+ शुद्ध कुचला चूर्ण २.५ ग्राम + आमवातेश्वर रस १० ग्राम + विषमुष्टिका वटी १० ग्राम इन सबको मिला कर कस कर घोंट लीजिये व एक ग्राम की मात्रा दिन में तीन बार गर्म जल या चाय के साथ दीजिये।
२. रास्ना घनसत्व १० ग्राम + महायोगराज गुग्गुलु १० ग्राम + शुद्ध कुचला १० ग्राम लेकर कस कर घोंट लीजिये व इसमें से एक-एक ग्राम मात्रा दिन में दो बार गर्म जल से लीजिये।
३. सप्ताह में एक बार रात में कब्ज न रहे इसलिये मीठे दूध में कैस्टर आयल(एरण्ड का तेल) एक चम्मच डाल कर पिलाएं।
दही, चावल, मिथाई, तैलीय पदार्थ, ठंडे खाद्य पदार्थ( जैसे फ्रोजन फ़ूड) व गरिष्ठ भोजन खाने में न दें। हल्का व सुपाच्य भोजन लाभ अधिक देगा इस बात का विशेष ध्यान रखें। इस उपचार को न्यूनतम तीन माह दें।
जो बाल कई बरसों में गिर गये हैं
I would like to thank you for giving me time on Sunday to discuss my health problems with you.
As suggested by you, I am mentioning my health problems as under:
I am 35 yers of age. I suffer from hyperacidity, heat flushes, high serum uric acid (gout). Apart from this, I suffer from constipation and gas problem. As soon as I eat even a little, my stomach gets distended and it gives me a lot of discomfort. I have observed that over the past 2 years, my semen has become thinner. I think it is because of pitta and body heat. I also suffer from pre mature ejaculation.
Alopecia: I suffer from male pattern baldness for the last 12 years. However, over the last 2-3 years, my hair has been falling at an alarming pace.
I take the following medicines daily:
A sustained release acid inhibitor, PAN 40 a day for hyperacidity
3 Zylorics (morning, noon and night) to control my uric acid levels
4 tablets of Medohar Guggulu thrice a day (12 tablets)
You have rightly diagnosed that my problems are because of Pitta imbalance. My pulse is very strong and gallops prominently. I suffer from body heat, anger, sweating and hyperacidity. Kindly suggest me remedies that correct this imbalance and correct the other problems like alopecia .
Awaiting your response on the medicines. I would like to consume the medicines prepared by your establishment as I have total faith in you. Please suggest further
Respectfully,
Abhiram Mishra
प्रिय अभिराम जी, आपकी समस्या की जड़ तो मात्र एक ही है किन्तु उसके लक्षण अनेक दिखने के कारण आपको प्रतीत हो रहा है कि ढेर सारी समस्याएं है। आपने फोन पर जो बातें बताई थीं और जो लक्षण लिखे हैं उनके आधार पर स्पष्ट दिखायी देता है कि आप पित्तविकार से ग्रस्त हैं जो कि समय के साथ गहराता चला गया और जटिल लक्षण प्रस्तुत करता गया है। आप परेशान न हों और धैर्यपूर्वक निम्न औषधियां लीजिये
१. आंवला घनसत्व + हरड़ घनसत्व + मुलैहठी घनसत्व + भृंगराज घनसत्व २०-२० ग्राम ले कर इस मिश्रण में २० ग्राम स्वर्णमाक्षिक भस्म मिला कर इसकी एक ग्राम मात्रा दिन में दो बार ठंडे जल के साथ लीजिये(इस दवा को बीज निकाले हुए खाली मुनक्के या खाली कैप्सूल में भर कर लिया जा सकता है)
२. भृंगराज + आंवला + मिश्री + साबुत काले तिल २५-२५ ग्राम मिला कर रख लें व इस योग को भी एक-एक ग्राम मात्रा दिन में दो बार ठंडे जल के साथ लीजिये।
३. बालों में तेल इस समय लगाने का कोई उपयोग नहीं होता बल्कि समस्या उलझती ही जाती है अतः रात में (अथवा यदि शिफ़्ट ड्यूटी करते हों तो जब सोने का समय हो) बालों की जड़ों में उंगली के पोरों से हल्के तरीके से पंचतिक्त घृत लगायें(इतना अधिक नहीं कि चूने-टपकने लगे)और सुबह मुल्तानी मिट्टी या एलोवेरा शैम्पू से धो लें।
इस उपचार को नियमित रूप से न्यूनतम छह माह तक करा जाए तब आप देखेंगे कि नए काले छोटे-छोटे बाल खल्वाट त्वचा पर उग रहे हैं। चूंकि यह एक जिद्दी रोग है अतः बिना हताश हुए इलाज करना पड़ता है, यदि हम औषधियों से यह अपेक्षा रखें कि जो बाल कई बरसों में गिर गये हैं वे दवा लेते ही चमत्कारिक रूप से पुनः उग आएंगे तो यह बचपना ही होगा। घैर्य रखना ही इस उपचार का सबसे बड़ा धनात्मक पक्ष है।
Wednesday, August 05, 2009
३-४ बजे शाम से सर में बहुत तेज़ दर्द होने लगता है
धन्यवाद
shyam kumar
प्रिय श्याम जी आपकी माता जी के बारे में आपने जो लक्षण बताए हैं उनसे कुछ विशेष स्पष्ट नहीं हो रहा है किंतु जैसा कि आपने बताया कि जो लक्षण हैं वे हैं - शाम को निश्चित समय पर सिर में तेज दर्द, गला दबाने जैसी अनुभूति और चक्कर आना। अपने अनुभव के आधार पर विचार करने पर समझा कि स्पष्ट सी बात है कि इतने समय तक सामान्यतः लोग दोपहर का भोजन कर चुके होते हैं और यह पेट में भोजन के पाचन का समय होता है। इस समय पित्त प्रबल रहता है किन्तु आपकी माता जी की समस्या के साथ में दर्द का होना वायु के प्रकोप को भी बताता है किन्तु वह उतना प्रबल नहीं है जब तक उस पर पित्त का आवरण नहीं आ जाता समस्या शुरू नहीं होती है। आपने ये नहीं बताया कि क्या ये लक्षण कुछ समय बाद स्वयं ही शांत हो जाते हैं या आप कोई उपाय करते हैं, उनका हाजमा कैसा है, क्या कब्जियत रहती है,मासिक धर्म आदि में कोई समस्या तो नहीं है आदि; यदि विस्तार से लिखें तो कोई दिक्कत न होगी और तत्काल सही व सटीक उपचार मिल जाएगा। फिलहाल आप निम्न उपचार माताजी को दें--
१. कपूर + मेन्थाल(पिपरमिंट, जिसे पान में ठंडक के लिये डाला जाता है) बराबर मात्रा में मिला लीजिये और टाइट ढक्कन की कांच की शीशी में रख लीजिये तथा दोपहर का भोजन करने के आधा घंटे बाद एक बूंद उंगली पर लेकर माताजी की नाभि पर लगा दीजिये।
२. दूब(दूर्वा) ये साधारणतया पायी जाने वाली हरी घास है इसे लाकर मिट्टी साफ़ करके इतनी मात्रा में पीसिये कि एक चम्मच रस निकल आए। इस तरह से ताजा निकाला हुआ रस माता जी को सुबह नाश्ते के बाद तथा रात्रि को भोजन के आधा घंटे बाद दीजिए और उसके बाद एक घंटे तक पानी न पिएं।
इस उपचार को एक सप्ताह तक दीजिये और आयुषवेद के संपर्क में रहिए, तेज मिर्च-मसालेदार भोजन, मांसाहार से परहेज कराइये।
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आप इन औषधियों को मात्र उत्पादन मूल्य पर हमसे मंगवा सकते हैं
अग्निकुमार रस
अर्शोघ्नी बटी
आनंद भैरव रस
अजीर्ण कंटक रस
अर्शकुठार रस
आमवातेश्वर रस
आमवातारि रस
अश्वकंचुकी(घोड़ाचोली)रस
अग्नितुंडी बटी
अमरसुंदरी बटी
आरोग्यवर्धिनी
बटी
आमलकी रसायन
इच्छाभेदी रस
उपदंश कुठार रस
उन्माद गजकेशरी
रस
एकांगवीर रस
एलादि वटी
कनकसुंदर रस
कफ़कुठार रस
कुष्ठकुठार रस
कफ़केतु रस
कुमारकल्याण रस
कामदुधा रस
कृव्यादि रस
कफ़कर्तरी रस
कल्पतरू रस
कामधेनु रस
कृमिकुठार रस
कृमिमुग्दर रस
कफ़चिंतामणि रस
कांकायन बटी
कन्यालोहादि बटी
खैरसार बटी
खदिरादि बटी
गंधक बटी
गंधक रसायन
गर्भपाल रस
गुड़मार बटी
गुल्मकुठार रस
ग्रहणीकपाट रस
ग्रहणी गजेन्द्र
रस
चंद्रप्रभा बटी
चतुर्भुज रस
चंद्रामृत रस
चंदनादि बटी
चंद्रान्शु रस
चतुर्मुख रस
चित्रकादि बटी
चिंतामणि
चतुर्मुख रस
चंद्रकला रस
चिंतामणि रस
चौंसठ प्रहरी
पीपल
जवाहरमोहरा
दंतोद्भेदगदान्तक
रस
हिंगुलेश्वर रस
हृदयार्णव रस
हिंग्वादि बटी,
ज्वरांकुश रस
जयमंगल रस
लघुमालिनी बसंत
रस
लहशुनादि बटी
लवंगादि बटी
लक्ष्मीनारायण रस
लक्ष्मीविलास रस
लक्ष्मीनारायण
रस(नारदीय)
लाई रस
लीलाविलास रस
लोकनाथ रस
मधुमेहनाशिनी बटी
महाज्वरांकुश रस
महाशंख बटी
महामृत्युंजय रस
महावात विध्वंसन
रस
महालक्ष्मी विलास
रस
मकरध्वज बटी
मन्मथाभ्र रस
मूत्रकृच्छान्तक
रस
मरिच्यादि बटी
मृत्युन्जय रस
नृपतिवल्लभ रस
नागार्जुनाभ्र रस
नष्टपुष्पान्तक
रस
नित्यानंद रस
पीयूषवल्ली रस
पूर्ण चंद्र रस
प्रदररिपु रस,
प्रवाल पंचाम्रत
रस
प्रतापलंकेश्वर
रस
प्रमेहगज केशरी
रस
पुष्पधन्वा रस
प्रदरारि रस
प्रदरान्तक रस
रसपीपरी रस
रसराज रस
रामबाण रस
रजःप्रवर्तिनी
बटी,
रसादि रस
रक्तपित्तान्तक
रस
संजीवनी बटी
संशमनी बटी
समीरपन्नग रस
सारिवादि बटी
सर्पगंधाघन बटी
सूतशेखर रस
श्रंगाराभ्र रस
स्मृतिसागर रस
सिद्धप्राणेश्वर
रस
सोमनाथ रस
शिलाजीत बटी,
शिलाजित्वादि बटी
शिलासिंदूर बटी,
शिरःशूलादिवज्र
रस
शिरोवज्र रस
शूलवज्रिणी बटी
शंख बटी
शंकर बटी
शूलगजकेशरी रस
श्वास कुठार रस,
श्वासकास
चिंतामणि रस
शीतांशु रस
शुक्रमात्रिका
बटी
त्रिभुवन कीर्ति
रस
त्रिमूर्ति रस,
त्रैलोक्य
चिंतामणि रस
तारकेश्वर रस
बोलबद्ध रस
ब्राह्मी बटी
वात गजांकुश रस
वातकुलान्तक रस
बसंत कुसुमाकर रस
वृहत वातगजांकुश
रस
वृहत बंगेश्वर रस
विरेचन बटी
वृहत वातचिंतामणि
रस
वृहत
गर्भचिंतामणि रस
वीर्यशोधन बटी
वृद्धिबाधिका बटी
व्योषादि बटी
विषतिंदुक बटी
व्याधिहरण रसायन,
वृहत कामचूड़ामणि
रस
योगेन्द्र रस
अभ्रक भस्म
(साधारण,शतपुटी,सहस्त्रपुटी)
अकीक पिष्टी/भस्म
हजरुलयहूद
भस्म/पिष्टी
गोदन्ती भस्म
जहरमोहरा खताई
भस्म/पिष्टी,
कुक्कुटाण्डत्वक
भस्म
कहरवा पिष्टी
कान्तसार लौह
भस्म
कपर्द(वराटिका)भस्म
कासीस भस्म
लौह भस्में
(तीन
प्रकार)
मण्डूर भस्म
श्रंग भस्म
मुक्ताशुक्ति
भस्म/पिष्टी,
नाग भस्म
प्रवाल
पिष्टी/भस्म
शंख भस्म
शुभ्रा(स्फटिका)
भस्म
स्वर्णमाक्षिक
भस्म
ताम्र भस्म
टंकण भस्म
त्रिबंग भस्म
बंग भस्म
यशद भस्म
कासीस गोदन्ती
भस्म
संगेजराहत भस्म
संगेयेशव
भस्म/पिष्टी
गोमेदमणि
भस्म/पिष्टी
माणिक्य
भस्म/पिष्टी
मुक्ता(मोती)भस्म/पिष्टी
नीलम भस्म/पिष्टी
पुखराज
भस्म/पिष्टी
चांदी(रजत)भस्म
पन्ना(तार्क्ष्य)भस्म/पिष्टी
लाजावर्त
भस्म/पिष्टी
अम्लपित्तान्तक
लौह
चंदनादि लौह
(ज्वर
व प्रमेह)
ताप्यादि लौह
(रजत/बिना
रजत)
धात्री लौह
नवायस लौह
प्रदरारि लौह
प्रदरान्तक लौह
पुनर्नवादि
मण्डूर
विषमज्वरान्तक
लौह
सर्वज्वरहर लौह
सप्तामृत लौह
शिलाजित्वादि लौह
यक्रदप्लीहारि
लौह
रक्तपित्तान्तक
लौह
शोथारि लौह
मेदोहर विडंगादि
लौह
अमृतादि गुग्गुल
आभा गुग्गुल
कांचनार गुग्गुल
कैशोर गुग्गुल,
गोक्षुरादि
गुग्गुल
पुनर्नवादि
गुग्गुल
लाक्षादि गुग्गुल
पंचतिक्तघृत
गुग्गुल
रास्नादि गुग्गुल
सप्तविंशतिको
गुग्गुल
सिंहनाद गुग्गुल,
त्रयोदशांग
गुग्गुल
त्रिफला गुग्गुल
योगराज गुग्गुल
महायोगराज
गुग्गुल
वातारि गुग्गुल,
मेदोहर(नवक)
गुग्गुल
अभ्रक पर्पटी
स्वर्ण पर्पटी
बोल पर्पटी
लौह पर्पटी
प्राणदा पर्पटी
ताम्र पर्पटी
पंचामृत पर्पटी
विजय पर्पटी
रस पर्पटी
शीतल पर्पटी
श्वेत पर्पटी
मकरध्वज
चंद्रोदय
मल्ल सिंदूर
मल्ल चंद्रोदय
रस सिंदूर
शिला सिंदूर
स्वर्णबंग
ताल सिंदूर
रसमाणिक्य,
शिलाजीत(गीला/सूखा)
स्वर्णबंग क्षार





