रविवार, मार्च 09, 2008

एयर कंडिशनर में रहने से एलर्जी है साँस फूलने लगती है ....

डॉक्टर साहब,मुझे बताया है कि मुझे एयर कंडिशनर में रहने से एलर्जी है जिसके कारण मुझे गर्मियों के मौसम में ए.सी. का लाभ नहीं मिला करता है । गरमी तो सहन करा जा सकता है किन्तु जो तकलीफ़ है वह है दम फूलना ; मेरी साँस फूलने लगती है लगता है कि मर ही जाऊंगा लेकिन घर में तो ए.सी.बंद करा जा सकता है ऑफिस में दो सौ लोगॊ के लिये चलने वाला ए.सी. मेरे कारण तो बंद नहीं करा जा सकता है इसलिये कैसे मर मर के जी रहा हूं आप समझ सकते हैं कि नौकरी मैं नहीं छोड़ सकता और बीमारी मुझे नहीं छोड़ रही है । कृपा करके कोई उपचार बताएं ।
श्याम मोहन,वाशी(नवी मुंबई)
श्याम मोहन जी ,आपकी समस्या वाकई दुःख देने वाली है पर अब ज्यादा समय तक यह समस्या नहीं रहने वाली है । आप इन दवाओं का सेवन करिए और देखिए कि आपकी बरसों से सहेली बनी हुई बीमारी कैसे चंद रोज़ में भाग जाएगी --
१ . गुड़ १ किलो + अदरख १०० ग्राम + हल्दी ५० ग्राम + कालीमिर्च २० दाने ले लीजिए । सबसे पहले हल्दी और कालीमिर्च को अलग-अलग बारीक बीस लीजिए अब अदरख को महीन चटनी की तरह से पीस लीजिए फिर इन तीनों चीजों को गुड़ में मिला कर आग पर लेई की तरह से पका लीजिए । इस दवा को किसी एयरटाइट बर्तन में रखिए और सुबह-दोपहर-रात में एक-एक चाय वाला चम्मच लेकर चाटें और ध्यान रखिए कि दवा सेवन के आधे घंटे बाद तक पानी न पिएं यदि पीना एकदम अनिवार्य लगे तो हलका गुनगुना सा गर्म पानी पिएं ।
२ . असगंध(अश्वगंधा) २ ग्राम + सोंठ आधा ग्राम + पिप्पली(छोटी पीपर) आधा + पीपरामूल आधा ग्राम ,इन सब औषधियों को महीन पीस लें तथा २५० ग्राम यानि एक पाव दूध में जैसे खीर पकाते हैं उस तरह से पका लें । सुबह शाम जितना दूध इसमें से आसानी से पचा सकते हों हल्का गर्म ही इसमें से लेकर पिया करें ।
यदि दम का वेग अत्यधिक कष्ट दे रहा हो और तीव्र हो तो लक्ष्मीविलास रस की एक-एक गोली भी इस दूध के साथ ही निगल लें ।
इसे चमत्कार मत मानिये कि आप कु्छ दिनों में खुद ही ए.सी. चलाकर घर में बैठा करेंगे ; यह तो शुद्ध आयुर्वेद है । दवा कम से कम दो माह तक लीजिए किन्तु लाभकारी प्रभाव तो आपको एक सप्ताह में ही दिखने लगेगा ।

3 आप लोग बोले:

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

बहुत काम की जानकारी दी। मेरी बेटी को भी ऐसा ही है वह भी एसी में असहज महसूस करती है। जुकाम या ऐसा ही सर्दी जैसा असर होता है। क्या उसे भी यही नुस्खा दिया जाए?

डा०रूपेश श्रीवास्तव ने कहा…

द्विवेदी जी,बिटिया को यह दवा निर्भय होकर दीजिये और आयुर्वेद का चमत्कार देखिए,अफसोस तो इसी बात का है कि जिस आयुर्वेद पर फिरंगी रिसर्च करके कुछ पा लेना चाहते हैं हम उसे भुलाए बैठे हैं और अंग्रेजी गोलियां निगले जा रहे हैं । आयुर्वेद के पास सब जगह से निराश होकर आना ही भारत में बड़ी मूर्खता सिद्ध हो रही है ।

Dr Prabhat Tandon ने कहा…

होली की बहुत-२ बधाई और आयुर्वेद पर ज्ञानदर्शन करके डां रूपेश जी आपने भारतीय पद्द्तियों को मुख्य धारा मे लाने का उत्त्म कार्य किया है , आगे भी आप ऐसे लेखों से जागृत करते रहेगें , ऐसी आशा करता हूँ.