मंगलवार, फ़रवरी 19, 2008

लकवा या पक्षाघात

डा.साहब मेरे पिताजी की उम्र ५५ वर्ष है । उनको ब्लड प्रेशर हाई रहा करता है लेकिन पिछले सप्ताह उन्हें हाई बी.पी. के कारण लकवा मार गया है । अब वे बिस्तर पर हैं और पूरी तरह से चल-फिर सकने को मोहताज हैं । पिताजी को अक्सर जुकाम रहा करता है और बलगमी खांसी भी आती है । वालंटरी रिटायरमेंट लेने के कारण अब वे घर पर ही रहा करते हैं । हम लोग मधम वर्गीय परिवार से हैं इसलिए ज्यादा धन खर्च कर पाना संभव नहीं है, कोई उपचार बताइए ।
:-समीना शेख
** समीना बहन,आपके पिताजी को पक्षाघात का दूसरा दौरा नहीं हुआ यह सौभाग्य की बात है । आपके पिताजी की रिपोर्ट को देखकर जो दवाएं देना फलप्रद है वे निम्न हैं -
१ . ताप्यादि लौह एक-एक गोली सुबह शाम गुनगुने पानी से
२ . एकांगवीर रस एक-एक गोली सुबह शाम दो चम्मच महारास्नादि काढ़े से
३ . वातचिन्तामणि रस एक-एक गोली सुबह शाम दो चम्मच महारास्नादि काढ़े से
{ये दोनो दवाएं साथ में ले लीजिए}
४ . आरोग्यवर्धिनी वटी एक-एक गोली सुबह शाम
५ . सुबह खाली पेट ५(पांच) मिली. मालकांगनी का तेल सेवन करा दें
शेष सभी दवाएं खाली पेट न दें । खाने-पीने में वात बढ़ाने वाले भोजन का त्याग कर दें । यदि पिताजी मांसाहार करते हों तो कबूतर का शोरबा बना कर दीजिए अन्यथा लहसुन को दूध के संग खीर जैसा बना लें दोनो ही समान प्रभावकारी हैं । इस उपचार को लगातार छह माह तक जारी रखिए और हालत में हुए परिवर्तन सूचित करिए ।

1 आप लोग बोले:

मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…

डा.साहब,धीरे-धीरे करके सब बीमार यहां इकट्ठे होने लगेंगे तब आपको लैपटाप लेना पड़ेगा ।