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रविवार, अप्रैल 27, 2008
मेरी बेटी को बचाइये, क्या वो पागल हो गयी है?
Published :
4/27/2008 06:26:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डॉ.साहब हमारी बेटी जिसकी उम्र बाइस साल है तीन माह पहले एक दिन अचानक ही घर से गायब हो गयी। हमनें पुलिस में रपट लिखायी और समाज के ताने भी दबी आवाज में सुने कि किसी के साथ भाग गयी होगी लेकिन हमारी बेटी को हम अच्छी तरह जानते हैं उसका यदि किसी से कोई मेल-मिलाप होता तो वह हमें तुरंत ही बताती थी इसलिये उसे बिना बताये भाग जाने की जरूरत ही नहीं है क्योंकि हमारा परिवार एक खुले विचारों वाला परिवार है। एक सप्ताह लापता रहने के बाद पुलिस को हमारी बेटी मैले-कुचैले कपड़ों में दूसरे जिले के एक मंदिर के पास मिली जिसे कि उसे उसके मामा ने पहचाना। उस समय वह गुमसुम थी, हमने मौके की नज़ाकत को समझ कर उससे कुछ नहीं पूछा वह बिना किसी प्रतिवाद के घर आ गयी लेकिन अब तो हमारी शिक्षित बेटी का व्यवहार एकदम बदल गया है जैसे कि कोई बुरी आत्मा का साया हो उसपर; कपड़ों में ही मल-मूत्र त्याग कर देती है उसे एहसास ही नहीं होता कि यह गलत है, हममें से किसी से भी कोई बात नहीं करती और अकेली बैठ कर घंटों न जाने क्या-क्या अनर्गल प्रलाप करती रहती है यहां तक कि वो किस भाषा में बड़बड़ा रही है ये तक समझ में नहीं आता है। आंख, भौंहे, हाथ-पैरों, कंधा, कमर आदि को नचाती रहती है, कभी-कभी अचानक आंखे फाड़ कर देखने लगती है, अपने आपको कूड़े-कचड़े से सजाने का प्रयास करती है, खाना पसंद नही करती यदि बहला-फुसला कर हम लोग खिला भी दें तो भोजन के बाद घर में तेजी से इधर-उधर भागना शुरू कर देती है जो कि करीब एक घंटे तक जारी रहता है फिर खुद ही थक कर सो जाती है। स्नान नहीं करती, शरीर दुर्बल हो गया है, कभी हंसने लगती है कभी रोने लगती हैऔर कभी न जाने किन भाषाओं के गाने गाना शुरू कर देती है। हम लोगों से मारपीट या बुरा बर्ताव नहीं करती बल्कि खुद में ही मग्न रहती है। हमें एक पुलिस अफसर ने कहा था कि शायद इसके साथ बलात्कार जैसी कोई दुर्घटना हुई होगी जिससे इसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया होगा लेकिन मेडिकल जांच में बलात्कार या किसी शारीरिक जबरदस्ती की कोई पुष्टि नहीं हुई। लोग कहते हैं कि भूत-प्रेत का साया है हम सब कर रहे हैं इस लिये आप भी यदि संभव हो तो सहायता करें हो सकता है कि यह कोई बीमारी मात्र हो। हमें गुजरे बुरे समय को नहीं कुरेदना बस हमारी बेटी अच्छी हो जाए हम आपका जीवन भर एहसान मानेंगे। मेहरबानी करके उसे मेंटल हास्पिटल ले जाने की सलाह न दीजियेगा।
अनुरोध पर नाम व पता नहीं दिया जा रहा है
भाईसाहब, मैं आपके कष्ट को समझ रहा हूं कि एक ही बेटी और ये हालत हो जाए तो कितना घोर दुःख होता है किन्तु ईश्वर पर विश्वास रख कर लक्षणों के आधार पर औषधि व्यवस्था लिख रहा हूं। इन दवाओं को लगातार दो माह तक दें तथा जो परिवर्तन आये उसकी तत्काल फोन पर सूचना देते रहे----
१ . चतुर्भुज रस १२५ मिग्रा. + प्रवाल पिष्टी २५० मिग्रा. + शंखपुष्पी चूर्ण १ ग्राम मिला कर मात्रा बना लें व सुबह-शाम शहद के साथ इसे चटाएं (दवा खाली पेट दे सकते हैं)।
२ . स्मृति सागर रस २५० मिग्रा. + नागार्जुनाभ्र रस १२५ मिग्रा. + खमीरा गावजुबां ३ ग्राम + शुक्ति पिष्टी २५० मिग्रा. को मिला कर एक खुराक बना कर ऊपर वाली दवा के आधे घंटे बाद जल से दें।
३ . रजत भस्म ८० मिग्रा. + चन्द्रावलेह १० ग्राम सुबह व रात को गाय के दूध के साथ दें।
४ . भोजन में लशुनाद्यघृत १२ ग्राम मिला कर खिलाएं।
५ . देह पर शतधौत घृत की मालिश करवाएं।
एक माह तक लगातार यह उपचार दीजिये फिर उसके बाद सुबह की २ नंबर व ४ नंबर वाली दवाओं में परिवर्तन करें व उसके स्थान पर निम्न दवा देना शुरू करें--
२ . (अ) उन्मादगज केशरी रस २५० मिग्रा. + प्रवाल पिष्टी २५० मिग्रा. को दिन में दो बार मक्खन व मिश्री के मिश्रण के साथ दें।
४ .(अ) महाचैतस घृत १० ग्राम रात को सोते समय गुनगुने गर्म मीठे दूध में मिला कर दें।
ईश्वर पर भरोसा रखिये भाईसाहब आपकी बेटी अवश्य ही स्वस्थ हो कर अपने पुराने व्यवहार पर आ जाएगी। सूचना देना मत भूलिये।
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