शनिवार, मई 24, 2008

हस्तमैथुन छोड़ना चाहता हूं.....

sir,bahut sarminda hoon. maine apne shareer ko khokhla kar liya hai. sabse chhipaya, lekin aap se chhipakar narak mein bhi vaas nahin hoga. aapne daroo-sharab, ganza, cigrette chudane ke nuskhe batayee. main ek insan hoon, jo roti-chabal, dal, sabji, fal, chhodkar dunia ka koi cheej nahee khata hoo. koi vyasan nahi hai, sivay, maasturbation ke. isne meri dunia ko tanha, akela, vyavan bana ke chod diya hai. kab se lagi ye aadat, theek theek yad nahi, itna yad hai kii kaksha saat mein main ye dushkarma karta tha. isko bhala bataane vale ko kahoonga kii bhagwan sadbuddhi de par main ise har bar chhodna chaha lekin chahkar bhi nahi chhod paya yadi apke pas koi yukti hai to please, mera uddhar karen aur mujhe maut ke moonh mein jane se bacha le.अनाम
भाईसाहब,आपका मेरे ऊपर तो विश्वास है लेकिन खुद के ऊपर विश्वास क्या बिलकुल समाप्त हो चुका है कि यदि मैंने कहा कि ये करो और ये मत करो तो वो ब्रह्मवाक्य हो जाएगा। सच तो ये है कि आपकी बुरी आदत शरीर से न जुड़ी हो कर मन से जुड़ी है। लेकिन यदि आपकी स्थिति ऐसी है कि आप इतने गहरे अपराधबोध से ग्रस्त हैं तो मैं जरुर आपका साथ दूंगा। आप पहले तो इस बात को सोचना बिलकुल बंद करिये कि आप जो कर रहे हैं वह आपके शरीर के लिये इतना भयंकर है कि आप मौत के मुंह में चले जाएंगे। लीजिये आपकी देह में उपजती झूठी कामचेतना को समाप्त करते हैं और आप निम औषधियों का सेवन करें - -
१ . धनिया पाउडर जो कि सब्जी-भाजी में डाला जाता है जिसे कि तमाम कम्पनियां बना कर पैकेट बंद कर के बेचती हैं, इस धनिया पाउडर को सौ ग्राम लेकर उसमें दस ग्राम कपुर और सौ ग्राम ही मिश्री मिला दीजिये और दिन में तीन बार आधा-आधा चम्मच पानी से सेवन करें।
२ . त्रिबंग भस्म एक रत्ती एक चम्मच मलाई के साथ दिन में दो बार सेवन करें।
पूजा-पाठ तथा व्यायाम पर ध्यान लगाएं, एकांत से बचें,अश्लील चिन्तन व ऐसे घासलेटी साहित्यादि से परहेज करें ये आपके लिये मीठे जहर से कम नहीं हैं। आप अगर मन में पक्का इरादा कर लें तो फिर आपको कोई भी उस ओर नहीं ले जा सकता क्योंकि शरीर आपका है और इसका नुकसान तो आपको ही भुगतना होगा। संगीत आदि में रुचि लीजिये। विवाह के लिए प्रयत्न करिये। ईश्वर आपके साथ है। आप जिस किसी भी व्यक्ति जैसे आपकी माताजी या गुरूजी को आदरणीय मानते हों बस मन में ये भावना रखिये कि वे चौबीसों घंटे आपको देख रहे हैं।

आंखो के सामने जाल और कीड़े जैसे चित्र बनने का आभास होता है...

sir, tin char sal pahle mere banyee ankh ke samne til ke akar ka aabhasi chitra banta tha. us samay maine ek allopathy ankh ke doctor se dikhaya tha. unhone us samay kaha kuch nahi hai.dr. saheb ab char sal ke bad mere dono ankhon ke samne ye chitra banne lage hain, sath hi kuch jali aur kide jaise chitra bhi. meri umar 30 sal ke karib hai. peshe se patrakar hoon. isliye aath-das gante computer ke samne baithana mazboori hai. idhar kuch dino se dekh raha hoon ki aankhon ki roshni bhi kuch kam ho gayee hai aur ankh jalta hai aur unse paani girta hai.agar aap kripa karen to doosri samasya bataunga.pranammanoj kumar
मनोज भाई,आपकी आंखों की समस्या को चिकित्सक ने ऐसे कैसे कह दिया कि कुछ नहीं है। ये एक भयंकर लापरवाही की निशानी है। आप की समस्या को आपसे निवेदन है कि जरा विस्तार से बताइये ताकि समझा जा सके कि वास्तव में आपको भ्रम हो रहा है या नजरों में दोष उत्पन्न हो रहा है क्योंकि जितना कम्प्यूटर के सामने आप बैठते हैं उससे कहीं बहुत ज्यादा तो बहुत से लोग बैठते हैं किन्तु ऐसे कीड़े आदि का अहसास होना नहीं होता लेकिन आपकी इस समस्या पर तत्काल ही अवरोध लगाने के लिये आप निम्न औषधि का प्रयोग करें--
१ . षड्बिन्दु तेल दोनो नासिका छिद्रों में तीन-तीन बूंद तथा तीन-तीन बूंद दोनो कानो में डालिये और दवा डालने के बाद कम से कम आधा घंटा विश्राम करिये।
इस उपचार को लगातार जारी रखिये और विश्वास रखिये कि आपकी समस्या थम जाएगी और आगे मुझे जरा स्पष्ट करके सूचित करें ताकि आपको अविलंब ही उपचार सुझाया जा सके। धन्यवाद

दोनो अंडकोषों में तीन या चार गुना अंतर है...

mera baanya andkosh danye kee apeksha teen se char guna bada hai. pichle kareeb pandrah sal se. haan dard nahi karta hai. kabhi jyada phool jata hai. kai ayurvedic aur homeopathic dava le chuka hoo. chandraprabhavati aur vridhivadhikavati se kam to ho jata hai. par usi avastha mein rahta hahin hai. kripa karke ilaz batayen, operation se dar lagta hai. meri umar 30 sal ke karib hai. shaadi nahee hui hai.
manoj kumar
मनोज भाई,आपकी समस्या पुरानी है किन्तु निराश न हों। जैसा कि आपने बताया कि आप चंद्रप्रभा वटी और वृद्धिबाधिका बटी ले लेने से आपको आराम आ जाता है किन्तु उसी अवस्था में रह जाता है। दोनो अंडकोषों में तीन या चार गुना अंतर परेशानी पैदा करता है स्वाभाविक सी बात है कि यदि दर्द न भी हो तब भी ये एक परेशानी वाली बात है। आप के लिये जो उपचार लिख रहा हूं वह आप नियमित रूप से न्यूनतम छह माह तक लें और विश्वास रखिये कि आपकी समस्या समाप्त हो जाएगी--
१ . वृद्धिबाधिका बटी एक गोली + वृद्धिहर रस एक गोली सुबह शाम शहद के साथ लीजिये।
२ . छोटी हरड़ को एक दिन गोमूत्र में भिगो कर रखिये बाद में सुखा कर एरण्ड(रेंडी) के तेल में भून लीजिये व पीस कर चूर्ण बना कर चौथाई भाग सेंधा नमक मिला लीजिये। इस योग को पांच ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार भोजन के बाद गर्म जल से लीजिये।
३ . रात को सोते समय १०० ग्राम ताजे इमली के पत्ते लेकर किसी मिट्टी के बर्तन में रखें और इसमें इतना गोमूत्र डालें कि सारी पत्तियां डूब जाएं। फिर इसे आग पर पकाएं जब गोमूत्र कम हो जाएफिर उतना ही गोमूत्र डालें व पकाएं ऐसा चार बार करें। ध्यान दीजिये कि यदि अंडकोष कद्दू की तरह से भी भारी हों तो इस योग से समस्या समाप्त हो जाती है ऐसी स्थिति में बर्तन से उठती भाप से सेंक लीजिये। जब योग पूरा हो जाए तो उसे हलका सा गर्म ही अंडकोष पर बांधें। इस योग में कदाचित आप को अड़चन हो सकती है किन्तु यदि आप आपरेशन से बचना चाहते हैं तो ये बेहतरीन उपाय है।

मूत्र के साथ PUS CELLS आ रहे हैं....

डाक्टर साहब,मेरी उम्र पैंतालीस साल है। मुझे कुछ दिनो से मूत्र मार्ग में तकलीफ़ थी। जलन और रुकावट के साथ मूत्र त्याग हुआ करता था। जांच करवाने पर इनफ़ेक्शन पाया गया मूत्र में मवाद के कण( pus cells) आ रहे हैं। मैं भारी भरकम एण्टीबायोटिक दवाएं महीनों खाने के स्थान पर आपसे कोई आयुर्वेदिक औषधि चाहता हूं। मेहरबानी करके उपचार बताएं।
ओमप्रकाश उपाध्ये,संगमनेर
ओमप्रकाश जी, आपकी समस्या देखने पर लगता है कि आप एंण्टीबायोटिक दवाओं का पूर्व में कोई बुरा अनुभव रखते हैं। इस कारण एंण्टीबायोटिक दवाओं से बचना चाहते हैं। ठीक है आपके अनुसार आपको आयुर्वेदिक औषधि बता रहा हूं जो कि न सिर्फ़ आपकी तकलीफ़ को समाप्त करेगी अपितु मूत्र से पस-सेल्स आने के कारण का भी निर्मूलन करेगी--
१ . कबाब चीनी + रेवन्दचीनी + मुलहठी + सफेद जीरा + कलमी शोरा ये सब अलग-अलग दस-दस ग्राम तथा इस में पिसी हुई मिश्री ३० ग्राम मिला लीजिये। इस पूरे मिश्रण को कस कर मिला लीजिये और पांच ग्राम की मात्रा का सेवन गाय के कच्चे दूध की लस्सी साथ सुबह खाली पेट सेवन कराएं। आपकी समस्या आश्चर्यजनक रूप से सप्ताह भर में निर्मूल हो जाएगी लेकिन सावधानी के तौर पर न्यूनतम पंद्रह दिन दवा लीजिये।

शुक्रवार, मई 23, 2008

लोग मुझे अजीब सी हिकारत भरी नजरो से देखने लगते हैं

नमस्कार डा. साहब, मेरी उम्र २४ वर्ष है और मुझे पिछले करीब ६ वर्ष से एक समस्या ने परेशान किया हुआ है. मेरे पूरे शरीर की त्वचा बेहद नाजुक है. एक मामूली सी खरोंच, किसी चीज के छू जाने या तौलिये से चेहरा पोंछ लेने भर से शरीर के उस हिस्से में लालामी भरे चकत्ते हो जाते हैं. चकत्ता ठीक उसी आकर का बनता है जितनी जगह पर खरोंच हुई हो या किसी का हाथ छू गया हो. और ये निशान और लालामी मात्र ५ से १० मिनट में अपने आप गायब हो जाती है जैसे कुछ हुआ ही न हो. बिना खरोंच आदि के मैं एकदम सामान्य रहता हूँ और मुझे देखकर कोई जान भी नही सकता की मुझे ऐसी कोई बीमारी है. मैंने ४ वर्ष पहले एलर्जी टेस्ट करवाया था, जिसके अनुसार बाद मे एक वर्ष तक वैक्सीनेशन भी नियमित करवाया, पर कोई लाभ नहीं हुआ. फ़िर होम्योपैथ से भी महीनों तक इलाज करवाया पर मामूली लाभ तक नहीं दिखा. मैं आजकल कोई भी नियमित एलोपैथिक दवा नही ले रहा हूँ. हाँ, अधिक तकलीफ होने पर मैं कभी कभी CETRIZINE दवा एक खा लेता हूँ तो फ़िर करीब एक हफ्ते तक ये चकत्ते बनना काफी कम हो जाता है, बाद में दवा का असर खत्म होने पर फ़िर पहले जैसा. कृपा करके मुझे कोई स्थाई समाधान बताये. घर पर रहता हूँ तो चल जाता है, पर किसी और के घर जाने पर तो मैं खाना खाने और हाथ मुंह धोने से भी कतराता हूँ क्योंकि मेरे चेहरे पर आए इस असामान्य परिवर्तन से लोग मुझे अजीब सी हिकारत भरी नजरो से देखने लगते हैं और मेरे पास आने से कतराते हैं जैसे कि मेरे पास आने से उनको भी ये बीमार न लग जाए. मैं थक चुका हूँ लोगों को अपनी इस बीमारी के बारे में बता बता कर. मेरी मदद करें.
Thanks and Regards
Punit Omar, Pune
Email: pomar@techmahindra.com
पुनीत जी, आपकी समस्या को देखा और समझा। आप यकीन करिये कि आप किसी गम्भीर समस्या से तो हरगिज़ ग्रस्त नहीं हैं बस आपको अब तक दुर्भाग्यवश सही उपचार और सलाह नहीं मिले। आपकी समस्या त्वचान्तर्गत पित्त से संबद्ध है। इस तरह से होने वाले लक्षणों का कारण पित्त का कोप ही होता है। आप एलर्जी वगैरह के भ्रम में अगर पड़ गये तो सारी जिंदगी उसी में उलझे रहेंगे। आपकी समस्या कोई ऐसी नहीं है कि जो अन्य किसी को संक्रमित कर सके ,क्या आप एकदम ही जाहिल किस्म के लोगों की संगति में हैं? जो लोग आप से कतराते हैं उन्हें आप खुद ही छोड़ दीजिये क्योंकि ऐसे लोग जो आपका मुसीबत में साथ छोड़ दें उनसे दूर हो जाना ही हितकर होता है। लीजिये आपकी समस्या का समाधान प्रस्तुत है --
१ . सूतशेखर रस एक गोली + कामदुधा रस एक गोली दिन में दो बार भोजन करने के बाद शीतल जल से लीजिये।
२ . गिलोय सत्त्व दस ग्राम + प्रवाल पिष्टी दस ग्राम मिला लीजिये और इस मिश्रण में से २५० मिग्रा. औषधि दिन में दो बार खस के शर्बत या शर्बत रूह अफ़जाह(डाबर) के साथ लीजिये।
इस उपचार को दो माह तक लीजिये और आप अपने भोजन में मिर्च-मसाले का प्रयोग बंद कर दीजिये यही चीजें आपको नुकसान कर रही हैं। चायनीज व्यंजनों और बाजारू सौफ़्ट ड्रिंक्स से भी सख्त परहेज रखिये वरना दवा करने का कोई लाभ न होगा और बीमारी फिर लौट आयेगी। मांसाहार जब तक औषधि सेवन करें बंद कर दीजिये, सिगरेट आदि धूम्रपान से भी बचें।

गुरुवार, मई 22, 2008

ऐसे चकत्ते उभर आते हैं जैसे कि चींटी ने काट लिया हो....

डा.साहब नमस्कार, पिछले एक माह से मुझे कलाइयों,चेहरे,कमर और पेट पर ऐसे चकत्ते उभर आते हैं जैसे कि चींटी ने काट लिया हो ,इन ददोरों में जलन और खुजली भी बहुत देज होती रहती है। आठ-दस घंटों में ये अपने आप ठीक हो जाते हैं मेरी पत्नी इन पर नारियल के तेल में कपूर मिला कर लगा देती है इससे थोड़ी राहत मिलती है लेकिन पूरी तरह से ठीक नही होता है। हमारे घर आये एक मित्र ने बताया कि इसे शीतपित्त कहते हैं लेकिन आजकल तो गर्मी है फिर ये रोग तो सर्दियों में होना चाहिये। लेकिन अगर किसी भी कारण से हो ही गया है तो इसका इलाज क्या है क्योंकि अपने पड़ोस में जो डाक्टर हैं उनकी दवा पंद्रह दिन से खा रहा हूं लेकिन कोई फायदा नहीं है । आप ही कुछ उपाय बताएं। धन्यवाद
मोहर सिंह,दादरी
सिंह साहब,आपकी समस्या को देखा और अच्छी तरह से समझा। आपको स्पष्ट करना था कि शीतपित्त नामक बीमारी का सर्दी के मौसम से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि ये शरीर में खान-पान या विहार की गड़बड़ी के कारण धातुतिक्ति(HISTAMINE) नामक तत्त्व उत्पंन हो जाता है जिसके कारण त्वचा पर इस तरह के खुजली और जलन लिये चकत्ते उत्पंन हो जाते हैं लीजिये आपके लिये उपचार प्रस्तुत है-
१ . सर्पगन्धा का बारीक कपड़े से छना हुआ चूर्ण ५ ग्राम + मुक्ताशुक्ति भस्म ५ ग्राम इन दोनो को मिला कर घोंट लीजिये एवं एकसार हो जाने पर २५० मिग्रा. की मात्रा दिन में तीन बार जल से दीजिये।
२ . हरिद्राखण्ड नामक औषधि एक चम्मच दिन में दो बार चटाइये और जल पिला दीजिये।
आप यकीन मानिये एक सप्ताह तक दवा सेवन कर लेने के बाद आपको इस बीमारी से छुटकारा मिल जाएगा और फिर शायद ही कभी जीवन में दुबारा हो।

मंगलवार, मई 20, 2008

Left Ovarian Tumor, enlarged polycystic right ovary and.......

My wife, Smt. Ritu, 30, consulted the Doctor for her regular severe pain and other connected problems, irregular MC, weight loss etc. We've one male child, whose is now 5 years old.Results of Sonography conducted by a MD (Radiology) are as under : 1. Bulky uterus with large subserous leiomyoma in left anterior wall.2. Enlarged polycystic right ovary. Clinical crrelation is suggested.Another sonography reveals : 1. A solitary mass observed on left side of uterus 9.4cmx8.5cm.2. Right Ovary not seen.Impression : Left Ovarian Tumor.Several medicines and other treatments were received after these reports. Again after two-three months (after suggested medicines etc. course completion), we visited the Doctor for the same problem (pain, etc.)The Doctor has strongly advised to undergo for Hysterectomy, i.e. Uterus & Ovary removal.Sir, though, we do not want any child in future, we are not in a mood about Uterus Removal. Sir, I only want to know that whether the uterus removal is necessary or not ? She has also taken Ayurvedic Treatment, but the problem is not ready to go.Sir, I will be highly obliged, if your kind opinion is received, in this regard. I've also attached a PDF file, containing the above request in Hindi, kindly download the same.Thanking you, Sir.Yours faithfully,Ashok Kumar Verma
आत्मन बंधु वर्मा जी, सर्वप्रथम तो आपका धन्यवाद करना चाहता हूं कि आपने मुझे इस योग्य माना कि सलाह ले सकें। किन्तु एक बात का क्षोभ भी मन में होता है कि आयुर्वेद और हिन्दी को अभी भी आप जैसे विद्वान लोग दोयम दर्जे का मानते हैं किन्तु जब एलोपैथी से मन भर जाता है या व्यर्थ धन व्यय करके भी लाभ नहीं होता तब लोग हार कर आयुर्वेद या होम्योपैथी की शरण में आते हैं। बात बस इतनी है कि जो लोग व्यवसायिक बुद्धि रखते हैं चाहे वो एलोपैथ हों या आयुर्वेद अथवा किसी अन्य चिकित्सा पद्धति से उपचार करने वाले, आप जैसे दुखी और परेशान लोग उनके लिये मात्र ग्राहक से अधिक कुछ नहीं होते उन्हें आपका दर्द अपने लाभ का केन्द्र नजर आता है। मैं आपके सामने आयुर्वेद की महिमा का बखान करके कुछ सिद्ध नहीं करना चाहता लेकिन इतना स्पष्ट करना चाहता हूं कि आधुनिक तरीकों से आयुर्वेद को समझ पाना बचकाना प्रयास है। संभव है कि आपको इस बात का बुरा लग रहा हो कि उपचार के स्थान पर उपदेश दे रहा हूं। लीजिये आपकी पत्नी की समस्या का हल प्रस्तुत है।
१ . सर्वेश्वर पर्पटी ६ ग्राम + शुद्ध बर्किया हरताल ६ ग्राम + स्वर्ण भस्म ६ ग्राम + अभ्रक भस्म(सहस्त्रपुटी) ६ ग्राम + मुक्ता पिष्टी ६ ग्राम + हीरा भस्म २५० मिली ग्राम + पन्ना पिष्टी ३ ग्राम + गिलोय सत्व ६० ग्राम इन सभी औषधियों को भली प्रकासे से घोंट लीजिये व सहजन(Drumstick) की छाल के रस को इसमें मिला कर २५० मिलीग्राम की गोलियां बना लें। इस गोली को एक-एक गोली दिन में दो बार शहद के साथ दें व ऊपर से तीन चम्मच सहजन की छाल का रस पिला दिया करें।
२ . रस माणिक्य १२० मिग्रा. + आरोग्यवर्धिनी बटी १२० मिग्रा + पंचामृत रस १२० मिग्रा मिला कर शहद के साथ दिन में दो बार दें।
३. पंचतिक्त घृत गुग्गुलु दो दो गोली दिन में तीन बार गर्म दूध से दें।
४ . विषतिन्दुक बटी दो गोली + रस पर्पटी ५०० मिग्रा. + सोंठ ५०० मिग्रा. + कालीमिर्च ५०० मिग्रा. + मीठा विष(इसे बछनाग या वत्सनाभ नाम से भी जाना जाता है)५०० मिग्रा. + अजवाइन ५०० मिग्रा. + छोटी(लेंडी) पीपर ५०० मिग्रा. बारीक पीस कर पोस्त डोडा के काढे को मिला कर २५० मिग्रा. की गोलियां बना लें व एक-एक गोली दिन में दो बार गुनगुने जल से दें।
इस उपचार को छह माह तक जारी रखिये व अपने संतुष्टि व लाभ की पुष्टि के लिये पुनः टैस्ट करवा लें। ईश्वर से प्रार्थना है कि आपकी पत्नी शीघ्रातिशीघ्र स्वस्थ हो जाएं। खट्टे व चटपटे आहार से परहेज़ कराएं।

अस्थमा का अटैक आया था अब डेढ़ साल बाद खून की उल्टी हुई है...

Adardiy Doctor ji
mera dost ko aj se kareeb 5 sall pahle achanak asthama ka attk aya ta doctor ne kha ki tumko ellegry ho gai hi magar kabi kabi saas lene me dickat hoti thi lakin uske 1.5 sal bad achanak ak din usko khon ki palti suru ho gai doctor ne kha ki uska ek walw kharab ho gya hi laki usne apration nai karaya magar vo aj bhi sahi hi kawal usko mausam badale per hi dikkat hoti hi aur body me improve ment nai ho raha hi wah apration nai karana chahta hi so please ko ayurvadic tarika batay jisse me usko bata saku thank u krapya kar ke mujhi ese mail i.d. per nivard mail kar de.
thank u
vikash
विकास जी,आपके मित्र की समस्या को समझने का प्रयत्न किया और इस नतीजे पर आया हूं कि उनको कॊई विशेष चिन्ता की बात नहीं है। व्यवसायिक चिकित्सकों द्वारा "हार्ट वाल्व" खराब कह दिया जाना अक्सर उनके धंधे का टोटका होता है ताकि इसी बहाने से आपके हजारों रुपए के टैस्ट कराए जा सकें क्योंकि उनका पैथोलाजिस्ट से भी कमीशन रहता है। आप बेफ़िक्र हो कर अपने मित्र को निम्न औषधियां दें और यकीन रखिये कि आपका मित्र शीघ्र ही स्वस्थ हो जाएगा---
१ . सितोपलादि चूर्ण २ ग्राम + श्वांसकुठार रस एक गोली वासारिष्ट के दो ढक्कन के साथ सुबह-शाम दीजिये, दवा खाली पेट न दें कुछ नाश्ता या भोजन के बाद ही दें।
२ .शुद्ध शिलाजीत आधा ग्राम दिन में दो बार दूध के साथ दीजिये।
३ . अर्जुनारिष्ट दो ढक्कन दिन में दो बार बराबर जल के साथ दीजिये।
ये उपचार दो माह तक दीजिये। मांसाहार दो माह के लिये बंद कर दें। अंडे भी न खाएं तो हितकर होगा।

दायें अंडकोष में सूजन और दर्द

प्रणाम डॉक्‍टर साहब, सर्वप्रथम तो आपका बहुत-बहुत शुक्रिया जो आपने मेरी समस्‍या पर इतनी तत्‍परता से प्रतिक्रिया दी. आपको मैं थोड़े से विस्‍तार से पूरी बात बता देता हूं. सबसे पहले तो मेरी उम्र 24 वर्ष है और मैं अविवाहित हूं. सन् 2005 मार्च महीने में मैं जिम जाया करता था कसरत करने के लिए तभी से एक दिन मेरे दायें अंडकोष में सूजन और दर्द शुरू हुआ. मतलब तब मेरी उम्र 21 होगी. हफ्ते भर मैंने कोई उपचार नहीं लिया और दर्द असहनीय होता गया. जहां तक चोट लगने की बात है ऐसा कुछ नहीं हुआ था. मैं सुबह जिम जाने से पहले बहुत सारा पानी पीता था फ्रेश होने के लिए और जिम के दौरान पेशाब का प्रेशर बनने और उसे रोके रखना भी कारण हो सकता है. हालांकि कारण क्‍या है मैं स्‍पष्‍ट रूप से नहीं कह सकता. खैर एक-दो हफ्ते बाद मैं एक फिजीशियन और उसके बाद सर्जन के यहां गया. दोनों ने कहा कि कुछ नहीं है और दवाएं देकर टरका दिया. कोई लाभ नहीं. मैं मुरैना मध्‍यप्रदेश में रहता हूं उसके बाद ग्‍वालियर के सर्जन को दिखाया उन्‍होंने अल्‍ट्रासाउंड कराया. जिसमें दायें अंडकोष का आकार बढ़ा होने के अलावा कोई समस्‍या नहीं थी. सब नॉर्मल था. उन्‍होंने भी दवाएं देकर टरकाया. कुछ खास फायदा नहीं. उसके बाद काफी महीनों तक वहीं के एक आयुर्वेदाचार्य से उपचार लेता रहा. बहुत लाभ हुआ. दर्द लगभग खतम सा हो गया. सूजन भी कुछ खास नहीं दिखी. फिर 2006 में मेरे बायी तरफ के लोअर अब्‍डोमेन में दर्द रहने लगा. दरअसल उनकी सलाह पर मैंने लंगोट पहनना शुरू किया था और एक मौके पर मैंने कमर पर लंगोट बहुत ही ज्‍यादा कस लिया था. उस दिन के बाद मेरे बायीं लोअर अब्‍डोमेन में दर्द रहने लगा. मामूली बहुत ज्‍यादा नहीं. बस टाइट पैंट पहनने या बेल्‍ट लगाने पर वो बढ़ जाता है और शरीर के पूरी बायें हिस्‍से में होने लगता है मतलब बायें तलवे से लेकर और ऊपर सिर तक हाथ तक. मैंने उन्‍हें बताया तो वे टहलाते रहे. सो मैंने उनके यहां जाना बंद कर दिया. एक सर्जन के यहां गया तो उन्‍होंने अल्‍ट्रासाउंड कराकर सब कुछ नॉर्मल बताकर कह दिया कि यह सब तो तुम्‍हारा वहम है. उसके बाद 6 महीने तक कोई दवा नहीं ली और काफी डिप्रेशन में चला गया. फिर 2007 की शुरूआत में मेडिकल कॉलेज ग्‍वालियर के एक जूनियर डॉक्‍टर मित्र के कहने पर कुछ सर्जन और फिजीशियन को दिखाया और उन्‍होंने कहा तुम्‍हें कोई बीमारी ही नहीं है. बस अंडकोष का आकार थोड़ा बड़ा है तो कभी कभार कुछ लोगों का होता ही है. उसके बाद काफी समय तक कोई दवा नहीं. फिर एक होम्‍योपैथी के चिकित्‍सक को दिखाया. तब से अब तक उनकी दवाएं ले रहा था. 15 दिन पहले तक. पर आठ महीने दवा लेने के बावजूद फर्क तो दिखा पर अपेक्षित फर्क नहीं दिखा ऊपर से चिकित्‍सक महोदय का कहना था कि मैं कह नहीं सकता कि इलाज कब तक चलेगा. मतलब इलाज सालों भी चल सकता है उनके अनुसार. होम्‍योपैथी लेने से पहले मैं न तो मोटरसायकल, स्‍कूटर में किक मार सकता था क्‍योंकि इससे असहनीय दर्द होता था. ना वजन उठा सकता था, दौड़ने से भी बेहद कष्‍ट होता था, थोड़ा भी पेशाब रोकने से दर्द शुरू हो जाता था, सर्दियों के दौरान तकलीफ बढ़ जाती थी अंडकोष की. मतलब ठंडे पानी को छू लेने या शौच के लिए जाने के बाद अंडकोष में असहनीय दर्द होता था. डिस्‍चार्ज के बाद भी दर्द होता था. हालांकि अब इतने समय होम्‍योपैथी लेने के बाद इन सब कार्यों को करने के बावजूद दर्द उतना भयंकर नहीं होता. उन चिकित्‍सक ने मुझे सब कुछ करने की छूट दे रखी थी चो बाइक चलाओ चाहे वजन उठाओ, चाहे masturbation करो. हालांकि अभी मैं यदि masturbation करूं तो स्थिति ये है कि उसके बाद दर्द शुरू हो जाता है और कुछ दिन तक होता रहता है. इस बार होम्‍योपैथी लेने के कारण सर्दियों में भी काफी कम तकलीफ हुई. मोटरसायकल चलाऊं तो दर्द होता है. पर मैं होम्‍योपैथ की अत्‍यधिक धीमी गति से उपचार से परेशान हो गया था और यह बहुत महंगा भी था. फिलहाल मेरे दायें अंडकोष में दर्द, सूजन दोनों है. दर्द ना तो असहनीय है ना ही बहुत कम है. दर्द पूरे दाहिने पैर में होता है और भारीपन महसूस होता है. दर्द जब कम रहता है तो केवल अंडकोष तक ही होता है टांग में नहीं महसूस होता. और बायें लोअर अब्‍डोमेन की समस्‍या यथावत है. हालांकि बहुत से लोगों ने इसे नर्वस सिस्‍टम की समस्‍या बताया. पर वहां दर्द नहीं है वो तो कभी कभार तंग पैंट पहनने या गलती से दौड़ने पर होता है. वहां भी ऐसा है कि दर्द यदि ज्‍यादा हुआ तो शरीर के पूरे बायें हिस्‍से में होता है सिर तक. हालांकि दर्द ज्‍यादा, या फिर होता ही नहीं है. समस्‍या तो मुख्‍यतया अंडकोष की ही है. पिछले महीने अप्रैल में जो अल्‍ट्रासाउंड कराया उसकी रिपोर्ट ये है- बाकी सब तो नॉर्मल है. both testis shows normal echo pattern.Rt testis is larger in size measRt testis 37*20mm Lt testis 27*14mmRt testis shows increased vascul;arity on color flow.ये तो रही रिपोर्ट हालांकि जब रिपोर्ट कराई थी उसके बाद अब लगता है कि थोड़ी सूजन ज्‍यादा है क्‍योंकि हर समय दौड़-भाग करने, बाइक चलाने और अनियमित दिनचर्या के कारण हो सकता है. अब मैंने स्‍वामी रामदेव का प्राणायाम शुरू किया है उसको करने के बाद दर्द में राहत महसूस करता हूं. हालांकि ग्‍वालियर में हफ्तेभर पहले स्‍वामी रामदेव के पतंजलि योग चिकित्‍सालय भी गया था पर उन्‍होंने कहा कि आप तो बिल्‍कुल ठीक हैं. डॉक्‍टसाहब अब आपसे विनती है कि मेरी समस्‍या को दृष्टिगत रखते हुए समुचित उपचार बतायें. क्‍या इस समस्‍या का समाधान संभव है और यदि हां तो ये कितना समय लेगा. चूंकि मेरा विवाह भी आगामी साल-छ: महीनों में हो सकता है. जरूरी प्रीकॉशन(सावधानियां) और परहेज भी बतावें और समुचित मार्गदर्शन दें. मेल कुछ ज्‍यादा ही लंबा हो गया है. इसके लिए क्षमा चाहता हूं. आभार, अनिल,मध्यप्रदेश
अनिल भाई,आपकी समस्या को गौर से देखा विस्तार से लिखा इसके लिये मैं आपका धन्यवाद करता हूं। आपकी समस्या कोई बहुत बड़ी या लाइलाज तो है नहीं बस होता यह है कि अनियमित दिनचर्या और आचरण के कारण रुग्ण्ता उपजती है। आपको एक बात बहुत ही स्पष्टता से बता देना चाहता हूं कि चाहे आपने कितने भी तथ्यों और तर्कों से अपने आपको हस्थमैथुन के पक्ष में समझा रखा हो और मन को ये बता-जता कर कि ये तो एक सहज साधारण क्रिया है किन्तु आपके लिये ये बेहद हानिकारक है। शेष निर्णय आपको लेना है। आप उस इत्र का व्यवसाय करने वाले को क्या कहेंगे जो कि लाखों फूलों का इत्र खींच कर नाली में बहा दे? मैं बस इतना ही कहना चाहता हूं क्योंकि सबके पास तर्क हैं पक्ष और विपक्ष में। जैसी इस समय आपकी स्थिति है ये ठीक वैसी ही है जैसा कि घायल घोड़ा हो और आप उसे चाबुक मार मार कर दौड़ाएं, आप हस्थमैथुन से उस समय तो अपनी कामेच्छा पूर्ण कर लेते हैं लेकिन भविष्य के बारे में क्या फिर जीवन भर डाक्टरों के भरोसे ही रहने का इरादा बनाया हुआ है। इससे अधिक समझाना व्यर्थ है आप अपना भला बुरा स्वयं समझते हैं। इन औषधियों को न्यूनतम चार माह तक नियमित सेवन करें आपकी समस्या समाप्त हो जाएगी---
१ . वृद्धिबाधिका बटी दो -दो गोली + शूल वर्जिणी बटी एक गोली दिन में दो बार नाश्ते और रात्रि के भोजन के बाद जल से लीजिये।
२ . गोक्षुरादि गुग्गुलु दो गोली + लोकनाथ रस एक गोली + त्रिबंग भस्म २५० मिग्रा. + शुभ्रा भस्म २५० मिग्रा. + पुनर्नवा मण्डूर २५० मिग्रा. इन सबको इसी अनुपात में मिला कर एक खुराक बनाएं। इस खुराक को दिन में तीन बार हलके गर्म जल से लीजिये।
३ . शोथहर गुटिका को पत्थर पर दिन एक बार घिस कर लेप करे और लंगोट को कस न बांधें। रात्रि को सोते समय महानारायण तेल लगा कर सोएं व यदि संभव हो तो हल्का सा सेंक लिया करें इससे शीघ्र लाभ होगा किन्तु ध्यान रहे कि सेंक हलकी आंच की हो तेज आंच आपको भयंकर हानि पहुंचाएगी।
तेज़ मिर्च-मसालेदार भोजन तथा खट्टे पदार्थों से परहेज़ करना हितकर है। आप शीघ्रातिशीघ्र स्वस्थ हो जाएं व सुखपूर्वक विवाहित जीवन के दायित्त्वों का निर्वाह करें ऐसी ईश्वर से प्रार्थना है।

सोमवार, मई 19, 2008

नाक से कभी भी रक्त आने लगता है व लैट्रिन करते समय भी खून दिखा...

डाक्टर साहब नमस्ते, मैं एक छोटे से कस्बे निकल कर महानगर दिल्ली आया क्योंकि जिस कंपनी में नौकरी मिली उसने पहली पोस्टिंग दिल्ली में ही कर दी। चुंकि गरीब परिवार से रहा तो जब देखा कि कंपनी की ओर से अच्छे से अच्छा भोजन मुफ़्त में ही मिलता है तो मेरी ही गलती है कि मैं अपने आप को सम्हाल नहीं पाया और तेज चटपटे भोजन जैसे चिकन, मटन, मछली, अंडा आदि रोज ही भोजन में लगातार तीन माह से खाये चला जा रहा हूं। शाकाहारी भोजन को हाथ तक नहीं लगाया अब पिछले एक सप्ताह से मुझे नाक से कभी भी अचानक रक्त आने लगता है जैसे कि नक्सीर फूट जाती है। मुझे धूप में भी काफी घूमना पड़ जाता है सर्वे के सिलसिले में। हल्की सी सूखी खांसी है जिसमें कि कभी-कभी थूक के साथ रक्त की लालिमा दिखती है, भोजन के बाद देह में जलन सी होती है, सिर एकदम गर्म बना रहता है, प्यास बहुत लगती है, भोजन के बाद काफ़ी देर तक बेचैनी सी बनी रहती है, बदन एकदम ढीला सा हो जाता है, ऐसा लगता है कि गले में धुंआ भरा हो, कल तो मुझे लैट्रिन करते समय भी खून दिखा। मैं डर गया हूं और मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि मुझे क्या ये सब खाने के कारण हो रहा है या कोई अन्य कारण है। मुझे प्लीज तत्काल दवा बताइये। मैं कोई नशा नहीं करता हूं।
जय सिंह राजपूत,ओरछा
जयसिंह जी, आप इस बात से परेशान न हों आपको हुई बीमारी वाकई कोई गम्भीर बीमारी नहीं है पर गम्भीरता तब बढ़ सकती थी जब आप इसे अनदेखा कर देते। आपकी बीमारी को आयुर्वेद की भाषा में "रक्तपित्त" कहते हैं। आप अपने भोजन में सुधार करिये और मांसाहार बंद कर के शाकाहार अपनाइये वरना उपचार व्यर्थ हो जाएगा। मिर्च-मसालेदार भोजन से सख्त परहेज़ रखें। निम्न उपचार लीजिये--
१ . सितोपलादि चूर्ण २ ग्राम + प्रवाल पिष्टी २ रत्ती + रक्तपित्तांतक रस २ रत्ती + शुभ्रा भस्म २ रत्ती; इन सब को मिला कर एक खुराक बनाएं और दिन में तीन बार शहद और मिश्री के मिश्रण के संग सेवन करें।
२ . खस का शर्बत लाकर रखिये और दिन में जब ज्यादा प्यास लगे तो आधा-आधा गिलास इस शर्बत को हल्का-हल्का घूंट भर कर पीजिये।
३ . कामदुधा रस एक गोली दिन में दो बार वासारिष्ट के दो चम्मच के साथ लीजिये।
इस उपचार को एक माह तक जारी रखिये। आप पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे घबराइये मत।

रविवार, मई 18, 2008

बच्चा नींद में दांतो को रगड़ कर अजीब सी किचकिच की आवाज निकालता रहता है

डाक्टर साहब नमस्ते, मेरे बेटे की उम्र ९ वर्ष है। वह दुबला-पतला है लेकिन हमेशा खेलता-कूदता है ,पढ़ाई में भी तेज़ है कोई बीमारी प्रतीत नहीं होती लेकिन मैंने एक बात पिछले एक माह से देखा है कि वह जब गहरी नींद में होता है तब कुछ बड़बडाता है या फिर दांतो को रगड़ कर अजीब सी किचकिच की आवाज निकालता रहता है। उसे जगा देने पर इस बात का एहसास नहीं होता। मैंने अपने पति को बताया तो उन्होंने बोला कि शायद पेट में कीड़े हैं क्योंकि वो अक्सर अपने लैट्रिन के स्थान को खुजाता रहता है। बच्चे की इस समस्या के लिये कोई आयुर्वेदिक उपाय बताइये मैं बच्चों को अंग्रेजी दवा देने से डरती हूं।
सलोनी रंगनायकी,इलाहाबाद
सलोनी बहन, आपके पति का अनुमान सही है। आपका बच्चा पेट के कीड़ो के कारण ही दांतो को किटकिटाता है और साथ ही मलद्वार को खुजाना भी क्रिमिरोग का ही एक बड़ा लक्षण है। आप परेशान न हों ये कोई गम्भीर बीमारी नहीं है। बच्चे को मधुर आहार जब तक दवा दें बंद करना ही बेहतर रहेगा। बच्चे को निम्न दवाएं दें--
१ . क्रिमिकुठार रस १ गोली दिन में दो बार धतूरे के पत्तों के दो बूंद रस के साथ दो चाय के चम्मच शहद मिला कर दें। याद रखिये धतूरा यदि अधिक मात्रा में पेट में चला जाए तो विषाक्तता के लक्षण दिखाता है अतः इसमें मात्रा का विशेष ध्यान रखिये कि यदि बच्चा पांच साल से नीचे है तो उसे धतूरे के रस के साथ न दे कर बस मात्र शहद से ही दें और पांच से आठ साल तक के बच्चों को एक बूंद रस तथा आठ साल से चौदह साल तक के बच्चों को दो बूंद रस दें। ये दवा मात्र तीन दिन ही देना है फिर बंद कर दीजिये।
२ . पहली दवा देने के तीन दिन के बाद रात को सोते समय एक चम्मच पंचसकार चूर्ण गर्म जल से दें।
३ . विडंगादि चूर्ण एक एक चम्मच दिन में एक बार दोपहर में भोजन के पहले गर्म जल से सेवन करायें।
४ . क्रिमिघातिनी गुटिका एक-एक गोली सुबह-शाम पानी से दिया करें। इस दवा को एक सप्ताह तक दें और फिर बंद कर दें।
बच्चे की भोजन की स्वच्छता आदि पर ध्यान दीजिये बस आपका बच्चा पंद्रह दिनो में सामान्य हो जाएगा।

शनिवार, मई 17, 2008

यह ब्रेन ट्यूमर की समस्या तो नहीं है ????

डाक्टर साहब नमस्ते, मेरी उम्र २८ वर्ष है। मैं विवाहित महिला हूं। मेरे सिर के समस्त दाहिने भाग की नसों में व गर्दन में बहुत तेज दर्द होता है जिससे मैं बहुत परेशान हूं। सर, मैंने कई डाक्टरों की दवाएं खा ली हैं लेकिन जब दर्द निवारक दवा खा लेती हुं तो कुछ दिन ठीक रहता है। यह कोन सा रोग है? सिर के बांए हिस्से में कोई परेशानी नहीं है। इस दर्द से मैं बहुत सहमी व डरी हुई हुं। यह ब्रेन ट्यूमर की समस्या तो नहीं है। आप इस समस्या का निदान बताने की कृपा करें। मैं सदा आपकी आभारी रहूंगी, सर कोई अच्छा सा उपचार बताना व रोग का नाम भी बताना।
प्रिया,नोएडा
प्रिया बहन, आपने ज्यादा बात अपने दर्द के बारे में नहीं बता पायी है कि किस समय बढ़्ता है या किस समय अपने आप कम हो जाता है अथवा क्या इस दर्द के साथ आपको उल्टी जैसा भी महसूस होता है, मासिक धर्म सामान्य है अथवा नहीं, क्या पूर्वकाल में भीषण जुकाम सर्दी हुई थी। आपको क्या किसी ने ब्रेन ट्यूमर के बारे में कहा है या ये मात्र आपका ही विचार है? क्या किसी कारणवश विशेष चिन्ता है या मानसिक श्रम करना पड़ता है या रात्रि जागरण करना पड़ता है? कितने समय से इस तरह का दर्द हो रहा है? कील ठोंकने जैसा दर्द होता है या कुछ विशेष अनुभूति होती है? आप परेशान न हों फिलहाल तो मुझे ऐसा नहीं प्रतीत हो रहा कि आपको ब्रेन ट्यूमर जैसी कोई समस्या है ये महज आपका भ्रम है, मेरे अनुसार आप "अर्धावभेदक" नामक शिरोरोग से पीड़ित हैं। आप निम्न उपचार लीजिये और दिन में सोना सर्वथा बंद कर दें तथा अत्यधिक पति संसर्ग से भी बचें --
१ . त्रिफला चूर्ण ३० ग्राम + चिरायता १० ग्राम + हल्दी १० ग्राम + नीम की छाल १० ग्राम + गिलोय(गुडूची या गुरिच) १० ग्राम लेकर गुड़ मिला कर काढ़ा बनाएं यानि चाय की तरह से पका लें और सुबह शाम इसका हलके गर्म-गर्म ही आधा कप सेवन करें।
२ . गूलर(ऊमर या उम्बर) के फलों को पीस कर सिर पर मोटा सा लेप दिन में कई बार करा करें
३ . महालक्ष्मीविलास रस एक-एक गोली सुबह शाम दूध के साथ दीजिये। खाली पेट न दें।
४ . गोदन्ती भस्म २५० मिग्रा. + प्रवाल पिष्टी २५० मिग्रा. + छोटी इलायची के पीसे हुए बीज १२५ मिग्रा मिला कर एक मात्रा बनाएं तथा इस दवा को सुबह ही सूरज निकलने से पहले ही ६० ग्राम दही के साथ खा लें था ऐसा रोज सुबह तीन दिन तक लगातार करें फिर बंद कर दें।
५ . षड्बिन्दु तेल की छ्ह बूंदे दोनो नासिका छिद्रों में तथा कानों में तीन-तीन बूंदे सुबह शाम डाला करें।
इस उपचार को दो माह तक जारी रखें। मांसाहार त्याग दें। अवश्य लाभ होगा चिन्ता न करें।

skin specialist called it as vitiligo यानि कि त्वचा पर सफेद दाग.....


sir,my son is 6 yr old .for the last 4 months white round circles/patch/spot are found on his face,body.his lip has changed towhite.consulted skin specialist,called it as vitiligo,not much benefitis recd. few more spots are developing.please give the proper remedy.iam very much worried.
Beena Tompe

बीना बहन, आपके बच्चे की समस्या को गहराई से समझा और आपको भी बताना चाहता हूं जो कि आपके चिकित्सक ने बताया है कि इस बीमारी का नाम अमुक है। यह मात्र एक त्वचा रोग है जो कि पीड़ादायक तो नहीं होता किन्तु सोन्दर्यनाशक अवश्य होता है। इसलिये माता पिता तथा स्वयं रोगी भी अत्यंत चिंतित रहते हैं। Vitiligo नाम से बताई गयी बीमारी में त्वचा के पिगमेंट यानि रंगत देने वाली कोशिकाओं का नाश होने लगता है और इससे चेहरा,नासिका, गुप्तांग, नेत्रगोलक का अंदरूनी भाग तथा बाल प्रभावित हो सकते हैं। आपके बच्चे को होने वाली समस्या के अनेक कारण हो सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि ये बीमारी कोई असाध्य रोग हो, इसलिये आप चिन्ता न करते हुए धैर्य रखें बच्चा ठीक हो जाएगा। इस रोग के निवारण के लिए सर्वप्रथम रोगी का पेट साफ कराना तथा शोधन करना अनिवार्य होता है वरना कोई भी उपचार उचित लाभ नहीं देता है। अतः बच्चे को प्रारंभ में दस्त कराने की दवा बताउंगा इससे जुलाब होने पर आप घबराएं नहीं ये बस उपचार का हिस्सा है।
१ . इच्छाभेदी रस की आधी गोली रात को पानी दें लेकिन उससे पहले दिन में मूंग की दाल की खिचड़ी गाय का घी मिला कर खिलाएं। तीन दिन तक।
२ . गंधक रसायन २५० मिग्रा. + स्वर्णमाक्षिक भस्म १२५ मिग्रा. + गिलोय सत्व २५० मिग्रा. मिला कर शहद के साथ दो बार दीजिये। सुबह नाश्ते के बाद।
३ . आरोग्यवर्धिनी बटी दो गोली + तालकेश्वर रस एक गोली + प्रवाल पिष्टी १२५ मिग्रा. + रस माणिक्य बारीक घोंटा हुआ १२५ मिग्रा + बाकुची चूर्ण एक ग्राम + एक ग्राम त्रिफला चूर्ण मिला कर एक खुराक बनाएं तथा मंजिष्ठादि कषाय + खदिरारिष्ट के दो ढक्कन दवा से साथ में मिला कर पेस्ट जैसा बना लें व दिन में दो बार भोजन के बाद दें।
४ . सोने से आधे घंटे पहले महातिक्त घृत + सोमराजी घृत समान मात्रा में मिला कर एक चम्मच दूध के साथ दें।
५ . दिन में तीन बार चालमोगरा तेल + पंचतिक्त घृत + नीम का तेल + बाकुची का तेल बराबर मात्रा में मिला कर लगाएं।
एक बात का ध्यान रखिये कि यह एक जिद्दी किस्म का रोग है इसलिये अधीरता से लाभ नहीं होता है, न्यूनतम एक से दो साल तक औषधियां देना लाभप्रद होगा। तीखे भोजन से परहेज कराएं तथा चायनीज व्यंजन आदि बंद कर दें।







My son is suffering sweating in hand and feet & low weight ( under weight).

My son is suffering sweating in hand and feet & low weight ( under weight) who is 10 years old , his weight is 22 Kg, normal hight, taking normal diet, but he is under weight. I request you please advice me homeo and aurvedic medicine for weight gain and sweating . I want to increase his weight, he is very thin, Child Physician said he is normal. He take milk with bananas.
please advice me diet also.
reply in hindi
Thanks with regards,
नोएडा पावर,उत्तर प्रदेश
भाईसाहब, आपके बच्चे की समस्या को ध्यान से देखा। आपको बताना चाहता हूं कि हमारे डा.रूपेश श्रीवास्तव आपको मात्र आयुर्वेद का उपाय बताते हैं, होम्योपैथी उनका क्षेत्र नहीं है। आपने एक बात लिखा है कि बच्चे को पीडियाट्रिशियन ने देखा और नार्मल बताया है। क्या आपको उसकी बात पर विश्वास नहीं हो पा रहा है? एक बात स्पष्ट करना चाहता था कि हर व्यक्ति को उसका बच्चा कमजोर ही दिखता है, शरीर की काठी यदि दुबली पतली है तो ये बात चिन्ता का विषय तो हरगिज़ नहीं होना चाहिये बशर्ते कोई बीमारी या असामान्य लक्षण न दिखाई दे। यदि आपके बच्चे को पसीना आने की समस्या अधिक है व आपको वजन कम प्रतीत होता है तो सर्वप्रथम देख लीजिये कि आप उसे जो कुछ भी पौष्टिक से पौष्टिक पदार्थ खाने को दे रहे हैं चाहे वह केला और दूध हो या अन्य कुछ भी वह उसे पच रहा है या नहीं। लीजिये आपके कहे अनुसार समाधान प्रस्तुत है...
१ . आरोग्यवर्धिनी बटी एक गोली दोपहर भोजन के बाद पुनर्नवारिष्ट के एक चम्मच से साथ निगलवाएं।
२ . स्नान करने के लिये साबुन के स्थान पर मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग करवाएं।
३ . अश्वगंधादि चूर्ण आधा चम्मच अश्वगंधारिष्ट के दो चम्मच के साथ दिन में दो बार दें।
४ . अग्नितुण्डी बटी दिन में दो बार एक गोली गर्म जल से दें।
बच्चे की सारी समस्याएं समाप्त हो जाने के बाद भी आप उसे अश्वगंधारिष्ट के दो चम्मच दिन में दो बार सामान्य पुष्टिकारक पेय के तौर पर दे सकते हैं। भोजन में तेज मिर्च मसालेदार भोजन न दें, बाजारू खाद्य पदार्थों का परहेज़ कराएं तथा बाजार में बिकने वाले साफ़्टड्रिन्क व चाकलेट विशेष तौर पर न दें बाकी सामान्य आहार दीजिए।

शुक्रवार, मई 16, 2008

I am suffering from Gilberts syndrome ( hyper bilirubinemia) and LEFT VENTRICULAR HYPERTROPHY

Dear Sir,
my age is 33 y, male, weight 67 kg, hight 175 cm. I am suffering from gilberts syndrome ( hyper bilirubinemia) which is constant 2.4 mg from last 5 years. colour of urine, skin , eye is light yellow. i am feeling some pain and swelling at right side of liver portion AND I AM TAKING NORMAL DITE. Gastroentrologist doctor said you are ok but i request you, pl advise me for some medicine.
After ECG test doctor said you are suffering from LEFT VENTRICULAR HYPERTROPHY , my BP was 140/90 always from long time 5 years approx but this time i am taking Cardiopril 2.5 mg cap. one cap daily then my BP is normal. when stop cardiopril , I feel weakness, headache, pain left side solder, angryness, darkness fron of my eye ever time when passing urine and also feel chakkar at that time and problem in breathing after some hard work.
this time I am taking cardiopril but i want to stop alopathic medicine.
ERYTHROCYTE
5.7
4.5-5.5 ML/
C.MM
MCH ( MEAN CORPUSCULAR HAEMOGLOBIN
26.3
27-32 PG
TLC
4200
4000-11000/
C.MM
LYMPHOCYTES
42
20-40 %
PLATELET
173000
150000 - 400000/CMM
MPV ( MEAN PLATELET VOLUME)
11
6.5 - 10.5 fl
PDW ( PLATELET DISTRIBUTION WIDTH)
14
6 - 11 fl
SUGAR FASTING
102
70- 105 MG%
SUGAR PP
130
90-160 MG %
SERUM BILIRUBIN TOTAL
2.11
DIRECT
0.48
INDIRECT
1.63
SGPT
39
-- Thanking you,M.gupta

गुप्ता साहब,आपने जिस तरह से अपनी बीमारी को बताया है उससे साफ पता चल रहा है कि आपके ऊपर एलोपैथी के तमामोतमाम प्रयोग करे जाते रहे हैं और आप पैथोलाजिस्ट्स और एलोपैथी के व्यवसायिक डाक्टरों के चंगुल में बुरी तरह से फंसे रहे हैं। आपके शरीर को इन लोगों ने दवाओं की प्रयोगशाला या ऐसा कहें कि गोदाम बना डाला है और आपकी मानसिक दशा ऐसी कर दी है कि कुछ भी हो तो आप विशेषज्ञ के पास भागते हैं। सच तो ये है कि आज जब मैंने चिकित्सा शास्त्र को इतना जान लिया है तो सीना ठोंक कर कह सकता हूं कि दवाएं तो मात्र आपके शरीर में आरोग्य के लिये दस प्रतिशत कार्य करती हैं बाकी कार्य आपका शरीर स्वयं करता है। अब मेहरबानी करके जो बता रहा हूं उन दवाओं को विश्वासपूर्वक लें और हर माह यकीन के लिये टैस्ट कराना बंद कर दें, देह में आरोग्य आप स्वयं महसूस कर सकते हैं उसके लिये किसी परीक्षण की जरूरत नहीं होती है।
मुझे आपको परहेज बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि मैं अनुमान लगा सकता हूं कि आपकी क्या हालत बना रखी है डाक्टरों ने मिलकर। अब जो औषधियां बता रहा हूं उन्हें नियम से लेना प्रारंभ करिये यकीन मानिये कि आप कुछ दिनों में खुद ही कह सकेंगे कि मैं स्वस्थ महसूस कर रहा हूं।
१ . कागजी नींबू का रस छह ग्राम + शहद छह ग्राम + छोटी पीपर का चूर्ण ५०० मिग्रा. + काली मिर्च का चूर्ण ५०० मिग्रा + सोंठ का चूर्ण ५०० मिग्रा ; इन सबको मिला कर दिन में तीन बार सेवन करें। खाली पेट न लें ,भोजन के आधे घंटे बाद ले सकते हैं।
२ . नवायस लौह दो गोली(५०० मिग्रा) + पुनर्नवा मंडूर ५०० मिग्रा + शंख भस्म २५० मिग्रा + आरोग्यवर्धिनी बटी एक गोली को एक साथ लेकर दो चम्मच पुनर्नवासव+ दो चम्मच कुमार्यासव मिला कर दिन में दो बार लें।
३ . भुनी हुई कुटकी का चूर्ण ५०० मिग्रा + ५०० मिग्रा मिश्री को गुनगुने जल से दिन में दो बार लें।
४ . हृदयार्णव रस एक गोली + प्रभाकर बटी एक गोली अर्जुनारिष्ट के दो चम्मच के साथ दिन में दो बार लें।
५ . शुद्ध शिलाजीत आधा ग्राम दिन में दो बार दूध के साथ लीजिये।
इस उपचार को लगातार तीन माह तक जारी रखिये और मुझे सूचित करिए। मात्र पंद्रह दिनों में ही आप अनुकूल परिवर्तन का अनुभव करने लगेंगे। cardiopril को पहले एक-एक दिन के अंतर पर खाएं फिर एक सप्ताह बाद दो-दो दिन के अंतर पर और इसी प्रकार तीसरे सप्ताह तीन दिन के अंतर पर और चौथे सप्ताह चार दिन के अंतर पर फिर बंद कर दें।

मुझे खूनी बवासीर है तथा गुदा में एक मस्सा भी है।

डाक्टर साहब नमस्ते,मेरी आयु २८ वर्ष है। डा.साहब जी मेरी परेशानी यह है कि मुझे खूनी बवासीर है तथा गुदा में एक मस्सा भी है। पेट में ज्यादातर कब्ज रहती है और मेरा पेट भी भारी होता जा रहा है। जब कब्ज हो जाती है तो पाखाना के समय काफी खून जाता है। अतः आपसे निवेदन है कि कोई अच्छी सी दवाई देने की कृपा करें। जिससे कि मुझे इस रोग से मुक्ति मिल जाए। मैं आपका सदा आभारी रहूंगा।
विपिन, उत्तर प्रदेश
विपिन भाई, मैं आपकी तकलीफ़ को भली प्रकार से समझ रहा हूं कि आप कितनी तकलीफ़ से गुजर रहे हैं। सच तो ये है कि आपकी मुख्य समस्या खूनी बवासीर न हो कर कब्जियत है और इसी के कारण आपको खूनी बवासीर हुई है। अब बेफिक्र हो जाइए क्योंकि अब न तो कब्ज की समस्या रहेगी और न ही बवासीर रहने वाली है; दर्द, मस्सा, खून जादू की तरह से गायब हो जाएगा बस आप इन दवाओं को नियम से लीजिये और दवा के सेवन के दौरान मिर्च-मसालेदार आहार, मांसाहार बंद कर दें व बाजारू भोजन से परहेज करें।
१ . रात्रि भोजन के बाद में एक चम्मच गंधर्व हरीतकी चूर्ण को गर्म जल से लें। ये नित्य प्रति पंद्रह दिन तक लें।
२ . सोलहवें दिन से इस दवा से स्थान पर इसी प्रकार से इतनी ही मात्रा में त्रिफ़ला चूर्ण लेना प्रारंभ करें और ऊपर बताई दवा बंद कर दें।
३ . इन्ही दवाओं के साथ ही दिन में तीन बार अर्शकुठार रस एक गोली + अर्शोघ्नी बटी एक गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लें।
४. नीम के तेल १०० मिली+ १० ग्राम पिपरमिंट + २० ग्राम कपूर मिला कर रख लें मिश्रित होने के बाद दो भाग कर लें एक भाग से एक-एक बूंद बताशे में भर कर दिन में तीन बार जल से लें तथा दूसरा भाग मल त्याग करने के बाद गुदा के प्रभावित स्थान पर लगाएं यदि कदाचित जलन हो तो उसे एक दो दिन सहन कर लीजिये फिर जलन न होगी।
५ . शुभ्रा भस्म आधा-आधा ग्राम दिन में तीन बार ठंडे दूध से लें ।

६. मेदोहर गुग्गुलु दो-दो गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लें।

मेरा शरीर बहुत दुबला-पतला है,हीनभावना से ग्रसित हूं।

मेरी आयु २५ वर्ष है। डा.साहब जी मेरी परेशानी यह है कि मेरा शरीर बहुत दुबला-पतला है। जिसके कारण मैं हीनभावना से ग्रसित हूं। मेरे शरीर को देखकर मेरी संग सहेलियां भी मेरा मजाक उड़ाती हैं जिसके कारण मुझे अपने आप पर बहुत गुस्सा आता हैं तथा मुझे भूख भी खुल कर नहीं लगती हैं। एक या दो रोटी खाकर ही पूरा दिन गुजर जाता है। कुछ खाने का मन ही नहीं करता है। मैंने काफ़ी दवाएं खा ली हैं। किसी से कुछ फ़ायदा नहीं होता है। दो तीन साल पहले मैं काफ़ी स्वस्थ थी। अब मेरे साथ यह क्या हो रहा है ये मेरी समझ में नहीं आ रहा है। डा.साहब मेरे चेहरे पर झाईयां भी हो रही हैं तथा मुझे लिकोरिया की भी प्राब्लम है जिसके कारण मैं बहुत परेशान हूं। डा.साहब मैं चारों तरफ से निराश होकर अब आपसे आशा करती हूं कि अब आप ही मेरी इस समस्या का निदान आयुर्वेद में ढ़ूंढ कर मेरी सहायता जरूर करेंगे। डाक्टर साहब मुझे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा भी बहुत आता है। गुस्सा शान्त हो जाने के बाद मैं बहुत पश्चाताप भी करती हूं।
अतः आपसे नम्र निवेदन है कि आप जल्दी से जल्दी मेरा उपचार भेजने की कृपा करें। धन्यवाद
जयलता, ग्रेटर नोएडा(गौतम बुद्ध नगर)
जयलता बहन, मैंने आपकी समस्या को देखा किन्तु कुछ बातें यदि स्पष्ट हो जातीं तो मुझे आसानी होती जैसे कि क्या आप विवाहित हैं या अविवाहित? आप क्या करती हैं कुछ नौकरी या अध्ययन आदि? लिकोरिया की समस्या कितने समय से है? लिकोरिया में आने वाला स्राव किस तरह का है श्वेत या लाल,पतला स्राव है या गाढ़ा? शाकाहारी हैं या मांसाहारी? लेकिन कोई बात नहीं यदि आप इन बातों को बताने से रह भी गयी हैं तब भी आयुर्वेद के महासागर से आपके लिये औषधिरत्न लेकर आपको स्वास्थ्य लाभ दिया जा सकता है। आप निम्न दवाएं नियमित रूप से लीजिये और तनिक भी चिन्ता न करिये बीमारिया यदि आती हैं तो ये बस आपके साथ हुई कुछ दैहिक या मानसिक अनियमितता का परिणाम होती हैं इनसे निराश न होकर बल्कि सुधार करके मुक्त हो जाना उचित है। आप यदि कोई कार्य कर लेती हैं तो उस पर पश्चाताप मत करिये। जिन बातों पर गुस्सा आया था उन पर विचार करिये कि हो सकता है आपका गुस्सा करना उचित रहा हो। इन औषधियों को कम से कम दो माह तक लीजिये और फिर हुए बदलाव मुझे सूचित अवश्य करें दवा के सेवन के दौरान मिर्च-मसालेदार आहार, मांसाहार बंद कर दें व बाजारू भोजन से परहेज करें।
१ . प्रदर हर लौह १ गोली + प्रदरान्तक रस १ गोली सुबह शाम दूध में शहद मिला कर लें।
२ . अशोकारिष्ट दो चम्मच दिन में दो बार भोजन करने के बाद लीजिये।
३ . अश्वगंधारिष्ट के दो चम्मच के साथ दिन में दो बार एक-एक चम्मच अश्वगंधादि चूर्ण भोजन के बाद लीजिये।
४ . सप्ताह में एक बार रात में खाने के बाद त्रिफला चूर्ण दो चम्मच गर्म जल से लीजिये ताकि कब्जियत न रहे और पेट साफ होता रहे।
इस प्रकार आप इस उपचार को दो माह लें और यदि आवश्यकता लगे तो आगे भी जारी रखिये कोई नुकसान नहीं होगा। आपकी चेहरे की झाईयां कहां गायब हो गयी लोगों को आश्चर्य होगा। विश्वास रखते हुये औषधि नियम से सेवन करें।

गुरुवार, मई 15, 2008

मेडिकल सांइस का इससे बड़ा धोखा और क्या हो सकता है??????

my E.C.G. is diagnosed as complete heart block pl. advise desi treatment.
सुभाष शर्मा
सुभाष जी,मुझे आश्चर्य है कि आपका E.C.G. हार्ट में शत-प्रतिशत ब्लाकेज बता रहा है लेकिन आप न सिर्फ जीवित हैं बल्कि स्वयं मुझसे सलाह मांग कर इलाज भी चाहते हैं। आप क्या इस मेडिकल सांइस के धोखे को अब तक समझ नहीं पाए कि यदि आपका शत-प्रतिशत ब्लाकेज है तो आप कितनी देर तक जीवित रह सकते हैं। दरअसल होता ये है कि व्यवसायिक चिकित्सा से जुड़े लोगों के घर का चूल्हा तो आपके ही धन से जलता है, जीवन में धन से पूरी करी जाने वाली सारी जरूरतें आप ही अपने पैसे से पूरी करते हैं। एक बात ये लोग समझते हैं कि यदि मरीज को डराया नहीं जाए तो उससे पैसा आसानी से निकाला नहीं जा सकता। इसलिये यदि ब्लाकेज है और आपको तकलीफ़ है तो शत-प्रतिशत ब्लाकेज बता देने में हर्ज़ ही क्या है मरीज सुनते ही डर जाएगा फिर उसे बाईपास सर्जरी के लिए राजी कर लिया जाएगा, ऐसे में आप कर्ज़ लें या चोरी करें उन्हें इस बात से कोई लेना-देना नहीं होता। जैसे किराने की दुकान पर विक्रेता तराजू में हेराफेरी करके कम सामान तौल कर आपसे ज्यादा पैसा ले लेता है ठीक वैसी ही सोच इन व्यवसायिक चिकित्सकों की होती है। ये भी पैथोलाजिकल टैस्ट्स में हेराफेरी करवा के मनमाने रिजल्ट्स निकलवा लेते हैं क्योंकि पैथोलाजिस्ट, कैमिस्ट और डाक्टर सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे तो हैं। आप बिलकुल मत डरिये और नीचे लिखे उपचार को नियम से एक साल तक लीजिये और स्वस्थ होने के बाद जिस चिकित्सक नें आपको ऐसा बताया है उसे दिखाइये ----
१ . अर्जुन की छाल का जवकुट यानि मोटा-मोटा चूर्ण ३ ग्राम व २५ ग्राम मिश्री लेकर २५० ग्राम दूध में उबालें और इसी दूध का प्रतिदिन प्रातः व सांयकाल सेवन करें।२ . अर्जुनारिष्ट + अश्वगंधारिष्ट दोनो को मिला कर दो चम्मच बराबर जल मिला कर दिन में दो बार भोजन के बाद लें।३ . अकीक पिष्टी १०० मिग्रा. + मुक्तापिष्टी १२५ मिग्रा. + जहरमोहरा पिष्टी २०० मिग्रा + अर्जुन की छाल का महीन चूर्ण २५० मिग्रा. + प्रभाकर बटी २५० मिग्रा की एक गोली + सितोपलादि चूर्ण एक ग्राम ; इन सबको मिला कर कुल मात्रा की तीन बराबर पुड़िया बनाएं व दिन में तीन बार शहद के साथ सेवन कराएं, दवा को इसी अनुपात में बना कर रख लें व नियमित रूप से न्यूनतम छह माह सेवन कराएं यदि अधिक दिन भी सेवन कराया तो कोई नुकसान नहीं होगा। ये एकदम निरापद एवं हानिरहित उपचार हैं।

मंगलवार, मई 13, 2008

मम्मी के हाथों पैरों की सभी हड्डियों की गाठों में बहुत तेज दर्द रहता है।


डाक्टर साहब, नमस्ते
मेरी मम्मी बहुत परेशान हैं। मेरी मम्मी के हाथों पैरों की सभी हड्डियों की गाठों में बहुत तेज दर्द रहता है। हाथ व पैरों की उंगलियां भी टेढ़ी हो गयी हैं। जिसके कारण उठने बैठने में बहुत परेशानी होती है । हमने बहुत इलाज करा लिया है लेकिन कहीं से भी कोई फ़ायदा नहीं हो रहा है। कोई डाक्टर कहते हैं कि गांठों में यूरिया जमा है और कोई डाक्टर कहते हैं कि गठिया बाय हैं। मेरी मम्मी पिछले पंद्रह साल से परेशान हैं उन्हें अंग्रेजी दवा बिलकुल सूट नहीं करती हैं । अतः आपसे निवेदन है कि आप मेरी मम्मी को आयुर्वेद की अच्छी भले ही मंहगी हो कोई दवा देने की कृपा करें। जिससे मेरी मम्मी को इस बीमारी से आपके द्वारा जीवनदान मिल सके। आपके इस अहसान से हम सदा आपके ऋणी रहेंगे। आपसे आशा है कि आप इस परेशानी में मेरा साथ जरूर देंगे। अपना फोन नं. बताने की कृपा करें। आपका सदा आभारी रहूंगा।
सतीश कुमार,नोएडा
सतीश जी माताजी के प्रति आपका गहरा प्रेम आजकल के समय में बच्चों में जरा कम ही देखने में आता है। आपकी माताजी की बीमारी पर बहुत सारे चिकित्सक तमाम दवाओं के प्रैक्टिकल कर चुके हैं और रोग जीर्ण हो चुका है किन्तु निराशा की बात नहीं है। आपको धैर्य रखना होगा। जिस प्रकार गंदे कपड़े पर रंग नहीं चढ़ता उसी तरह से बिना शरीर का शोधन करे उत्तम से उत्तम दवा भी अपना असर नहीं दिखा पाती है। आयुर्वेद की भाषा में आपकी माताजी को हुई बीमारी "आमवात" कहलाती है। सर्वप्रथम आपकी माताजी के शरीर का विधिवत शोधन किया जाए तब जाकर ऐसी स्थिति बनेगी कि उन्हें दवाएं असर करेंगी। इस लिये इस क्रम में उन्हें निम्न उपचार दें----
१ . निशोथ + सेंधा नमक + सोंठ बराबर मात्रा में मिला कर एक माशा चूर्ण कांजी(एक खट्टा सा पेय) के साथ दिन में दो बार दें, खाली पेट न दें। इससे उन्हें दस्त होंगे और देह में संचित विषपदार्थ मल के द्वारा निकल जाएंगे। दस्तों से घबराने की आवश्यकता नहीं है किन्तु यदि अधिक हों तो मात्रा कम कर दें।
इस चूर्ण को एक सप्ताह तक लेकर बंद कर दें इसके बाद नीचे लिखी दवा का तीन दिन बाद सेवन कराएं।
२ . एरण्ड तेल दो चम्मच + रास्नासप्तक क्वाथ दो चम्मच मिला कर दिन में दो बार दें । इसे भी खाली पेट न दें और एक सप्ताह तक देने के बाद बंद कर दें जैसे कि ऊपर की दवा बंद करी हैं।
३ . सोंठ १ तोला + गोखरू १ तोला मिला कर ३२ तोला जल में पकाएं और आठ तोला जल यानि कि एक-चौथाई रह जाने के बाद छान कर प्रतिदिन दो बार चार-चार तोला करके पिलाएं । ये रोज ताजा बनाएं। नाश्ते के बाद ही दें यानि खाली पेट दवा नहीं देना है।
४ . चित्रकादि बटी एक-एक गोली दिन में तीन बार गर्म जल से दें।
५ . वातारि गुग्गुलु एक गोली + आमवातारि रस दो गोली + महायोगराज गुग्गुलु दो गोली + वातगजांकुश रस एक गोली को रास्नादि क्वाथ के दो चम्मच के साथ दिन में तीन बार दें।
६ . समीर गज केशरी रस एक गोली + अश्वगंधादि गुग्गुलु दो गोली दिन में तीन बार अदरख के रस तथा शहद को मिला कर निगलवाएं।
७ . विषगर्भ तेल से मालिश करवाएं और फिर ऊपर से कपड़ा लपेट दें ताकि हवा न लग पाए।
माताजी को गर्म जल, बाजरा, मूंग, जौ, करेला, परवल, तोरई, लहसुन,प्याज, हींग, सोंठ, गोमूत्र, मूली, एरण्ड का तेल, दूध का सेवन कराएं। गुड़ , अधिक जागना, बासी व गरिष्ठ भोजन, मांस, मछली,मल-मूत्र के वेग को रोकना, उड़द का सेवन न करें। दवाओं का सेवन कम से कम छह मास से साल भर तक कराएं जल्दबाजी न करें।
मेरा फोन नं. है 09224496555

सोमवार, मई 12, 2008

बच्चा बिस्तर में पेशाब कर लेता है...

डा.साहब नमस्ते
मेरे बच्चे की उम्र छह साल है। वो पूरी तरह से स्वस्थ है किन्तु समस्या ये है कि वह सोने पर बिस्तर में पेशाब कर लेता है, जबकि उसे रात को सोने से पहले पेशाब करवा कर सुलाती हूं। कई चिकित्सकों ने दवाएं दी है किन्तु बाद में वे ये ही कह कर दिलासा दे देते हैं कि बड़े होने पर ये समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी। क्या वाकई कोई उपचार नहीं है और मुझे उसके कितने बड़े होने तक इंतजार करना होगा? यदि आयुर्वेद में कोई तरीका हो तो बताइये।
रचना भागवत,झांसी
रचना बहन,आपके बच्चे की समस्या कोई नयी समस्या नहीं है अक्सर बच्चे बिस्तर गीला कर देते हैं। इसे आयुर्वेद में कौमारचर्या के अंतर्गत एक रोग "शैय्यामूत्र" स्वीकारा गया है। ये सत्य है कि उम्र बढ़ने पर ये समस्या खत्म हो जाती है किन्तु कभी-कभी ये बच्चों में पंद्रह वर्ष तक देखा गया है। इसलिये आप प्रतीक्षा किये बिना धैर्यपूर्वक निम्न दवा को बना कर उसे सेवन कराएं और चमत्कार देखिये कि कैसे शीघ्र ही आपका बच्चा इस परेशानी से निकल आता है --
गूलर के पेड़ की भीतरी छाल ५० ग्राम + पीपल की छाल ५० ग्राम + अर्जुन की छाल ५० ग्राम + सोंठ ५० ग्राम + राई(मोहरी या काली सरसों) २५ ग्राम + काले तिल १०० ग्राम ; इन सबको मिला कर भली प्रकार से महीन कर लें। यदि संभव हो तो इसमें शिलाजीत ५० ग्राम मिला कर दो-दो रत्ती की गोलियां बना लें। इससे बच्चे को दवा लेने में आसानी होगी साथ ही आपका बच्चा एकदम स्वस्थ और पुष्ट बना रहेगा।

रविवार, मई 11, 2008

गर्भाशय भ्रंश(Prolepse of Uterus)बताया गया है, मैं सर्जरी नहीं चाहती...

डा.साहब नमस्ते
मुझे टैस्ट करने के बाद गर्भाशय भ्रंश यानि Prolepse of Uterus बताया गया है और कहा गया है कि इस बीमारी का सर्जरी के अलावा कोई उपचार नहीं है। मुझे सर्जरी कराने में डर लग रहा है और साथ ही ये बहुत मंहगा उपचार है। इसलिये आपसे निवेदन है कि आयुर्वेद का कोई उपाय बताएं ताकि सर्जरी न करानी पड़े और मैं सहज ही गर्भ धारण कर सकूं। बड़ी मेहरबानी होगी मैं जो धन सर्जरी में खर्च होने जा रहा है उसका आधा तो खुशी से दे सकती हूं।
प्रार्थना मेहता,झालावाड़
प्रार्थना बहन, आप बिलकुल चिंतामुक्त हो जाइए आपको सर्जरी कराने की आवश्यकता हरगिज़ न्हीं होगी बस मुझे थोड़ा सा समय उपचार के लिये दे दीजिये; रही बात कि आप मुझे धन देना चाहती हैं तो स्पष्ट करना चाहता हूं कि ये सेवाकार्य है मैं किसी प्रकार का शुल्क नहीं स्वीकारता, हां यदि आप मां बनने के बाद अपने बच्चे के नाम से मेरे इस सेवा अभियान को जारी रखने के लिये कुछ दान करना चहें तो उसे सहर्ष स्वीकार सकता हूं,अग्रिम धन्यवाद। अब आपके लिये जो औषधि लिख रहा हूं उसके सारे घटक आपको आयुर्वेदिक दवाओं का कच्चा माल बेंचने वाले पंसारियों के पास से आराम से प्राप्त हो जाएगा----
१ . माजूफल + मुलायम सुपारी + बड़ी इलायची + कचूर + धाय के फूल + तज + छोटी हरड़ + फिटकरी + गुलाब के फूल + सुपारी का फूल + बड़ी हरड़ का बक्कल + गुड़मार ; इन सभी बारह वस्तुओं को पचास-पचास ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें। एक साफ धोए हुए पतले मलमल के कपड़े में इस मिश्रित चूर्ण की २५ ग्राम मात्रा लेकर पतले डोरे से बांध कर योनि में स्थापित करें तथा तीन घन्टे बाद निकाल लें। इस प्रकार आप तीन माह तक करें और पति संसर्ग से परहेज करें। यकीन मानिये कि आपकी समस्या कहां गायब हो गयी ये चिकित्सकों को भी आश्चर्य लगेगा।
२ . सुपारी पाक एक-एक चम्मच सुबह शाम सेवन करें।
३ . अशोकारिष्ट दो-दो चम्मच दिन में तीन बार बराबर जल मिला कर लिया करें।
तैलीय,मिर्च-मसालेदार आहार से बचें। कोई वजन उठाने का कार्य भी न किया करें। प्राणायाम करना चाहें तो किसी योग्य आचार्य से सीख कर ही करें।

शनिवार, मई 10, 2008

कब्ज़ियत,बवासीर और गॉल ब्लैडर में १४ मिमी. पथरी है

सर,मैं एक कम्प्यूटर आपरेटर हूं, मुझे कब्ज़ियत रहा करती है साथ ही मुझे बवासीर की भी समस्या है। मुझे गॉल ब्लैडर में १४ मिमी. पथरी है। कोई उपाय बताएं।
अमित कुमार
अमित जी,आपने ये नहीं बताया कि आपको बवासीर में रक्त आता है या नहीं मस्से बाहर हैं अथवा नहीं किन्तु मैं आपको ऐसा उपचार बताता हूं जो कि हर परिस्थिति में कारगर रहेगा। आप पहले दो दिन आधा-आधा दिन का उपवास रखें यानि कि बस रात्रि में भोजन करें व दोपहर में फलों का रस अथवा नींबू पानी पीकर रहें। दो दिन बाद आप निम्न उपचार लेना प्रारम्भ करें..
१ . गंधर्व हरीतकी एक चम्मच गुनगुने पानी में घोल कर रात्रि भोजन के आधे घंटे बाद लें। इस दवा को यदि आज लिया है तो बीच में एक दिन छ्ड़ दें व अगले दिन लें यानि कि एक दिन का अवकाश देकर दवा पंद्रह दिन तक लें।
२ . नीम का तेल १०० मिली. ले लीजिये व उसमें २० ग्राम कपूर(जो हिन्दू लोग पूजा आदि में प्रयोग करते हैं) तथा १० ग्राम पिपरमिन्ट(जिसे पान में ठन्डक के लिये बहुत थोडी सी मात्रा में डाला जाता है); इस मिश्रण को एक कांच की शीशी में भर कर टाइट ढक्कन लगा कर धूप में एक दिन के लिये रख दीजिये और फिर इस दवा के दो बराबर भाग कर अलग-अलग शीशियों में भर लीजिये एक भाग को मलहम की तरह लगाने के लिये प्रयोग कीजिये और दूसरे भाग में से एक-एक बूंद दवा दिन में तीन बार एक चम्मच शक्कर में मिला कर खा लीजिये और ऊपर से पानी पी लीजिये।
३ . गोक्षुरादि गुग्गुलु २ गोली + लघु सूतशेखर रस २ गोली सुबह शाम जल के साथ एक माह तक सेवन करिये।
आपकी तीनो समस्याएं- कब्जियत, बवासीर और गॉल ब्लैडर स्टोन सब समाप्त हो जाएंगे। खाने में ध्यान रखिये कि पत्तेदार साग सेवन न करें साथ ही मिर्च-मसालेदार तैलीय भोजन से परहेज करें। जल अधिक पिया करें।

My husbend’s penis-foreskin not move a bit back and he is diabetic.......

Dear Dr., namaste, My husbend is suffering from yeast problem. he is diabetic and sugar variate between 200 to 300. his penis forsikn not move a bit back and when he intercourse then forskin get many cuts. he feel too much itching on is penis and when he itch it then some thick white paste came out from under forskin i think its yeast. pls help me and tell me what is this diseases and what medicine he should take pls tell as early as possible.
thanks.
trisha_ash2001@yahoo.com
Dear sister Trisha, I think the term you are using "yeast" is for 'SMIGMA' .First of all he is a diabetic, it must be undercontrol and the next problem is foreskin of his organ is not moving back during intercourse; this is called "निरुद्ध प्रकश" in ayurved and a minor surgery like circumcision will solve this problem. This is not a big problem, please give him following medicines ----
1 . Aarogyavardhini bati (आरोग्यवर्धिनी बटी) three times a day after meals with luke warm water.
2 . Taalsindoor(ताल सिन्दूर) 5 graam + Gandhak rasaayan(गंधक रसायन) 15 graam + ras maanikya(रस माणिक्य) 10 gram ; make 60 equal doses of this mixture and give him with 2 tea spoonful of equal mixture of Saarivaadyaarishta + Mahamanjishthaadi kadha, two times a day after meals.
3. Basant kusumaakar ras one tab two times a day with water.
4 . Tribang bhasma 20 gram + powder of GUDMAAR LEAF 60 gram + powder of dried NEEM LEAF 60 gram + dried Shilajit 120 gram ; pond this mixture properly and make tabs of appx.500 Mg. take two tabs four times a day with two tea spoonful Aloe-Aamla juice.
These medicines must be taken at least for two months, avoid non-veg, oily and spicy foods.

शुक्रवार, मई 09, 2008

दांयी किडनी में ४-५ मिमी. की पथरी है

डॉक्टर साहब,मेरी दांयी किडनी में ४X५ मिमी. की पथरी है जिसके कारण बहुत दर्द होता रह्ता है दर्द कभी तेज और कही धीमा रहता है किन्तु बंद नहीं होता। कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये।
सतीश कुमार जी
सतीश भाई,पहले तो माफ़ी चाहता हूं कि आपको भाषा की समस्या में उलझा दिया लेकिन मेरी भी मजबूरी आप समझ सकते हैं कि मेरे पास समय का सर्वथा अभाव रहता है काम इतना अधिक हो जाता है। अब आपकी दवा आपको बताता हूं
१ . कलमी शोरा(ये आपको पंसारी की दुकान पर आसानी से मिल जाने वाली चीज है जो देखने में दानेदार बारीक नमक जैसी दिखती है और स्वाद में नमकीन और ठंडी सी महसूस होती है)आधा- आधा ग्राम की मात्रा में सुबह शाम लेकर पुनर्नवादि कषाय के दो चम्मच के साथ ले लीजिये।
२ . यदि कलमी शोरा न मिले तो हजरुल यहूद भस्म को इसी तरह से सेवन करें, ये आपको आयुर्वेदिक दवा विक्रेता के पास से मिल जाएगी।
३ . एक वनस्पति जिसे लोग अजूबा,पानफुटी,पत्थर फोड़ी,दर्दमार या पर्णबीज नाम से जानते हैं अगर मिल जाती है तो उसके दो पत्ते पानी में उबाल कर सुबह शाम पीजिये आपकी पथरी कब घुल कर निकल गयी आपको पता ही नहीं चलेगा। इस पौधे के पत्तों में से किनारे से छोटे-छोटे नये पौधे निकल आते हैं इसे बगीचों में शोभा के लिये लगाया जाता है।
वैसे तो पहली दवा ही जादू कर देती है। मांस, मछली, अंडा, मिर्च-मसालेदार आहार से परहेज रखें, पानी ज्यादा पियें और हल्का भोजन किया करें,समय हो तो सुबह-शाम घूमा टहला करें। शीघ्र ही स्वस्थ हो जाएंगें।

गुरुवार, मई 08, 2008

मेरा गुप्तांग बाहर निकल आता है........


डॉक्टर साहब, मैं बहुत दिनो तक इस समस्या को सहन करती रही कि मैं तो एक अकेली स्त्री हूं और पति का स्वर्गवास हुए चार वर्ष बीत चुके हैं और बच्चे बड़े हैं मेरी उम्र तैंतालीस साल है। मेरा गुप्तांग बाहर निकल आता है, गायनेकोलाजिस्ट को दिखाने पर उसने बताया कि ये एक प्रकार का योनि का पक्षाघात है। एलोपैथी में इसका कोई उपचार है भी नहीं और साथ ही मैं भी ये सोचती रही कि मुझे अब क्यों इस विषय में सोच कर परेशान होना चाहिये किन्तु अंग बाहर निकल आने से बड़ी तकलीफ़ होती है। कोई उपाय बताइये जो ज्यादा मंहगा न हो।
जयंती सलुजा,आगरा
जयंती बहन, आप परेशान न हों, सत्य है कि एलोपैथी में इस समस्या का कोई उपचार नहीं है। मैं आपकी समस्या को भली प्रकार समझ रहा हूं ये वाकई में एक प्रकार का पक्षाघात ही है। आपको एकदम सस्ता उपचार बता रहा हूं लेकिन मूल्य में सस्ता होने के बावजूद ये योग सोने से तौला जाने वाला है।
१ . काले तिल २० ग्राम + शोधित गंधक ४० ग्राम दोनो को बारीक पीस कर मिला लें और आवश्यकतानुसार शहद मिला कर चटनी जैसा अवलेह बना लें तथा एक-एक ग्राम मात्रा दिन में दो बार सेवन करें(नाश्ते और रात्रि को भोजन के बाद) ।
२ . भूनी हुई फिटकरी ६० ग्राम + माजुफल १२० ग्राम + पोस्तडोडा १० ग्राम(यदि मिल सके तो इसके स्थान पर दो ग्राम अफीम ले सकते हैं किन्तु ये कई स्थानो पर कानूनी अड़चन दे सकता है इसलिये न लेना ही बेहतर रहेगा) । मजबूत हाथों से इस मिश्रण को एकदम बारीक पीस लें। मासिक धर्म होने के बाद उक्त चूर्ण की दो ग्राम की मात्रा को एक मलमल के साफ कपड़े में पोटली बना कर नित्य स्नान करने के बाद योनि में एक सप्ताह तक रोज रखा करें तथा संध्या को पोटली निकाल दिया करें फिर एक सप्ताह के लिये इस उपचार को रोक कर पुनः इसी प्रकार करें यानि कि एक सप्ताह तक उपचार लें व एक सप्ताह बंद रखें इसी प्रकार तीन माह त्क जारी रखें। आप विश्वास रखिये कि आपकी समस्या समाप्त हो जाएगी और जीवन भर फिर कभी न होगी।
३ . कब्जियत न रहे इस लिये त्रिफला चूर्ण सेवन कर लिया करें जरूरत होने पर।

मंगलवार, मई 06, 2008

पक्षाघात(पैरालिसिस) के तीन अलग-अलग केस.....

आदरणीय डॉक्टर साहब,मेरे पापा को पक्षाघात(पैरालिसिस) हो गया था ,एक सप्ताह अस्पताल में रहने के बाद अब वे घर आ गये हैं। तमाम दवाएं दे दी गयी हैं पर पापा की जिद है कि वे बस आयुर्वेद की दवा ही खाना चाहते हैं और उन्हें यकीन है कि उससे वे पूर्णतया स्वस्थ हो जाएंगे। अस्पताल में बताया गया कि पापा को ये समस्या हाई ब्लड प्रेशर के कारण हुई थी। मेहरबानी करके कोई सटीक दवा बताएं।
रजनी तिवारी,जयपुर
रजनी बहन,आपके पापा के संबंध में आपने जो जानकारी भेजी है वह अत्यंत संक्षिप्त है फिर भी जो औषधियां चल रही हैं यदि उनसे पर्याप्त लाभ दिखायी दे रहा है तो बस उन दवाओं के सेवन के बाद एक घंटे के अंतर पर वृहत वात चिंतामणि रस एक-एक रत्ती(१२५ मिग्रा.) दिन में दो बार शहद के साथ कम से कम पंद्रह दिन तक लगातार दीजिये, चमत्कारिक लाभ दिखाई देगा।
इसी तरह की समस्या भेजी है संगमनेर से निर्मल ने जो कहते हैं कि उनकॆ पिता जी को पक्षाघात(पैरालिसिस) हो गया एक माह पहले हुआ था किन्तु उसका कारण लो ब्लड प्रेशर बताया गया था तो क्या यही दवा देना उचित होगा या फिर कोई अलग उपचार देना होगा। पिताजी को अब एलोपैथी की कोई दवा नहीं दी जा रही है।
निर्मल, संगमनेर
निर्मल जी, आप अपने पिताजी को ऊपर बताई दवा न देकर वातकुलान्तक रस एक-एक रत्ती(१२५ मिग्रा.) को दिन में दो बार शहद के साथ कम से कम एक माह तक लगातार दीजिये, स्थायी लाभ दिखाई होगा।
अजय चंदेल,आगरा से लिखते हैं कि इनके मामा जी को भी हाई ब्लड प्रेशर के कारण पक्षाघात(पैरालिसिस) हो गया ,बीस दिन हुए लेकिन उन्हें मधुमेह(डायबिटीज) भी है तो क्या दवा में फेर बदल करना होगा या यही दवा दूं?
अजय जी,आप ऊपर बताई गयी दवा के साथ में दिन में दो बार साथ में त्रिबंग भस्म एक-एक रत्ती(१२५ मिग्रा.) दिन में दो दीजिये बाकी जो पथ्य मधुमेही को कराए जाते हैं वे जारी रखें। औषधियां कम से कम तीन माह तक लगातार दीजिये, स्थायी लाभ दिखाई होगा।


सोमवार, मई 05, 2008

ब्लड प्रेशर लो हो जाने की समस्या है....

आदरणीय डॉक्टर साहब, मेरी भाभी जी को हमेशा ब्लड प्रेशर लो हो जाने की समस्या है। इस कारण उन्हें बहुत दुर्बलता महसूस होती है। अक्सर चक्कर आते रहते हैं। मैंने देखा है कि उनका बी.पी. कम होकर ९०/६० से भी नीचे चला जाता है,क्या यह घातक हो सकता है? कोई स्थायी उपचार बताइये।
समीना पठान,अजमेर
समीना बहन, आपने जो विवरण दिया है उसके आधार पर मैं बताना चाहता हूं कि आप अपनी भाभी जी को चिंता मुक्त रखें और घर का माहौल खुशनुमा बनाए रखने का यत्न किया करें। पुष्टिकारक आहार लेने की सलाह दीजिये कि खाने-पीने पर विशेष ध्यान दें। रही बात घातक होने की तो बस इतना ही कहना सही सलाह रहेगी कि हां ये अत्यंत घातक हो सकता है इसलिये लापरवाही तो हरगिज़ न करें। ये औषधियां नियम पूर्वक दें----
१ . नवजीवन रस एक -एक गोली सुबह शाम दुग्ध के साथ दें।
२ . प्रभाकर वटी एक -एक गोली सुबह शाम शहद के साथ दें।
३ . मुक्ता पंचामृत दो-दो रत्ती की मात्रा दिन में दो बार शहद के साथ दें।
आहार-विहार की ओर उचित ध्यान दें,सुपाच्य,पौष्टिक भोजन दें, नमक का पर्याप्त प्रयोग करें,छुहारा, किशमिश, बादाम को दूध में उबाल कर दिया करें। यदि कोई मानसिक परेशानी हो तो उसे दूर करने का प्रयास करें। इस प्रकार चालीस दिन तक उपचार लें तो स्थायी लाभ मिलेगा।

SPUR के कारण पैर की एड़ी न कटवाएं....

आदरणीय डॉक्टर साहब, मेरे पैर की एड़ी में चुभता हुआ सा इतना तेज दर्द होता है कि पैर जमीन में रखना मुश्किल है। पैर यदि जमीन पर टिका दिया तो अत्यंत वेदना होने लगती है। अपने शहर के डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने बताया कि मेरे रोग को अंग्रेजी में SPUR कहते हैं इसमें मेरी एड़ी की हड्डी की नोक बढ़ गई है जिसे वे काट कर निकाल देंगे। दूसरे डॉक्टर ने कहा कि वे उस जगह पर एक टीका लगा देंगे जिससे वेदना शांत होगी उस टीके का नाम है CARTISONE , मुझे तो एड़ी में टीका लगवाने या सर्जरी के नाम से ही भय लग रहा है। मेरे एक मित्र ने बताया कि जितनी पीड़ा रोग से हो रही है उससे ज्यादा दर्द तो टीके के कारण होती है। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि क्या करूं मेहरबानी करके कोई आयुर्वेदिक उपाय बताएं।
जयेन्द्र शुक्ल,मथुरा
जयेन्द्र जी, आपकी तकलीफ मैं समझ रहा हूं। एलोपैथी की मजबूरी है कि वो वही बता सकती है जो कि उसकी सीमा के अंदर आता है। आपको न तो एड़ी में टीका लगवाने की जरूरत है और न ही आपरेशन करवा के एड़ी कटवाने की आवश्यकता है। आप निम्न दवाएं नियम से दो माह तक लीजिये--
१ . सिहनाद गुग्गुल दो-दो गोली महारास्नादि क्वाथ के दो ढक्कन के साथ दिन में दो बार सुबह शाम लीजिये (दवा खाली पेट न लें और जो विशेष ध्यान देने वाली बात है वो ये कि सिंहनाद गुग्गुलु खरीदते समय उसकी पैकिंग के ऊपर देख लें वहां ग्रन्थाधिकार लिखा रहता है और आपको भैषज्य रत्नावली के आधार पर बनी औषधि लेना है यह संक्षिप्त में भै.र. लिखा रहता है)।
२ . रात्रि को भोजन के बाद एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गर्म जल से लीजिये ताकि कब्जियत न रहे।
बाजारू साफ़्टड्रिंक्स का सेवन न करें, वात करने वाला आहार न लें।

रविवार, मई 04, 2008

गैस बनती रहती है दिनभर डकारें मारता रहता हूं........

डॉक्टर साहब,नमस्ते; मैं एक दुकानदार हूं और मेरी कपड़े की दुकान है। मेरी उम्र बावन साल है। सुबह साढ़े सात बजे सो कर उठता हूं। नित्यकर्म से फारिग होने के बाद पूजा पाठ करता हूं और नाश्ता करके दुकान पर नौ बजे तक आ जाता हूं फिर रात को नौ बजे दुकान बंद होने पर ही घर वापस आना हो पाता है। दोपहर का भोजन बच्चा घर से लेकर आ जाता है दिन भर दुकान पर बैठे-बैठे मेरे पाचन का सत्यानाश हो गया है। दोपहर में खाने का मन नहीं होता क्योंकि सुबह का नाश्ता ही पेट में हजम नहीं हो पाता है और चलना-फिरना बिलकुल होता ही नहीं है,दिन भर पेट में गुड़गुड़ाहट होती रहती है गैस बनती रहती है जिससे डकारें मारता रहता हूं। लगता है कि कहीं कोई बड़ी बीमारी न पकड़ ले किन्तु मेरी लाचारी है कि मैं अपना व्यवसाय बदल नहीं सकता और इस तरह दिन भर बैठने के कारण जो तकलीफ़ हो रही है उसे भुगतना मजबूरी बन गयी है। क्या आयुर्वेद में मेरी दिनचर्या की मजबूरी समझ कर आप पेट के लिये कोई दवा बता सकते हैं मैं घर पर अपनी पत्नी से बनवा लूंगा या बाजार से खरीद लूंगा। धन्यवाद
चोंथमल साजनानी,रींवा(म.प्र.)
साजनानी साहब आपकी मजबूरी मैं भली प्रकार से समझ रहा हूं। अगर मैं आपको कुछ ऐसी सलाह दूं जो आप पालन ही न कर सकें तो उसका कोई उपयोग न होगा। आप अपने सोने और जागने के समय में एक घन्टे का बदलाव करिये। रात में अधिक से अधिक साढ़े दस बजे तक सो जाइए और रात्रि भोजन के बाद कम से कम पंद्रह मिनट तक थोड़ा टहलिए फिर सोने जाइए और सुबह साढ़े सात के स्थान पर सात बजे उठिए और सुबह भी नित्य कर्म से फारिग होने के बाद थोड़ा हल्का सा व्यायाम करिये क्योंकि आपकी दिनचर्या में शारीरिक श्रम का स्थान ही नहीं है। निम्न औषधि का सेवन नियमित रूप से करिये कुछ दिनो में आपकी समस्या समाप्त हो जाएगी किन्तु दवा को कम से कम एक मास तक खाएं----
योग : -- सेंधा नमक १५० ग्राम + अकरकरा २५ ग्राम + सोंठ २५ ग्राम + छोटी पीपर २५ ग्राम + काली मिर्च २५ ग्राम + सफेद जीरा २५ ग्राम + शोधित गंधक २५ ग्राम + काला जीरा २५ ग्राम + शुद्ध हींग ढाई ग्राम + रस सिन्दूर छह ग्राम + नींबू का सत्व(टाटरी) सौ ग्राम; इन सब पदार्थों को लेकर मजबूत हाथों से घुटाई करा के मिश्रित कर लें। इस में से दो चुटकी भर मात्रा दिन में चार बार सेवन करें और पानी दस मिनट बाद ही पिएं। आपकी गैस की समस्या समाप्त होने के साथ ही आप स्फूर्ति भी महसूस किया करेंगें ।

शुक्रवार, मई 02, 2008

बाईपास सर्जरी न करवानी पड़े,75% ब्लाकेज है.....

डॉक्टर साहब,पंद्रह दिन पहले मेरे पति के सीने में अचानक बहुत तेज दर्द हुआ जो कि छाती के बाएं बाजू से गर्दन के बाएं हिस्से तथा बाएं कंधे की ओर सरकता सा महसूस हो रहा था। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, बेहद घबराहट हो रही थी और ऐसा लग रहा था कि ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ गया हो। मैंने निकट के डॉक्टर को बुलाया तो वे तत्काल ही अपनी कार से ही अस्पताल ले गये। आज ही मेरे पति अस्पताल से घर वापिस आए हैं। बताया गया कि उनकी दिल की नसों में 75% ब्लाकेज होने के कारण ये दर्द हुआ था इसे "एंजाइना पेक्टोरिस" कहते हैं। जल्द ही बाईपास सर्जरी के लिये बोला गया है। हम लोग बहुत डरे हुये हैं। मेहरबानी करके कुछ ऐसा आयुर्वेदिक इलाज हो तो बताइये कि हमें बाईपास सर्जरी न करवानी पड़े और ये ब्लाकेज बस दवाएं खाने से ही खुल जाएं।
सोनालिका सिंह,मथुरा
सोनालिका बहन, आप बिलकुल बेफिक्र हो जाइये क्योंकि आयुर्वेद में आपके पति की समस्या का कारगर हल मौजूद है। उन्हें बाईपास सर्जरी जैसा मंहगा और जोखिम भरा उपाय करने की आवश्यकता नहीं है। मैंने आपके द्वारा भेजी एंजियोग्राफी की रिपोर्ट देख ली है। अब ध्यान दें कि वे अनावश्यक चिन्ता न करें,उन्हें उपवास आदि करने से रोक दें, मांसाहार न करें(अंडे भी नहीं), शराब सेवन और धूम्रपान करते हों तो तत्काल ही बन्द करें, आहार-विहार का समय सुनिश्चित करें, न्यूनतम परिश्रम करें, एकदम हल्का व्यायाम करें, नमक और शक्कर का प्रयोग बन्द कर देना ही हितकर है, दही तथा लहसुन का भरपूर सेवन करें, रात्रि को तांबे के लोटे में पानी भर कर रख दें व सुबह निहारे मुंह उठते ही उस पानी को पी लें ताकि कब्ज न रहे, सुबह नाश्ते में अंकुरित चने व किशमिश मिला कर खूब चबा कर खाएं, तैलीय भोजन न करें ये बेहद नुकसानदेह सिद्ध होगा। निम्न दवाओं को नियम पूर्वक सेवन कराएं और देखिये कि आयुर्वेद क्या चमत्कार करता है ७५% क्या अगर ८०% भी ब्लाकेज हो तो कैसे बिना आपरेशन के ठीक करता है.......
१ . अर्जुन की छाल का जवकुट यानि मोटा-मोटा चूर्ण ३ ग्राम व २५ ग्राम मिश्री लेकर २५० ग्राम दूध में उबालें और इसी दूध का प्रतिदिन प्रातः व सांयकाल सेवन करें।
२ . अर्जुनारिष्ट + अश्वगंधारिष्ट दोनो को मिला कर दो चम्मच बराबर जल मिला कर दिन में दो बार भोजन के बाद लें।
३ . अकीक पिष्टी १०० मिग्रा. + मुक्तापिष्टी १२५ मिग्रा. + जहरमोहरा पिष्टी २०० मिग्रा + अर्जुन की छाल का महीन चूर्ण २५० मिग्रा. + प्रभाकर बटी २५० मिग्रा की एक गोली + सितोपलादि चूर्ण एक ग्राम ; इन सबको मिला कर कुल मात्रा की तीन बराबर पुड़िया बनाएं व दिन में तीन बार शहद के साथ सेवन कराएं, दवा को इसी अनुपात में बना कर रख लें व नियमित रूप से न्यूनतम तीन माह सेवन कराएं यदि अधिक दिन भी सेवन कराया तो कोई नुकसान नहीं होगा। ये एकदम निरापद एवं हानिरहित उपचार हैं।

बुधवार, अप्रैल 30, 2008

मैं एक एलोपैथिक प्रेक्टिशनर हूं.......

डॉ.रूपेश जी, नमस्कार; मैं पिछले कुछ दिनों से आयुषवेद लगातार देख रहा हूं। ये एक बहुत सराहनीय प्रयोग है। मैंने आयुर्वेद की एक सम्मानित मासिक पत्रिका में आपका एक अत्यंत ही मौलिकता से परिपूर्ण शोधपत्र "एड्स में ज्वर की लाक्षणिकता पर अनुभव" पढ़ा। मैं एक एलोपैथिक प्रेक्टिशनर हूं। मुझे आपके आयुर्वेद के ज्ञान से एक बात जाननी है जो कि हर एलोपैथी के चिकित्सक के लिये समस्या होती है लेकिन शायद ये उनकी मजबूरी रहती है कि वे आपसे सलाह नहीं ले सकते क्योंकि भारत में अभी भी एलोपैथी को बाकी दूसरी चिकित्सा पद्धतियों के मुकाबले में श्रेष्ठ समझा जाता है। मैंने पाया है कि अल्सर से लेकर तपेदिक(टी.बी.) तक में और एड्स से लेकर ब्लड कैंसर तक या अन्यान्य रोगों में ज्वर यानि बुखार(fever) एक गम्भीर लक्षण के तौर पर रहता है और एलोपैथी में इसे नियंत्रित करने के लिये हम जो दवाएं देते हैं उनके पर्याप्त दुष्प्रभाव होते हैं ये बात मैं और आप भली प्रकार जानते हैं इस लिये मेहरबानी करके मुझे ज्वर नियंत्रित करने के लिये कोई आयुर्वेद का रामबाण उपाय बताइये।
"एक चिकित्सक" नाम व पता निवेदन पर गुप्त रखा गया है....
आत्मन बंधुवर, सर्वप्रथम तो आयुर्वेद में आस्था दर्शाने के लिये मैं आपको समस्त आयुर्वेद अनुरागियों की तरफ से साधुवाद देता हूं। आपने सही कहा है कि ज्वर एक महाघोर लक्षण रहता है किसी भी रोग के दौरान और यदि ये नियंत्रित न रहे तो मरीज धीरे-धीरे उपचार के दौरान ही मौत के मुंह में चला चाता है। यदि आपकी तरह सब लोग निःसंकोच ऐसे ही आयुर्वेद को स्वीकारने लगें तो इस विश्व का उद्धार हो जाए और साथ ही साथ पर्यावरण आदि की समस्यों का स्वतः ही समाधान हो जाएगा। लीजिये आपके निवेदन पर आयुर्वेद के महासागर के मोती बिना मूल्य पर प्रस्तुत हैं आशा है कि आप सब इस जानकारी से लाभान्वित होंगे---
१ . सुदर्शन चूर्ण एक माशा + गोदन्ती भस्म चार रत्ती + सितोपलादि चूर्ण एक माशा + प्रवाल पिष्टी दो रत्ती का मिश्रण बना लें व इस मिश्रण की खुराक दिन में तीन बार शहद के साथ दें ।
२ . जयमंगल रस एक गोली + सुवर्णबसन्तमालती रस एक गोली दिन में तीन बार शहद के साथ दें ।(इन रसौषधियों को कुछ फार्मेसियां इंजेक्शन के रूप में भी बनाती हैं जिन्हें कि निर्भय होकर प्रयोग करा जा सकता है)
३ . अमृतारिष्ट दो चम्मच + अभयादि क्वाथ दो चम्मच के साथ संशमनी बटी एक-एक गोली दिन में दो बार दे सकते हैं।
वैसे आयुर्वेद में प्रत्येक औषधि यथाविधि निदान के बाद ही दी जाना उचित है किन्तु कई ऐसी दवाएं हैं जिन्हें कि आप लक्षणों के आधार पर सहज ही दे सकते हैं और लक्षणों का शमन होने पर आगे अपनी चिकित्सा क्रम को जारी रख सकते हैं।

आपको अल्सरेटिव कोलाइटिस है.......

डॉक्टर साहब,मेरी उम्र ३० साल है। पिछले कुछ दिनों से पेट में समस्या है। चुभन जैसा दर्द होता रहता है ऐसा लगता है कि कोई ड्रिल मशीन चला रहा है शायद मैं बता नहीं पा रहा हूं पर cramping pain भी महसूस होता है, बार-बार लैट्रिन जाने का मन होता है किन्तु मल नहीं निकलता बल्कि वैसी अनुभूति ही होती है कि मल त्याग करने जाऊं,यदि थोड़ा मल होता भी है तो उसके साथ में बलगम की तरह से चिकना पदार्थ और रक्त मिला हुआ आता है,दिन भर में लगभग पांच बार तो लैट्रिन जाता ही हूं। मुझे एण्टीबायोटिक दवाएं लेने में डर लगता है क्योंकि उनसे मेरा पेट महीने भर तक गड़बड़ रहता है इसलिये कोई आयुर्वेदिक उपचार बताएं बहुत कष्ट है। फिलहाल तो एक पड़ोसी ने बताया है कि इस प्रकार की बीमारी में छाछ यानि कि मट्ठा फायदा करता है तो बस दिन में दो बार भोजन के बाद एक गिलास वही पी ले रहा हूं। मल एवं रक्त की रिपोर्ट भेज रहा हूं।
जीवन सिंह,अल्मोड़ा
सिंह साहब, हो सकता है कि आपके पड़ोसी ने आपको प्रेमवश यह उपचार सुझाया है किन्तु यह आपके लिये जानलेवा सिद्ध होगा इसलिये तत्काल इसे बंद कर दीजिये। आपकी रिपोर्ट्स देखी हैं आपको अल्सरेटिव कोलाइटिस है जिसमें कि आपके लिये दही या मट्ठे जैसी चीज अत्यंत घातक होती है। आप अनार, सेब, लौकी, मूंग, मूंग की खिचड़ी, मुनक्का, खजूर, नारियल का पानी और बकरी का दूध लीजिये शेष भारी भोजन आपको नुक्सान करेगा। आप निम्न औषधियां नियम से लें--
१ . कामदुधा रस(मुक्ता युक्त) एक-एक गोली सुबह शाम वत्सकादि काढ़े के दो चम्मच के साथ लें जल से भी ले सकते हैं।
२ . प्रवाल पंचामृत रस की एक-एक गोली सुबह शाम जल से भी ले।
३ . कर्पूर रस की एक-एक गोली बकरी के दूध को उबाल कर ठंडा करके दें(ध्यान रखिये कि दूध बकरी का ही हो गाय अथवा भैंस का न लें प्रयास करने से बकरी का दूध मिल जाएगा )।
इन दवाओं को लगातार एक माह तक लें आराम तो चार दिन में ही हो जाएगा किन्तु सावधानी हेतु एक माह लें। इन दवाओं का कोई बुरा प्रभाव नहीं होगा आपके स्वास्थ्य पर।

मंगलवार, अप्रैल 29, 2008

मेरी पत्नी को छह माह का गर्भ है.......

डॉक्टर जी,मेरी पत्नी को छह माह का गर्भ है। सबकुछ सामान्य था किन्तु पिछले एक सप्ताह से मैंने देखा कि उसके पैरों में हल्की सी सूजन है और आंखें भी कुछ पीली से नजर आ रही हैं, आंखों के पीलेपन का पता तुरंत ही चल गया क्योंकि उसकी आंखे बाकी लोगों से अलग नीले रंग की हैं। उसने बताया कि मूत्र का रंग भी एकदम पीला आ रहा है। मैंने उसे कई बार मना करा परंतु फिर भी मेरी नजर बचा कर वह मुल्तानी मिट्टी खाया करती थी कहीं उसके कारण तो नुक्सान नहीं हो गया? मेरा बच्चा तो इससे प्रभावित नहीं होगा न?जांच में रक्त की कमी बताई गयी थी, कोई आयुर्वेदिक तरीका बताइये कि सब सामान्य हो जाए। आपको धन्यवाद।
चरवा ओरांव,छत्तीसगढ़
भाईसाहब,आप परेशान न हों आपके बच्चे को कोई परेशानी नहीं होगी, उसकी रक्षा तो भगवान करते हैं। आप बस अपनी पत्नी की तरफ ध्यान दीजिये। मिट्टी खाने से कई लोगों को पाण्डुरोग हो जाता है लेकिन अक्सर महिलाएं ऐसी अवस्था में मना करने के बाद भी मिट्टी खा ही लेती हैं। इस विषय को छोड़ कर हम आपकी पत्नी का उपचार लिखते हैं ध्यानपूर्वक दवाएं दीजिये ताकि वे जल्द ही स्वस्थ होकर स्वस्थ शिशु को जन्म दें....
१ . मण्डूर माक्षिक भस्म दो-दो रत्ती(२५० मिग्रा.) लेकर उसे शहद से सुबह-शाम चटाएं।
२ . ताप्यादि लौह एक-एक गोली(१२५ मिग्रा.) शहद से सुबह-शाम दीजिये।
३ . भोजन के बाद दोनो समय द्राक्षारिष्ट दो-दो चम्मच बराबर जल मिला कर पिलाइये।
यह उपचार कम से कम चालीस दिन तक दीजिये और अपनी पत्नी को समझाने का प्रयास करिये कि मिट्टी न खाएं इससे बच्चे की सेहत पर प्रभावित हो सकती है।

सोमवार, अप्रैल 28, 2008

दूध की मात्रा कम हो रही है बच्ची के लिये....



डॉक्टर साहब,मेरी बहन की उम्र २५ साल है और उसे एक सप्ताह पहले पुत्री पैदा हुई है, ये उनकी पहली संतान है। बहन जी दुबली-पतली हैं, कोई बीमारी नहीं है पूरी तरह से स्वस्थ हैं और प्रसव भी सामान्य रहा लेकिन अब उन्हे एक समस्या हो गयी है कि दूध कम आता है जो कि बच्ची के लिये पूरा नहीं हो रहा है जैसे-जैसे बच्ची बड़ी होगी उसे दूध की अधिक जरूरत होगी। मेहरबानी करके कोई ऐसा उपाय बताइये कि दूध की मात्रा बढ़ जाए।
शीतल शर्मा,गाजियाबाद
शीतल बहन,अनेक महिलाओं को प्रसव के समय ऐसा हो जाता है किन्तु आप परेशान न हों मैं जो नुस्खा आपकी दीदी के लिये बता रहा हूं वह गुरू परंपरा से कई सौ साल से इस्तेमाल किया जाता रहा है। इससे बड़ी बहन जी के दुग्ध की मात्रा तो बढ़ेगी ही और उनका स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहेगा।
१ . कमल गट्टे की गिरी १०० ग्राम + असगंध चूर्ण १०० ग्राम + सफ़ेद जीरा १०० ग्राम + मुलहठी(जेष्ठमध) का चूर्ण १०० ग्राम + घी में भूना हुआ सिघाड़े का आटा १०० ग्राम + शतावर चूर्ण ४०० ग्राम ; इन सबको मिला कर कसकर घोंट लें ध्यान रहे कि जितना महीन घोंटा जाएगा उतना ही लाभप्रद है।
इस चूर्ण की ५ ग्राम मात्रा दिन में तीन बार दूध के साथ दें और दूध को इस तरह तैयार करें कि २५० ग्राम दूध में ४ पिण्डखजूर डाल कर उबालें और इसी उबले हुए दूध से ऊपर बताए चूर्ण का सेवन कराएं।
२ . रात्रि भोजन के बाद एक चम्मच त्रिफला चूर्ण हलके गुनगुने पानी से लें।
मात्र एक सप्ताह में बहन जी को बेटी के लिये पर्याप्त दूध आने लगेगा। इस चूर्ण का सेवन तीन माह तक अवश्य कराइये।

रविवार, अप्रैल 27, 2008

कृपया मेरी समस्याओ का निदान सुझाएं.....

डॉ. साहब मेरी आयु ३८ वर्ष है तथा मैं विवाहिता व दो बच्चो की माँ हूं। पिछले कुछ समय से मेरे बांये घुटने की दाहिनी तरफ की हड्डी में दर्द रहता है जो की पालथी मारकर बैठकर उठने के समय ज्यादा होता है चलते समय कड़क-कड़क की आवाज़ आती है मेरी माहवारी भी अनियमित ही गई है किसी किसी माह तो होती ही नही या बहुत ही कम होती है। मुझे सफेद पानी भी ज्यादा आता है व इस पानी के साथ गाढ़ा-गाढ़ा सा चिपचिपा सफेद पास जैसा पदार्थ निकलता है बाकि भूख-प्यास निद्रा पाखाना ठीक है। कृपया मेरी समस्याओ का निदान सुझाएं।
आपकी बहन सत्यवती
बहन जी,आपने जिस तरह के लक्षणों का वर्णन करा है उससे स्पष्ट होता है कि आप इन समस्याओं को काफी समय से झेल रही हैं। बिल्कुल निश्चिंत हो जाएं आपकी समस्या का हल लिख रहा हूं लेकिन ध्यान रहे कि आपके भीतर जो तमाम लक्षणों का एक समुच्चय बन गया है उसके उपचार के लिये आपको धैर्य रखना होगा तथा आप तत्काल ही तेल मसालेदार भोजन से परहेज़ रखना प्रारंभ कर दें, चाय व काफ़ी भी एकदम कम कर दें क्योंकि ये आपको नुकसान कर रहे हैं। बाजारू साफ़्ट ड्रिंक्स से सख्त परहेज करें, फ़्रिज का ठंडा पानी भी पीना आपके लिये हानिकारक हो सकता है। भोजन में हल्का यानि कि आसानी से हज़म होने वाला आहार लें, पुराना साठी का चावल, जौ, मूंग, परवल, लौकी, जीरा, धनिया, मिश्री तथा घी पथ्य है इन्हें भोजन में शामिल करके विविध व्यंजन बना कर सेवन करिये तो शीघ्र लाभ होगा। इन दवाओं का प्रयोग दिये निर्देशानुसार करिये--
१ . त्रिफला गुग्गुलु एक-एक गोली सुबह-दोपहर-शाम को गर्म जल से लीजिये।
२ . प्रदरान्तक रस १२५ मिग्रा + प्रदरान्तक लौह १२५ मिग्रा + कुक्कुटाण्डत्वक भस्म १२५ मिग्रा मिला कर शहद के साथ सुबह शाम लीजिये।
३ . चंद्रप्रभा वटी २ गोली + पुष्यानुग चूर्ण ५ ग्राम मिला कर अशोकारिष्ट के दो चम्मच के साथ दिन में दो बार लीजिये।
४ . घुटने में स्थानिक मालिश के लिये केरोसीन का तेल(जिसे घासलेट या मिट्टी का तेल भी कहते हैं) १०० मिली. + सैंधव नमक(जो उपवास में खाया जाता है) २० ग्राम बारीक पीस कर मिला कर एक सप्ताह कसकर शीशी का ढक्कन बंद करके तेज़ धूप में रख दें फिर प्रभावित स्थान पर हलके हाथ से मालिश करके घुटने को किसी कपड़े से लपेट लें ताकि हवा न लगे। मालिश सुबह स्नान के बाद व शाम को सूर्यास्त से पहले करें।
इस पूरे उपचार को कम से कम दो माह तक लीजिये अवश्य ही आराम होगा और फिर कभी समस्या वापिस न होगी।

मेरी बेटी को बचाइये, क्या वो पागल हो गयी है?



डॉ.साहब हमारी बेटी जिसकी उम्र बाइस साल है तीन माह पहले एक दिन अचानक ही घर से गायब हो गयी। हमनें पुलिस में रपट लिखायी और समाज के ताने भी दबी आवाज में सुने कि किसी के साथ भाग गयी होगी लेकिन हमारी बेटी को हम अच्छी तरह जानते हैं उसका यदि किसी से कोई मेल-मिलाप होता तो वह हमें तुरंत ही बताती थी इसलिये उसे बिना बताये भाग जाने की जरूरत ही नहीं है क्योंकि हमारा परिवार एक खुले विचारों वाला परिवार है। एक सप्ताह लापता रहने के बाद पुलिस को हमारी बेटी मैले-कुचैले कपड़ों में दूसरे जिले के एक मंदिर के पास मिली जिसे कि उसे उसके मामा ने पहचाना। उस समय वह गुमसुम थी, हमने मौके की नज़ाकत को समझ कर उससे कुछ नहीं पूछा वह बिना किसी प्रतिवाद के घर आ गयी लेकिन अब तो हमारी शिक्षित बेटी का व्यवहार एकदम बदल गया है जैसे कि कोई बुरी आत्मा का साया हो उसपर; कपड़ों में ही मल-मूत्र त्याग कर देती है उसे एहसास ही नहीं होता कि यह गलत है, हममें से किसी से भी कोई बात नहीं करती और अकेली बैठ कर घंटों न जाने क्या-क्या अनर्गल प्रलाप करती रहती है यहां तक कि वो किस भाषा में बड़बड़ा रही है ये तक समझ में नहीं आता है। आंख, भौंहे, हाथ-पैरों, कंधा, कमर आदि को नचाती रहती है, कभी-कभी अचानक आंखे फाड़ कर देखने लगती है, अपने आपको कूड़े-कचड़े से सजाने का प्रयास करती है, खाना पसंद नही करती यदि बहला-फुसला कर हम लोग खिला भी दें तो भोजन के बाद घर में तेजी से इधर-उधर भागना शुरू कर देती है जो कि करीब एक घंटे तक जारी रहता है फिर खुद ही थक कर सो जाती है। स्नान नहीं करती, शरीर दुर्बल हो गया है, कभी हंसने लगती है कभी रोने लगती हैऔर कभी न जाने किन भाषाओं के गाने गाना शुरू कर देती है। हम लोगों से मारपीट या बुरा बर्ताव नहीं करती बल्कि खुद में ही मग्न रहती है। हमें एक पुलिस अफसर ने कहा था कि शायद इसके साथ बलात्कार जैसी कोई दुर्घटना हुई होगी जिससे इसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया होगा लेकिन मेडिकल जांच में बलात्कार या किसी शारीरिक जबरदस्ती की कोई पुष्टि नहीं हुई। लोग कहते हैं कि भूत-प्रेत का साया है हम सब कर रहे हैं इस लिये आप भी यदि संभव हो तो सहायता करें हो सकता है कि यह कोई बीमारी मात्र हो। हमें गुजरे बुरे समय को नहीं कुरेदना बस हमारी बेटी अच्छी हो जाए हम आपका जीवन भर एहसान मानेंगे। मेहरबानी करके उसे मेंटल हास्पिटल ले जाने की सलाह न दीजियेगा।
अनुरोध पर नाम व पता नहीं दिया जा रहा है
भाईसाहब, मैं आपके कष्ट को समझ रहा हूं कि एक ही बेटी और ये हालत हो जाए तो कितना घोर दुःख होता है किन्तु ईश्वर पर विश्वास रख कर लक्षणों के आधार पर औषधि व्यवस्था लिख रहा हूं। इन दवाओं को लगातार दो माह तक दें तथा जो परिवर्तन आये उसकी तत्काल फोन पर सूचना देते रहे----
१ . चतुर्भुज रस १२५ मिग्रा. + प्रवाल पिष्टी २५० मिग्रा. + शंखपुष्पी चूर्ण १ ग्राम मिला कर मात्रा बना लें व सुबह-शाम शहद के साथ इसे चटाएं (दवा खाली पेट दे सकते हैं)।
२ . स्मृति सागर रस २५० मिग्रा. + नागार्जुनाभ्र रस १२५ मिग्रा. + खमीरा गावजुबां ३ ग्राम + शुक्ति पिष्टी २५० मिग्रा. को मिला कर एक खुराक बना कर ऊपर वाली दवा के आधे घंटे बाद जल से दें।
३ . रजत भस्म ८० मिग्रा. + चन्द्रावलेह १० ग्राम सुबह व रात को गाय के दूध के साथ दें।
४ . भोजन में लशुनाद्यघृत १२ ग्राम मिला कर खिलाएं।
५ . देह पर शतधौत घृत की मालिश करवाएं।
एक माह तक लगातार यह उपचार दीजिये फिर उसके बाद सुबह की २ नंबर व ४ नंबर वाली दवाओं में परिवर्तन करें व उसके स्थान पर निम्न दवा देना शुरू करें--
२ . (अ) उन्मादगज केशरी रस २५० मिग्रा. + प्रवाल पिष्टी २५० मिग्रा. को दिन में दो बार मक्खन व मिश्री के मिश्रण के साथ दें।
४ .(अ) महाचैतस घृत १० ग्राम रात को सोते समय गुनगुने गर्म मीठे दूध में मिला कर दें।
ईश्वर पर भरोसा रखिये भाईसाहब आपकी बेटी अवश्य ही स्वस्थ हो कर अपने पुराने व्यवहार पर आ जाएगी। सूचना देना मत भूलिये।


शनिवार, अप्रैल 26, 2008

भाईसाहब को किसी प्रेतबाधा ने जकड़ लिया है.....


डा.साहब,पिछले कुछ माह से जब से शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव हुए मेरे भाईसाहब का उसमें काफ़ी पैसा फंस गया है। पता नहीं उनके शेयर्स की स्थिति सामान्य होगी? शायद इसी कारण से वे पिछले दो माह से बहुत चिड़चिड़े हो गये हैं, जल्दी ही क्रोधित हो जाते हैं जबकि वे काफी हंसमुख हुआ करते थे, उद्विग्न रहा करते हैं, कोई भी कार्य करते हैं तो वह अव्यवस्थित सा रहता है, भूलने भी लगे हैं, नींद एकदम कम हो गयी है, रक्तचाप काफ़ी बढ़ा रहता है लेकिन वे अपनी बी.पी. की दवा लेना तक अक्सर भूल जाते हैं, सिर में दर्द बताते हैं, बातचीत में अचानक असम्बद्ध वाक्य बोल जाते हैं तथा शीघ्रता से भी कभी-कभी बोलना प्रारम्भ कर देते हैं, वजन भी गिर रहा है, नजरें भी कमजोर सी हो गयी हैं। ऐसा लग रहा है कि भाईसाहब को किसी प्रेतबाधा ने जकड़ लिया है लेकिन मैं जानती हूं कि ऐसा कुछ नहीं बल्कि ये महज मनोशारीरिक विकार है, मेहरबानी करके कोई उपचार बताएं मुझसे भाईसाहब की हालत देखते नहीं बनती।
नाज़नीन बानो,जबलपुर

नाज़नीन जी, आप फ़िक्र ना करें आपके भाईसाहब शीघ्र ही इस परेशानी से मुक्त हो जाएंगे। दरअसल आर्थिक परेशानी के चलते उन्हें ऐसी परेशानी हुई है। बाकी सारे लक्षण तो उसी से संबद्ध हैं। मैंने आपके द्वारा ई-मेल करी हुई रिपोर्ट देख लीं हैं लीजिये समस्या का समाधान प्रस्तुत है--
१ . नागार्जुनाभ्र रस २५० मिग्रा. + सूतशेखर रस(साधारण) २५० मिग्रा. + ब्राह्म रसायन २५ ग्राम को मिला कर एक खुराक बनाएं व सुबह शाम एक-एक खुराक ठंडे मीठे दूध से दें।
२ . भोजन के बाद दो गोली हिंग्वादि बटी की चूसने को दें तथा भोजन के आधे घंटे बाद दो चम्मच अश्वगंधारिष्ट पिलाएं।
३ . दिन में तीन बजे के आसपास प्रवालपिष्टी २५० मिग्रा. + मुक्ताशुक्ति पिष्टी २५० मिग्रा. को एक मुनक्के में भर कर दें और यदि मुनक्के में बीज हो तो उसे निकाल कर फेंक दें।
४ . रात्रि में सोने से पहले दस ग्राम ब्राम्हीघृत दूध में मिला कर पिलाएं।
मांसाहार का सर्वथा परहेज करवाएं, अधिक तैलीय और मसालेदार भोजन से दूर रखें, घर का वातावरण खुशनुमा बनाएं रखने का प्रयत्न करें। इस औषधि व्यवस्था को दो माह तक जारी रखिये विश्वास रखिये कि आपके भाईसाहब अवश्य स्वस्थ हो जाएंगे।

शुक्रवार, अप्रैल 25, 2008

परेशानी के चलते बेटी की शादी नहीं कर पा रहे हैं........

डा.साहब,प्रणाम मेरी पुत्री बबली जिसकी उम्र बाइस साल है, अस्थमा की बीमार है। बहुत वर्षों से तमाम चिकित्सक बदल-बदल कर हम लोग थक गये हैं। आयुर्वेदिक उपचार भी एक वर्ष तक जारी रखा गया किन्तु पता नहीं क्यों लाभ नहीं हुआ। वैद्य जी ने जो दवाएं दी थीं उनमे से मुझे दो नाम याद हैं एक था "श्वास कुठार रस" और दूसरा था "वृहत श्वास चिन्तामणि रस" । उसे श्वास का दौरा होने से पहले हृदय और पूरी छाती में दर्द का आभास सा होने लगता है। पेट में चुभने जैसी पीड़ा होने लगती है, अफ़ारा भी महसूस होता है। मुंह का स्वाद बदल जाता है ओर कनपटियों में भयंकर तोड़ने जैसा दर्द होता है। स्वभाव एकदम चिड़चिड़ा हो चला है जबकि पहले वह एक खुशमिजाज लड़की थी। गरमी की शिकायत बहुत करती है जबकि सामान्य मौसम हो तब भी। जवान लड़की की इस तरह की परेशानी के चलते हम लोग उसकी शादी नहीं कर पा रहे हैं कि अगर ससुराल में ऐसी समस्या हुई तो भगवान ही जाने क्या होगा? मेहरबानी करके हमारी बच्ची के लिये कोई कारगर इलाज बताइये, उसकी रिपोर्ट्स की जेराक्स प्रतियां आपको पोस्ट से भेज दी हैं।
रामसिंह,भारापुर(सहारनपुर)
रामसिंह जी,आपकी बच्ची की समस्या वाकई गम्भीर है लेकिन निराश होने से तो समस्या हल नहीं होगी और सत्य तो ये है कि आपने बबली के लिये जो आयुर्वेदिक उपचार लिया था वो मात्र पेटेंट दवाएं देने वाले किन्हीं व्यवसायी किस्म के वैद्य जी का रहा जिन्हें कि सही निदान करने की आवश्यकता न्यून जान पड़ती है। आपके वैद्य जी को आयुर्वेद के ऊपर विश्वास तो है लेकिन व्यवसायिक तौर पर जिसके कारण उन्हें सफलता नहीं मिली। आयुर्वेद ऐसे ही लोगों के कारण बदनाम हो चला है। खैर इस बात को जाने दीजिये और बबली का उपचार लिखता हूं।
१ . खानेवाला मीठा सोडा यानि कि सोडा बाई कार्ब १६ रत्ती में शोधन करा हुआ संखिया ०२(दो) रत्ती मिला कर एक दिन तक घुटाई करवा लें और इसकी १८ पुड़िया बना लें तथा सुबह-शाम एक-एक पुड़िया ठंडे पानी से दें। ध्यान रखिये कि संखिया(आर्सेनिक) एक अत्यंत तेज जहर माना जाता है जिसकी अत्यंत अल्प मात्रा ही जानलेवा होती है इसलिये इसके प्रयोग में सावधानी बरतनी चाहिये। किसी अच्छी आयुर्वेदिक दवा निर्माता कंपनी से आपको संखिया शोधित सोमल या शोधित मल्ल नाम से मिल जायेगा। घुटाई में भी कमी न करें। मात्र सात दिनों में जहां बड़े योग असफल हो जाते हैं ये साधारण सा योग काम कर जाता है। अगर कुछ विशेष लाभ न हो तो इसी तरह से दो सप्ताह और दे सकते हैं।
२ . सेवन काल में घी में भुना दलिया दें,कब्जियत न रहने दें। एक चम्मच अमलताश के गूदे को एक कप गरम जल में एक चम्मच शहद मिला कर रोज दोपहर को पिलाएं।
दिन में पुराने चावलों का भात, मूंग, मसूर, परवल, करेले, पेठा, पके कद्दू का साग, बकरी का दूध, खजूर, अनार, आमला, मिश्री, पुराना घी, शहद, मुर्गा, तीतर का मांस, बथुआ, चौलाई, पोई का साग, बैंगन, लहसुन, नीबू, रत्रि भोजन में गेंहू की रोटियां, छॊटी इलायची दें। वेगों को जैसे मलमूत्र को न रोकें, कब्ज निवारण के लिये एनिमा न दें, धूल-धूंए से बचे, तली-भुनी तेज मिर्च मसाले, उड़द की दाल, कफ़ वर्धक पदार्थ, दही, अधिक पानी पीना, शोक,चिन्ता, रात्रि को अधिक खाना, मेहनत का काम, भेड़ का दूध को वर्जित करें। ये सब अपथ्य हैं जिनके सेवन से रोग दूर नहीं होता है और जटिलता बढ़ती जाती है।
आयुर्वेद पर विश्वास बनाए रखिये आपकी बच्ची शीघ्र ही स्वस्थ हो जाएगी।

शनिवार, अप्रैल 19, 2008

फफोले(छाले) निकल आते हैं, डायग्नोसिस में Impetigo Eczematidus Bulla रोग लिखा है

आदरणीय डा.साहब,नमस्कार, पिछले बीस दिनों से अजीब से रोग से परेशान हूं। शरीर के किसी भी भाग में त्वचा पर फफोले निकल आते हैं और कुछ दो या तीन दिन में अपने आप फूट जाते हैं इन छालों के फूटने से बहुत तेज जलन और दर्द होता है। जैसे कि जल जाने के बाद छाले बन जाते हैं ठीक वैसे ही छाले हैं। इन छालों का रंग कुछ काला-लाल है और छालों की त्वचा कुछ मोटी से जान पड़ती है अंदर कुछ पीला सा पानी जैसा तरल भरा रहता है। एलोपैथी के डाक्टर ने दस दिन तक दवाएं दी लेकिन मुझे कोई आराम नहीं महसूस हुआ बल्कि नए फफोले आते ही जा रहे हैं उस डाक्टर ने अपने डायग्नोसिस में Impetigo Eczematidus Bulla नामक रोग लिखा है। मेहरबानी करके तुरंत आराम देने वाला उपाय बताएं। मैं मांसाहार करता हूं लेकिन कोई व्यसन नहीं है,भूख कम ही लगती है।
संजय नारंगणे, नोयडा
संजय जी,आपकी बीमारी को आयुर्वेद की भाषा में "विस्फोट" कहते हैं। यह एक त्वचा रोग है जोकि भोजन में कफ-पित्त को दूषित करने वाले पदार्थों के सेवन करने से या कोई भी ऐसे कार्यों को अति तक करना जिससे कि ये दोष कुपित होकर रक्त को प्रभावित कर दें, होता है। आप सर्वप्रथम तो बाजारू साफ़्टड्रिंक्स का सेवन तत्काल बंद कर दीजिये जो शायद आपके मामले में रोग के मुख्य कारण सिद्ध हो रहे हैं इसके साथ नमक,मिर्च, खटाई, चाय, काफ़ी का प्रयोग भी बंद करना आपके लिये हितकर है। सबसे पहले आपकी कोष्ठशुद्धि अनिवार्य है जिसके लिये दो चम्मच एरण्ड का तेल(CASTOR OIL) एक कप हलके गर्म मीठे दूध के साथ मिला कर रात में सोने से पहले पी लें, लेकिन ध्यान रखिये कि जिस दिन रात में ये दवा लें उस दिन में बस खिचड़ी ही खायें और उसमें भी ज्यादा मात्रा में शुद्ध घी मिला कर(वनस्पति घी का प्रयोग न करें) । सुबह आपको इससे तीन चार बार दस्त होंगे जिससे घबराईये मत। जिस प्रकार गंदे कपड़े पर रंग नहीं चढ़ता उसी तरह यदि शरीर की भी शुद्धि न करी जाए तो दवाएं लाभ नहीं देतीं। तीन दिन तक आप इस जुलाब को लीजिये ताकि भलीभांति पेट साफ हो जाए। इसके बाद निम्न उपचार लीजिये --
१ . गंधक रसायन २० ग्राम + रस माणिक्य १० ग्राम + तालकेश्वर रस १० ग्राम को भली प्रकार घोंट कर मिला लें तथा कुल साठ बराबर मात्रा की पुड़िया बना लीजिये। सुबह- शाम को एक एक पुड़िया खदिरारिष्ट २ चम्मच+ महामंजिष्ठादि काढ़ा ४ चम्मच के साथ निगल लीजिये।
२ . नीम की सूखी पत्तियां १०० ग्राम + उसवा १०० ग्राम + मजीठ ५० ग्राम + सारिवा ५० ग्राम + चोपचीनी ५० ग्राम इन सबको गिलोय के रस के साथ घोंट कर मटर के दाने के बराबर की गोलियां बना लीजिये और एक एक गोली सुबह-दोपहर-शाम को जल के साथ लें लेकिन अगर ये सब कूटना पीसना संभव न हो सके तो इस पूरी औषधि के स्थान पर एक-एक गोली पंचतिक्त घृत गुग्गुलु सुबह-दोपहर-शाम को इसी प्रकार लीजिये।
३ . महामरिच्यादि तेल को छालों पर ऊपर से लगायें। ये दिन में कई बार लगाया जा सकता है।

शुक्रवार, अप्रैल 18, 2008

हर्पीज़(HERPES) नामक बीमारी है.....

डा.साहब,नमस्कार; पिछले दो दिनों से 100-101 तक बुखार है, दोनो बाहों के बगल में गांठें सी बन गईं हैं, सीने पर तेज जलन और दर्द के साथ छोटे-छोटे कुछ फफोले से उभर आये हैं जो कि एक कतार या मालानुमा दिख रहे हैं, ऐसा दर्द है जैसे कि कोई कैंची से काट रहा हो। घर के लोगों ने कहा कि मकड़ी के काटने से ऐसा हुआ होगा लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसा हुआ है अतः डाक्टर को दिखाने से पहले ही मेरे एक मित्र ने बताया कि यह हर्पीज़(HERPES) नामक बीमारी है जिसका यदि सही इलाज न हुआ और फफोलों को घेरा पूरे सीने से होता हुआ पीठ तक जाकर पूरा हो गया तो मौत तक हो सकती है। मैं बहुत डर गया हूं मुझे अपने कई पुराने अनुभवों के कारण एलोपैथी पर विश्वास नहीं रहा है अतः तत्काल कोई कारगर इलाज बताइये।
जयंत कुलकर्णी,नासिक(महाराष्ट्र)
जयंत जी,आयुर्वेद पर विश्वास दिखाने के लिये धन्यवाद वरना तो लोग पहले एलोपैथी की शरण में ही जाते हैं और जब रोग लाइलाज अवस्था में आ जाता है तब आयुर्वेद के पास आते हैं। ये सत्य है कि आपकी बीमारी तकलीफ़ देने वाली है लेकिन डरिये मत आप शीघ्र ही स्वस्थ हो जाएंगे। यह एक विषाणु का संक्रमण है जो कि असाध्य तो हरगिज नहीं है तो लीजिये प्रस्तुत है आपकी समस्या का समाधान--
१ . स्थानीय लेप(local application) के लिये गाय का घी २० ग्राम + सहजन(drum stick) या मुनगा के पत्तों की चटनी २० ग्राम + गंधक १० ग्राम + यशद भस्म ५ ग्राम मिला कर खूब घोंट कर मलहम जैसा बना लीजिये और दिन में कम से कम तीन बार लगाइये।
२ . गिलोय सत्त्व २५० मिग्रा. + चिरायता चूर्ण २५० मिग्रा. + अनंतमूल चूर्ण २५० मिग्रा. + गंधक रसायन २५० मिग्रा. रसमाणिक्य ५० मिग्रा.
इन सारी औषधियों को भली प्रकार घोंट कर एक मात्रा बनाएं व इसी अनुपात में अनुमानतः २० दिन की मात्रा बना लीजिये व सुबह- दोपहर व रात को एक-एक मात्रा को गाय के एक चम्मच घी में एक चम्मच मिश्री(खड़ी शक्कर) मिला कर लें।
मात्र तीन दिनों में आपको चमत्कारिक लाभ दिखने लगेगा किंतु बीस दिन तक दवा अवश्य लें ताकि रक्त शुद्धि हो जाये। आहार में सुपाच्य भोजन लीजिये और तेल मसाला तथा मांसाहार बंद कर दें जब तक औषधि लें।

गुरुवार, अप्रैल 17, 2008

I always feel constipation........

Respected Dr.Rupesh, I M working in a call centre(mumbai) as a team leader and nature of my work is very passive and shiftwise,I M always sitting and listening the calls made by my colleagues. I always feel constipation. Lunch time is very short and we are to finish our lunch in that given time. I use to smoke but do not drink. Should I use some market laxatives? Are these products harmless? What to do plz guide.
Siddhaant sharma,mumbai
Dear siddhaant, don't worry; it is a common problem. If you have only 15 minutes spare for your body you need no medicine at all. Just set a routine according to your shift duty for some physical exercises as- kapaalbhaati pranayam and if you do not feel comfortable with physical exercise then go for medicine. Use fiberous food,take juices and avoid eggs, junk food like vada-paav or chinese food, have sufficient water. You may take laxatives ones in a week as -
1 . GANDHARVA HARITAKI(गन्धर्व हरीतकी) one Tea spoon with luke warm water at bed time.
2 . NAARAACH RAS(नाराच रस) one tab with with luke warm water at bed time.{HEAVY LAXATIVE}
3. ICHCHAABHEDI RAS(इच्छाभेदी रस) one tab with with luke warm water at bed time.{HEAVY LAXATIVE}
4 . PANCH SAKAAR CHURNA(पंचसकार चूर्ण) one Tea spoon with luke warm water at bed time.

बुधवार, अप्रैल 16, 2008

जोडों में सूजन है व चुभन जैसा दर्द होता है....

डा.साहब प्रणाम,पिछले दो माह से मेरे शरीर के लगभग सभी जोडों में सूजन है व चुभन जैसा दर्द होता है, चलते-फिरते नहीं बनता, खड़े होने तथा बिस्तर पर लेटने की स्थिति में पीड़ा जारी रहती है,सूजे हुए स्थान पर ऐसा लगता है कि बिच्छू ने डंक मार दिया है, मुंह से बदबू आती रहती है चाहे कितना भी अच्छा टूथपेस्ट क्यों न इस्तेमाल करूं, भोजन करने का मन ही नहीं करता है, मुंह में हमेशा लार सी बनती रहती है, शुरू में करीब बीस दिन तक तो हलका स बुखार रहता था जो कि एलोपैथिक दवा से ठीक हो गया लेकिन ये समस्या खत्म नहीं हो रही है। मेरी कपड़े की दुकान है तो दिन भर बैठा रहना होता है, व्यायाम के लिये समय ही नहीं मिल पाता है, क्भी-कभी बदन पर खुजली भी होती है। मुझे समझ में ही नहीं आ रहा कि मुझे ये क्या हो रहा है? मेहरबानी करके कोई उपाय बताइये।
राजेन्द्र मेहता,राजकोट
मेहता जी, आपकी बीमारी का कारण है आपका ऐसा आहार-विहार जिसमें कि शारीरिक श्रम शामिल नहीं है और आप व्यायाम भी नहीं करते हैं। आपको हुई बीमारी का नाम है "आमवात"। सबसे पहले आपके शरीर की शुद्धि के लिये लंघन, स्वेदन एवं विरेचन कराना होगा। पहले आप एक या दो दिन क्षमतानुसार उपवास करिये,दिन में बस दो चार फल खाइये; कोष्ठबद्धता दूर करने के लिये आप रात को एक गिलास हल्के गुनगुने मीठे दूध में दो चम्मच एरण्ड का तेल(castor oil) मिला कर पी लें जिससे कि सुबह दो-चार दस्त आकर पेट साफ हो जाएगा। स्वेदन के लिये रेत या बालू, राई, एरण्ड बीज, सैंधा नमक, इनकी पोटली बना कर गरम तवे पर रखें व सुहाता-सुहाता सा सेंक करें ध्यान रखिये कि ज्यादा गर्म न हो; हाथ, पैर, उंगली, कंधे, कमर सब जगह सेंक करें। वातवर्धक आहार से बचें, अरबी(घुइयां),आलू, गोभी, भिण्डी का सेवन न करें। पुराने गेंहू की रोटियां, मूंग की दाल, करेला, परवल, लहसुन, मेथी, चौलाई, बथुआ खाएं व दूध में सोंठ का चूर्ण मिला कर पिया करें। निम्न औषधियां लें---
१ . अग्नितुण्डी बटी १ गोली + शंख भस्म दो चुटकी + साथ लेकर दो चम्मच दशमूलारिष्ट के साथ लीजिये दिन में दो बार भोजन के बाद।
२ . महायोगराज गुग्गुलु २ गोली दिन में दो बार महारास्नादि काढ़े के साथ लीजिये।
३ . आमवातारि रस १ + त्र्योदशांग गुग्गुलु १ गोली दिन में तीन बार अश्वगंधारिष्ट के दो चम्मच के साथ लीजिये।
इस पूरे औषधिक्रम को लगातार दो माह तक लीजिये तथा भले ही दुकान तक पैदल जाएं अपने स्वास्थ्य के लिये इतना तो व्यायाम के तौर पर करिये ही अन्यथा दवाएं बंद करने पर पुनः रोग के लक्षण वापस आ सकते हैं। यदि औषधियों के संबंध में संबंधी कोई जानकारी लेनी हो तो निःसंकोच मुझे ई-मेल करें।

रविवार, अप्रैल 13, 2008

एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड कराने से भी कुछ नहीं निकला......


डॉक्टर साहब, मेरे पेट के दाहिने हिस्से में ठीक बीचोंबीच में हमेशा दर्द रहता है। एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड कराने से भी कुछ नहीं निकला। दवा भी खूब कराई-लेकिन दर्द ठीक नहीं हो रहा है। पेट हमेशा भारी रहता है। आंव जैसा भी आता है और एसिडिटी भी खूब रहती है। कमजोरी तो खैर रहती ही है। बताईए क्या करूं ताकि स्वास्थ्य ठीक हो।
पंडित जी
आत्मन बंधु पंडित जी,आपने जैसी समस्या बतायी है तो स्पष्ट है कि आपके ऊपर ऐलोपैथी के भरपूर प्रयोग करे जा चुके हैं,तमाम टैस्ट आदि भी करा चुके हैं किन्तु अब तक जब बीमारी ही समझ में नहीं आयी है तो उपचार तो स्वाभाविक है कि अंधेरे में तीर की भांति ही रहेंगे। माडर्न पैथोलाजी की निश्चित सीमाएं हैं उन्हें अंतिम निदान नहीं मान लेना चाहिये क्योंकि अगर आप डायग्नोसिस के अनुसार स्वस्थ हैं फिर भी अगर आप दर्द की शिकायत करते हैं तो जो आपसे संबंधित लोग हैं उन्हें या तो लगेगा कि आप बहाना करते हैं या फिर आपको दिमागी खलल है। सर्वप्रथम आप दो दिनों का मात्र जल पर उपवास करिये इसके बाद धीरे-धीरे फल व सब्जियों का रस प्रारंभ करें। फलों में अनार, बेल, पपीता, आंवला, नाशपाती, केला आदि उपयोगी हैं। सब्जियों में लौकी, कद्दू, खीरा, तोरई, नेनुआ, टिण्डा, परवल, बथुआ, पालक, हरी मेथी, चौलाई, गाजर, पत्तागोभी, मूली के हरे पत्ते आदि रुचि अनुसार लें। चार दिन इस तरह से ठोस आहार बंद रखिये तदुपरांत ठोस आहार शुरू करिये। चोकर युक्त गेहूं की दो रोटी उबली सब्जी जिसमें कि बस स्वादानुसार नमक ही हो कोई मसाला मत डालियेगा, सूप, पतला दलिया, छाछ, सलाद, अंकुरित अनाज आदि जठराग्नि के अनुसार लीजिये यानि कि जो आसानी से पच जाए। धीरे-धीरे पंद्रह दिनों में सामान्य आहार पर आइये। मांस, मछली, अण्डा, केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, चाकलेट, तले भुने पदार्थ,चायनीज व्यंजन, गरिष्ठ भोजन, अत्यधिक वसायुक्त भोजन बिलकुल बंद रखें। और निम्नलिखित उपचार को लेना शुरू करिये: -
१ . प्रवाल पंचामृत रस ३ ग्राम + अम्लपित्तान्तक रस ५ ग्राम + सूतशेखर रस(साधारण) ५ ग्राम + लीला विलास रस ५ ग्राम + मुक्ताशुक्ति पिष्टी ५ ग्राम + सितोपलादि चूर्ण ३० ग्राम ; यानि कि कुल मिश्रण बनेगा ५३ ग्राम और अब इस मिश्रण की समान मात्रा की तीस पुड़ियां बना लीजिये और एक-एक पुड़िया में सुबह दोपहर शाम को एक ग्राम आंवला चूर्ण मिला कर शहद के साथ चाट लीजिये व ऊपर से दो चम्मच भूनिम्बादि काढ़ा पी लीजिये दवा लेने के आधे घन्टे तक पानी न पियें। दवाएं नाश्ता करने के बाद ही लें।
२ . दिन में सुबह आठ बजे के आसपास और शाम को चार बजे के आसपास कच्चे नारियल(गरी) २० ग्राम को मिश्री मिला कर दूध के साथ दीजिये। ये दवा खाली पेट ले सकते हैं इसके आधा घंटे बाद नाश्ता करिए यदि चाहिए तो।
३ . भोजन से दस मिनट पहले यवानी खाण्डव चूर्ण ३ ग्राम मुंह में रख कर चाटें व भोजन करने के दस मिनट बाद अविपत्तिकर चूर्ण ३ ग्राम जल से लीजिये।
लगातार दो माह तक उपचार लीजिये और विश्वास करें कि आप स्वस्थ हो जाएंगे बल्कि पहले ही सप्ताह से आप स्वयं कहेंगे कि आयुर्वेद वाकई चमत्कारिक है।

शनिवार, अप्रैल 12, 2008

किडनी में पथरी है....



आदरणीय डा.रूपेश, नमस्कार; मेरे भाई की उम्र बीस साल है आज उसे बैडमिंटन खेलते-खेलते अचानक कमर में दर्द शुरू हुआ जो कि नीचे अण्डकोशों तक फैल गया है। कभी कभी वो दर्द से कराह उठता है, एक बार उल्टी भी हो चुकी है किन्तु इससे कोई अंतर नहीं पड़ा। नाभि के पास के क्षेत्र में कुछ भारीपन की शिकायत कर रहा है। चलने-फिरने की कोशिश से दर्द की लहर सी उठ जाती है लेकिन अगर एक ही स्थिति में रहा जाए तो कुछ देर में दर्द कम होते-होते बंद हो जाता है। कोई तत्काल आराम देने वाला उपचार बताएं बड़ा कष्ट है और ऐसा क्यों हुआ है। हम लोग मांसाहारी भोजन भी करते हैं, भाई को कोई व्यसन नहीं है।
रविकांत रायकवार,झांसी(उ.प्र.)
रविकांत जी,आपने जो पिछले माह करवाई मूत्र की रिपोर्ट भेजी है उसमें मूत्र में रेड सेल्स, पस सेल्स व प्रोटीन की उपस्थिति है। आपके भाई को दरअसल किडनी में पथरी है जो कि खेलने के फ़ौरान अपने मूल स्थान से च्युत हो गयी है जिस कारण इतना तेज दर्द शुरू हो गया है। चिंतित न हों कल सुबह ही नीचे लिखी दवाएं उन्हें दीजिये और तत्काल दर्द निवारण के लिये उन्हें जामुन के दो चम्मच सिरके में दो चुटकी खाने वाला सोडा डाल कर दे दीजिये और फिर आधे घंटे तक पानी न दें दर्द समाप्त हो जाएगा। ज्यादा हिले-डुलें न ताकि तकलीफ़ न हो।
१ . हजरुलयहूद भस्म १५ ग्राम + कलमी शोरा १५ ग्राम लेकर मिला लें व इस मिश्रण की तीस पुड़िया बना लें और सुबह शाम नारियल पानी या सादे पानी के साथ एक-एक पुड़िया लें।
२ . तारकेश्वर रस एक-एक गोली सुबह शाम वरुणादि कषाय के चार ढक्कन दवा के साथ दीजिये।
३ . गोक्षुरादि गुग्गुलु और त्रिफला गुग्गुलु दो-दो गोली सुबह-दोपहर-शाम को पानी के साथ दीजिये।
मात्र पंद्रह दिनों के भीतर अगर ईश्वर ने चाहा तो यदि ज्यादा बड़े आकार की पथरी नहीं है तो घुल कर मूत्रमार्ग से कब निकल जायेगी पता ही नहीं चलेगा। एक बात का ध्यान रखिये कि इन पंद्रह दिनों में रोगी को मांसाहार से परहेज करवाएं।

शुक्रवार, अप्रैल 11, 2008

पेट में हल्का-हल्का दर्द बना रहता है....

डाक्टर साहब,मेरी उम्र अड़तीस साल है। मैं पिछले तीन माह से पेट की समस्या से बहुत परेशान हूं। पेट में हल्का-हल्का दर्द बना रहता है, भूख भी कम लगती है, शौच जाने के बाद भी लगता है कि पेट अभी साफ नहीं हुआ है, कमजोरी बनी रहती है, मुंह में पानी सा घुलता रहता है। एक वैद्यजी ने मुझे बताया कि ये आंव की समस्या है दो सप्ताह उपचार लेने पर ठीक रहा पर फिर से समस्या वैसी ही है। उपचार बताइये बड़ी मेहरबानी होगी मैं बहुत त्रस्त हो गया हुं।
आर.के.शर्मा, गाजियाबाद
शर्मा जी,धैर्य रखिये अब आप पूर्णतया स्वस्थ हो जाएंगे। सबसे पहले तो पंचसकार चूर्ण एक चम्मच रात्रि में सोते समय आधा कप गुनगुने जल में घोल कर पी लें। गरिष्ठ व तले हुये पदार्थ बिलकुल बंद कर दें। मीठा, चिकनाई, चाय, दूध का सेवन न करें ये आपको नुकसान करते हैं। हल्का व सुपाच्य भोजन ही करें। प्रातःकाल टहलना और हल्का व्यायाम करें। सुबह की शुरुआत मक्खन निकाले हुये मट्ठे में नमक, हींग, भुना हुआ ज़ीरा डालकर पियें। दोपहर में चित्रकादि बटी एक गोली मुंह में डाल कर चूसिये और निम्न उपचार लीजिये...
१ . अग्निकुमार रस ५ ग्राम + यकृत हर लौह ५ ग्राम + शंख भस्म ५ ग्राम लेकर कुल तीस पुड़िया बना लीजिये और एक-एक पुड़िया सुबह-शाम शहद के साथ लीजिये।
२ . नवायस लौह ५ ग्राम + शुक्ति भस्म ५ ग्राम लेकर कुल तीस पुड़िया बना लीजिये और एक-एक पुड़िया दोपहर और रात्रि में शहद के साथ लीजिये।
तीन दिन में एक बार रात को सोने से पहले पंचसकार चूर्ण एक चम्मच ले लिया करें।

जल्दी-जल्दी सर्दी हो जाती है.......

आदरणीय डाक्टर साहब,मेरी उम्र पैंतीस साल है। सात साल पहले मेरी छाती में कफ़ बनने की शिकायत थी जो कि काफ़ी खखारने पर एकदम गाढ़ी चाकलेटी रंग के बलगम के रूप में बाहर आता था। मैंने एन्टीबायोटिक दवाएं एक सप्ताह का कोर्स डाक्टर के बताने पर लिया क्योंकि उस समय रक्त में इओसिनोफ़िल काफ़ी बढ़ा हुआ था। कुछ दिन तक इससे आराम रहा लेकिन फिर कफ़ बनने की शिकायत हो गयी जिसे मैंने साधारण समझ कर ध्यान नहीं दिया किन्तु अब मुझे जल्दी-जल्दी सर्दी हो जाती है एक तरह से कहूं तो जीना हराम हो गया है, हरदम ही आवाज घरघराना, नाक बहना ,छींके आना चालू रहता है। आप कोई स्थायी हल बताइये बड़ी मेहरबानी होगी।
देवचरण साहू,दुर्ग(छत्तीसगढ़)
देवचरण जी, आप आयुर्वेद पर विश्वास करके आयुषवेद पर आए हैं तो आपको निराशा न होगी। आप पहले अपने आहार-विहार में तनिक परिवर्तन करें जिससे आप तुरंत लाभ प्राप्त कर सकें। सुबह-शाम हल्का व्यायाम करिये, गर्मी शुरू हओने जारही है तो ध्यान रखिये कि गर्मी से आकर तुरंत कोई भी शीतल पेय न लें। दूध, चाय, काफ़ी, चिकनाई और गुड़, तेल, दही, मट्ठा, उड़द, अरहर की दाल, मूली, चावल भोजन में प्रयोग न करें। गेंहू का दलिया, गेंहू की रोटी, मूंग, मसूर की दाल का प्रयोग भोजन में करें और निम्न औषधियां नियम से लीजिये फिर देखिये आयुर्वेद का चमत्कार......
१ . श्रंगाराभ्रक रस १० ग्राम + स्वर्ण बसंतमालती रस ०५ ग्राम + सितोपलादि चूर्ण १० ग्राम + श्रंग भस्म १० ग्राम; इन सब औषधियों को मिला कर पूरे मिश्रण की कुल ६० पुड़ियां बना लीजिये व सुबह शाम एक-एक पुड़िया शहद से लें।
२ . कफ़केतु रस १० ग्राम + प्रवाल भस्म १० ग्राम + टंकण भस्म १० ग्राम ; इन सबको मिला कर ऊपर लिखी दवा की तरह ही ६० पुड़ियां बना लीजिये व दोपहर व रात्रि को एक चम्मच मलाई में आधा चम्मच शक्कर मिला कर एक-एक पुड़िया लें।

मंगलवार, अप्रैल 08, 2008

कहीं मुझे पीलिया तो नहीं हो गया ?

डा.साहब,शायद change of water या ऐसे ही किसी संभावित कारण से मुझे ऐसा लग रहा है कि कहीं मुझे पीलिया तो नहीं हो गया है क्योंकि मूत्र का रंग एकदम पीला आ रहा है। मैं कभी-कभी शराब का सेवन कर लेता हूं और मांसाहार भी करता हूं। मेरी नौकरी के कारण मुझे अकसर टूर पर रहना पड़ता है। उपाय बताएं।
यशवंत सिंह,दिल्ली
भाईसाहब, आपने जो संभावना बतायी है उस आधार पर और आपसे फोन पर जो बाते हुईं है बहुत संभव है कि आपको पीलिया की शुरूआत है। इसे अगर नजरअंदाज करा तो संभव है कि बीमारी गंभीर रूप ले ले। कुछ उपचार लिख रहा हूं अविलंब ले लीजिये---
१ . नवायस लौह ३-३ रत्ती दिन में दो बार मट्ठे या शहद के साथ लें।
२ . पुनर्नवादि मंडूर की १-१ गोली दिन में तीन बार मट्ठे या गो मूत्र के साथ लें।
३ . लोहासव २-२ चम्मच सुबह शाम बराबर मात्रा जल के साथ लें।
अगर ये शास्त्रोक्त औषधियां न मिल सकें तो एक सफेद फिटकरी को तवे पर भून लीजिये ध्यान रहे कि जलने न पाए, फिर दो ग्राम भुनी हुई फिटकरी को २० ग्राम दही के साथ लीजिये अथवा कलमी शोरा १० ग्राम और ५० ग्राम मिश्री(खड़ी शक्कर) बारीक पीस लें ये मिश्रण ३-३ ग्राम जल से लीजिये। अगर ये कुछ भी न मिले तो मूली के हरे पत्तों शक्कर मिला कर मीठा कर लें और दिन में इसी तरह बनाया रस २-२ कप तीन बार पियें। आपकी बीमारी गायब हो गयी आपको दो-चार दिनों में ही समझ आ जाएगा।

गुरुवार, अप्रैल 03, 2008

माथे पर चिपकाने वाली बिन्दी से सफेद दाग

आदरणीय डाक्टर साहब,मैं काफ़ी दिनो तक माथे पर चिपकाने वाली बिन्दी का प्रयोग करती रही लेकिन पिछले दो माह से मैने देखा कि बिन्दी चिपकाने वाले स्थान पर सफेद सा दाग़ हो गया है जिसमें कि कभी-कभी खुजली सी भी प्रतीत होती है। डर्मेटोलाजिस्ट को दिखाने पर उसने बताया कि यह बिन्दी चिपकाने के कारण ही हुआ है। उन्होंने कुछ दवाएं दी हैं किन्तु दो माह में कोई अन्तर नहीं दिखा। हारकर आयुर्वेद की शरण में आयी हूं मुझे पता है कि निराशा न होगी।
नैना शाह,पोरबंदर(गुजरात)
नैना बहन,आपके डर्मेटोलाजिस्ट ने जो बताया मैं भी उससे सहमत हूं क्योंकि बिन्दी निर्माता कई बार चिपकाने वाले पदार्थ के स्थान पर राल जैसे वनस्पति उत्पाद लेने की जगह केमिकल्स इस्तेमाल करते हैं जो कि किसी किसी की संवेदनशील त्वचा को नुक्सान कर जाते हैं। आपके लिये जो सरलतम उपाय है वह प्रस्तुत है लेकिन इस विश्वास के साथ कि आपको गोमूत्र के प्रयोग से कोई अड़चन न होगी, हिन्दू गोमूत्र को तो एक पवित्र पदार्थ मानते हैं और यदि औषधि के तौर पर हमें कभी कोई ऐसी वस्तु प्रयोग करनी भी पड़े तो उसे धार्मिक मान्यताओं से अलग रख कर मात्र औषधि की तरह इस्तेमाल कर लेना चाहिये। आप बाकुची(बावची) के बीजों को बारीक पीस कर गोमूत्र के संग मिला लें और प्रभावित स्थान पर लेप करें यकीन मानिये शीघ्र ही आप आशातीत लाभ महसूस करेंगी । सुबह शाम एक-एक गोली आरोग्यवर्धिनी की भोजन के बाद ले लिया करें।