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गुरुवार, मई 08, 2008

मेरा गुप्तांग बाहर निकल आता है........


डॉक्टर साहब, मैं बहुत दिनो तक इस समस्या को सहन करती रही कि मैं तो एक अकेली स्त्री हूं और पति का स्वर्गवास हुए चार वर्ष बीत चुके हैं और बच्चे बड़े हैं मेरी उम्र तैंतालीस साल है। मेरा गुप्तांग बाहर निकल आता है, गायनेकोलाजिस्ट को दिखाने पर उसने बताया कि ये एक प्रकार का योनि का पक्षाघात है। एलोपैथी में इसका कोई उपचार है भी नहीं और साथ ही मैं भी ये सोचती रही कि मुझे अब क्यों इस विषय में सोच कर परेशान होना चाहिये किन्तु अंग बाहर निकल आने से बड़ी तकलीफ़ होती है। कोई उपाय बताइये जो ज्यादा मंहगा न हो।
जयंती सलुजा,आगरा
जयंती बहन, आप परेशान न हों, सत्य है कि एलोपैथी में इस समस्या का कोई उपचार नहीं है। मैं आपकी समस्या को भली प्रकार समझ रहा हूं ये वाकई में एक प्रकार का पक्षाघात ही है। आपको एकदम सस्ता उपचार बता रहा हूं लेकिन मूल्य में सस्ता होने के बावजूद ये योग सोने से तौला जाने वाला है।
१ . काले तिल २० ग्राम + शोधित गंधक ४० ग्राम दोनो को बारीक पीस कर मिला लें और आवश्यकतानुसार शहद मिला कर चटनी जैसा अवलेह बना लें तथा एक-एक ग्राम मात्रा दिन में दो बार सेवन करें(नाश्ते और रात्रि को भोजन के बाद) ।
२ . भूनी हुई फिटकरी ६० ग्राम + माजुफल १२० ग्राम + पोस्तडोडा १० ग्राम(यदि मिल सके तो इसके स्थान पर दो ग्राम अफीम ले सकते हैं किन्तु ये कई स्थानो पर कानूनी अड़चन दे सकता है इसलिये न लेना ही बेहतर रहेगा) । मजबूत हाथों से इस मिश्रण को एकदम बारीक पीस लें। मासिक धर्म होने के बाद उक्त चूर्ण की दो ग्राम की मात्रा को एक मलमल के साफ कपड़े में पोटली बना कर नित्य स्नान करने के बाद योनि में एक सप्ताह तक रोज रखा करें तथा संध्या को पोटली निकाल दिया करें फिर एक सप्ताह के लिये इस उपचार को रोक कर पुनः इसी प्रकार करें यानि कि एक सप्ताह तक उपचार लें व एक सप्ताह बंद रखें इसी प्रकार तीन माह त्क जारी रखें। आप विश्वास रखिये कि आपकी समस्या समाप्त हो जाएगी और जीवन भर फिर कभी न होगी।
३ . कब्जियत न रहे इस लिये त्रिफला चूर्ण सेवन कर लिया करें जरूरत होने पर।

रविवार, मार्च 16, 2008

गायनेकोलाजिस्ट्स को बताने पर भी कुछ लाभ नहीं,गुप्तांग में हमेशा सूजन

डॉक्टर साहब ,मेरी समस्या इतनी परेशानी भरी है कि क्या बताऊं क्योंकि कई गायनेकोलाजिस्ट्स को बताने पर भी कुछ लाभ नहीं होता है दो या चार दिन जब दवा खाती हूं तब ठीक रहता है लेकिन फिर वैसा ही हो जाता है । आपको बताने में काफी शर्म भी आ रही थी पर मेरी माताजी के दबाव डालने पर बता रही हूं । मेरे गुप्तांग में हमेशा सूजन बनी रहती है सामान्यतः बहुत कष्ट होता है तो आप जान सकते हैं कि पारिवारिक जीवन का क्या हाल होगा । मेरी उम्र चालीस साल है ,मासिक धर्म नियमित है,कभी-कभी कब्जियत रहती है,वजन सामान्य से शायद थोड़ा ज्यादा है । कृपा करके कोई स्थायी और कारगर आयुर्वेदिक इलाज बताइये ।
आपकी एक बहन,भावनगर
बहन,आपने अपनी समस्या को न बताने लायक मान कर छिपाने और सहन करने का प्रयास करा जो कि उचित नहीं है ,लज्जा स्वाभाविक है पर यह तो बीमारी है यदि आप इसे छिपायेंगी तो यह और बढ़कर ज्यादा कष्ट्कारी होगी । इसलिये लज्जा एक सीमा तक सार्थक और उचित है । आप अपनी अन्य परिचित बहनों को भी बताएं कि यदि वे अपनी समस्याओं को दबाने या छिपाने की कोशिश करेंगी तो कष्ट तो उनको ही सहना होता है । आपके पति को इससे कोई पीड़ा नहीं होती तो जबतक आप खुद होकर उन्हें नहीं बताएंगी उन्हें पता ही नहीं चलेगा । उपचार लिख रहा हूं ,नियमित रूप से दो माह तक लीजिये,पंद्रह दिनों में लाभ स्थायी दिखने लगेगा फिर भी आगे तक दवाएं जारी रखिए और पति संसर्ग से परहेज के लिये उन्हें समझाइए कि आप बीमार हैं और आपको तकलीफ़ हो रही है जल्द ही सब ठीक हो जाएगा और पारिवारिक जीवन सामान्य हो जाएगा ,तेज मिर्च-मसालेदार और मांसाहारी भोजन से भी परहेज करें ---
१ . चन्द्रप्रभा वटी एक गोली + आरोग्यवर्धिनी वटी एक गोली + गंधक रसायन एक गोली ,इन दवाओं को सुबह शाम साधारण पानी से लीजिए ।
२ . पुष्यानुग चूर्ण (ये न मिल पाने पर खदिरत्वक चूर्ण) तीन ग्राम दोपहर व रात्रि को पानी से लीजिए ,भोजन के बाद ।
३ . त्रिफला गुग्गुलु की दो-दो गोली सुबह दोपहर शाम को गुनगुने गरम पानी के साथ लीजिये ,ध्यान रखें कि कोई भी दवा खाली पेट नहीं लें जब तक चिकित्सक न कहे ।
४. पंचवल्कल क्वाथ या त्रिफला क्वाथ से प्रभावित अंग को धोया करिये दिन में दो बार जैसी सुविधा हो ।
५. कल्पतरु तेल में रुई का टुकड़ा भिगो कर अंग में धारण करिये जैसी सुविधा जान पड़े ।
आप परहेज का पालन करिये और फिर देखिये कि आयुर्वेद में कैसा चमत्कार है ।