नमस्कार डा. साहब, मेरी उम्र २४ वर्ष है और मुझे पिछले करीब ६ वर्ष से एक समस्या ने परेशान किया हुआ है. मेरे पूरे शरीर की त्वचा बेहद नाजुक है. एक मामूली सी खरोंच, किसी चीज के छू जाने या तौलिये से चेहरा पोंछ लेने भर से शरीर के उस हिस्से में लालामी भरे चकत्ते हो जाते हैं. चकत्ता ठीक उसी आकर का बनता है जितनी जगह पर खरोंच हुई हो या किसी का हाथ छू गया हो. और ये निशान और लालामी मात्र ५ से १० मिनट में अपने आप गायब हो जाती है जैसे कुछ हुआ ही न हो. बिना खरोंच आदि के मैं एकदम सामान्य रहता हूँ और मुझे देखकर कोई जान भी नही सकता की मुझे ऐसी कोई बीमारी है. मैंने ४ वर्ष पहले एलर्जी टेस्ट करवाया था, जिसके अनुसार बाद मे एक वर्ष तक वैक्सीनेशन भी नियमित करवाया, पर कोई लाभ नहीं हुआ. फ़िर होम्योपैथ से भी महीनों तक इलाज करवाया पर मामूली लाभ तक नहीं दिखा. मैं आजकल कोई भी नियमित एलोपैथिक दवा नही ले रहा हूँ. हाँ, अधिक तकलीफ होने पर मैं कभी कभी CETRIZINE दवा एक खा लेता हूँ तो फ़िर करीब एक हफ्ते तक ये चकत्ते बनना काफी कम हो जाता है, बाद में दवा का असर खत्म होने पर फ़िर पहले जैसा. कृपा करके मुझे कोई स्थाई समाधान बताये. घर पर रहता हूँ तो चल जाता है, पर किसी और के घर जाने पर तो मैं खाना खाने और हाथ मुंह धोने से भी कतराता हूँ क्योंकि मेरे चेहरे पर आए इस असामान्य परिवर्तन से लोग मुझे अजीब सी हिकारत भरी नजरो से देखने लगते हैं और मेरे पास आने से कतराते हैं जैसे कि मेरे पास आने से उनको भी ये बीमार न लग जाए. मैं थक चुका हूँ लोगों को अपनी इस बीमारी के बारे में बता बता कर. मेरी मदद करें.
Thanks and Regards
Punit Omar, Pune
Email: pomar@techmahindra.com
पुनीत जी, आपकी समस्या को देखा और समझा। आप यकीन करिये कि आप किसी गम्भीर समस्या से तो हरगिज़ ग्रस्त नहीं हैं बस आपको अब तक दुर्भाग्यवश सही उपचार और सलाह नहीं मिले। आपकी समस्या त्वचान्तर्गत पित्त से संबद्ध है। इस तरह से होने वाले लक्षणों का कारण पित्त का कोप ही होता है। आप एलर्जी वगैरह के भ्रम में अगर पड़ गये तो सारी जिंदगी उसी में उलझे रहेंगे। आपकी समस्या कोई ऐसी नहीं है कि जो अन्य किसी को संक्रमित कर सके ,क्या आप एकदम ही जाहिल किस्म के लोगों की संगति में हैं? जो लोग आप से कतराते हैं उन्हें आप खुद ही छोड़ दीजिये क्योंकि ऐसे लोग जो आपका मुसीबत में साथ छोड़ दें उनसे दूर हो जाना ही हितकर होता है। लीजिये आपकी समस्या का समाधान प्रस्तुत है --
१ . सूतशेखर रस एक गोली + कामदुधा रस एक गोली दिन में दो बार भोजन करने के बाद शीतल जल से लीजिये।
२ . गिलोय सत्त्व दस ग्राम + प्रवाल पिष्टी दस ग्राम मिला लीजिये और इस मिश्रण में से २५० मिग्रा. औषधि दिन में दो बार खस के शर्बत या शर्बत रूह अफ़जाह(डाबर) के साथ लीजिये।
इस उपचार को दो माह तक लीजिये और आप अपने भोजन में मिर्च-मसाले का प्रयोग बंद कर दीजिये यही चीजें आपको नुकसान कर रही हैं। चायनीज व्यंजनों और बाजारू सौफ़्ट ड्रिंक्स से भी सख्त परहेज रखिये वरना दवा करने का कोई लाभ न होगा और बीमारी फिर लौट आयेगी। मांसाहार जब तक औषधि सेवन करें बंद कर दीजिये, सिगरेट आदि धूम्रपान से भी बचें।
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Namaskar Doctor Shahab. Me aapse apni samasya ka samadan chahta ho. sabse pahle me aapko apne bare me batana chahta ho meri aayo 21 year he ...
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प्रणाम डॉक्टर साहब, सर्वप्रथम तो आपका बहुत-बहुत शुक्रिया जो आपने मेरी समस्या पर इतनी तत्परता से प्रतिक्रिया दी. आपको मैं थोड़े से विस्ता...
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डॉ साहब ,आपको सादर नमस्कार . मैंने आपके बहुत सारे ब्लोग्स पढ़े हैं । वहाँ से प्रेरित होकर मई भी आप को मेल कर रहा हू आशा रख...
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कुछ सुझाव
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शुक्रवार, मई 23, 2008
लोग मुझे अजीब सी हिकारत भरी नजरो से देखने लगते हैं
Published :
5/23/2008 07:36:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
गुरुवार, मई 22, 2008
ऐसे चकत्ते उभर आते हैं जैसे कि चींटी ने काट लिया हो....
Published :
5/22/2008 08:03:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डा.साहब नमस्कार, पिछले एक माह से मुझे कलाइयों,चेहरे,कमर और पेट पर ऐसे चकत्ते उभर आते हैं जैसे कि चींटी ने काट लिया हो ,इन ददोरों में जलन और खुजली भी बहुत देज होती रहती है। आठ-दस घंटों में ये अपने आप ठीक हो जाते हैं मेरी पत्नी इन पर नारियल के तेल में कपूर मिला कर लगा देती है इससे थोड़ी राहत मिलती है लेकिन पूरी तरह से ठीक नही होता है। हमारे घर आये एक मित्र ने बताया कि इसे शीतपित्त कहते हैं लेकिन आजकल तो गर्मी है फिर ये रोग तो सर्दियों में होना चाहिये। लेकिन अगर किसी भी कारण से हो ही गया है तो इसका इलाज क्या है क्योंकि अपने पड़ोस में जो डाक्टर हैं उनकी दवा पंद्रह दिन से खा रहा हूं लेकिन कोई फायदा नहीं है । आप ही कुछ उपाय बताएं। धन्यवाद
मोहर सिंह,दादरी
सिंह साहब,आपकी समस्या को देखा और अच्छी तरह से समझा। आपको स्पष्ट करना था कि शीतपित्त नामक बीमारी का सर्दी के मौसम से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि ये शरीर में खान-पान या विहार की गड़बड़ी के कारण धातुतिक्ति(HISTAMINE) नामक तत्त्व उत्पंन हो जाता है जिसके कारण त्वचा पर इस तरह के खुजली और जलन लिये चकत्ते उत्पंन हो जाते हैं लीजिये आपके लिये उपचार प्रस्तुत है-
१ . सर्पगन्धा का बारीक कपड़े से छना हुआ चूर्ण ५ ग्राम + मुक्ताशुक्ति भस्म ५ ग्राम इन दोनो को मिला कर घोंट लीजिये एवं एकसार हो जाने पर २५० मिग्रा. की मात्रा दिन में तीन बार जल से दीजिये।
२ . हरिद्राखण्ड नामक औषधि एक चम्मच दिन में दो बार चटाइये और जल पिला दीजिये।
आप यकीन मानिये एक सप्ताह तक दवा सेवन कर लेने के बाद आपको इस बीमारी से छुटकारा मिल जाएगा और फिर शायद ही कभी जीवन में दुबारा हो।
मोहर सिंह,दादरी
सिंह साहब,आपकी समस्या को देखा और अच्छी तरह से समझा। आपको स्पष्ट करना था कि शीतपित्त नामक बीमारी का सर्दी के मौसम से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि ये शरीर में खान-पान या विहार की गड़बड़ी के कारण धातुतिक्ति(HISTAMINE) नामक तत्त्व उत्पंन हो जाता है जिसके कारण त्वचा पर इस तरह के खुजली और जलन लिये चकत्ते उत्पंन हो जाते हैं लीजिये आपके लिये उपचार प्रस्तुत है-
१ . सर्पगन्धा का बारीक कपड़े से छना हुआ चूर्ण ५ ग्राम + मुक्ताशुक्ति भस्म ५ ग्राम इन दोनो को मिला कर घोंट लीजिये एवं एकसार हो जाने पर २५० मिग्रा. की मात्रा दिन में तीन बार जल से दीजिये।
२ . हरिद्राखण्ड नामक औषधि एक चम्मच दिन में दो बार चटाइये और जल पिला दीजिये।
आप यकीन मानिये एक सप्ताह तक दवा सेवन कर लेने के बाद आपको इस बीमारी से छुटकारा मिल जाएगा और फिर शायद ही कभी जीवन में दुबारा हो।
सोमवार, मार्च 10, 2008
स्किन एलर्जी का क्या उपाय है.......?
Published :
3/10/2008 12:57:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डॉक्टर साहब,आपने एलर्जी के बारे में जो दवा बताई है वो तो श्वांस के लिये है पर मुझे भी एलर्जी की शिकायत है लेकिन मुझे इससे त्वचा पर खुजली और चकत्ते पड़ते हैं तो क्या मैं भी यही दवा खा सकता हूं ?
सज्जन सिंह,जामनगर
सज्जन साहब, आप उस दवा को न लेकर नीचे लिखी दवा लीजिये और ध्यान रखिये कि ऐसी कोई चीज न खाएं जो ज्यादा मसालेदार हो ।
१ . रस माणिक्य ५ ग्राम + लौहभस्म ५ ग्राम + गेरू १५ ग्राम + गंधक रसायन २५ ग्राम लीजिये ,इसमें सबसे पहले रसमाणिक्य को एकदम महीन घोंट लीजिए ताकि उसकी चमक खत्म हो जाए ;यह एक क्रिस्टलों के रूप में आने वाली आयुर्वेदिक औषधि है । रसमाणिक्य को एकदम महीन घोंट लेने के बाद उसमें बाकी दवायें मिला कर घोंट लें । दवा की आधा ग्राम मात्रा को खाली मुनक्के में भर कर सुबह शाम खाली पेट सारिवाद्यासव + महामंजिष्ठादि काढ़े के मिश्रण से निगलवाएं ।
२ . चालमोगरा तेल(तुबरक तेल) ५० मिली. + महामरिच्यादि तेल ३० मिली. + नीम तेल ३० मिली. मिला कर रखें व प्रभावित स्थान पर दिन भर में दो-तीन बार लगा लिया करें ।
आपकी समस्या में पहले दिन से ही लाभ दिखाई देना शुरू हो जाएगा ।
सज्जन सिंह,जामनगर
सज्जन साहब, आप उस दवा को न लेकर नीचे लिखी दवा लीजिये और ध्यान रखिये कि ऐसी कोई चीज न खाएं जो ज्यादा मसालेदार हो ।
१ . रस माणिक्य ५ ग्राम + लौहभस्म ५ ग्राम + गेरू १५ ग्राम + गंधक रसायन २५ ग्राम लीजिये ,इसमें सबसे पहले रसमाणिक्य को एकदम महीन घोंट लीजिए ताकि उसकी चमक खत्म हो जाए ;यह एक क्रिस्टलों के रूप में आने वाली आयुर्वेदिक औषधि है । रसमाणिक्य को एकदम महीन घोंट लेने के बाद उसमें बाकी दवायें मिला कर घोंट लें । दवा की आधा ग्राम मात्रा को खाली मुनक्के में भर कर सुबह शाम खाली पेट सारिवाद्यासव + महामंजिष्ठादि काढ़े के मिश्रण से निगलवाएं ।
२ . चालमोगरा तेल(तुबरक तेल) ५० मिली. + महामरिच्यादि तेल ३० मिली. + नीम तेल ३० मिली. मिला कर रखें व प्रभावित स्थान पर दिन भर में दो-तीन बार लगा लिया करें ।
आपकी समस्या में पहले दिन से ही लाभ दिखाई देना शुरू हो जाएगा ।
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