कब्ज लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कब्ज लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, मई 25, 2008

डायाफ्राम के नीचे दाहिने हिस्से में कुछ फूला सा महसूस होता है.....

सर,नमस्ते
मेरी उम्र २७ साल है लगभग नौ दस साल पहले मैं पीलिया से पीड़ित हुआ था। उपचार लेने के बाद पीलिया तो ठीक हो गया लेकिन एक नई समस्या तब से पीछा नहीं छोड़ रही है। मेरे पेट में नाभि के ऊपर डायाफ्राम के नीचे दाहिने हिस्से में कुछ फूला सा महसूस होता है। खाने के बाद लगता है कि खाना वहां पर ही अटक गया है, झुकने या उस स्थान को दबाने पर मुंह में अनपचा भोजन आ जाता है, ऐसा लगता है कि डकार आ जाए तो कदाचित राहत मिल जाएगी किन्तु डकार आती ही नहीं,ये उभरा हिस्सा दबाने पर दर्द नहीं करता है,कब्जियत बनी रहती है, गले में कफ़ रहता है जो कि खखारने पर पारदर्शी से बलगम के रूप में निकल आता है और ये कदाचित मीठा सा प्रतीत होता है बाकी तमाम उपद्रव आपको मैं फोन पर बता चुका हूं। परीक्षा नजदीक है इसलिये जरा त्वरित उपचार बताएं ताकि स्वस्थ होकर परीक्षा दे सकूं। धन्यवाद..
सौरभ,वाराणसी
सौरभ भाई, आपकी समस्या के बारे में समझा कि किस तरह से तमाम व्यवसायिक लोग आपके ऊपर आयुर्वेद से लेकर एलोपैथी के अनेक प्रयोग कर चुके हैं। सच तो ये है कि जब हम अपने ऊपर अनेक परीक्षण करवा चुके होते हैं तब हमारा ध्यान हमारे आसपास मौजूद ईश्वर की दी अनमोल चीजों से हट जाता है। बिना किसी भूमिका के आपको उपचार बता रहा हूं जिसे आपको वर्धमान क्रम में लेना है लेकिन उससे पहले आप पहले पंद्रह दिन सितोपलादि चूर्ण दो-दो ग्राम सुबह शाम शहद के साथ लीजिये फिर उसके बाद आप आधा ग्राम से शुरू ग्वारपाठा(एलोवेरा,घीग्वार) रोज आधा ग्राम बढ़ाते जाइये। इस प्रकार से आप जब रोज दोपहर के भोजन के बाद एलोवेरा का सेवन करें तो इस क्रम में यह मात्रा बढ़ कर दस ग्राम तक आ जाए तो इसके उलटे क्रम में मात्रा घटाना शुरू कर दीजिये और फिर आधा ग्राम पर आने के बाद पंद्रह दिन के लिये बंद कर दीजिये और फिर इसी क्रम में लीजिये ऐसी पूरी प्रक्रिया तीन बार दोहराइये आपकी बीमारी जड़ से गायब हो जाएगी।

शुक्रवार, मई 16, 2008

मुझे खूनी बवासीर है तथा गुदा में एक मस्सा भी है।

डाक्टर साहब नमस्ते,मेरी आयु २८ वर्ष है। डा.साहब जी मेरी परेशानी यह है कि मुझे खूनी बवासीर है तथा गुदा में एक मस्सा भी है। पेट में ज्यादातर कब्ज रहती है और मेरा पेट भी भारी होता जा रहा है। जब कब्ज हो जाती है तो पाखाना के समय काफी खून जाता है। अतः आपसे निवेदन है कि कोई अच्छी सी दवाई देने की कृपा करें। जिससे कि मुझे इस रोग से मुक्ति मिल जाए। मैं आपका सदा आभारी रहूंगा।
विपिन, उत्तर प्रदेश
विपिन भाई, मैं आपकी तकलीफ़ को भली प्रकार से समझ रहा हूं कि आप कितनी तकलीफ़ से गुजर रहे हैं। सच तो ये है कि आपकी मुख्य समस्या खूनी बवासीर न हो कर कब्जियत है और इसी के कारण आपको खूनी बवासीर हुई है। अब बेफिक्र हो जाइए क्योंकि अब न तो कब्ज की समस्या रहेगी और न ही बवासीर रहने वाली है; दर्द, मस्सा, खून जादू की तरह से गायब हो जाएगा बस आप इन दवाओं को नियम से लीजिये और दवा के सेवन के दौरान मिर्च-मसालेदार आहार, मांसाहार बंद कर दें व बाजारू भोजन से परहेज करें।
१ . रात्रि भोजन के बाद में एक चम्मच गंधर्व हरीतकी चूर्ण को गर्म जल से लें। ये नित्य प्रति पंद्रह दिन तक लें।
२ . सोलहवें दिन से इस दवा से स्थान पर इसी प्रकार से इतनी ही मात्रा में त्रिफ़ला चूर्ण लेना प्रारंभ करें और ऊपर बताई दवा बंद कर दें।
३ . इन्ही दवाओं के साथ ही दिन में तीन बार अर्शकुठार रस एक गोली + अर्शोघ्नी बटी एक गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लें।
४. नीम के तेल १०० मिली+ १० ग्राम पिपरमिंट + २० ग्राम कपूर मिला कर रख लें मिश्रित होने के बाद दो भाग कर लें एक भाग से एक-एक बूंद बताशे में भर कर दिन में तीन बार जल से लें तथा दूसरा भाग मल त्याग करने के बाद गुदा के प्रभावित स्थान पर लगाएं यदि कदाचित जलन हो तो उसे एक दो दिन सहन कर लीजिये फिर जलन न होगी।
५ . शुभ्रा भस्म आधा-आधा ग्राम दिन में तीन बार ठंडे दूध से लें ।

६. मेदोहर गुग्गुलु दो-दो गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लें।

बुधवार, फ़रवरी 20, 2008

आधाशीशी(माइग्रेन)

मैं पेशे से शिक्षिका हूं ,मानसिक श्रम काफी होता है मेरे काम में और क्लास में शोर मचाते बच्चे तो जान के दुश्मन प्रतीत होते हैं । सुबह उठने के साथ ही सिर में दर्द होना शुरू हो जाता है और दोपहर में लंच टाइम तक तो ऐसा लगने लगता है कि दीवार में सिर मार कर फोड़ दूं , ऐसा लगता है कि सिर में कील ठोंकी जा रही हो या सिर में बम फट रहे हों । कभी सिर के द्दंए हिस्से में और कभी बांए हिस्से में दर्द होता है दोपहर के बाद में दर्द कम होने लगता है लेकिन पूरी तरह से ठीक नहीं होता है ,रात में ठीक रहता है । डाक्टर को दिखाने पर उन्होंने सिरदर्द के लिए दवा दे दी लेकिन उसका असर बस दो घन्टे तक ही रहता है फिर से वैसा ही दर्द होने लगता है डाक्टर ने रोग का नाम माइग्रेन बताया है । अक्सर कब्ज़ रहती है और कभी-कभी जुकाम भी हो जाया करता है। क्या आयुर्वेद में कोई परमानेण्ट इलाज है ?
** बहन जी ,आपका रोग आयुर्वेद में आधाशीशी और सूर्यावर्त नाम से जाना जाता है । पहले आप यह जान लीजिए कि एलोपैथी में इसका कोई इलाज नही है जो भी दवा दी जाती है वह दर्द दूर कर देती है कुछ समय के लिए लेकिन मूल कारण दूर नहीं कर पाती जिस कारण फिर से दर्द होने लगता है । पहले आपकी कब्जियत दूर करनी होगी जो कि आपकी बीमारी की जड़ है जिसके लिये आप रात में सोते समय अपने कॊष्ठ के अनुसार कब्ज निवारण के लिये सवा लीजिए फिर तीन दिन तक यह दवा लेने के बाद बंद करदें और आगे ऐसा भोजन लिया करें जो कब्ज न किया करे इस लिए अंडे ,तैलीय भोजन और चाइनीज खाने से परहेज़ करें(जैसा कि आपने बताया था कि आपको रात के खाने में चाईनीज पसंद है)
१ . रात्रि भोजन के बाद एक चम्मच पंचसकार चूर्ण गुनगुने पानी में चोल कर पी लीजिए ।
२ . सुबह उठकर नित्यकर्मों से निपट कर जिस ओर दर्द हो रहा है उस ओर के नथुने में इस घोल की दो बूंदे डाल लें । एक कप पानी में एक चम्मच सैंधव (सेंधा) नमक मिला कर घोल बना लें । सेंधा नमक वह नमक है जो लोग उपवास में खाया करते हैं ।
३ . किसी अच्छी निर्माणशाला का बना हुआ नारायण तेल लेकर सुबह माथे पर जहां कनपटी का क्षेत्र है वहां उंगली से हलके से ५-१० मिनट मालिश करें ।
आपको आश्चर्य होगा कि आपको जीवन भर कैसा भी सिरदर्द होगा पर आधाशीशी (माइग्रेन) नहीं होगा ।