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नमस्कार महोदय उम्र २९ वर्ष वजन ४३ केजी कद १६५सेमि ५'५'' दुबला शरीर, अविवाहित, अध्यनरत महोदय मै बहुत हि दुबला व कमजोर हू. कृपया म...
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Namaskar Doctor Shahab. Me aapse apni samasya ka samadan chahta ho. sabse pahle me aapko apne bare me batana chahta ho meri aayo 21 year he ...
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प्रणाम डॉक्टर साहब, सर्वप्रथम तो आपका बहुत-बहुत शुक्रिया जो आपने मेरी समस्या पर इतनी तत्परता से प्रतिक्रिया दी. आपको मैं थोड़े से विस्ता...
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डॉ साहब ,आपको सादर नमस्कार . मैंने आपके बहुत सारे ब्लोग्स पढ़े हैं । वहाँ से प्रेरित होकर मई भी आप को मेल कर रहा हू आशा रख...
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यह सभी वर्गों के पुरुषों के लिये अत्यंत उत्तम स्वास्थ्यवर्धक वटी ( टैबलेट) है जो कि बेहद प्रभावी तथा बहुमूल्य जड़ी-बूटियों का बेहतरीन मिश्रण ...
कुछ सुझाव
शनिवार, मई 31, 2008
मुझे बताया कि स्टमक में घाव हैं,आपरेशन न करवाना पड़े.....
राज अवस्थी, बरुआसागर
राज भाईसाहब आपको आपरेशन करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी इस लिये भयभीत न हों। यदि आपके आमाशय में घव है तो ये कोई जानलेवा या लाइलाज बीमारी नहीं है बस होता ये है कि आप पेट के असहनीय दर्द से घबरा जाते हैं। अब आप निम्न औषधियों को नियम से लीजिये और चिंतामुक्त हो जाइये साथ ही दर्द से भी मुक्ति मिल जाएगी, इस उपचार से किसी भी कारण हुआ आमाशय घाव या व्रण भर जाएगा और उसके बनने का कार्ण भी समाप्त हो जाएगा। बस ध्यान रखिये कि आपका भोजन कम से कम पंद्रह दिन तक तरल हो ठोस आहार न लें बस पंद्रह दिन की ही तो बात है फिर उसके बाद धीरे-धीरे हल्का भोजन लेना शुरू करियेगा। दूध और घी ले सकते हैं,शहद लीजिये,अण्डे यदि खाते हों तो ले सकते हैं पर एक से ज्यादा नहीं वो भी दूध में घोल कर लें। गर्म दूध न लें हानिकारक है इस लिये ठण्डा किया हुआ दूध लेना हितकर है। बाजारू साफ़्ट ड्रिंक्स हर्गिज़ न लें।
१ . पहले चार दिन तक सुबह-दोपहर-शाम-रात को ये दवा लें -- सर्वांगसुन्दर रस ४ रत्ती + मण्डूर भस्म ४ रत्ती + शुक्ति भस्म ४ रत्ती मिला लें व ये हो गई आपकी एक दिन की खुराक जिसे चार बराबर हिस्सों में करके एक माशा सौंफ़ के चूर्ण+ भुना जीरा का चूर्ण ४ रत्ती के साथ मिला कर आपको शहद के साथ चाटना है। भोजन के बाद कुमार्यासव नं. १ दो चम्मच पियें ।
२ . चार दिन बाद पांचवे दिन से दवा परिवर्तित करिये व ये दवा लेना शुरू करें -- सूतशेखर रस(साधारण) २५० मिग्रा. + कामदुधा रस(साधारण) ५०० मिग्रा. + यशद भस्म १०० मिग्रा. + जहरमोहरा पिष्टी २५० मिग्रा. + आमलकी रसायन ५०० मिग्रा. + शंख भस्म २५० मिग्रा. + मुक्ताशुक्ति पिष्टी २५० मिग्रा. + प्रवाल पंचामृत(मुक्ता युक्त) ५० मिग्रा. ; इस पूरी दवा की एक खुराक करें व इसे सुबह दोपहर शाम को तीन बार शहद के साथ लीजिये और इसके दस मिनट बाद जीरा जल पी लीजिये। जीरा जल बनाने के लिये तीन ग्राम जीरा लेकर बारीक पीसिये और लगभग १०० मिली जल में डाल कर दस मिनट के लिये रख दीजिये तथा फिर पतले कपड़े से छान लीजिये बस हो गया आपका जीरा जल तैयार, अब आप इसका सेवन कर सकते हैं परंतु हर बार ताजा ही बनाएं।
इस औषधि व्यवस्था को दो माह तक प्रयोग और यकीन करिये कि आपकी बीमारी ठीक हो जाएगी अगर प्रतीत हो तो दो माह और इस्तेमाल कर लीजिये लम्बे समय तक भी यदि आप दवाएं लें नुकसान नहीं होगा
रविवार, मई 25, 2008
डायाफ्राम के नीचे दाहिने हिस्से में कुछ फूला सा महसूस होता है.....
मेरी उम्र २७ साल है लगभग नौ दस साल पहले मैं पीलिया से पीड़ित हुआ था। उपचार लेने के बाद पीलिया तो ठीक हो गया लेकिन एक नई समस्या तब से पीछा नहीं छोड़ रही है। मेरे पेट में नाभि के ऊपर डायाफ्राम के नीचे दाहिने हिस्से में कुछ फूला सा महसूस होता है। खाने के बाद लगता है कि खाना वहां पर ही अटक गया है, झुकने या उस स्थान को दबाने पर मुंह में अनपचा भोजन आ जाता है, ऐसा लगता है कि डकार आ जाए तो कदाचित राहत मिल जाएगी किन्तु डकार आती ही नहीं,ये उभरा हिस्सा दबाने पर दर्द नहीं करता है,कब्जियत बनी रहती है, गले में कफ़ रहता है जो कि खखारने पर पारदर्शी से बलगम के रूप में निकल आता है और ये कदाचित मीठा सा प्रतीत होता है बाकी तमाम उपद्रव आपको मैं फोन पर बता चुका हूं। परीक्षा नजदीक है इसलिये जरा त्वरित उपचार बताएं ताकि स्वस्थ होकर परीक्षा दे सकूं। धन्यवाद..
सौरभ,वाराणसी
सौरभ भाई, आपकी समस्या के बारे में समझा कि किस तरह से तमाम व्यवसायिक लोग आपके ऊपर आयुर्वेद से लेकर एलोपैथी के अनेक प्रयोग कर चुके हैं। सच तो ये है कि जब हम अपने ऊपर अनेक परीक्षण करवा चुके होते हैं तब हमारा ध्यान हमारे आसपास मौजूद ईश्वर की दी अनमोल चीजों से हट जाता है। बिना किसी भूमिका के आपको उपचार बता रहा हूं जिसे आपको वर्धमान क्रम में लेना है लेकिन उससे पहले आप पहले पंद्रह दिन सितोपलादि चूर्ण दो-दो ग्राम सुबह शाम शहद के साथ लीजिये फिर उसके बाद आप आधा ग्राम से शुरू ग्वारपाठा(एलोवेरा,घीग्वार) रोज आधा ग्राम बढ़ाते जाइये। इस प्रकार से आप जब रोज दोपहर के भोजन के बाद एलोवेरा का सेवन करें तो इस क्रम में यह मात्रा बढ़ कर दस ग्राम तक आ जाए तो इसके उलटे क्रम में मात्रा घटाना शुरू कर दीजिये और फिर आधा ग्राम पर आने के बाद पंद्रह दिन के लिये बंद कर दीजिये और फिर इसी क्रम में लीजिये ऐसी पूरी प्रक्रिया तीन बार दोहराइये आपकी बीमारी जड़ से गायब हो जाएगी।
शुक्रवार, मई 16, 2008
मुझे खूनी बवासीर है तथा गुदा में एक मस्सा भी है।
डाक्टर साहब नमस्ते,मेरी आयु २८ वर्ष है। डा.साहब जी मेरी परेशानी यह है कि मुझे खूनी बवासीर है तथा गुदा में एक मस्सा भी है। पेट में ज्यादातर कब्ज रहती है और मेरा पेट भी भारी होता जा रहा है। जब कब्ज हो जाती है तो पाखाना के समय काफी खून जाता है। अतः आपसे निवेदन है कि कोई अच्छी सी दवाई देने की कृपा करें। जिससे कि मुझे इस रोग से मुक्ति मिल जाए। मैं आपका सदा आभारी रहूंगा।
विपिन, उत्तर प्रदेश
विपिन भाई, मैं आपकी तकलीफ़ को भली प्रकार से समझ रहा हूं कि आप कितनी तकलीफ़ से गुजर रहे हैं। सच तो ये है कि आपकी मुख्य समस्या खूनी बवासीर न हो कर कब्जियत है और इसी के कारण आपको खूनी बवासीर हुई है। अब बेफिक्र हो जाइए क्योंकि अब न तो कब्ज की समस्या रहेगी और न ही बवासीर रहने वाली है; दर्द, मस्सा, खून जादू की तरह से गायब हो जाएगा बस आप इन दवाओं को नियम से लीजिये और दवा के सेवन के दौरान मिर्च-मसालेदार आहार, मांसाहार बंद कर दें व बाजारू भोजन से परहेज करें।
१ . रात्रि भोजन के बाद में एक चम्मच गंधर्व हरीतकी चूर्ण को गर्म जल से लें। ये नित्य प्रति पंद्रह दिन तक लें।
२ . सोलहवें दिन से इस दवा से स्थान पर इसी प्रकार से इतनी ही मात्रा में त्रिफ़ला चूर्ण लेना प्रारंभ करें और ऊपर बताई दवा बंद कर दें।
३ . इन्ही दवाओं के साथ ही दिन में तीन बार अर्शकुठार रस एक गोली + अर्शोघ्नी बटी एक गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लें।
४. नीम के तेल १०० मिली+ १० ग्राम पिपरमिंट + २० ग्राम कपूर मिला कर रख लें मिश्रित होने के बाद दो भाग कर लें एक भाग से एक-एक बूंद बताशे में भर कर दिन में तीन बार जल से लें तथा दूसरा भाग मल त्याग करने के बाद गुदा के प्रभावित स्थान पर लगाएं यदि कदाचित जलन हो तो उसे एक दो दिन सहन कर लीजिये फिर जलन न होगी।
५ . शुभ्रा भस्म आधा-आधा ग्राम दिन में तीन बार ठंडे दूध से लें ।
६. मेदोहर गुग्गुलु दो-दो गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लें।
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आप इन औषधियों को मात्र उत्पादन मूल्य पर हमसे मंगवा सकते हैं
अग्निकुमार रस
अर्शोघ्नी बटी
आनंद भैरव रस
अजीर्ण कंटक रस
अर्शकुठार रस
आमवातेश्वर रस
आमवातारि रस
अश्वकंचुकी(घोड़ाचोली)रस
अग्नितुंडी बटी
अमरसुंदरी बटी
आरोग्यवर्धिनी
बटी
आमलकी रसायन
इच्छाभेदी रस
उपदंश कुठार रस
उन्माद गजकेशरी
रस
एकांगवीर रस
एलादि वटी
कनकसुंदर रस
कफ़कुठार रस
कुष्ठकुठार रस
कफ़केतु रस
कुमारकल्याण रस
कामदुधा रस
कृव्यादि रस
कफ़कर्तरी रस
कल्पतरू रस
कामधेनु रस
कृमिकुठार रस
कृमिमुग्दर रस
कफ़चिंतामणि रस
कांकायन बटी
कन्यालोहादि बटी
खैरसार बटी
खदिरादि बटी
गंधक बटी
गंधक रसायन
गर्भपाल रस
गुड़मार बटी
गुल्मकुठार रस
ग्रहणीकपाट रस
ग्रहणी गजेन्द्र
रस
चंद्रप्रभा बटी
चतुर्भुज रस
चंद्रामृत रस
चंदनादि बटी
चंद्रान्शु रस
चतुर्मुख रस
चित्रकादि बटी
चिंतामणि
चतुर्मुख रस
चंद्रकला रस
चिंतामणि रस
चौंसठ प्रहरी
पीपल
जवाहरमोहरा
दंतोद्भेदगदान्तक
रस
हिंगुलेश्वर रस
हृदयार्णव रस
हिंग्वादि बटी,
ज्वरांकुश रस
जयमंगल रस
लघुमालिनी बसंत
रस
लहशुनादि बटी
लवंगादि बटी
लक्ष्मीनारायण रस
लक्ष्मीविलास रस
लक्ष्मीनारायण
रस(नारदीय)
लाई रस
लीलाविलास रस
लोकनाथ रस
मधुमेहनाशिनी बटी
महाज्वरांकुश रस
महाशंख बटी
महामृत्युंजय रस
महावात विध्वंसन
रस
महालक्ष्मी विलास
रस
मकरध्वज बटी
मन्मथाभ्र रस
मूत्रकृच्छान्तक
रस
मरिच्यादि बटी
मृत्युन्जय रस
नृपतिवल्लभ रस
नागार्जुनाभ्र रस
नष्टपुष्पान्तक
रस
नित्यानंद रस
पीयूषवल्ली रस
पूर्ण चंद्र रस
प्रदररिपु रस,
प्रवाल पंचाम्रत
रस
प्रतापलंकेश्वर
रस
प्रमेहगज केशरी
रस
पुष्पधन्वा रस
प्रदरारि रस
प्रदरान्तक रस
रसपीपरी रस
रसराज रस
रामबाण रस
रजःप्रवर्तिनी
बटी,
रसादि रस
रक्तपित्तान्तक
रस
संजीवनी बटी
संशमनी बटी
समीरपन्नग रस
सारिवादि बटी
सर्पगंधाघन बटी
सूतशेखर रस
श्रंगाराभ्र रस
स्मृतिसागर रस
सिद्धप्राणेश्वर
रस
सोमनाथ रस
शिलाजीत बटी,
शिलाजित्वादि बटी
शिलासिंदूर बटी,
शिरःशूलादिवज्र
रस
शिरोवज्र रस
शूलवज्रिणी बटी
शंख बटी
शंकर बटी
शूलगजकेशरी रस
श्वास कुठार रस,
श्वासकास
चिंतामणि रस
शीतांशु रस
शुक्रमात्रिका
बटी
त्रिभुवन कीर्ति
रस
त्रिमूर्ति रस,
त्रैलोक्य
चिंतामणि रस
तारकेश्वर रस
बोलबद्ध रस
ब्राह्मी बटी
वात गजांकुश रस
वातकुलान्तक रस
बसंत कुसुमाकर रस
वृहत वातगजांकुश
रस
वृहत बंगेश्वर रस
विरेचन बटी
वृहत वातचिंतामणि
रस
वृहत
गर्भचिंतामणि रस
वीर्यशोधन बटी
वृद्धिबाधिका बटी
व्योषादि बटी
विषतिंदुक बटी
व्याधिहरण रसायन,
वृहत कामचूड़ामणि
रस
योगेन्द्र रस
अभ्रक भस्म
(साधारण,शतपुटी,सहस्त्रपुटी)
अकीक पिष्टी/भस्म
हजरुलयहूद
भस्म/पिष्टी
गोदन्ती भस्म
जहरमोहरा खताई
भस्म/पिष्टी,
कुक्कुटाण्डत्वक
भस्म
कहरवा पिष्टी
कान्तसार लौह
भस्म
कपर्द(वराटिका)भस्म
कासीस भस्म
लौह भस्में
(तीन
प्रकार)
मण्डूर भस्म
श्रंग भस्म
मुक्ताशुक्ति
भस्म/पिष्टी,
नाग भस्म
प्रवाल
पिष्टी/भस्म
शंख भस्म
शुभ्रा(स्फटिका)
भस्म
स्वर्णमाक्षिक
भस्म
ताम्र भस्म
टंकण भस्म
त्रिबंग भस्म
बंग भस्म
यशद भस्म
कासीस गोदन्ती
भस्म
संगेजराहत भस्म
संगेयेशव
भस्म/पिष्टी
गोमेदमणि
भस्म/पिष्टी
माणिक्य
भस्म/पिष्टी
मुक्ता(मोती)भस्म/पिष्टी
नीलम भस्म/पिष्टी
पुखराज
भस्म/पिष्टी
चांदी(रजत)भस्म
पन्ना(तार्क्ष्य)भस्म/पिष्टी
लाजावर्त
भस्म/पिष्टी
अम्लपित्तान्तक
लौह
चंदनादि लौह
(ज्वर
व प्रमेह)
ताप्यादि लौह
(रजत/बिना
रजत)
धात्री लौह
नवायस लौह
प्रदरारि लौह
प्रदरान्तक लौह
पुनर्नवादि
मण्डूर
विषमज्वरान्तक
लौह
सर्वज्वरहर लौह
सप्तामृत लौह
शिलाजित्वादि लौह
यक्रदप्लीहारि
लौह
रक्तपित्तान्तक
लौह
शोथारि लौह
मेदोहर विडंगादि
लौह
अमृतादि गुग्गुल
आभा गुग्गुल
कांचनार गुग्गुल
कैशोर गुग्गुल,
गोक्षुरादि
गुग्गुल
पुनर्नवादि
गुग्गुल
लाक्षादि गुग्गुल
पंचतिक्तघृत
गुग्गुल
रास्नादि गुग्गुल
सप्तविंशतिको
गुग्गुल
सिंहनाद गुग्गुल,
त्रयोदशांग
गुग्गुल
त्रिफला गुग्गुल
योगराज गुग्गुल
महायोगराज
गुग्गुल
वातारि गुग्गुल,
मेदोहर(नवक)
गुग्गुल
अभ्रक पर्पटी
स्वर्ण पर्पटी
बोल पर्पटी
लौह पर्पटी
प्राणदा पर्पटी
ताम्र पर्पटी
पंचामृत पर्पटी
विजय पर्पटी
रस पर्पटी
शीतल पर्पटी
श्वेत पर्पटी
मकरध्वज
चंद्रोदय
मल्ल सिंदूर
मल्ल चंद्रोदय
रस सिंदूर
शिला सिंदूर
स्वर्णबंग
ताल सिंदूर
रसमाणिक्य,
शिलाजीत(गीला/सूखा)
स्वर्णबंग क्षार