sir,my son is 6 yr old .for the last 4 months white round circles/patch/spot are found on his face,body.his lip has changed towhite.consulted skin specialist,called it as vitiligo,not much benefitis recd. few more spots are developing.please give the proper remedy.iam very much worried.
Beena Tompe
बीना बहन, आपके बच्चे की समस्या को गहराई से समझा और आपको भी बताना चाहता हूं जो कि आपके चिकित्सक ने बताया है कि इस बीमारी का नाम अमुक है। यह मात्र एक त्वचा रोग है जो कि पीड़ादायक तो नहीं होता किन्तु सोन्दर्यनाशक अवश्य होता है। इसलिये माता पिता तथा स्वयं रोगी भी अत्यंत चिंतित रहते हैं। Vitiligo नाम से बताई गयी बीमारी में त्वचा के पिगमेंट यानि रंगत देने वाली कोशिकाओं का नाश होने लगता है और इससे चेहरा,नासिका, गुप्तांग, नेत्रगोलक का अंदरूनी भाग तथा बाल प्रभावित हो सकते हैं। आपके बच्चे को होने वाली समस्या के अनेक कारण हो सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि ये बीमारी कोई असाध्य रोग हो, इसलिये आप चिन्ता न करते हुए धैर्य रखें बच्चा ठीक हो जाएगा। इस रोग के निवारण के लिए सर्वप्रथम रोगी का पेट साफ कराना तथा शोधन करना अनिवार्य होता है वरना कोई भी उपचार उचित लाभ नहीं देता है। अतः बच्चे को प्रारंभ में दस्त कराने की दवा बताउंगा इससे जुलाब होने पर आप घबराएं नहीं ये बस उपचार का हिस्सा है।
१ . इच्छाभेदी रस की आधी गोली रात को पानी दें लेकिन उससे पहले दिन में मूंग की दाल की खिचड़ी गाय का घी मिला कर खिलाएं। तीन दिन तक।
२ . गंधक रसायन २५० मिग्रा. + स्वर्णमाक्षिक भस्म १२५ मिग्रा. + गिलोय सत्व २५० मिग्रा. मिला कर शहद के साथ दो बार दीजिये। सुबह नाश्ते के बाद।
३ . आरोग्यवर्धिनी बटी दो गोली + तालकेश्वर रस एक गोली + प्रवाल पिष्टी १२५ मिग्रा. + रस माणिक्य बारीक घोंटा हुआ १२५ मिग्रा + बाकुची चूर्ण एक ग्राम + एक ग्राम त्रिफला चूर्ण मिला कर एक खुराक बनाएं तथा मंजिष्ठादि कषाय + खदिरारिष्ट के दो ढक्कन दवा से साथ में मिला कर पेस्ट जैसा बना लें व दिन में दो बार भोजन के बाद दें।
४ . सोने से आधे घंटे पहले महातिक्त घृत + सोमराजी घृत समान मात्रा में मिला कर एक चम्मच दूध के साथ दें।
५ . दिन में तीन बार चालमोगरा तेल + पंचतिक्त घृत + नीम का तेल + बाकुची का तेल बराबर मात्रा में मिला कर लगाएं।
एक बात का ध्यान रखिये कि यह एक जिद्दी किस्म का रोग है इसलिये अधीरता से लाभ नहीं होता है, न्यूनतम एक से दो साल तक औषधियां देना लाभप्रद होगा। तीखे भोजन से परहेज कराएं तथा चायनीज व्यंजन आदि बंद कर दें।