Respected sir,
namaskar
I am the regular reader of your blog,thanks for the valueble information given to us,My daughter is 5 yrs old & suffering from the atopic dermatitis as per the homeopathic docter,earlier we had tried the alopathic medicine,but no satisfactory results came out,after that we started the homeopathic course from last 1.5 year,but now she develops the asthma related problems,we have to do the nebulisors & some times prednisolone like steroids also,our doctor told us that ,skin & chest problems are parallel to each other,if we supress the asthma related problems then skin problems comes,now she becomes is very sensitive to dust & allerges,weather change,in dec i had give her the kafeswari & crux,she shown some results ,then we had consulted with our vaid jee,he had given some ayudvedic medicin& also told us this is some hot medicins,so give her in small qty for the asthama related problem,after taking only 2 doses she was fine,but skin becomes too much itching & rashes,she was conitiously itching the skin ,then again he told us to apply the kele ka tail & jattdii oil mixed with the coconut oil,but no result came,now her skin & asthama is in poor condition,we have to use the nebuliseres also on the regular basis,she is having too much problem(itching problem) in the nights alsoour homeopathic doctor says first he will cure her chest problems then skin,pls help us
॥ ॐ सांई राम ॥... ॥ अनंत कोटी ब्रम्हांड नायक राजाधिराज योगीराज परं ब्रम्हं श्री सच्चिदानंद सदगुरू श्री साईनाथ महाराज की जय ॥... ॥ ॐ सांई राम ॥
warm regards
Gitesh uppal
भाईसाहब मैं मानता हूं कि होम्योपैथी हो या कोई सी भी चिकित्सा प्रणाली जब तक वह शरीर की रचना के विषय में एनाटामी की आधुनिकता को लेकर उलझी रहेगी वह चिकित्सा में दिग्भ्रमित ही रहेगी। इसका कारण आपको बता दूं कि आधुनिक फिजिक्स व केमिस्ट्री जैसे विषय अभी तक होम्योपैथी के सिद्धांतों को लेकर अटकलें लगाते रहते हैं क्योंकि 12X की पोटेन्सी के बाद तो जिस मूल दवा को लेकर वह दवा आपके सामने अधिक पोटेन्सी पर लायी गयी है उसके तो अणु माइक्रोस्कोप से देखने पर दिखते ही नहीं है फिर दवा उच्च शक्ति पर कैसे जाती रहती है ये तो एक ऊर्जा सिद्धांत है जो भौतिकी नहीं जान सकती तो फिर आयुर्वेद का त्रिदोष सिद्धांत कैसे समझ सकते हैं। आप बच्ची को निम्न दवाएं दीजिये और देखिये कि बेटी कैसे स्वस्थ होकर सबको आश्चर्य में डाल देगी-
१. आयुर्वेद में इसे हरिद्रा क्षीरपाक रसायन कहते हैं मैं आपको इसको बनाने का तरीका बताता हूं। अच्छी साफ़ हल्दी की गांठों को थोड़ा सा कूट लें फिर गाय के घी में भून लीजिये इस भुनी हुई हल्दी को बारीक पीस लीजिये।
गाय का सौ ग्राम दूध ले लीजिये और गर्म करें, गर्म होने पर उसमें सवा ग्राम(यानि अंदाज से लगभग तीन चुटकी भर) ऊपर बताई गई हल्दी के चूर्ण को मिला दीजिये। इसी में दस ग्राम गुड़ डाल दीजिये व पकने दीजिये उबाल आने पर बिना छाने हल्का गर्म ही बच्ची को पिलाइये।
इसी के साथ एक चौथाई चाय का चम्मच हरिद्रा खण्ड(यह आयुर्वेद की एक बनी हुई औषधि है जो आपको आयुर्वेद के औषधि विक्रेता के पास मिल जाएगी यह एक किस्म का च्यवनप्राश जैसा पाक या अवलेह होता है) + आधी गोली श्वांस कुठार रस भी बच्ची को निगलवा दीजिये। यह खुराक दिन में दो बार दीजिये, खाली पेट न दें।
२ . त्वचा पर लगाने के लिये आप यह मिश्रण तैयार बना लीजिये- नीम का तेल ५० मिली. + करंज का तेल ५० मिली. + कपूर १० ग्राम + पिपरमिंट १० ग्राम(इसे मेन्थाल भी कहते हैं। इसे मिश्रण को दिन में तीन बार प्रभावित अंग पर लगाइये।
इस उपचार को तीन माह तक जारी रखें लेकिन एक माह देने के बाद द्स दिन के लिये बंद कर दें व पुनः शुरू करें, इस प्रकार तीन माह करें।
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शनिवार, फ़रवरी 14, 2009
बेटी को होम्योपैथ ने atopic dermatitis बताया है,अस्थमा बुरी स्थिति में है
Published :
2/14/2009 08:54:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
रविवार, नवंबर 30, 2008
छह-सात साल से जुका़म है साइनुसायटिस नामक बीमारी बताई है
Published :
11/30/2008 05:41:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डा.साहब
नमस्ते
मुझे लगभग छह सात सालों से हमेशा जुका़म बना रहता है, नाक बहती रहती है, ऐसा लगता है कि अंदर कुछ फंसा हुआ है, अक्सर खांसी भी आती है और कम मात्रा में बलगम भी छूटता है। सिर हमेशा भारी बना रहता है। जब पढ़ने के लिये सिर नीचे को झुकाता हूं तो लगता है कि अंदर कुछ भरा है जो बाहर आना चाहता है लेकिन ऐसा होता नहीं। मैं बौत परेशान हूं मेरी मदद करिये सुना है कि आयुर्वेद में मौत के अलावा हर बीमारी का इलाज है।
संतराम कोरी,झांसी
संतराम जी आपने बिलकुल सही सुना है। ठंडी चीजों का सेवन बिलकुल बंद करके इन दवाओं को लीजिये-
१ . सितोपलादि चूर्ण २ ग्राम + त्रिभुवन कीर्ति रस एक गोली + लक्ष्मी विलास रस(नारदीय)एक गोली + श्रंग भस्म दो रत्ती(यानि २५० मिग्रा.) + रस सिंदूर एक रत्ती + गोदन्ती भस्म दो रत्ती : इन सभी को मिला कर एक खुराक बना लीजिये व दिन में शहद के साथ मिला कर तीन बार सुबह-दोपहर-शाम चाटिये।
२ . षड्बिन्दु तेल की छह बूंदें नाक के दोनो छेदों में डालिये सुबह - शाम।
३ . हरिद्रा खण्ड आधा चम्मच दिन में दो बार सेवन करें। ऊपर से गुनगुना गर्म जल पी लीजिये।
इस औषध को तीन माह तक लीजिये फिर जीवन भर कभी आपको इस तरह की समस्या न होगी।
नमस्ते
मुझे लगभग छह सात सालों से हमेशा जुका़म बना रहता है, नाक बहती रहती है, ऐसा लगता है कि अंदर कुछ फंसा हुआ है, अक्सर खांसी भी आती है और कम मात्रा में बलगम भी छूटता है। सिर हमेशा भारी बना रहता है। जब पढ़ने के लिये सिर नीचे को झुकाता हूं तो लगता है कि अंदर कुछ भरा है जो बाहर आना चाहता है लेकिन ऐसा होता नहीं। मैं बौत परेशान हूं मेरी मदद करिये सुना है कि आयुर्वेद में मौत के अलावा हर बीमारी का इलाज है।
संतराम कोरी,झांसी
संतराम जी आपने बिलकुल सही सुना है। ठंडी चीजों का सेवन बिलकुल बंद करके इन दवाओं को लीजिये-
१ . सितोपलादि चूर्ण २ ग्राम + त्रिभुवन कीर्ति रस एक गोली + लक्ष्मी विलास रस(नारदीय)एक गोली + श्रंग भस्म दो रत्ती(यानि २५० मिग्रा.) + रस सिंदूर एक रत्ती + गोदन्ती भस्म दो रत्ती : इन सभी को मिला कर एक खुराक बना लीजिये व दिन में शहद के साथ मिला कर तीन बार सुबह-दोपहर-शाम चाटिये।
२ . षड्बिन्दु तेल की छह बूंदें नाक के दोनो छेदों में डालिये सुबह - शाम।
३ . हरिद्रा खण्ड आधा चम्मच दिन में दो बार सेवन करें। ऊपर से गुनगुना गर्म जल पी लीजिये।
इस औषध को तीन माह तक लीजिये फिर जीवन भर कभी आपको इस तरह की समस्या न होगी।
सोमवार, अक्टूबर 27, 2008
पटाखों के धुंए से भयंकर परेशानी होती है
Published :
10/27/2008 02:37:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डा.साहब प्रणाम,मेरी बेटी १३ साल की है और जब भी दीवाली का त्योहार आता है तो सारी दुनिया खुश होती है लेकिन जब भी दीवाली का त्योहार आता है मेरी इकलौती बेटी को बहुत कष्ट हो जाता है। उसे पटाखों के धुंए से भयंकर परेशानी होती है, उसे दमा जैसा दौरा पड़ने लगता है और खांसी आती है, नाक बहने लगती है, पसलियों में दर्द और बुखार हो जाता है यानि कि हर बार दीवाली के अगले दिन ही हमें अस्पताल भागना पड़ता है जिस कारण हमारे लिये ये त्योहार बुरे सपने जैसा लगता है। यदि हम किसी को पटाखे चलाने से रोकूं तो लोग कहेंगे कि मैं परंपराओं का विरोध कर रहा हूं हमारा दुःख कोई नहीं समझता है। मेहरबानी करके आप हमारी मदद करें और हमारी बेटी को इस परेशानी से मुक्त कराएं।
संजय जागीरदार,दमण
संजय जी, मैं आपकी परेशानी को समझ रहा हूं । लोग परंपराओं के नाम पर आजकल त्योहारों पर जो कुछ भी करते हैं वह भले ही आपके लिये कष्टप्रद है किंतु आप किस किस को समझाएंगे, मेरी भी यही पीड़ा है। खैर आप अब चिन्ता न करें आप अपनी बेटी के लिये निम्न दवाएं ले आइये अस्पताल जाने की स्थिति हरगिज न आयेगी और यदि आपने छह माद लगातार दवाएं दी तो अगली दीवाली पर आपको परेशानी न होगी।
१ . दशमूल का क्वाथ सुबह - शाम एक-एक चम्मच दें।
२ . दो चुटकी हरड़ का चूर्ण चटा कर ऊपर से अगस्त्य हरीतकी अवलेह एक-एक चम्मच चटाइये।
३ . आधा ग्राम समशर्कर चूर्ण सुबह-शाम चाटने को दें।
इन दवाओं को आज ही ले आइये ताकि बच्ची को तकलीफ़ न हो और दीवाली का पर्व सुख से बीते।
बुधवार, जुलाई 16, 2008
गले में मटर के दाने के आकार की दो गांठे हैं,खांसी बहुत रहती है।
Published :
7/16/2008 10:52:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डॉ साहब नमस्कारमेरी बेटी को खांसी बहुत रहती है। खांसी सूखी है। बहुत इलाज करा चुका हूं। एलोपैथी भी और होम्योपैथी भी। कुछ फायदा होता है बाद में मर्ज फिर वही हो जाता है। बेटी की उम्र साढ़े आठ साल है। बचपन से ही उसके गले में मटर के दाने के आकार की दो गांठे हैं। मैने मांटूर टेस्ट भी तीन बार करा लिया है। रिपोर्ट निगेटिव आती है। प्राइमरी कॉप्लेक्स की संभावना डॉक्टर बताते हैं मगर रिपोर्ट निगेटिव है। गले में टांसिल भी हैं। क्या इससे उसका विकास रुक सकता है। मैं काफी परेशान हूं। बेटी का किसी भी काम में मन नहीं लगता या यूं कहूं वह किसी भी काम में तल्लीनता से नहीं जुटती। कांफीडेंस की भी कमी है। आखिर मैं क्या करूं और क्या इन लक्षणों का बीमारी से कोई संबंध में मुझे दिशा दें।योगेश जादौन, बीहड़
योगेश जी,आपकी बेटी की समस्या को बहुत गम्भीरता से समझने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि आपकी बेटी की समस्या जीर्ण हो चुकी है किन्तु जिस तरह से डाक्टर संभावना के आधार पर अनुमान लगा कर चिकित्सा करते हैं उससे प्रतीत होता है कि ऐसे डाक्टर बच्चों को मात्र प्रायोगिक जंतु ही समझते हैं। बच्ची के दोष जीर्ण हो कर परस्पर क्लिष्ट आवरणॊं में पहुंच चुके होने के कारण ही ऐसा होता है कि यदि लाक्षणि उपचार दे दिया जाए तो कुछ समय के लिये लाभ हो जाता है किंतु फिर वही समस्या अधिक जोर से उभर आती है। आप बच्ची को आधुनिक परीक्षणों की कसौटी पर घिसवाना बंद करिये इन परीक्षणों की हकीकत मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं। किसी भी कार्य में तल्लीनता न आने का कारण ही यह है कि बच्ची जब खांसी से परेशान है तो उस उम्र की बच्ची क्या बड़े से बड़ा हठयोगी भी परेशान हो जायेगा और उसकी तल्लीनता भंग हो जाएगी। टांसिल में सूजन होना तो सहज बात है कि इस परिस्थिति में वह हो ही जाएगी। आप बच्ची को निम्न उपचार न्यूनतम छह माह तक दें-
१ . रुदन्ती चूर्ण एक ग्राम + स्वर्णबसंत मालती रस १२५ मिग्रा + श्रंग भस्म १२५ मिग्रा. + सितोपलादि चूर्ण ५०० मिग्रा इन सबकी एक खुराक बना कर शहद के साथ दिन में इसी तरह तीन बार चटायें। दवा खाली पेट न दें।
२. शिला सिंदूर ६५ मिग्रा + कांचनार गुग्गुल एक गोली दिन में तीन बार वासारिष्ट के दो चम्मच के साथ दें।
सुपाच्य आहार दीजिये,बाजारू चीजों से परहेज कराएं। जल्दी-जल्दी उपचार बदलना भी घातक सिद्ध होता है यह ध्यान रखिये।
योगेश जी,आपकी बेटी की समस्या को बहुत गम्भीरता से समझने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि आपकी बेटी की समस्या जीर्ण हो चुकी है किन्तु जिस तरह से डाक्टर संभावना के आधार पर अनुमान लगा कर चिकित्सा करते हैं उससे प्रतीत होता है कि ऐसे डाक्टर बच्चों को मात्र प्रायोगिक जंतु ही समझते हैं। बच्ची के दोष जीर्ण हो कर परस्पर क्लिष्ट आवरणॊं में पहुंच चुके होने के कारण ही ऐसा होता है कि यदि लाक्षणि उपचार दे दिया जाए तो कुछ समय के लिये लाभ हो जाता है किंतु फिर वही समस्या अधिक जोर से उभर आती है। आप बच्ची को आधुनिक परीक्षणों की कसौटी पर घिसवाना बंद करिये इन परीक्षणों की हकीकत मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं। किसी भी कार्य में तल्लीनता न आने का कारण ही यह है कि बच्ची जब खांसी से परेशान है तो उस उम्र की बच्ची क्या बड़े से बड़ा हठयोगी भी परेशान हो जायेगा और उसकी तल्लीनता भंग हो जाएगी। टांसिल में सूजन होना तो सहज बात है कि इस परिस्थिति में वह हो ही जाएगी। आप बच्ची को निम्न उपचार न्यूनतम छह माह तक दें-
१ . रुदन्ती चूर्ण एक ग्राम + स्वर्णबसंत मालती रस १२५ मिग्रा + श्रंग भस्म १२५ मिग्रा. + सितोपलादि चूर्ण ५०० मिग्रा इन सबकी एक खुराक बना कर शहद के साथ दिन में इसी तरह तीन बार चटायें। दवा खाली पेट न दें।
२. शिला सिंदूर ६५ मिग्रा + कांचनार गुग्गुल एक गोली दिन में तीन बार वासारिष्ट के दो चम्मच के साथ दें।
सुपाच्य आहार दीजिये,बाजारू चीजों से परहेज कराएं। जल्दी-जल्दी उपचार बदलना भी घातक सिद्ध होता है यह ध्यान रखिये।
बुधवार, जुलाई 09, 2008
बचपन से ही जुखाम की काफ़ी शिकायत रही है
Published :
7/09/2008 09:42:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
नमस्ते डाक्टर साहब,मेरी उम्र चालीस साल है। मुझे बचपन से ही जुखाम की काफ़ी शिकायत रही है। काफ़ी इलाज करा लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ। बचपन में DNS का आपरेशन भी हुआ था। पहले सर्दी के साथ खांसी भी आती थी और नाक से पानी बहता था। अब नाक से पानी नहीं बहता लेकिन नाक जाम रहती है और सिर भारी रहता है। अब कभी खांसी नही होती। कुछ साल पहले मुझे जांडिस हुआ था जिसके बाद थोड़ा हाजमा बिगड़ गया। खासकर दूध नहीं पचा पाता। गैस और एसिडिटी रहती है। आफिस में बैठे-बैठे काम करने से वजन बढ़कर ७५ किग्रा. हो गया है। कमजोरी और दिन भर थकान महसूस होती है। थोड़ा चलने पर सांस भारी हो जाती है। अक्सर सर्दी और गैस की वजह से सिरदर्द होता है जिसे दूर करने के लिये combiflam की गोली खा लेता हूं। आभारी रहूंगा अगर कोई इलाज बता सकें। हो सके तो ये भी बताएं कि क्या दवाएं बनी-बनायी मेडिकल स्टोर पर मिलती हैं?
सुभाष डी., मुम्बई
सुभाष जी,मुझे आप जैसे लोगों के साथ बहुत आसानी होती है जो कि अपनी समस्या को विस्तार से लिखते हैं। आपने जो भी लिखा वह आपकी समस्या को अच्छे तरीके से स्पष्ट करता है। आपके दोष को मैं इस तरह से बता सकता हूं कि कफ़ के ऊपर पित्त का आवरण है जिसके कारण आप इस तरह परेशान हैं और मुझे पूरी उम्मीद है कि ये पित्त की समस्या का कारण आपको पूर्वकाल में हुआ पीलिया रोग रहा है, जोकि उपचार से ठीक तो हो गया किन्तु अपना प्रभाव जाते जाते आपकी देह पर छोड़ गया। चिन्ता की बात नहीं है आप निम्न उपचार लें और यकीन मानें कि आप शतप्रतिशत स्वस्थ हो जाएंगे किंतु बढ़े हुए वजन के लिये आपको नियमित व्यायाम करना आवश्यक है। आप यदि चाय-काफ़ी का सेवन करते हों तो बंद कर देना आपके लिये हितकर रहेगा साथ ही धूम्रपान भी आपके लिये अपथ्य है।
१ . त्रिफला चूर्ण रात्रि भोजन के बाद एक चम्मच हल्के गर्म जल से सेवन करें।
२ . कामदुधा रस(साधारण) एक-एक गोली दिन में तीन बार सुबह दोपहर व रात्रि को साधारण जल के साथ सेवन करें।
३ . सितोपलादि चूर्ण दो ग्राम को शहद(मध या honey) के साथ दिन में तीन बार सेवन करें।
COMBIFLAM का सेवन तत्काल बंद कर दीजिये, दवा के नाम पर आप जो खा रहे हैं वह आपके स्वास्थ्य का सत्यानाश कर रहा है। इस दवा(?) का अक्सर सेवन आपकी किडनी का भयंकर नुकसान करता है। आप इस उपचार को एक माह तक लें फिर आप देखिये कि आप स्वस्थ महसूस करेंगे। यदि आप दूध पीना चाहते हैं तो एक गिलास दूध में तीन छुहारे(खारिक) की गुठली निकाल कर उबालें फिर छुहारे चबा लें और दूध पी लीजिये। आप इस तरह दूध की थोड़ी मात्रा से शुरू कर सकते हैं। ये दवाएं आपको आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर पर सरलता से मिल जाएंगी।
सुभाष डी., मुम्बई
सुभाष जी,मुझे आप जैसे लोगों के साथ बहुत आसानी होती है जो कि अपनी समस्या को विस्तार से लिखते हैं। आपने जो भी लिखा वह आपकी समस्या को अच्छे तरीके से स्पष्ट करता है। आपके दोष को मैं इस तरह से बता सकता हूं कि कफ़ के ऊपर पित्त का आवरण है जिसके कारण आप इस तरह परेशान हैं और मुझे पूरी उम्मीद है कि ये पित्त की समस्या का कारण आपको पूर्वकाल में हुआ पीलिया रोग रहा है, जोकि उपचार से ठीक तो हो गया किन्तु अपना प्रभाव जाते जाते आपकी देह पर छोड़ गया। चिन्ता की बात नहीं है आप निम्न उपचार लें और यकीन मानें कि आप शतप्रतिशत स्वस्थ हो जाएंगे किंतु बढ़े हुए वजन के लिये आपको नियमित व्यायाम करना आवश्यक है। आप यदि चाय-काफ़ी का सेवन करते हों तो बंद कर देना आपके लिये हितकर रहेगा साथ ही धूम्रपान भी आपके लिये अपथ्य है।
१ . त्रिफला चूर्ण रात्रि भोजन के बाद एक चम्मच हल्के गर्म जल से सेवन करें।
२ . कामदुधा रस(साधारण) एक-एक गोली दिन में तीन बार सुबह दोपहर व रात्रि को साधारण जल के साथ सेवन करें।
३ . सितोपलादि चूर्ण दो ग्राम को शहद(मध या honey) के साथ दिन में तीन बार सेवन करें।
COMBIFLAM का सेवन तत्काल बंद कर दीजिये, दवा के नाम पर आप जो खा रहे हैं वह आपके स्वास्थ्य का सत्यानाश कर रहा है। इस दवा(?) का अक्सर सेवन आपकी किडनी का भयंकर नुकसान करता है। आप इस उपचार को एक माह तक लें फिर आप देखिये कि आप स्वस्थ महसूस करेंगे। यदि आप दूध पीना चाहते हैं तो एक गिलास दूध में तीन छुहारे(खारिक) की गुठली निकाल कर उबालें फिर छुहारे चबा लें और दूध पी लीजिये। आप इस तरह दूध की थोड़ी मात्रा से शुरू कर सकते हैं। ये दवाएं आपको आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर पर सरलता से मिल जाएंगी।
सोमवार, मई 19, 2008
नाक से कभी भी रक्त आने लगता है व लैट्रिन करते समय भी खून दिखा...
Published :
5/19/2008 08:15:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब नमस्ते, मैं एक छोटे से कस्बे निकल कर महानगर दिल्ली आया क्योंकि जिस कंपनी में नौकरी मिली उसने पहली पोस्टिंग दिल्ली में ही कर दी। चुंकि गरीब परिवार से रहा तो जब देखा कि कंपनी की ओर से अच्छे से अच्छा भोजन मुफ़्त में ही मिलता है तो मेरी ही गलती है कि मैं अपने आप को सम्हाल नहीं पाया और तेज चटपटे भोजन जैसे चिकन, मटन, मछली, अंडा आदि रोज ही भोजन में लगातार तीन माह से खाये चला जा रहा हूं। शाकाहारी भोजन को हाथ तक नहीं लगाया अब पिछले एक सप्ताह से मुझे नाक से कभी भी अचानक रक्त आने लगता है जैसे कि नक्सीर फूट जाती है। मुझे धूप में भी काफी घूमना पड़ जाता है सर्वे के सिलसिले में। हल्की सी सूखी खांसी है जिसमें कि कभी-कभी थूक के साथ रक्त की लालिमा दिखती है, भोजन के बाद देह में जलन सी होती है, सिर एकदम गर्म बना रहता है, प्यास बहुत लगती है, भोजन के बाद काफ़ी देर तक बेचैनी सी बनी रहती है, बदन एकदम ढीला सा हो जाता है, ऐसा लगता है कि गले में धुंआ भरा हो, कल तो मुझे लैट्रिन करते समय भी खून दिखा। मैं डर गया हूं और मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि मुझे क्या ये सब खाने के कारण हो रहा है या कोई अन्य कारण है। मुझे प्लीज तत्काल दवा बताइये। मैं कोई नशा नहीं करता हूं।
जय सिंह राजपूत,ओरछा
जयसिंह जी, आप इस बात से परेशान न हों आपको हुई बीमारी वाकई कोई गम्भीर बीमारी नहीं है पर गम्भीरता तब बढ़ सकती थी जब आप इसे अनदेखा कर देते। आपकी बीमारी को आयुर्वेद की भाषा में "रक्तपित्त" कहते हैं। आप अपने भोजन में सुधार करिये और मांसाहार बंद कर के शाकाहार अपनाइये वरना उपचार व्यर्थ हो जाएगा। मिर्च-मसालेदार भोजन से सख्त परहेज़ रखें। निम्न उपचार लीजिये--
१ . सितोपलादि चूर्ण २ ग्राम + प्रवाल पिष्टी २ रत्ती + रक्तपित्तांतक रस २ रत्ती + शुभ्रा भस्म २ रत्ती; इन सब को मिला कर एक खुराक बनाएं और दिन में तीन बार शहद और मिश्री के मिश्रण के संग सेवन करें।
२ . खस का शर्बत लाकर रखिये और दिन में जब ज्यादा प्यास लगे तो आधा-आधा गिलास इस शर्बत को हल्का-हल्का घूंट भर कर पीजिये।
३ . कामदुधा रस एक गोली दिन में दो बार वासारिष्ट के दो चम्मच के साथ लीजिये।
इस उपचार को एक माह तक जारी रखिये। आप पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे घबराइये मत।
जय सिंह राजपूत,ओरछा
जयसिंह जी, आप इस बात से परेशान न हों आपको हुई बीमारी वाकई कोई गम्भीर बीमारी नहीं है पर गम्भीरता तब बढ़ सकती थी जब आप इसे अनदेखा कर देते। आपकी बीमारी को आयुर्वेद की भाषा में "रक्तपित्त" कहते हैं। आप अपने भोजन में सुधार करिये और मांसाहार बंद कर के शाकाहार अपनाइये वरना उपचार व्यर्थ हो जाएगा। मिर्च-मसालेदार भोजन से सख्त परहेज़ रखें। निम्न उपचार लीजिये--
१ . सितोपलादि चूर्ण २ ग्राम + प्रवाल पिष्टी २ रत्ती + रक्तपित्तांतक रस २ रत्ती + शुभ्रा भस्म २ रत्ती; इन सब को मिला कर एक खुराक बनाएं और दिन में तीन बार शहद और मिश्री के मिश्रण के संग सेवन करें।
२ . खस का शर्बत लाकर रखिये और दिन में जब ज्यादा प्यास लगे तो आधा-आधा गिलास इस शर्बत को हल्का-हल्का घूंट भर कर पीजिये।
३ . कामदुधा रस एक गोली दिन में दो बार वासारिष्ट के दो चम्मच के साथ लीजिये।
इस उपचार को एक माह तक जारी रखिये। आप पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे घबराइये मत।
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मृत्युन्जय रस
नृपतिवल्लभ रस
नागार्जुनाभ्र रस
नष्टपुष्पान्तक
रस
नित्यानंद रस
पीयूषवल्ली रस
पूर्ण चंद्र रस
प्रदररिपु रस,
प्रवाल पंचाम्रत
रस
प्रतापलंकेश्वर
रस
प्रमेहगज केशरी
रस
पुष्पधन्वा रस
प्रदरारि रस
प्रदरान्तक रस
रसपीपरी रस
रसराज रस
रामबाण रस
रजःप्रवर्तिनी
बटी,
रसादि रस
रक्तपित्तान्तक
रस
संजीवनी बटी
संशमनी बटी
समीरपन्नग रस
सारिवादि बटी
सर्पगंधाघन बटी
सूतशेखर रस
श्रंगाराभ्र रस
स्मृतिसागर रस
सिद्धप्राणेश्वर
रस
सोमनाथ रस
शिलाजीत बटी,
शिलाजित्वादि बटी
शिलासिंदूर बटी,
शिरःशूलादिवज्र
रस
शिरोवज्र रस
शूलवज्रिणी बटी
शंख बटी
शंकर बटी
शूलगजकेशरी रस
श्वास कुठार रस,
श्वासकास
चिंतामणि रस
शीतांशु रस
शुक्रमात्रिका
बटी
त्रिभुवन कीर्ति
रस
त्रिमूर्ति रस,
त्रैलोक्य
चिंतामणि रस
तारकेश्वर रस
बोलबद्ध रस
ब्राह्मी बटी
वात गजांकुश रस
वातकुलान्तक रस
बसंत कुसुमाकर रस
वृहत वातगजांकुश
रस
वृहत बंगेश्वर रस
विरेचन बटी
वृहत वातचिंतामणि
रस
वृहत
गर्भचिंतामणि रस
वीर्यशोधन बटी
वृद्धिबाधिका बटी
व्योषादि बटी
विषतिंदुक बटी
व्याधिहरण रसायन,
वृहत कामचूड़ामणि
रस
योगेन्द्र रस
अभ्रक भस्म
(साधारण,शतपुटी,सहस्त्रपुटी)
अकीक पिष्टी/भस्म
हजरुलयहूद
भस्म/पिष्टी
गोदन्ती भस्म
जहरमोहरा खताई
भस्म/पिष्टी,
कुक्कुटाण्डत्वक
भस्म
कहरवा पिष्टी
कान्तसार लौह
भस्म
कपर्द(वराटिका)भस्म
कासीस भस्म
लौह भस्में
(तीन
प्रकार)
मण्डूर भस्म
श्रंग भस्म
मुक्ताशुक्ति
भस्म/पिष्टी,
नाग भस्म
प्रवाल
पिष्टी/भस्म
शंख भस्म
शुभ्रा(स्फटिका)
भस्म
स्वर्णमाक्षिक
भस्म
ताम्र भस्म
टंकण भस्म
त्रिबंग भस्म
बंग भस्म
यशद भस्म
कासीस गोदन्ती
भस्म
संगेजराहत भस्म
संगेयेशव
भस्म/पिष्टी
गोमेदमणि
भस्म/पिष्टी
माणिक्य
भस्म/पिष्टी
मुक्ता(मोती)भस्म/पिष्टी
नीलम भस्म/पिष्टी
पुखराज
भस्म/पिष्टी
चांदी(रजत)भस्म
पन्ना(तार्क्ष्य)भस्म/पिष्टी
लाजावर्त
भस्म/पिष्टी
अम्लपित्तान्तक
लौह
चंदनादि लौह
(ज्वर
व प्रमेह)
ताप्यादि लौह
(रजत/बिना
रजत)
धात्री लौह
नवायस लौह
प्रदरारि लौह
प्रदरान्तक लौह
पुनर्नवादि
मण्डूर
विषमज्वरान्तक
लौह
सर्वज्वरहर लौह
सप्तामृत लौह
शिलाजित्वादि लौह
यक्रदप्लीहारि
लौह
रक्तपित्तान्तक
लौह
शोथारि लौह
मेदोहर विडंगादि
लौह
अमृतादि गुग्गुल
आभा गुग्गुल
कांचनार गुग्गुल
कैशोर गुग्गुल,
गोक्षुरादि
गुग्गुल
पुनर्नवादि
गुग्गुल
लाक्षादि गुग्गुल
पंचतिक्तघृत
गुग्गुल
रास्नादि गुग्गुल
सप्तविंशतिको
गुग्गुल
सिंहनाद गुग्गुल,
त्रयोदशांग
गुग्गुल
त्रिफला गुग्गुल
योगराज गुग्गुल
महायोगराज
गुग्गुल
वातारि गुग्गुल,
मेदोहर(नवक)
गुग्गुल
अभ्रक पर्पटी
स्वर्ण पर्पटी
बोल पर्पटी
लौह पर्पटी
प्राणदा पर्पटी
ताम्र पर्पटी
पंचामृत पर्पटी
विजय पर्पटी
रस पर्पटी
शीतल पर्पटी
श्वेत पर्पटी
मकरध्वज
चंद्रोदय
मल्ल सिंदूर
मल्ल चंद्रोदय
रस सिंदूर
शिला सिंदूर
स्वर्णबंग
ताल सिंदूर
रसमाणिक्य,
शिलाजीत(गीला/सूखा)
स्वर्णबंग क्षार