Respected sir,
namaskar
I am the regular reader of your blog,thanks for the valueble information given to us,My daughter is 5 yrs old & suffering from the atopic dermatitis as per the homeopathic docter,earlier we had tried the alopathic medicine,but no satisfactory results came out,after that we started the homeopathic course from last 1.5 year,but now she develops the asthma related problems,we have to do the nebulisors & some times prednisolone like steroids also,our doctor told us that ,skin & chest problems are parallel to each other,if we supress the asthma related problems then skin problems comes,now she becomes is very sensitive to dust & allerges,weather change,in dec i had give her the kafeswari & crux,she shown some results ,then we had consulted with our vaid jee,he had given some ayudvedic medicin& also told us this is some hot medicins,so give her in small qty for the asthama related problem,after taking only 2 doses she was fine,but skin becomes too much itching & rashes,she was conitiously itching the skin ,then again he told us to apply the kele ka tail & jattdii oil mixed with the coconut oil,but no result came,now her skin & asthama is in poor condition,we have to use the nebuliseres also on the regular basis,she is having too much problem(itching problem) in the nights alsoour homeopathic doctor says first he will cure her chest problems then skin,pls help us
॥ ॐ सांई राम ॥... ॥ अनंत कोटी ब्रम्हांड नायक राजाधिराज योगीराज परं ब्रम्हं श्री सच्चिदानंद सदगुरू श्री साईनाथ महाराज की जय ॥... ॥ ॐ सांई राम ॥
warm regards
Gitesh uppal
भाईसाहब मैं मानता हूं कि होम्योपैथी हो या कोई सी भी चिकित्सा प्रणाली जब तक वह शरीर की रचना के विषय में एनाटामी की आधुनिकता को लेकर उलझी रहेगी वह चिकित्सा में दिग्भ्रमित ही रहेगी। इसका कारण आपको बता दूं कि आधुनिक फिजिक्स व केमिस्ट्री जैसे विषय अभी तक होम्योपैथी के सिद्धांतों को लेकर अटकलें लगाते रहते हैं क्योंकि 12X की पोटेन्सी के बाद तो जिस मूल दवा को लेकर वह दवा आपके सामने अधिक पोटेन्सी पर लायी गयी है उसके तो अणु माइक्रोस्कोप से देखने पर दिखते ही नहीं है फिर दवा उच्च शक्ति पर कैसे जाती रहती है ये तो एक ऊर्जा सिद्धांत है जो भौतिकी नहीं जान सकती तो फिर आयुर्वेद का त्रिदोष सिद्धांत कैसे समझ सकते हैं। आप बच्ची को निम्न दवाएं दीजिये और देखिये कि बेटी कैसे स्वस्थ होकर सबको आश्चर्य में डाल देगी-
१. आयुर्वेद में इसे हरिद्रा क्षीरपाक रसायन कहते हैं मैं आपको इसको बनाने का तरीका बताता हूं। अच्छी साफ़ हल्दी की गांठों को थोड़ा सा कूट लें फिर गाय के घी में भून लीजिये इस भुनी हुई हल्दी को बारीक पीस लीजिये।
गाय का सौ ग्राम दूध ले लीजिये और गर्म करें, गर्म होने पर उसमें सवा ग्राम(यानि अंदाज से लगभग तीन चुटकी भर) ऊपर बताई गई हल्दी के चूर्ण को मिला दीजिये। इसी में दस ग्राम गुड़ डाल दीजिये व पकने दीजिये उबाल आने पर बिना छाने हल्का गर्म ही बच्ची को पिलाइये।
इसी के साथ एक चौथाई चाय का चम्मच हरिद्रा खण्ड(यह आयुर्वेद की एक बनी हुई औषधि है जो आपको आयुर्वेद के औषधि विक्रेता के पास मिल जाएगी यह एक किस्म का च्यवनप्राश जैसा पाक या अवलेह होता है) + आधी गोली श्वांस कुठार रस भी बच्ची को निगलवा दीजिये। यह खुराक दिन में दो बार दीजिये, खाली पेट न दें।
२ . त्वचा पर लगाने के लिये आप यह मिश्रण तैयार बना लीजिये- नीम का तेल ५० मिली. + करंज का तेल ५० मिली. + कपूर १० ग्राम + पिपरमिंट १० ग्राम(इसे मेन्थाल भी कहते हैं। इसे मिश्रण को दिन में तीन बार प्रभावित अंग पर लगाइये।
इस उपचार को तीन माह तक जारी रखें लेकिन एक माह देने के बाद द्स दिन के लिये बंद कर दें व पुनः शुरू करें, इस प्रकार तीन माह करें।
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कुछ सुझाव
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शनिवार, फ़रवरी 14, 2009
बेटी को होम्योपैथ ने atopic dermatitis बताया है,अस्थमा बुरी स्थिति में है
Published :
2/14/2009 08:54:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
गुरुवार, जनवरी 29, 2009
सोरायसिस नामक स्किन डिसीज़ से बहुत परेशान हूं
Published :
1/29/2009 05:47:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डा.साहब मैं सोरायसिस नामक स्किन डिसीज़ से बहुत परेशान हूं होम्योपैथी से लेकर ऐलोपैथी तक का इलाज करवा चुका हूं एल्किन जब तक इलाज जारी रहता है समस्या खत्म रहती है लेकिन उपचार लेना बंद करते ही फिर से उभर कर आ जाती है। आत्महत्या करने का मन करता है क्या वाकई ये बीमारी लाइलाज है या आयुर्वेद में इसका सचमुच इलाज है? मेरी मदद करिये।शुक्रिया
अज़ीम खान,भुसावल
भाईसाहब बिलकुल परेशान मत होइये आपसे किस मूर्ख ने कह दिया कि सोरायसिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है? यह एक जिद्दी हठीला सा रोग है लेकिन ऐसा नहीं है कि इलाज ही न हो। आप इस उपचार को लगातार कम से कम छह माह तक लीजिये और स्थायी लाभ के लिये आप एक साल तक लगातार लीजिये-
१ . आरोग्यवर्धिनी वटी १ गोली + पंचतिक्त घृत गुग्गुल १ गोली + कैशोर गुग्गुल १ गोली दिन में तीन बार खदिरारिष्ट+महामंजिष्ठादि कषाय के दो चम्मच के साथ लीजिये।
२ . गिलोय सत्व १ ग्राम + रस माणिक्य १०० मिलीग्राम + प्रवाल पिष्टी २०० मिलीग्राम मिला कर दिन में तीन बार पहली दवा के आधे घंटे बाद सारिवाद्यारिष्ट के दो चम्मच से लीजिये।
३ . प्रभावित अंग को नीम के पत्तों के उबाले हुए पानी से धोकर पंचतिक्त घृत दिन में दो बार लगाइये व रात में सोते समय जात्यादि तेल लगाइये। खाने में नमक का प्रयोग एकदम बंद कर दीजिये, दलिया, दूध, दूध-रोटी का सेवन ज्यादा करिये। इस उपचार को लेने से एक सप्ताह के अंदर ही आपको बहुत लाभ महसूस होगा।
अज़ीम खान,भुसावल
भाईसाहब बिलकुल परेशान मत होइये आपसे किस मूर्ख ने कह दिया कि सोरायसिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है? यह एक जिद्दी हठीला सा रोग है लेकिन ऐसा नहीं है कि इलाज ही न हो। आप इस उपचार को लगातार कम से कम छह माह तक लीजिये और स्थायी लाभ के लिये आप एक साल तक लगातार लीजिये-
१ . आरोग्यवर्धिनी वटी १ गोली + पंचतिक्त घृत गुग्गुल १ गोली + कैशोर गुग्गुल १ गोली दिन में तीन बार खदिरारिष्ट+महामंजिष्ठादि कषाय के दो चम्मच के साथ लीजिये।
२ . गिलोय सत्व १ ग्राम + रस माणिक्य १०० मिलीग्राम + प्रवाल पिष्टी २०० मिलीग्राम मिला कर दिन में तीन बार पहली दवा के आधे घंटे बाद सारिवाद्यारिष्ट के दो चम्मच से लीजिये।
३ . प्रभावित अंग को नीम के पत्तों के उबाले हुए पानी से धोकर पंचतिक्त घृत दिन में दो बार लगाइये व रात में सोते समय जात्यादि तेल लगाइये। खाने में नमक का प्रयोग एकदम बंद कर दीजिये, दलिया, दूध, दूध-रोटी का सेवन ज्यादा करिये। इस उपचार को लेने से एक सप्ताह के अंदर ही आपको बहुत लाभ महसूस होगा।
शनिवार, अप्रैल 19, 2008
फफोले(छाले) निकल आते हैं, डायग्नोसिस में Impetigo Eczematidus Bulla रोग लिखा है
Published :
4/19/2008 08:56:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डा.साहब,नमस्कार, पिछले बीस दिनों से अजीब से रोग से परेशान हूं। शरीर के किसी भी भाग में त्वचा पर फफोले निकल आते हैं और कुछ दो या तीन दिन में अपने आप फूट जाते हैं इन छालों के फूटने से बहुत तेज जलन और दर्द होता है। जैसे कि जल जाने के बाद छाले बन जाते हैं ठीक वैसे ही छाले हैं। इन छालों का रंग कुछ काला-लाल है और छालों की त्वचा कुछ मोटी से जान पड़ती है अंदर कुछ पीला सा पानी जैसा तरल भरा रहता है। एलोपैथी के डाक्टर ने दस दिन तक दवाएं दी लेकिन मुझे कोई आराम नहीं महसूस हुआ बल्कि नए फफोले आते ही जा रहे हैं उस डाक्टर ने अपने डायग्नोसिस में Impetigo Eczematidus Bulla नामक रोग लिखा है। मेहरबानी करके तुरंत आराम देने वाला उपाय बताएं। मैं मांसाहार करता हूं लेकिन कोई व्यसन नहीं है,भूख कम ही लगती है।
संजय नारंगणे, नोयडा
संजय जी,आपकी बीमारी को आयुर्वेद की भाषा में "विस्फोट" कहते हैं। यह एक त्वचा रोग है जोकि भोजन में कफ-पित्त को दूषित करने वाले पदार्थों के सेवन करने से या कोई भी ऐसे कार्यों को अति तक करना जिससे कि ये दोष कुपित होकर रक्त को प्रभावित कर दें, होता है। आप सर्वप्रथम तो बाजारू साफ़्टड्रिंक्स का सेवन तत्काल बंद कर दीजिये जो शायद आपके मामले में रोग के मुख्य कारण सिद्ध हो रहे हैं इसके साथ नमक,मिर्च, खटाई, चाय, काफ़ी का प्रयोग भी बंद करना आपके लिये हितकर है। सबसे पहले आपकी कोष्ठशुद्धि अनिवार्य है जिसके लिये दो चम्मच एरण्ड का तेल(CASTOR OIL) एक कप हलके गर्म मीठे दूध के साथ मिला कर रात में सोने से पहले पी लें, लेकिन ध्यान रखिये कि जिस दिन रात में ये दवा लें उस दिन में बस खिचड़ी ही खायें और उसमें भी ज्यादा मात्रा में शुद्ध घी मिला कर(वनस्पति घी का प्रयोग न करें) । सुबह आपको इससे तीन चार बार दस्त होंगे जिससे घबराईये मत। जिस प्रकार गंदे कपड़े पर रंग नहीं चढ़ता उसी तरह यदि शरीर की भी शुद्धि न करी जाए तो दवाएं लाभ नहीं देतीं। तीन दिन तक आप इस जुलाब को लीजिये ताकि भलीभांति पेट साफ हो जाए। इसके बाद निम्न उपचार लीजिये --
१ . गंधक रसायन २० ग्राम + रस माणिक्य १० ग्राम + तालकेश्वर रस १० ग्राम को भली प्रकार घोंट कर मिला लें तथा कुल साठ बराबर मात्रा की पुड़िया बना लीजिये। सुबह- शाम को एक एक पुड़िया खदिरारिष्ट २ चम्मच+ महामंजिष्ठादि काढ़ा ४ चम्मच के साथ निगल लीजिये।
२ . नीम की सूखी पत्तियां १०० ग्राम + उसवा १०० ग्राम + मजीठ ५० ग्राम + सारिवा ५० ग्राम + चोपचीनी ५० ग्राम इन सबको गिलोय के रस के साथ घोंट कर मटर के दाने के बराबर की गोलियां बना लीजिये और एक एक गोली सुबह-दोपहर-शाम को जल के साथ लें लेकिन अगर ये सब कूटना पीसना संभव न हो सके तो इस पूरी औषधि के स्थान पर एक-एक गोली पंचतिक्त घृत गुग्गुलु सुबह-दोपहर-शाम को इसी प्रकार लीजिये।
३ . महामरिच्यादि तेल को छालों पर ऊपर से लगायें। ये दिन में कई बार लगाया जा सकता है।
संजय नारंगणे, नोयडा
संजय जी,आपकी बीमारी को आयुर्वेद की भाषा में "विस्फोट" कहते हैं। यह एक त्वचा रोग है जोकि भोजन में कफ-पित्त को दूषित करने वाले पदार्थों के सेवन करने से या कोई भी ऐसे कार्यों को अति तक करना जिससे कि ये दोष कुपित होकर रक्त को प्रभावित कर दें, होता है। आप सर्वप्रथम तो बाजारू साफ़्टड्रिंक्स का सेवन तत्काल बंद कर दीजिये जो शायद आपके मामले में रोग के मुख्य कारण सिद्ध हो रहे हैं इसके साथ नमक,मिर्च, खटाई, चाय, काफ़ी का प्रयोग भी बंद करना आपके लिये हितकर है। सबसे पहले आपकी कोष्ठशुद्धि अनिवार्य है जिसके लिये दो चम्मच एरण्ड का तेल(CASTOR OIL) एक कप हलके गर्म मीठे दूध के साथ मिला कर रात में सोने से पहले पी लें, लेकिन ध्यान रखिये कि जिस दिन रात में ये दवा लें उस दिन में बस खिचड़ी ही खायें और उसमें भी ज्यादा मात्रा में शुद्ध घी मिला कर(वनस्पति घी का प्रयोग न करें) । सुबह आपको इससे तीन चार बार दस्त होंगे जिससे घबराईये मत। जिस प्रकार गंदे कपड़े पर रंग नहीं चढ़ता उसी तरह यदि शरीर की भी शुद्धि न करी जाए तो दवाएं लाभ नहीं देतीं। तीन दिन तक आप इस जुलाब को लीजिये ताकि भलीभांति पेट साफ हो जाए। इसके बाद निम्न उपचार लीजिये --
१ . गंधक रसायन २० ग्राम + रस माणिक्य १० ग्राम + तालकेश्वर रस १० ग्राम को भली प्रकार घोंट कर मिला लें तथा कुल साठ बराबर मात्रा की पुड़िया बना लीजिये। सुबह- शाम को एक एक पुड़िया खदिरारिष्ट २ चम्मच+ महामंजिष्ठादि काढ़ा ४ चम्मच के साथ निगल लीजिये।
२ . नीम की सूखी पत्तियां १०० ग्राम + उसवा १०० ग्राम + मजीठ ५० ग्राम + सारिवा ५० ग्राम + चोपचीनी ५० ग्राम इन सबको गिलोय के रस के साथ घोंट कर मटर के दाने के बराबर की गोलियां बना लीजिये और एक एक गोली सुबह-दोपहर-शाम को जल के साथ लें लेकिन अगर ये सब कूटना पीसना संभव न हो सके तो इस पूरी औषधि के स्थान पर एक-एक गोली पंचतिक्त घृत गुग्गुलु सुबह-दोपहर-शाम को इसी प्रकार लीजिये।
३ . महामरिच्यादि तेल को छालों पर ऊपर से लगायें। ये दिन में कई बार लगाया जा सकता है।
मंगलवार, मार्च 18, 2008
बीमारी का नाम "सोरायसिस " है ....
Published :
3/18/2008 10:56:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डॉक्टर साहब,मैं बड़े जिद्दी किस्म के त्वचा रोग से पीड़ित हूं बीमारी का नाम "सोरायसिस " है और इसका इलाज ऐलोपैथी में है ही नहीं हमारे तरफ इसे भैंसहवा दाद कहते हैं । अंग्रेजी दवा वाले डॉक्टर को दिखाया तो उसने ही कहा कि जब तक आप दवा लेंगे तब तक ठीक रहेगा फिर उसके बाद कुछ दिनों में दोबारा उभर आयेगा इसलिये आप आयुर्वेद का इलाज करवाइये । लोग कहते हैं कि यह बीमारी मरते दम तक ठीक नहीं होती है क्या सचमुच आयुर्वेद में इसका इलाज है ?
परशुराम सिंह,सतना
सिंह साहब, जिसने भी आपको आयुर्वेद का मार्ग बताया है वह निःसंदेह ही धन्यवाद का पात्र है क्योंकि वह व्यक्ति खुद ऐलोपैथी का चिकित्सक है और उसकी सीमाएं जानता है कि वह क्या ठीक कर सकता है और क्या नहीं । ये सत्य है कि सोरायसिस एक अत्यंत जिद्दी रोग है किन्तु अब आप भी शुद्ध आयुर्वेद का चमत्कार देखिये कि यह रोग कितनी सरलता से अच्छा होता है । लीजिये प्रस्तुत है समस्या का हल----
१ . गंधक रसायन १० ग्राम + कैशोर गुग्गुलु १० ग्राम + रसमाणिक्य ढ़ाई ग्राम को घोंट कर रख लें व खाली कैप्सूल अथवा मुनक्के में आधा ग्राम मात्रा दवा भर कर सुबह-दोपहर-शाम को शहद और पानी की बराबर मात्रा के मिश्रण के एक चम्मच के साथ दें ।
२ . पंचतिक्त घृत गुग्गुलु ५०० ग्राम लेकर इसमें २५ ग्राम रसमाणिक्य मिला कर बारीक घोंट लें और आधा ग्राम की मात्रा सुबह शाम खदिरारिष्ट + सारिवाद्यारिष्ट + महामंजिष्ठादि क्वाथ के मिश्रण के दो दो चम्मच के साथ सुबह शाम दीजिये ।
३ . महामरिच्यादि तेल १०० मिली. + करंज तेल २० मिली + नीम तेल २० मिली + तुबरक तेल या चालमोगरा तेल २० मिली मिला कर रखें और सुबह शाम प्रभावित स्थानों पर लगाया करें ।
४ . रोज़ रात को पानी में दो साबुत हरड़ भिगो दिया करें और सुबह उनकी गुठली निकाल कर फेंक दें व हरड़ों को चबा कर खाएं ।
स्नान में कोई भी साबुन प्रयोग न करे और स्नान के लिये रोज पानी में नीम के पत्ते डाल कर उबाल कर तैयार करे गये पानी का प्रयोग करें । ईश्वर को धन्यवाद करिये और स्वस्थ जीवन बिताइए । तीन माह तक कम से कम उपचार अवश्य लीजिये ।
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आप इन औषधियों को मात्र उत्पादन मूल्य पर हमसे मंगवा सकते हैं
अग्निकुमार रस
अर्शोघ्नी बटी
आनंद भैरव रस
अजीर्ण कंटक रस
अर्शकुठार रस
आमवातेश्वर रस
आमवातारि रस
अश्वकंचुकी(घोड़ाचोली)रस
अग्नितुंडी बटी
अमरसुंदरी बटी
आरोग्यवर्धिनी
बटी
आमलकी रसायन
इच्छाभेदी रस
उपदंश कुठार रस
उन्माद गजकेशरी
रस
एकांगवीर रस
एलादि वटी
कनकसुंदर रस
कफ़कुठार रस
कुष्ठकुठार रस
कफ़केतु रस
कुमारकल्याण रस
कामदुधा रस
कृव्यादि रस
कफ़कर्तरी रस
कल्पतरू रस
कामधेनु रस
कृमिकुठार रस
कृमिमुग्दर रस
कफ़चिंतामणि रस
कांकायन बटी
कन्यालोहादि बटी
खैरसार बटी
खदिरादि बटी
गंधक बटी
गंधक रसायन
गर्भपाल रस
गुड़मार बटी
गुल्मकुठार रस
ग्रहणीकपाट रस
ग्रहणी गजेन्द्र
रस
चंद्रप्रभा बटी
चतुर्भुज रस
चंद्रामृत रस
चंदनादि बटी
चंद्रान्शु रस
चतुर्मुख रस
चित्रकादि बटी
चिंतामणि
चतुर्मुख रस
चंद्रकला रस
चिंतामणि रस
चौंसठ प्रहरी
पीपल
जवाहरमोहरा
दंतोद्भेदगदान्तक
रस
हिंगुलेश्वर रस
हृदयार्णव रस
हिंग्वादि बटी,
ज्वरांकुश रस
जयमंगल रस
लघुमालिनी बसंत
रस
लहशुनादि बटी
लवंगादि बटी
लक्ष्मीनारायण रस
लक्ष्मीविलास रस
लक्ष्मीनारायण
रस(नारदीय)
लाई रस
लीलाविलास रस
लोकनाथ रस
मधुमेहनाशिनी बटी
महाज्वरांकुश रस
महाशंख बटी
महामृत्युंजय रस
महावात विध्वंसन
रस
महालक्ष्मी विलास
रस
मकरध्वज बटी
मन्मथाभ्र रस
मूत्रकृच्छान्तक
रस
मरिच्यादि बटी
मृत्युन्जय रस
नृपतिवल्लभ रस
नागार्जुनाभ्र रस
नष्टपुष्पान्तक
रस
नित्यानंद रस
पीयूषवल्ली रस
पूर्ण चंद्र रस
प्रदररिपु रस,
प्रवाल पंचाम्रत
रस
प्रतापलंकेश्वर
रस
प्रमेहगज केशरी
रस
पुष्पधन्वा रस
प्रदरारि रस
प्रदरान्तक रस
रसपीपरी रस
रसराज रस
रामबाण रस
रजःप्रवर्तिनी
बटी,
रसादि रस
रक्तपित्तान्तक
रस
संजीवनी बटी
संशमनी बटी
समीरपन्नग रस
सारिवादि बटी
सर्पगंधाघन बटी
सूतशेखर रस
श्रंगाराभ्र रस
स्मृतिसागर रस
सिद्धप्राणेश्वर
रस
सोमनाथ रस
शिलाजीत बटी,
शिलाजित्वादि बटी
शिलासिंदूर बटी,
शिरःशूलादिवज्र
रस
शिरोवज्र रस
शूलवज्रिणी बटी
शंख बटी
शंकर बटी
शूलगजकेशरी रस
श्वास कुठार रस,
श्वासकास
चिंतामणि रस
शीतांशु रस
शुक्रमात्रिका
बटी
त्रिभुवन कीर्ति
रस
त्रिमूर्ति रस,
त्रैलोक्य
चिंतामणि रस
तारकेश्वर रस
बोलबद्ध रस
ब्राह्मी बटी
वात गजांकुश रस
वातकुलान्तक रस
बसंत कुसुमाकर रस
वृहत वातगजांकुश
रस
वृहत बंगेश्वर रस
विरेचन बटी
वृहत वातचिंतामणि
रस
वृहत
गर्भचिंतामणि रस
वीर्यशोधन बटी
वृद्धिबाधिका बटी
व्योषादि बटी
विषतिंदुक बटी
व्याधिहरण रसायन,
वृहत कामचूड़ामणि
रस
योगेन्द्र रस
अभ्रक भस्म
(साधारण,शतपुटी,सहस्त्रपुटी)
अकीक पिष्टी/भस्म
हजरुलयहूद
भस्म/पिष्टी
गोदन्ती भस्म
जहरमोहरा खताई
भस्म/पिष्टी,
कुक्कुटाण्डत्वक
भस्म
कहरवा पिष्टी
कान्तसार लौह
भस्म
कपर्द(वराटिका)भस्म
कासीस भस्म
लौह भस्में
(तीन
प्रकार)
मण्डूर भस्म
श्रंग भस्म
मुक्ताशुक्ति
भस्म/पिष्टी,
नाग भस्म
प्रवाल
पिष्टी/भस्म
शंख भस्म
शुभ्रा(स्फटिका)
भस्म
स्वर्णमाक्षिक
भस्म
ताम्र भस्म
टंकण भस्म
त्रिबंग भस्म
बंग भस्म
यशद भस्म
कासीस गोदन्ती
भस्म
संगेजराहत भस्म
संगेयेशव
भस्म/पिष्टी
गोमेदमणि
भस्म/पिष्टी
माणिक्य
भस्म/पिष्टी
मुक्ता(मोती)भस्म/पिष्टी
नीलम भस्म/पिष्टी
पुखराज
भस्म/पिष्टी
चांदी(रजत)भस्म
पन्ना(तार्क्ष्य)भस्म/पिष्टी
लाजावर्त
भस्म/पिष्टी
अम्लपित्तान्तक
लौह
चंदनादि लौह
(ज्वर
व प्रमेह)
ताप्यादि लौह
(रजत/बिना
रजत)
धात्री लौह
नवायस लौह
प्रदरारि लौह
प्रदरान्तक लौह
पुनर्नवादि
मण्डूर
विषमज्वरान्तक
लौह
सर्वज्वरहर लौह
सप्तामृत लौह
शिलाजित्वादि लौह
यक्रदप्लीहारि
लौह
रक्तपित्तान्तक
लौह
शोथारि लौह
मेदोहर विडंगादि
लौह
अमृतादि गुग्गुल
आभा गुग्गुल
कांचनार गुग्गुल
कैशोर गुग्गुल,
गोक्षुरादि
गुग्गुल
पुनर्नवादि
गुग्गुल
लाक्षादि गुग्गुल
पंचतिक्तघृत
गुग्गुल
रास्नादि गुग्गुल
सप्तविंशतिको
गुग्गुल
सिंहनाद गुग्गुल,
त्रयोदशांग
गुग्गुल
त्रिफला गुग्गुल
योगराज गुग्गुल
महायोगराज
गुग्गुल
वातारि गुग्गुल,
मेदोहर(नवक)
गुग्गुल
अभ्रक पर्पटी
स्वर्ण पर्पटी
बोल पर्पटी
लौह पर्पटी
प्राणदा पर्पटी
ताम्र पर्पटी
पंचामृत पर्पटी
विजय पर्पटी
रस पर्पटी
शीतल पर्पटी
श्वेत पर्पटी
मकरध्वज
चंद्रोदय
मल्ल सिंदूर
मल्ल चंद्रोदय
रस सिंदूर
शिला सिंदूर
स्वर्णबंग
ताल सिंदूर
रसमाणिक्य,
शिलाजीत(गीला/सूखा)
स्वर्णबंग क्षार