होम्योपैथी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
होम्योपैथी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, अप्रैल 25, 2009

हमेशा जुकाम रहता है नाक की हड्डी टेढी है


नमस्कार महोदय
उम्र २९ वर्ष
वजन ४३ केजी कद १६५सेमि ५'५'' दुबला शरीर
मुझे बचपन से ही जुखाम की समस्या रही है / अलोपैथी के डाक्टर ने साइनस बताया था नाक की सफाई भी की, काफी दवा भी खाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ /आज कल होम्योपैथी दवा खा रहा हूँ/फिर भी समस्या खत्म नही हो रही है / शायद हड्डी टेढी है. मै कवि हु /मंच पर कविता गान में काफी दिक्कत होती है पढने लिखने में भी मन नही लगता है / सिर भारी सा रहता है कफ बहुत निकलता /क्रपया स्थाई समाधान बताये .
धन्यवाद
-- With Kind Regards,

बृजेन्द्र शरण श्रीवास्तव 'उत्कर्ष' ,कानपुर
बृजेन्द्र भाई,आपकी समस्या को गहराई से समझा है और इस नतीजे पर हूं कि हड्डी आदि बढ़ने की बात तो मात्र मन बहलाने की बाते होती हैं। आप परेशान न होइये। आप इन दवाओं को नियमित रूप से तीन माह तक लीजिये और विश्वास रखिये कि आप स्वस्थ हो जाएंगे।
१. श्रंग भस्म २ रत्ती + शुक्ति भस्म २ रत्ती + गोदन्ती भस्म २ रत्ती + पिप्पली चूर्ण २ रत्ती इसकी एक मात्रा बनाएं और ऐसी मात्रा सुबह शाम शहद के साथ सेवन करें।
२. लक्ष्मीविलास रस नारदीय दो गोली दोपहर में खाने से आधे घंटे पहले अदरख+ तुलसी के रस के रस के साथ लीजिये।
३. पथ्यादि काढ़ा दस ग्राम दिन में दो बार सुबह शाम चाय या दूध लेने के पहले मुख शुद्धि करके तुरन्त एवं रात को सोते समय लीजिये।
४. नाक में दिन में दो बार षडबिन्दु तेल की छह-छह बूंदें डालिये।
आप यकीन मानिये कि इसके सेवन के कुछ दिनों बाद ही आप स्वयं महसूस करने लगेंगे कि न तो सिर में भारीपन है और न ही कफ़ आ रहा है। कविता पाठ और गायन आदि में कोई परेशानी न होगी।

गुरुवार, अप्रैल 02, 2009

सायटिका से साल भर से परेशान हूं

सर नमस्ते मैं चालीस साल की हूं, मैं एक टीचर हूं और पिछले एक साल से सायटिका से बहुत परेशान हूं। पहले तो समझ में ही न आया तो पेन किलर खा खाकर कई महीने निकाल दिये लेकिन फिर एक होम्योपैथी के डाक्टर ने बताया कि यह सायटिका नाम की बीमारी है। उनसे भी चार महीने से दवा ले रही हूं वो दस दिन की दवा चार सौ रुपए की देते हैं यानि एक महीने की दवा बारह सौ की पड़ती है इतनी मंहगी दवा के बाद भी कोई खास अंतर नहीं पड़ा आप ही कुछ मदद करिये। धन्यवद
सरिता तिवारी,सहारनपुर
बहन जी आपकी समस्या कोई खास गम्भीर नहीं है लेकिन चूंकि आपने जैसा कि बताया कि आप शिक्षिका हैं तो आपका अधिकांश कार्य खड़े रह कर ही करना होता है जिससे ज्यादा परेशानी होती है। लीजिये आपकी समस्या का हल प्रस्तुत है आप निम्न उपचार लीजिये-
१. मीठी सुरंजान २० ग्राम + सनाय २० ग्राम + सौंफ़ २० ग्राम + शोधित गंधक २० ग्राम + मेदा लकड़ी २० ग्राम + छोटी हरड़ २० ग्राम + सेंधा नमक २० ग्राम इन सभी को लेकर मजबूत हाथों से घोंट लें व दिन में तीन बार तीन-तीन ग्राम गर्म जल से लीजिये।
२. लौहभस्म २० ग्राम + रस सिंदूर २० ग्राम + विषतिंदुक बटी १० ग्राम + त्रिकटु चूर्ण २० ग्राम इन सबको अदरक के रस के साथ घोंट कर २५० मिलीग्राम के वजन की गोलियां बना लीजिये और दो-दो गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लीजिये।
खाली पेट दवाएं न लें और ध्यान रखें कि बासी रखा हुआ भोजन और बाजारू आहार हरगिज न खाएं। बाजारू शीतल पेय बिलकुल न पिएं। तीन माह तक इस उपचार को लगातार ले लेने से आपकी समस्या स्थायी तौर पर खत्म हो जाएगी। लाभ तो आपको मात्र तीन दिन में ही दिखने लगेगा।

गुरुवार, जनवरी 29, 2009

सोरायसिस नामक स्किन डिसीज़ से बहुत परेशान हूं

डा.साहब मैं सोरायसिस नामक स्किन डिसीज़ से बहुत परेशान हूं होम्योपैथी से लेकर ऐलोपैथी तक का इलाज करवा चुका हूं एल्किन जब तक इलाज जारी रहता है समस्या खत्म रहती है लेकिन उपचार लेना बंद करते ही फिर से उभर कर आ जाती है। आत्महत्या करने का मन करता है क्या वाकई ये बीमारी लाइलाज है या आयुर्वेद में इसका सचमुच इलाज है? मेरी मदद करिये।शुक्रिया
अज़ीम खान,भुसावल
भाईसाहब बिलकुल परेशान मत होइये आपसे किस मूर्ख ने कह दिया कि सोरायसिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है? यह एक जिद्दी हठीला सा रोग है लेकिन ऐसा नहीं है कि इलाज ही न हो। आप इस उपचार को लगातार कम से कम छह माह तक लीजिये और स्थायी लाभ के लिये आप एक साल तक लगातार लीजिये-
१ . आरोग्यवर्धिनी वटी १ गोली + पंचतिक्त घृत गुग्गुल १ गोली + कैशोर गुग्गुल १ गोली दिन में तीन बार खदिरारिष्ट+महामंजिष्ठादि कषाय के दो चम्मच के साथ लीजिये।
२ . गिलोय सत्व १ ग्राम + रस माणिक्य १०० मिलीग्राम + प्रवाल पिष्टी २०० मिलीग्राम मिला कर दिन में तीन बार पहली दवा के आधे घंटे बाद सारिवाद्यारिष्ट के दो चम्मच से लीजिये।
३ . प्रभावित अंग को नीम के पत्तों के उबाले हुए पानी से धोकर पंचतिक्त घृत दिन में दो बार लगाइये व रात में सोते समय जात्यादि तेल लगाइये। खाने में नमक का प्रयोग एकदम बंद कर दीजिये, दलिया, दूध, दूध-रोटी का सेवन ज्यादा करिये। इस उपचार को लेने से एक सप्ताह के अंदर ही आपको बहुत लाभ महसूस होगा।