डॉक्टर साहब,नमस्ते; मैं एक दुकानदार हूं और मेरी कपड़े की दुकान है। मेरी उम्र बावन साल है। सुबह साढ़े सात बजे सो कर उठता हूं। नित्यकर्म से फारिग होने के बाद पूजा पाठ करता हूं और नाश्ता करके दुकान पर नौ बजे तक आ जाता हूं फिर रात को नौ बजे दुकान बंद होने पर ही घर वापस आना हो पाता है। दोपहर का भोजन बच्चा घर से लेकर आ जाता है दिन भर दुकान पर बैठे-बैठे मेरे पाचन का सत्यानाश हो गया है। दोपहर में खाने का मन नहीं होता क्योंकि सुबह का नाश्ता ही पेट में हजम नहीं हो पाता है और चलना-फिरना बिलकुल होता ही नहीं है,दिन भर पेट में गुड़गुड़ाहट होती रहती है गैस बनती रहती है जिससे डकारें मारता रहता हूं। लगता है कि कहीं कोई बड़ी बीमारी न पकड़ ले किन्तु मेरी लाचारी है कि मैं अपना व्यवसाय बदल नहीं सकता और इस तरह दिन भर बैठने के कारण जो तकलीफ़ हो रही है उसे भुगतना मजबूरी बन गयी है। क्या आयुर्वेद में मेरी दिनचर्या की मजबूरी समझ कर आप पेट के लिये कोई दवा बता सकते हैं मैं घर पर अपनी पत्नी से बनवा लूंगा या बाजार से खरीद लूंगा। धन्यवाद
चोंथमल साजनानी,रींवा(म.प्र.)
साजनानी साहब आपकी मजबूरी मैं भली प्रकार से समझ रहा हूं। अगर मैं आपको कुछ ऐसी सलाह दूं जो आप पालन ही न कर सकें तो उसका कोई उपयोग न होगा। आप अपने सोने और जागने के समय में एक घन्टे का बदलाव करिये। रात में अधिक से अधिक साढ़े दस बजे तक सो जाइए और रात्रि भोजन के बाद कम से कम पंद्रह मिनट तक थोड़ा टहलिए फिर सोने जाइए और सुबह साढ़े सात के स्थान पर सात बजे उठिए और सुबह भी नित्य कर्म से फारिग होने के बाद थोड़ा हल्का सा व्यायाम करिये क्योंकि आपकी दिनचर्या में शारीरिक श्रम का स्थान ही नहीं है। निम्न औषधि का सेवन नियमित रूप से करिये कुछ दिनो में आपकी समस्या समाप्त हो जाएगी किन्तु दवा को कम से कम एक मास तक खाएं----
योग : -- सेंधा नमक १५० ग्राम + अकरकरा २५ ग्राम + सोंठ २५ ग्राम + छोटी पीपर २५ ग्राम + काली मिर्च २५ ग्राम + सफेद जीरा २५ ग्राम + शोधित गंधक २५ ग्राम + काला जीरा २५ ग्राम + शुद्ध हींग ढाई ग्राम + रस सिन्दूर छह ग्राम + नींबू का सत्व(टाटरी) सौ ग्राम; इन सब पदार्थों को लेकर मजबूत हाथों से घुटाई करा के मिश्रित कर लें। इस में से दो चुटकी भर मात्रा दिन में चार बार सेवन करें और पानी दस मिनट बाद ही पिएं। आपकी गैस की समस्या समाप्त होने के साथ ही आप स्फूर्ति भी महसूस किया करेंगें ।
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रविवार, मई 04, 2008
गैस बनती रहती है दिनभर डकारें मारता रहता हूं........
Published :
5/04/2008 06:51:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
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