डाक्टर साहब,नमस्कार
आपके द्वारा दी गयी सलाहें काफ़ी समय से पढ़ रहा हूं इसलिए अब मेरा विश्वास जम गया है कि आप सही और लाभदायक सलाह देते हैं। मेरी समस्या भी बच्चे न होने की ही है लेकिन मेरी बीमारी का नाम HYDROSPERMIA बताया गया है। मेरी शादी को तीन साल हो चुके हैं मेरी पत्नी पूरी तरह से स्वस्थ है समस्या मेरी ही है पूछने पर पैथोलाजी वाले ने बताया कि इस बीमारी में वीर्य पतला हो जाता है बस इससे ज्यादा वह नहीं समझा सका। क्या आयुर्वेद में इस बीमारी का इलाज है?
अनिल कालेकर,ग्वालियर(म.प्र.)
अनिल जी आपने जो semen examination report भेजी है मैंने उसे देखा है, विशेष चिन्ता की बात नहीं है आप परेशान न हों। निम्न उपचार लीजिये-
१ . पुष्पधन्वा रस एक गोली के साथ एक-एक ग्राम अश्वगंधा चूर्ण, विदारीकंद,सालमपंजा मिला कर इसे एक चम्मच कौंचा पाक के साथ चाट कर ऊपर से दो चम्मच अश्वगंधारिष्ट पी लीजिये। ऐसा दिन में तीन खुराक लीजिये। औषधि भोजन करने के बाद करिये।
२ . गिलोयसत्त्व + वंशलोचन + छोटी इलायची के बीज + बंग भस्म + शिलाजीत प्रत्येक दस ग्राम लेकर इसमें मुक्तापिष्टी दो ग्राम मिलाएं व इस मिश्रण में से ५०० मि.ग्रा. की मात्रा लेकर गुलकंद के साथ सुबह-शाम सेवन करें।
३ . वानरी गुटिका एक-एक सुबह-शाम एक चम्मच शतावरी चूर्ण मिला पकाए गये एक गिलास मीठे दूध के साथ लीजिये(दूध को छानिये मत वैसे ही पी लीजिये)
४ . कामदेव घृत का आधा चम्मच दिन में दो बार ऊपर बताए गये दूध में ही मिला कर सेवन करें।
खट्टे,मिर्च-मसालेदार भोजन,चायनीज़,बाजारू पेय,शराब आदि नशे तथा मांसाहार से सख्त परहेज करें। मैथुन भी निषेध रखिये। हलका व सुपाच्य आहार लीजिये। इस उपचार को कम से कम चालीस दिन तक लीजिये।
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Namaskar Doctor Shahab. Me aapse apni samasya ka samadan chahta ho. sabse pahle me aapko apne bare me batana chahta ho meri aayo 21 year he ...
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प्रणाम डॉक्टर साहब, सर्वप्रथम तो आपका बहुत-बहुत शुक्रिया जो आपने मेरी समस्या पर इतनी तत्परता से प्रतिक्रिया दी. आपको मैं थोड़े से विस्ता...
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डॉ साहब ,आपको सादर नमस्कार . मैंने आपके बहुत सारे ब्लोग्स पढ़े हैं । वहाँ से प्रेरित होकर मई भी आप को मेल कर रहा हू आशा रख...
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यह सभी वर्गों के पुरुषों के लिये अत्यंत उत्तम स्वास्थ्यवर्धक वटी ( टैबलेट) है जो कि बेहद प्रभावी तथा बहुमूल्य जड़ी-बूटियों का बेहतरीन मिश्रण ...
कुछ सुझाव
शनिवार, जनवरी 24, 2009
मेरी समस्या भी बच्चे न होने की ही है लेकिन मेरी बीमारी का नाम HYDROSPERMIA बताया
Published :
1/24/2009 10:09:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
शुक्रवार, जनवरी 23, 2009
पहले जैसी सेक्स की इच्छा नहीं रही
Published :
1/23/2009 11:01:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डॉक्टर साहब-नमस्कारमेरी उम्र 34 साल है और मेरी कुछ महीनों के बाद शादी होने वाली है।बचपन से लेकर अब तक जो गलतियां करी यानि कि हस्तमैथुन किया उसके कारण मुझे शीघ्रपतन की समस्या हो गयी है। अब मेरी पहले जैसी सेक्स की इच्छा नहीं रही। अब मेरी सेक्स में रुचि खत्म हो गई है। और सेक्स करने की कोशिश करता हूँ तो लिंग में पर्याप्त कठोरता नहीं आ पाती और बहुत जल्द ही दो-तीन सेकेंड में ही वीर्य स्खलन हो जाता है यानि शीघ्र पतन हो जाता है! सम्भोग के बाद मुझे तो अब भयंकर कमजोरी भी लगती है प्लीज़ आप मेरी मदद करिए ताकि मेरा वैवाहिक जीवन सुखमय रहे। धन्यवाद
आनंद कुमार
आनंद कुमार जी,बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आप विवाह से पूर्व ही शारीरिक संबंधों में उतर चुके हैं और अब जबकि समस्या मुंह फाड़ कर सामने आ गयी है तो औषधियां तलाशते और परेशान होते फिर रहे हैं। हारमोनल परिवर्तनों के कारण आपने हस्त मैथुन आदि जो गलतियां करी हैं उसका तो दुष्परिणाम आपके सामने कामेच्छा की न्यूनता के रूप में आपके सामने आ रहा है लेकिन विवाह से पहले ही आप जिस तरह के संबंधों में उतर चुके हैं उससे शारीरिक ही नहीं सामाजिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। आशा है कि आपको आपकी इस गलती का भी एहसास होगा, लीजिये उपचार प्रस्तुत है इसे कम से कम तीन माह तक लीजिये और तेलीय,मिर्च-मसालेदार,खट्टॆ भोजन से परहेज रखिये-
१ . पूर्ण चंद्र रस एक गोली + पुष्पधन्वा रस एक गोली + मन्मथ रस एक गोली की एक मात्रा बनाएं व हलके गर्म मीठे दूध से दिन में दो बार भोजन के बाद लें।
२ . वानरी वटी एक गोली + मूसली पाक एक चम्मच का सेवन दिन में दो बार अश्वगंधारिष्ट के दो चम्मच से भोजन के बाद करें।
३ . रात्रि भोजन के बाद त्रिफला चूर्ण एक चम्मच गर्म जल में घोल कर पीजिये ताकि कब्जियत न रहे।
आनंद कुमार
आनंद कुमार जी,बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आप विवाह से पूर्व ही शारीरिक संबंधों में उतर चुके हैं और अब जबकि समस्या मुंह फाड़ कर सामने आ गयी है तो औषधियां तलाशते और परेशान होते फिर रहे हैं। हारमोनल परिवर्तनों के कारण आपने हस्त मैथुन आदि जो गलतियां करी हैं उसका तो दुष्परिणाम आपके सामने कामेच्छा की न्यूनता के रूप में आपके सामने आ रहा है लेकिन विवाह से पहले ही आप जिस तरह के संबंधों में उतर चुके हैं उससे शारीरिक ही नहीं सामाजिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। आशा है कि आपको आपकी इस गलती का भी एहसास होगा, लीजिये उपचार प्रस्तुत है इसे कम से कम तीन माह तक लीजिये और तेलीय,मिर्च-मसालेदार,खट्टॆ भोजन से परहेज रखिये-
१ . पूर्ण चंद्र रस एक गोली + पुष्पधन्वा रस एक गोली + मन्मथ रस एक गोली की एक मात्रा बनाएं व हलके गर्म मीठे दूध से दिन में दो बार भोजन के बाद लें।
२ . वानरी वटी एक गोली + मूसली पाक एक चम्मच का सेवन दिन में दो बार अश्वगंधारिष्ट के दो चम्मच से भोजन के बाद करें।
३ . रात्रि भोजन के बाद त्रिफला चूर्ण एक चम्मच गर्म जल में घोल कर पीजिये ताकि कब्जियत न रहे।
मैं शायद बातों को भूल जाने लगा हूं
Published :
1/23/2009 06:19:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब नमस्कार
मेरी उम्र उनहत्तर साल है रिटायर हुए कई साल बीत चुके हैं अब तक मैं सामान्य जीवन जी रहा था लेकिन पिछले दो माह से मुझे कई बार इस बात का एहसास हुआ कि मैं शायद बातों को भुल जाने लगा हूं जिससे कि परेशानी होना स्वाभाविक है जैसे कि चाभी भूल जाना, किताबें या चश्मा भूल जाना और फिर घंटों तक तलाशना। क्या यह समस्या बढती हुई उम्र के कारण है या कोई अन्य कारण हो सकता है? कारण कुछ भी हो लेकिन मेरी मदद करिये मैं सठियाया हुआ कहलाना नहीं चाहता। मेहरबानी करके वनस्पतियों पर आधारित उपचार बतायें। अग्रिम धन्यवाद
देवदत्त ताम्रकार,अजनी
आदरणीय देवदत्त जी,आपने सही कहा कि कारण कुछ भी हो, आप तो बस लाभ के प्रति सचेष्ट रहिये। उम्र बढ़ने पर कई बार ऐसी समस्या देखी जाती है किन्तु आप परेशान न हों। आपके आदेशानुसार वनस्पति आधारित उपचार लिख रहा हूं जो कि अत्यंत प्रभावशाली है-
रसायन चूर्ण(गिलोय, गोखरू तथा आंवले को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण करने से बनता है) + अश्वगंधा चूर्ण + शतावरी चूर्ण + मुलैठी(यष्टिमधु अथवा जेष्ठमध भी कहलाती है) चूर्ण + ब्राह्मी चूर्ण + शखाहुली चूर्ण + त्रिकटु चूर्ण( सोंठ, काली मिर्च तथा छोटी पीपल को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण करने से बनता है) ; इन सब चूर्णों को ५०-५० ग्राम ले लीजिये इस मिश्रण में से पानी से एक चम्मच दिन में दो बार लीजिये।
आप स्वयं इसके गुणों की प्रशंसा करते थकेंगे नहीं ऐसी प्रभावी दवा है यह ऐसी स्थिति में याददाश्त बढ़ाने के लिये। सात्विक आहार लीजिये। ध्यान, प्राणायाम आदि का अभ्यास करें।
मेरी उम्र उनहत्तर साल है रिटायर हुए कई साल बीत चुके हैं अब तक मैं सामान्य जीवन जी रहा था लेकिन पिछले दो माह से मुझे कई बार इस बात का एहसास हुआ कि मैं शायद बातों को भुल जाने लगा हूं जिससे कि परेशानी होना स्वाभाविक है जैसे कि चाभी भूल जाना, किताबें या चश्मा भूल जाना और फिर घंटों तक तलाशना। क्या यह समस्या बढती हुई उम्र के कारण है या कोई अन्य कारण हो सकता है? कारण कुछ भी हो लेकिन मेरी मदद करिये मैं सठियाया हुआ कहलाना नहीं चाहता। मेहरबानी करके वनस्पतियों पर आधारित उपचार बतायें। अग्रिम धन्यवाद
देवदत्त ताम्रकार,अजनी
आदरणीय देवदत्त जी,आपने सही कहा कि कारण कुछ भी हो, आप तो बस लाभ के प्रति सचेष्ट रहिये। उम्र बढ़ने पर कई बार ऐसी समस्या देखी जाती है किन्तु आप परेशान न हों। आपके आदेशानुसार वनस्पति आधारित उपचार लिख रहा हूं जो कि अत्यंत प्रभावशाली है-
रसायन चूर्ण(गिलोय, गोखरू तथा आंवले को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण करने से बनता है) + अश्वगंधा चूर्ण + शतावरी चूर्ण + मुलैठी(यष्टिमधु अथवा जेष्ठमध भी कहलाती है) चूर्ण + ब्राह्मी चूर्ण + शखाहुली चूर्ण + त्रिकटु चूर्ण( सोंठ, काली मिर्च तथा छोटी पीपल को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण करने से बनता है) ; इन सब चूर्णों को ५०-५० ग्राम ले लीजिये इस मिश्रण में से पानी से एक चम्मच दिन में दो बार लीजिये।
आप स्वयं इसके गुणों की प्रशंसा करते थकेंगे नहीं ऐसी प्रभावी दवा है यह ऐसी स्थिति में याददाश्त बढ़ाने के लिये। सात्विक आहार लीजिये। ध्यान, प्राणायाम आदि का अभ्यास करें।
बच्चे न हो पाने का कारण मेरी बीमारी Oligospermia है
Published :
1/23/2009 05:14:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय़ डाक्टर साहब मैं आपको अपनी रिपोर्ट्स की फ़ाइल भेज रहा हूं। मुझे शादी को पांच साल हो गये हैं लेकिन बच्चे न होने के कारण जब जांच कराने का सिलसिला शुरू हुआ तब पता चला कि दोष मेरी पत्नी में नहीं बल्कि मुझमें है। बताया गया कि मेरे वीर्य में शुक्राणुओं की कमी है और इतनी कमी है कि गर्भ स्थापना के लिये जितने शुक्राणु चाहिये उससे बहुत कम हैं। मुझे डाक्टर ने ये भी बताया कि इसका इलाज आयुर्वेद में ही है। मेहरबानी करके हमारी मदद करिये ताकि हमारे घर में भी बच्चा आ सके। हम जीवन भर आपका उपकार न भूलेंगे।
संजय सिक्का,कुवैत
संजय जी,आपके द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट्स की बड़ी मोटी सी फ़ाइल देखी है उसमें से अधिकांश टैस्ट तो अनावश्यक ही कराए गये हैं। मैं आपकी मनोस्थिति समझ रहा हूं कि कैसे आपका डाक्टर खून चूस रहे हैं। आपकी बीमारी आयुर्वेद के अनुसार "अल्पशुक्राणुत्व" कहलाती है जो कि कोई इतनी बड़ी बीमारी नहीं है कि जिसके लिये इतने परीक्षण करवाने के बाद भी अब तक आपके घर में संतान नहीं है। इस समय आपकी रिपोर्ट के अनुसार यह संख्या १० मिलियन/मिली. तथा गति २५% है, आप निम्न उपचार चालीस दिन तक लगातार लीजिये -
१. पुष्पधन्वा रस १ गोली + आमलकी रसायन २५० मिग्रा. + अश्वगंधादि चूर्ण १ ग्राम + गिलोय सत्त्व २५० मिग्रा. ; इन सबको एक करके देसी पान के बिना कुछ लगाये पत्ते पर रख कर सुबह -दोपहर-शाम को चबा लीजिये।
२ . धातुसंजीवन बटी १ गोली + वानरी वटी १ गोली + शुक्रमात्रिका वटी १ गोली + चंद्रप्रभा वटी १ गोली ; दिन में तीन बार मिश्री व एक चम्मच शहद मिला कर मीठे करे गये ठंडे दूध के साथ लीजिये।
३ . कामदेव चूर्ण ३ ग्राम + गोक्षुरादि चूर्ण ३ ग्राम + शिलाजित्वादि वटी १ गोली दिन में दो बार मलाई के साथ मिला कर चाट लीजिये।
दवाएं खाली पेट न लें। नियमित व्यायाम करें। देर रात तक न जागा करें।
इस बात का ध्यान रखिये कि कब्जियत न रहे इस लिये त्रिफला चूर्ण आदि का सेवन आवश्यकता होने पर अवश्य करें क्योंकि यदि दवाएं ठीक से पचेंगी ही नहीं तो लाभ कैसे करेंगी। तेलीय,खटाई, चटपटी मसाले दार व बाजारू साफ़्ट ड्रिंक्स, चायनीज व्यंजनों से बिलकुल दूर रहिये, औषधि सेवन काल में सम्भोग न करें।
संजय सिक्का,कुवैत
संजय जी,आपके द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट्स की बड़ी मोटी सी फ़ाइल देखी है उसमें से अधिकांश टैस्ट तो अनावश्यक ही कराए गये हैं। मैं आपकी मनोस्थिति समझ रहा हूं कि कैसे आपका डाक्टर खून चूस रहे हैं। आपकी बीमारी आयुर्वेद के अनुसार "अल्पशुक्राणुत्व" कहलाती है जो कि कोई इतनी बड़ी बीमारी नहीं है कि जिसके लिये इतने परीक्षण करवाने के बाद भी अब तक आपके घर में संतान नहीं है। इस समय आपकी रिपोर्ट के अनुसार यह संख्या १० मिलियन/मिली. तथा गति २५% है, आप निम्न उपचार चालीस दिन तक लगातार लीजिये -
१. पुष्पधन्वा रस १ गोली + आमलकी रसायन २५० मिग्रा. + अश्वगंधादि चूर्ण १ ग्राम + गिलोय सत्त्व २५० मिग्रा. ; इन सबको एक करके देसी पान के बिना कुछ लगाये पत्ते पर रख कर सुबह -दोपहर-शाम को चबा लीजिये।
२ . धातुसंजीवन बटी १ गोली + वानरी वटी १ गोली + शुक्रमात्रिका वटी १ गोली + चंद्रप्रभा वटी १ गोली ; दिन में तीन बार मिश्री व एक चम्मच शहद मिला कर मीठे करे गये ठंडे दूध के साथ लीजिये।
३ . कामदेव चूर्ण ३ ग्राम + गोक्षुरादि चूर्ण ३ ग्राम + शिलाजित्वादि वटी १ गोली दिन में दो बार मलाई के साथ मिला कर चाट लीजिये।
दवाएं खाली पेट न लें। नियमित व्यायाम करें। देर रात तक न जागा करें।
इस बात का ध्यान रखिये कि कब्जियत न रहे इस लिये त्रिफला चूर्ण आदि का सेवन आवश्यकता होने पर अवश्य करें क्योंकि यदि दवाएं ठीक से पचेंगी ही नहीं तो लाभ कैसे करेंगी। तेलीय,खटाई, चटपटी मसाले दार व बाजारू साफ़्ट ड्रिंक्स, चायनीज व्यंजनों से बिलकुल दूर रहिये, औषधि सेवन काल में सम्भोग न करें।
बुधवार, जनवरी 21, 2009
तीन साल से नज़ला की तकलीफ़ है
Published :
1/21/2009 09:22:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
सर, नमस्ते
मेरी समस्या है कि मुझे पिछले तीन साल से नज़ला की तकलीफ़ है जिसके कारण मैं बहुत परेशान हूं। मैंने बहुत दवाएं ली हैं लेकिन कोई भी आराम नहीं होता जब नजले की समस्या शुरू होती है तो सिर और गर्दन में बहुत दर्द होता है और मेरी आवाज भी बंद हो जाती है ऐसे में इशारों से काम करना पड़ता है। बलगम भी नहीं निकल पाता है खांसी बहुत होती है पूरी-पूरी रात निकल जाती है। मेरी उम्र ३५ साल है। मेरी दूसरी समस्या है कि मुझे अस्थमा(दमा) की समस्या भी शुरू हो गयी है। पिछले चार माह से खांसी होने के साथ ही सांस की भी तकलीफ़ होने लगती है। मैं बहुत कमजोर हो गयी हूं। सर, मैं पैरों से भी विकलांग हूं जिस कारण मैं इधर-उधर जाने में असमर्थ हूं मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं उनका कोई सहारा नहीं है आपके बारे में मेरे एक रिश्तेदार ने बताया था और मैं अपनी समस्या उनसे ही आप तक पहुंचा रही हूं। आपसे उम्मीद है कि आप मेरी समस्या को हल करेंगे मैं आपकी जीवन भर आभारी रहूंगी।
चमनलता
पलवल(हरियाणा)
बहन, आयुषवेद परिवार हर संभव प्रयास करेगा कि आपकी समस्या जल्द से जल्द समाप्त हो जाए। आप निम्न उपचार को पंद्रह दिन तक लीजिये और इस दौरान यदि मांसाहार करती हों तो उसका त्याग करें ताकि समुचित लाभ मिल सके-
१. कफकेतु रस एक गोली + कफचिन्तामणि रस एक गोली को सुबह-दोपहर-शाम अदरक के रस आधा चम्मच व शहद एक चम्मच मिला कर लीजिये।
२ . अभ्रक भस्म एक रत्ती + लौह भस्म एक रत्ती को देसी पान के पत्ते पर शहद लगाएं व दोनो भस्मों को बुरक कर उस पत्ते को चबा कर खा लीजिये लेकिन ध्यान रहे कि एक घंटे तक पानी न पियें। दिन में दो बार इस तरह पान का सेवन करें।
३ . मकरध्वज बटी एक-एक गोली दिन में दो बार सुबह शाम शहद से लीजिये।
इस उपचार को पंद्रह दिन तक लेने पर आपको चमत्कारिक लाभ होगा और स्थायी लाभ के लिये चालीस दिन तक जारी रखें ताकि समस्या दोबारा न हो सके। आयुषवेद परिवार ईश्वर से प्रार्थना करता है कि आप जल्दी से स्वस्थ हो जाएं ताकि आपकी औषधियों की आवश्यकता समाप्त हो जाए।
मेरी समस्या है कि मुझे पिछले तीन साल से नज़ला की तकलीफ़ है जिसके कारण मैं बहुत परेशान हूं। मैंने बहुत दवाएं ली हैं लेकिन कोई भी आराम नहीं होता जब नजले की समस्या शुरू होती है तो सिर और गर्दन में बहुत दर्द होता है और मेरी आवाज भी बंद हो जाती है ऐसे में इशारों से काम करना पड़ता है। बलगम भी नहीं निकल पाता है खांसी बहुत होती है पूरी-पूरी रात निकल जाती है। मेरी उम्र ३५ साल है। मेरी दूसरी समस्या है कि मुझे अस्थमा(दमा) की समस्या भी शुरू हो गयी है। पिछले चार माह से खांसी होने के साथ ही सांस की भी तकलीफ़ होने लगती है। मैं बहुत कमजोर हो गयी हूं। सर, मैं पैरों से भी विकलांग हूं जिस कारण मैं इधर-उधर जाने में असमर्थ हूं मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं उनका कोई सहारा नहीं है आपके बारे में मेरे एक रिश्तेदार ने बताया था और मैं अपनी समस्या उनसे ही आप तक पहुंचा रही हूं। आपसे उम्मीद है कि आप मेरी समस्या को हल करेंगे मैं आपकी जीवन भर आभारी रहूंगी।
चमनलता
पलवल(हरियाणा)
बहन, आयुषवेद परिवार हर संभव प्रयास करेगा कि आपकी समस्या जल्द से जल्द समाप्त हो जाए। आप निम्न उपचार को पंद्रह दिन तक लीजिये और इस दौरान यदि मांसाहार करती हों तो उसका त्याग करें ताकि समुचित लाभ मिल सके-
१. कफकेतु रस एक गोली + कफचिन्तामणि रस एक गोली को सुबह-दोपहर-शाम अदरक के रस आधा चम्मच व शहद एक चम्मच मिला कर लीजिये।
२ . अभ्रक भस्म एक रत्ती + लौह भस्म एक रत्ती को देसी पान के पत्ते पर शहद लगाएं व दोनो भस्मों को बुरक कर उस पत्ते को चबा कर खा लीजिये लेकिन ध्यान रहे कि एक घंटे तक पानी न पियें। दिन में दो बार इस तरह पान का सेवन करें।
३ . मकरध्वज बटी एक-एक गोली दिन में दो बार सुबह शाम शहद से लीजिये।
इस उपचार को पंद्रह दिन तक लेने पर आपको चमत्कारिक लाभ होगा और स्थायी लाभ के लिये चालीस दिन तक जारी रखें ताकि समस्या दोबारा न हो सके। आयुषवेद परिवार ईश्वर से प्रार्थना करता है कि आप जल्दी से स्वस्थ हो जाएं ताकि आपकी औषधियों की आवश्यकता समाप्त हो जाए।
रविवार, जनवरी 18, 2009
भयंकर डायबिटीज है और पैरों में घाव हैं
Published :
1/18/2009 12:53:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
My father in law is a patient of dibetis since 4 years. He has a weird problem; He gets ailment/injury on his legs.It pains.
After couple of weeks of medication it disappears.But the same ailment/skin injury reappears after a week.
I would be thankful to you if you could help him to cure this ailment permanantly.If possible plz contact me on my cellphone or reply to this email
address.
राजेश मुळे,पुणे
राजेश जी आपके ससुर जी से आयुषवेद परिवार के एक स्वयंसेवक की मुलाकात ट्रेन में हुई थी और उन्होंने ही मुझसे भी जिक्र करा था कि आज उन्होंने एक मधुमेह के मरीज को देखा जो कि पैरों में गहरे घाव से बुरी तरह से परेशान थे,आयुषवेद परिवार के स्वयंसेवक ने उनके पैरों को अपने हाथ में लेकर नजदीक से देखा है और उनकी पीड़ा को समझा है। बताया गया कि वे बाइस यूनिट इंसुलिन लेते हैं जो कि आपने अपने इस मेल में जिक्र नहीं करा है। आप उन्हें भरोसा दिलायें उससे पहले आप स्वयं आयुर्वेद पर विश्वास करें कि जो उपचार होगा वह स्थायी लाभ देगा किन्तु कुछ समय तक लगातार लेने पर ही परिणाम दिखेगा। आप उन्हें निम्न औषधियां दें-
१. सोमनाथ रस एक गोली + मधुमेह नाशिनी गुटिका एक गोली + स्वर्ण बंग एक रत्ती(१२५ मि.ग्रा.) की एक मात्रा बनाएं व कड़वी नीम के पत्तों के काढ़े के साथ दिन में तीन बार भोजन से पहले ही निगलवाएं व पंद्रह मिनट बाद भोजन कर सकते हैं।
२ . बसंत कुसुमाकर रस एक गोली + शिलाजित्वादि बटी एक गोली + मामज्जक घन बटी एक गोली की एक मात्रा बनाएं व भोजन के बाद एक कप जल में सात काली मिर्च,सात बेल के पत्ते व एक चुटकी सैंधव नमक(जो उपवास में खाया जाता है)पीस कर मिला लें व इसे मिश्रण से निगलवाएं।
३ . पैरों के जख्म पर स्थानिक लेप के लिये मेंहदी के पत्ते + बेल के पत्ते + कड़वी नीम के पत्ते + जामुन के पत्ते मिला कर पीस कर लेप बना कर दिन में चार-पांच बार लगाएं।
आप यकीन मानिये कि इस उपचार को यदि लगातार छह माह तक ले लिया जाए तो समस्या का स्थायी हल हो जाएगा और सहज लाभ तो आपको मात्र तीन-चार दिन में ही दिखाई देने लगेगा।
शनिवार, जनवरी 17, 2009
गर्भधारण न कर पाने की समस्या
Published :
1/17/2009 08:00:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
सर नमस्ते, मेरी उम्र २८ साल है, सर मेरे एक बेटा है जिसकी उम्र चार साल है अब हम दूसरा बच्चा चाहते हैं लेकिन मैंने डाक्टर से तीन माह तक दवा भी ली है फिर भी कोई आराम नहीं है। डाक्टर ने जांच करके बताया कि सब सामान्य है, मेरा शरीर दुबला-पतला है, मासिक पाली भी बराबर आती है लेकिन गर्भधारण न कर पाने की समस्या के कारण मैं बहुत तनाव में रहती हूं साथ ही मेरे पति भी मुझसे नाराज बने रहते हैं आपकी वेबसाइट के बारे में एक दोस्त ने बताया था। मेहरबानी करके कोई अच्छा सा उपचार बताएं मेरी मासिक पाली की तारीख नजदीक आ रही है। ताकि मेरी समस्या समाप्त होकर मैं दोबारा गर्भधारण कर सकूं और इस तनाव भरी स्थिति से मुक्त हो सकूं। धन्यवाद
नेहा,उ.प्र.
नेहा बहन आपने जिस तरह से अपनी समस्या के बारे में बताया उससे कुछ विशेष स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि क्या हुआ है लेकिन मुझे पता है कि कई बार ऐसा हो जाता है कि किन्हीं कारणों से जैसे कि आपने जो उपाय इतने समय तक परिवार नियोजन के लिये अपनाया हो उसके दुष्प्रभाव से कोई विकार आ गया हो, लेकिन इन बातों को जाने दीजिये और प्रसन्न मन से इन औषधियों का सेवन करिये ताकि आपकी इच्छा जल्दी ही पूरी हो सके--
१. सन्तानदाता रस एक गोली + लक्ष्मणा लौह एक गोली की एक मात्रा बनाएं व दिन में तीन बार सुबह-दोपहर-शाम अशोकारिष्ट+लक्ष्मणारिष्ट के दो चम्मच के साथ सेवन करें। दवा खाली पेट न लें।
२ . सोंठ + काली मिर्च + छोटी पीपल + नागकेशर का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर इस मिश्रण में से दो ग्राम चूर्ण गाय के घी के साथ दिन में दो बार सुबह-शाम चटायें।
३ . महाफल घी एक चम्मच दिन में दो बार लीजिए।
तेज मसाले दार और तीखा भोजन मत करें। इस उपचार को कम से कम चालीस दिन तक जारी रखें साथ ही ध्यान दें कि हो सकता है कि आपके पति किसी समस्या से ग्रस्त हों और आप एकदम स्वस्थ हों और आप बेकार ही खुद को जिम्मेदार मान रही हों इसलिये अपने पति को भी समझाइए कि वे अपनी भी जांच करवा ही लें क्योंकि गर्भस्थापना में उनका भी पूर्ण स्वस्थ होना जरूरी है।
नेहा,उ.प्र.
नेहा बहन आपने जिस तरह से अपनी समस्या के बारे में बताया उससे कुछ विशेष स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि क्या हुआ है लेकिन मुझे पता है कि कई बार ऐसा हो जाता है कि किन्हीं कारणों से जैसे कि आपने जो उपाय इतने समय तक परिवार नियोजन के लिये अपनाया हो उसके दुष्प्रभाव से कोई विकार आ गया हो, लेकिन इन बातों को जाने दीजिये और प्रसन्न मन से इन औषधियों का सेवन करिये ताकि आपकी इच्छा जल्दी ही पूरी हो सके--
१. सन्तानदाता रस एक गोली + लक्ष्मणा लौह एक गोली की एक मात्रा बनाएं व दिन में तीन बार सुबह-दोपहर-शाम अशोकारिष्ट+लक्ष्मणारिष्ट के दो चम्मच के साथ सेवन करें। दवा खाली पेट न लें।
२ . सोंठ + काली मिर्च + छोटी पीपल + नागकेशर का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर इस मिश्रण में से दो ग्राम चूर्ण गाय के घी के साथ दिन में दो बार सुबह-शाम चटायें।
३ . महाफल घी एक चम्मच दिन में दो बार लीजिए।
तेज मसाले दार और तीखा भोजन मत करें। इस उपचार को कम से कम चालीस दिन तक जारी रखें साथ ही ध्यान दें कि हो सकता है कि आपके पति किसी समस्या से ग्रस्त हों और आप एकदम स्वस्थ हों और आप बेकार ही खुद को जिम्मेदार मान रही हों इसलिये अपने पति को भी समझाइए कि वे अपनी भी जांच करवा ही लें क्योंकि गर्भस्थापना में उनका भी पूर्ण स्वस्थ होना जरूरी है।
एक साल से दर्द के कारण हिलना-डुलना ही बंद है तो काम धंदा बिल्कुल ही चौपट हो चुका है
Published :
1/17/2009 01:00:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब !नमस्कारकाफी दिनों के सोच विचार के बाद आपको अपनी व्याधि लिखने की हिम्मत जुटा पा रहा हूँ। वस्तुत: जब भी लिखने की सोचता हूँ तो समस्या विस्तार मांगती है...शायद इस बार मैं कुछ संक्षिप्त करके बताने में सफल हो सकूं।डॉक्टर साब ! मेरी आयु 49 वर्ष की है ! मुझे लगभग एक वर्ष से एक ऐसी व्याधि से गुजरना पड़ रहा है की जिसके चलते सम्पूर्ण जीवन ही अस्त व्यस्त होकर रह गया है ! मैं पूरे बदन में दर्द से ग्रसित हूँ ! शुरुआत कमर के निचले हिस्से से हुई थी , काफी तकलीफ थी अतः ओर्थोपेडिक सर्जन को दिखाया ... उन्होंने दो तीन एक्स रे किए और चंद पेन किल्लर दे कर उसने अपनी भूमिका का निर्वाह कर लिया ! दर्द गयी नही हालांकी फिसियो थेरेपी भी की 15-16 दिन ! इसके चंद महीनो बाद पैर की एडियों में भयंकर दर्द होना शुरू हो गया ! अबकी बार एक जानने वाले सज्जन मुझे आर्मी हॉस्पिटल के एक न्यूरो सर्जन के पास ले गए ...उन्होंने कहा- कुछ नही बस ज़रा वज़न कम करो...( 90 किलो वज़न ज्यादा तो है ही...लेकिन कम करने के लिए चलना बहुत ज़रूरी है जो मैं दर्द के कारण फिलहाल कर नही कर पा रहा था ) खैर फिर पेन किल्लर दी गयी...लेकिन समस्या मूलभूत तौर पर ना केवल बनी रही बल्की बढ गयी ! दर्द शरीर में दायीं ओर नीचे की सबसे आखिरी पसली में आ गया ! फिर कन्धों के जोडों में, पीठ में, और अभी सितंबर के महीने से जघन संधी में ( दोनों तरफ़ ) । होस्पिटल में डॉक्टर साहब को दिखाया तो उन्होंने कई टेस्ट लिख दिए ( मसलन थाईरेड, लिपिड प्रोफाइल, कोलेस्ट्रोल, शुगर , एंटी नयूक्लेअर एंटी बॉडी, Rheumatoid Factor Serum , IFA, ASKA , यूरिक एसिड , ANA /ANF और Rheumatoid Factor Serum आदि) लेकिन इनकी रिपोर्ट्स से उन्हें कोई दिशा नही सूझी ! लगभग सभी टेस्ट औने पौने रूप से सामान्य ही हैं ! ( वैसे अपनी दिशा हीनता को ढांपते हुए उन्होंने मुझे रयुमोटोलोजिस्ट को दिखाने कि सलाह दी है )दर्द इतना है की पेंट पहनने के लिए पैर उठाने में दिक्कत है और दोनों बाजू भी ठीक से उठ नहीं पाते ! दर्द कि प्रकृति कुछ ऐसी है जैसे कभी कभी जाडों के मौसम में गर्दन या पीठ अकड़ जाती है ...ज़रा सा हिलना भी दूभर हो जाता है ! सबसे ज़्यादा पसली के दर्द ने परेशान कर रखा है....लेटने में, लेट कर उठने में , सीड़ी चड़ने उतरने में खासी मुश्किल आती है...सोते सोते करवट बदलते हुए दर्द से नींद खुल जाती है। अब जबकि एलोपैथी daignose ही नही कर पा रही तो इलाज क्या होगा! सिर्फ़ वोवरोन जैसी गोलियों का सहारा है...जो मैं समझता हूँ कि अनुचित भी है और खतरनाक भी !एक साल से जबकि मोमेंट ही बंद हो गयी है तो काम धंदा बिल्कुल ही चौपट हो चुका है। पेशे से मैंफ्री लांस मिडिया प्रोफेशनल हूँ ....लेकिन अब लगता है कि हूँ नहीं - कभी था !आपके ब्लॉग पर आपको लोगों की समस्याएं सुलझाते देख कुछ आशा जगी है...शायद आयुर्वेद से ही कुछ निदानमिल सके। यदि ऐसा हो सका तो मानो मुझे नया जीवन ही मिल जाएगा ! मुझे विश्वास है कि आप जैसे स्हर्दये मेरी अवश्य ही मदद करेंगे !संक्षिप्त करते करते भी पत्र काफी लंबा हो गया है...क्षमा प्रार्थी हूँ।जल्द ही आपके उत्तर कि प्रतीक्षा में
सागर
आत्मन भाई, आपकी सारी समस्या को बहुत गहराई से जाना-समझा और जैसा कि आपने स्वयं ही बताया कि एलोपैथी कैसे अंधेरे में तीर चला कर आपको बस उपचार के नाम पर एक भरोसा ही दे पा रही है जो कि अब कारगर नहीं प्रतीत हो रहा क्योंकि न तो आधुनिकता के हिमायतियों की न एलोपैथी काम आती है न ही उनकी सिम्पैथी(सहानुभूति)....। आपकी समस्या बिना किसी संदेह के बता रहा हूं कि यह वात की ही परेशानी है अधिक विस्तार में न जाते हुए सर्वप्रथम आपको एक बात कहना चाहता हूं कि जिस भरोसे से आपने आयुषवेद के समक्ष समस्या रखी है हम आपके उस भरोसे को आयुर्वेद के बल पर कायम रखेंगे और आप पुनः पूरी ऊर्जा के साथ पत्रकारिता में जुट जाएंगे, आप निम्न उपचार लें-
१ . सर्वप्रथम इच्छाभेदी रस की एक गोली गर्म जल से रात में ले लें इससे आपकोहो सकता है कि सुबह कुछ पतले दस्त होंगे उससे तनिक भी न घबराएं बल्कि यदि दस्त न हों तो अगले दिन एक के स्थान पर दो गोलियां लीजिये जब एक सप्ताह तक पर्याप्त दस्त आकर देह हल्की महसूस होने लगे तब इसे बंद कर दीजिये व अगले दिन से गंधर्व हरीतकी दो चम्मच रात को सोते समय गर्म जल से लीजिये ताकि कब्जियत न रहा करे व जठराग्नि ऐसी बनी रहे कि आप जो दवाएं लें उनका सम्यक पाचन होकर आपको लाभ मिले। इस दौरान हल्का भोजन करें यदि गरिष्ठ आहार लेंगे तो लाभ न हो पाएगा।
२ . महावात विध्वंसन रस एक गोली + विषतिंदुक बटी एक गोली + रास्नादि गुग्गुल दो गोली ; इन सबकी एक मात्रा बनाएं व दिन में तीन बार महारास्नादि काढ़े के दो चम्मच के साथ सेवन करें।
३ . त्रिमूर्ति रस एक गोली + समीरपन्नग रस(साधारण) एक गोली + योगराज गुग्गुल एक गोली ; इन सबकी एक मात्रा बनाएं व दिन में तीन बार गर्म जल से लें। पहले वाली दवा के आधे घंटे बाद ले सकते हैं।
इस उपचार को न्यूनतम चालीस दिन तक लगातार लीजिये आप आश्चर्यजनक तरीके से अपने स्वास्थ्य में सुधार पाएंगे। इस पूरे उपचार को आप स्थायी लाभ हेतु तीन माह तक लीजिये। बाजारू खाने से परहेज करें साथ ही उपचार काल में नशे व मांसाहार वर्जित करें।
सागर
आत्मन भाई, आपकी सारी समस्या को बहुत गहराई से जाना-समझा और जैसा कि आपने स्वयं ही बताया कि एलोपैथी कैसे अंधेरे में तीर चला कर आपको बस उपचार के नाम पर एक भरोसा ही दे पा रही है जो कि अब कारगर नहीं प्रतीत हो रहा क्योंकि न तो आधुनिकता के हिमायतियों की न एलोपैथी काम आती है न ही उनकी सिम्पैथी(सहानुभूति)....। आपकी समस्या बिना किसी संदेह के बता रहा हूं कि यह वात की ही परेशानी है अधिक विस्तार में न जाते हुए सर्वप्रथम आपको एक बात कहना चाहता हूं कि जिस भरोसे से आपने आयुषवेद के समक्ष समस्या रखी है हम आपके उस भरोसे को आयुर्वेद के बल पर कायम रखेंगे और आप पुनः पूरी ऊर्जा के साथ पत्रकारिता में जुट जाएंगे, आप निम्न उपचार लें-
१ . सर्वप्रथम इच्छाभेदी रस की एक गोली गर्म जल से रात में ले लें इससे आपकोहो सकता है कि सुबह कुछ पतले दस्त होंगे उससे तनिक भी न घबराएं बल्कि यदि दस्त न हों तो अगले दिन एक के स्थान पर दो गोलियां लीजिये जब एक सप्ताह तक पर्याप्त दस्त आकर देह हल्की महसूस होने लगे तब इसे बंद कर दीजिये व अगले दिन से गंधर्व हरीतकी दो चम्मच रात को सोते समय गर्म जल से लीजिये ताकि कब्जियत न रहा करे व जठराग्नि ऐसी बनी रहे कि आप जो दवाएं लें उनका सम्यक पाचन होकर आपको लाभ मिले। इस दौरान हल्का भोजन करें यदि गरिष्ठ आहार लेंगे तो लाभ न हो पाएगा।
२ . महावात विध्वंसन रस एक गोली + विषतिंदुक बटी एक गोली + रास्नादि गुग्गुल दो गोली ; इन सबकी एक मात्रा बनाएं व दिन में तीन बार महारास्नादि काढ़े के दो चम्मच के साथ सेवन करें।
३ . त्रिमूर्ति रस एक गोली + समीरपन्नग रस(साधारण) एक गोली + योगराज गुग्गुल एक गोली ; इन सबकी एक मात्रा बनाएं व दिन में तीन बार गर्म जल से लें। पहले वाली दवा के आधे घंटे बाद ले सकते हैं।
इस उपचार को न्यूनतम चालीस दिन तक लगातार लीजिये आप आश्चर्यजनक तरीके से अपने स्वास्थ्य में सुधार पाएंगे। इस पूरे उपचार को आप स्थायी लाभ हेतु तीन माह तक लीजिये। बाजारू खाने से परहेज करें साथ ही उपचार काल में नशे व मांसाहार वर्जित करें।
शनिवार, जनवरी 10, 2009
मैं premenstrual malaise से परेशान हूं,हार्मोन-उपचार नहीं चाहिये
Published :
1/10/2009 07:48:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब,
नमस्ते
मैं एक एयर होस्टेस हूं, मेरी उम्र २२ साल है, हर महीने माहवारी आने से पहले ही मेरी स्थिति अजीब सी होने लगती है; बदन में विचित्र सी उत्तेजना बनी रहती है, नींद गायब हो जाती है, सिर दर्द रहने लगता है, कब्जियत रहने लगती है,स्तनों और र्पैरों में सूजन सी चढ़ जाती है, मन खिन्न रहता है बिना किसी बात के उदासी छायी रहती है जिससे कि मेरे काम पर सीधा प्रभाव पड़ता है ये मेरे सहकर्मी मुझे बताते हैं कभी तो मुझे चक्कर और बेहोशी भी आ जाती है। क्या यह कोई सायक्लोजिकल प्राब्लम है या कुछ अन्य रोग है? मेरी एक गायनेकोलाजिस्ट दोस्त ने बताया कि इसे premenstrual malaise कहते हैं और इसका ऐलोपैथी में हार्मोनल उपचार है लेकिन उससे वजन बढ़ने की संभावना रहती है और किसी-किसी को तो माफ़िक भी नहीं पड़ता है तो अब ऐसे में अंधेरे में तीर चलवाना मैं सही नहीं मानती। आप ही आयुर्वेद के सागर से कोई मोती निकाल कर मेरी समस्या हल करिये।
लोपामुद्रा,मुंबई
बहन जी, माहवारी से पूर्व ऐसे लक्षणों का होना अक्सर आपकी मनोस्थिति के कारण ही होता है क्योंकि आप उससे सात-आठ दिन पहले से ही इस परिस्थिति पर मनन करना शुरु कर देती हैं और आप अनजाने में ही हर माह आपकी बीमारी का मानसिक धरातल तैयार कर लेती हैं। इसलिये पहला सुझाव कि आप माहवारी के संबंध में विचार करना छोड़ दीजिये जब हो जैसी हो तब ही विचार करें, दूसरी बात कि आपकी समस्या कोई लाइलाज तो है नहीं कि आप ज्यादा परेशान हों इसलिये बेफिक्र रहिये, मन लगा कर काम करिये और निम्न औषधियां तीन-चार माह तक माहवारी के समय ही तीन या चार दिन लीजिये और स्नान-शुद्धि के दो दिन बाद भी ले लीजिये बस फिर अगले माह लीजिये-
१ . आरोग्यवर्धिनी बटी दो गोली गर्म जल से सुबह एक बार नाश्ते के बाद लीजिये।
२ . अशोकारिष्ट + कुमार्यासव + लोहासव मिला कर तीन चम्मच बराबर गुनगुने जल में मिला कर सुबह नाश्ते के बाद लीजिये।
३ . शुद्ध नौसादर(नवसागर जो केमिस्ट के पास से अमोनियम क्लोराइड के नाम से मिल जाता है) दो चुटकियां गर्म जल से दोपहर व रात के खाने के बाद लीजिए।
नमस्ते
मैं एक एयर होस्टेस हूं, मेरी उम्र २२ साल है, हर महीने माहवारी आने से पहले ही मेरी स्थिति अजीब सी होने लगती है; बदन में विचित्र सी उत्तेजना बनी रहती है, नींद गायब हो जाती है, सिर दर्द रहने लगता है, कब्जियत रहने लगती है,स्तनों और र्पैरों में सूजन सी चढ़ जाती है, मन खिन्न रहता है बिना किसी बात के उदासी छायी रहती है जिससे कि मेरे काम पर सीधा प्रभाव पड़ता है ये मेरे सहकर्मी मुझे बताते हैं कभी तो मुझे चक्कर और बेहोशी भी आ जाती है। क्या यह कोई सायक्लोजिकल प्राब्लम है या कुछ अन्य रोग है? मेरी एक गायनेकोलाजिस्ट दोस्त ने बताया कि इसे premenstrual malaise कहते हैं और इसका ऐलोपैथी में हार्मोनल उपचार है लेकिन उससे वजन बढ़ने की संभावना रहती है और किसी-किसी को तो माफ़िक भी नहीं पड़ता है तो अब ऐसे में अंधेरे में तीर चलवाना मैं सही नहीं मानती। आप ही आयुर्वेद के सागर से कोई मोती निकाल कर मेरी समस्या हल करिये।
लोपामुद्रा,मुंबई
बहन जी, माहवारी से पूर्व ऐसे लक्षणों का होना अक्सर आपकी मनोस्थिति के कारण ही होता है क्योंकि आप उससे सात-आठ दिन पहले से ही इस परिस्थिति पर मनन करना शुरु कर देती हैं और आप अनजाने में ही हर माह आपकी बीमारी का मानसिक धरातल तैयार कर लेती हैं। इसलिये पहला सुझाव कि आप माहवारी के संबंध में विचार करना छोड़ दीजिये जब हो जैसी हो तब ही विचार करें, दूसरी बात कि आपकी समस्या कोई लाइलाज तो है नहीं कि आप ज्यादा परेशान हों इसलिये बेफिक्र रहिये, मन लगा कर काम करिये और निम्न औषधियां तीन-चार माह तक माहवारी के समय ही तीन या चार दिन लीजिये और स्नान-शुद्धि के दो दिन बाद भी ले लीजिये बस फिर अगले माह लीजिये-
१ . आरोग्यवर्धिनी बटी दो गोली गर्म जल से सुबह एक बार नाश्ते के बाद लीजिये।
२ . अशोकारिष्ट + कुमार्यासव + लोहासव मिला कर तीन चम्मच बराबर गुनगुने जल में मिला कर सुबह नाश्ते के बाद लीजिये।
३ . शुद्ध नौसादर(नवसागर जो केमिस्ट के पास से अमोनियम क्लोराइड के नाम से मिल जाता है) दो चुटकियां गर्म जल से दोपहर व रात के खाने के बाद लीजिए।
शुक्रवार, जनवरी 09, 2009
पत्नी की बीमारी का नाम Acute catarrhal salpingitis बताया है
Published :
1/09/2009 11:36:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब,मेरी पत्नी की बीमारी से मैं बहुत परेशान हो गया हूं पिछले दो महीने से उसे अक्सर ठंड लग कर तेज १०३-१०४ डिग्री तक बुखार हो जाता है, जीभ एकदम सूखने लगती है, उल्टियां होने लगती हैं, पेट के निचले हिस्से में पेड़ू की तरफ बहुत दर्द होने लगता है जो कि चलने फिरने से अत्यधिक बढ़ जाता है। एम.सी. बहुत ज्यादा मात्रा में होता है, निचले पेट का हिस्सा छूने-दबाने पर कड़ा सा और फूला हुआ महसूस होता है, पेशाब भी बड़ी तकलीफ़ से होता है। छूने से असहनीय बताती है, सम्भोग में तो उसे इतना दर्द हुआ कि लगा अब दर्द से मर ही जाएगी। यहां के डाक्टर बस कभी ये टेस्ट कभी वो टेस्ट करा लो कर रहे हैं समझ नहीं आता क्या करें मुझसे उसकी तकलीफ़ देखी नहीं जाती। कोई उपाय बताइये ,डाक्टर ने उसकी बीमारी का नाम Acute catarrhal salpingitis बताया है।
संजय शुक्ल,अजनी
संजय जी, आपके द्वारा भेजी गयी सभी रिपोर्ट्स को देखा है आपकी पत्नी डिम्बाशय शोथ से पीड़ित हैं जिसका आप परीक्षण करवा चुके हैं। आप उन्हें निम्न उपचार दीजिये-
१ . पेट पर हल्का सा तारपीन का शुद्ध तेल लगा कर गर्म पानी की थैली से सेंक करें, ऐसा दिन में तीन चार बार करिये।
२ . गंधक रसायन एक गोली + आरोग्यवर्धिनी बटी एक गोली + शुद्ध शिलाजीत दो रत्ती(२५० मिलीग्राम) की एक खुराक बनाएं इस मात्रा को दशमूलारिष्ट + अशोकारिष्ट + अभयारिष्ट मिला कर दो चम्मच से निगलवाएं। सुबह-शाम नाश्ते के बाद दें, खाली पेट न दें।
३ . आमलकी रसायन दो रत्ती + पंचनिम्ब चूर्ण तीन ग्राम + कुक्कुटाण्डत्वक भस्म दो रत्ती की एक खुराक बनाएं व पुनर्नवासव के दो चम्मच से सेवन कराएं। सुबह - शाम दें।
४ . रात में सोते समय एक गोली सर्पगंधा घन बटी एक गोली गर्म जल से दीजिए।
ये उपचार दो माह तक दें वैसे आराम तो दो-तीन दिन में ही दिखने लगेगा। तली-भुनी मसालेदार चीजों से परहेज कराएं।
संजय शुक्ल,अजनी
संजय जी, आपके द्वारा भेजी गयी सभी रिपोर्ट्स को देखा है आपकी पत्नी डिम्बाशय शोथ से पीड़ित हैं जिसका आप परीक्षण करवा चुके हैं। आप उन्हें निम्न उपचार दीजिये-
१ . पेट पर हल्का सा तारपीन का शुद्ध तेल लगा कर गर्म पानी की थैली से सेंक करें, ऐसा दिन में तीन चार बार करिये।
२ . गंधक रसायन एक गोली + आरोग्यवर्धिनी बटी एक गोली + शुद्ध शिलाजीत दो रत्ती(२५० मिलीग्राम) की एक खुराक बनाएं इस मात्रा को दशमूलारिष्ट + अशोकारिष्ट + अभयारिष्ट मिला कर दो चम्मच से निगलवाएं। सुबह-शाम नाश्ते के बाद दें, खाली पेट न दें।
३ . आमलकी रसायन दो रत्ती + पंचनिम्ब चूर्ण तीन ग्राम + कुक्कुटाण्डत्वक भस्म दो रत्ती की एक खुराक बनाएं व पुनर्नवासव के दो चम्मच से सेवन कराएं। सुबह - शाम दें।
४ . रात में सोते समय एक गोली सर्पगंधा घन बटी एक गोली गर्म जल से दीजिए।
ये उपचार दो माह तक दें वैसे आराम तो दो-तीन दिन में ही दिखने लगेगा। तली-भुनी मसालेदार चीजों से परहेज कराएं।
मोटापा बढ़ रहा है.....
Published :
1/09/2009 07:30:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
sir mery age 29 year's hai aur mera weight 80kg. hai,may married hoo.sir mera digest theek nahi rahata hai. kyoki meri work officeal hai jo ki chear ka hai. aab sir marey stomach par fat hoti ja rahi hai jiskay karan stomach bhari-2 lagta hai. too sir aapsay request hai ki koi good upchar send karaney ki karpa karay aapkae atti karpa hogi.
thx.
satish
भाई आपकी समस्या को देखने से पता चलता है कि आप अपने दैनिक जीवन में कम ही शारीरिक श्रम करते हैं। यही कारण है कि कुछ विशेष अंगों पर मेद यानि चर्बी का जमाव होने लगता है इसके लिये आप को जो दवाएं बताई जाएं उनके साथ ही आप अपनी दिनचर्या में यदि कुछ नियमित व्यायाम जोड़ सकें तो आपको जल्दी लाभ होगा। आप निम्न दवाओं को कम से कम तीन माह अवश्य प्रयोग करें-
१ . मेदोहर विडंगादि लौह एक गोली + मेदोहर गुग्गुलु एक गोली + त्रिमूर्ति रस एक गोली की एक खुराक बनाएं इसे मेदारि पेय के दो चम्मच के साथ दिन में तीन बार लीजिये।
२ . अभयासव के दो चम्मच रात को भोजन के आधे घंटे बाद बराबर गर्म पानी के साथ लीजिये।
3 . अग्नितुंडी बटी एक गोली दिन में दो बार गर्म पानी से लीजिये।
thx.
satish
भाई आपकी समस्या को देखने से पता चलता है कि आप अपने दैनिक जीवन में कम ही शारीरिक श्रम करते हैं। यही कारण है कि कुछ विशेष अंगों पर मेद यानि चर्बी का जमाव होने लगता है इसके लिये आप को जो दवाएं बताई जाएं उनके साथ ही आप अपनी दिनचर्या में यदि कुछ नियमित व्यायाम जोड़ सकें तो आपको जल्दी लाभ होगा। आप निम्न दवाओं को कम से कम तीन माह अवश्य प्रयोग करें-
१ . मेदोहर विडंगादि लौह एक गोली + मेदोहर गुग्गुलु एक गोली + त्रिमूर्ति रस एक गोली की एक खुराक बनाएं इसे मेदारि पेय के दो चम्मच के साथ दिन में तीन बार लीजिये।
२ . अभयासव के दो चम्मच रात को भोजन के आधे घंटे बाद बराबर गर्म पानी के साथ लीजिये।
3 . अग्नितुंडी बटी एक गोली दिन में दो बार गर्म पानी से लीजिये।
बुधवार, जनवरी 07, 2009
एक साल से पाइल्स से बहुत परेशान हूं.......
Published :
1/07/2009 05:46:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डॉक्टर साहब,
प्रणाम
मैं पिछले एक साल से पाइल्स से बहुत परेशान हूं शुरू में तो समझ में ही नहीं आया लेकिन अब हमेशा कब्जियत रहती है, गुदा में खुजली होती रहती है, मस्से बन गये हैं, कभी कभी लैट्रिन करते समय खून भी आ जाता है। लोग कहते हैं कि आपरेशन के बाद दोबारा हो जाता है। कोई स्थायी इलाज बताइये अंग्रेजी दवाओं में कोई इलाज नहीं है आपरेशन को ही कहते हैं। मुझे आपरेशन से डर भी लगता है।
संजय राउत,अकोला
संजय जी, परेशान न हों लेकिन आपको लोगों ने सही ही बताया है कि आपरेशन के बाद दोबारा बीमारी हो जाती है उसका कारण है कि मूल कारण तो दूर होता नहीं। यही अंतर है एलोपैथी और आयुर्वेद में। आपकी बीमारी को पाइल्स(बवासीर) या मूळव्याध को जड़ से मिटाने का तरीका आपरेशन है ही नहीं इसलिये आप डरिए मत और इन औषधियों को तीन माह तक लगातार लीजिये आराम तो आपको दूसरे दिन से ही महसूस होने लगेगा।
१ . अर्शोघ्नी बटी दो गोली + अर्शकुठार रस एक गोली + प्राणदा बटी एक गोली(यदि रक्त अधिक आये तो इसके साथ बोलबद्ध रस की एक गोली और ले लीजिये)दिन में तीन बार गुनगुने गर्म पानी से लीजिये।
२ . पहली दवा के आधा घंटा बाद अभयारिष्ट दो चम्मच बराबर पानी में मिला कर दिन में तीन बार पिएं।
३ . रात को सोने से पहले सत ईसबगोल तीन चम्मच एक गिलास गुनगुने जल में घोल कर पिएं।
४ . मलद्वार पर गुदा के अंदर तक उंगली से हलके से कासीसादि तेल मल त्याग के बाद लगाइये व गुदा धोने के पानी में एक चम्मच पिसी हुई फिटकरी डाल कर गुदा धोएं।
मूंग,मसूर, मोटे अनाज की रोटियां, मूली, पालक आदि हरे पत्ते वाले साग, लौकी , परवल, पपीता, करेला, कुंदरू, मट्ठा जैसा सुपाच्य आहार लीजिये। मैदा, खोया , डालडा(वनस्पति घी), गुड़, तेलीय पदार्थ, अरबी(घुईंया), मटर, लाल मिर्च, अचार आदि से परहेज करें।
प्रणाम
मैं पिछले एक साल से पाइल्स से बहुत परेशान हूं शुरू में तो समझ में ही नहीं आया लेकिन अब हमेशा कब्जियत रहती है, गुदा में खुजली होती रहती है, मस्से बन गये हैं, कभी कभी लैट्रिन करते समय खून भी आ जाता है। लोग कहते हैं कि आपरेशन के बाद दोबारा हो जाता है। कोई स्थायी इलाज बताइये अंग्रेजी दवाओं में कोई इलाज नहीं है आपरेशन को ही कहते हैं। मुझे आपरेशन से डर भी लगता है।
संजय राउत,अकोला
संजय जी, परेशान न हों लेकिन आपको लोगों ने सही ही बताया है कि आपरेशन के बाद दोबारा बीमारी हो जाती है उसका कारण है कि मूल कारण तो दूर होता नहीं। यही अंतर है एलोपैथी और आयुर्वेद में। आपकी बीमारी को पाइल्स(बवासीर) या मूळव्याध को जड़ से मिटाने का तरीका आपरेशन है ही नहीं इसलिये आप डरिए मत और इन औषधियों को तीन माह तक लगातार लीजिये आराम तो आपको दूसरे दिन से ही महसूस होने लगेगा।
१ . अर्शोघ्नी बटी दो गोली + अर्शकुठार रस एक गोली + प्राणदा बटी एक गोली(यदि रक्त अधिक आये तो इसके साथ बोलबद्ध रस की एक गोली और ले लीजिये)दिन में तीन बार गुनगुने गर्म पानी से लीजिये।
२ . पहली दवा के आधा घंटा बाद अभयारिष्ट दो चम्मच बराबर पानी में मिला कर दिन में तीन बार पिएं।
३ . रात को सोने से पहले सत ईसबगोल तीन चम्मच एक गिलास गुनगुने जल में घोल कर पिएं।
४ . मलद्वार पर गुदा के अंदर तक उंगली से हलके से कासीसादि तेल मल त्याग के बाद लगाइये व गुदा धोने के पानी में एक चम्मच पिसी हुई फिटकरी डाल कर गुदा धोएं।
मूंग,मसूर, मोटे अनाज की रोटियां, मूली, पालक आदि हरे पत्ते वाले साग, लौकी , परवल, पपीता, करेला, कुंदरू, मट्ठा जैसा सुपाच्य आहार लीजिये। मैदा, खोया , डालडा(वनस्पति घी), गुड़, तेलीय पदार्थ, अरबी(घुईंया), मटर, लाल मिर्च, अचार आदि से परहेज करें।
मंगलवार, जनवरी 06, 2009
बीमारी का नाम SPASMODIC DYSMENORRHOEA.......मेरी पत्नी दर्द से तड़प जाती है
Published :
1/06/2009 06:57:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डॉक्टर साहब,
प्रणाम
मैं अपनी पत्नी की समस्या को लेकर बहुत चिंतित हूं। उसकी उम्र २४ साल व बदन इकहरा है। उसे मासिक पाली(M.C.) में बहुत दर्द होता है। मासिक धर्म शुरू होने से एक दिन पहले से वह दर्द से तड़पने लगती है नाभि के निचले हिस्से में भयंकर कुचलने-मसलने जैसा दर्द बताती है। दूसरे दिन तक पेनकिलर्स लेने से कम होता जाता है लेकिन तब तक वह अधमरी सी हालत में आ जाती है। मेरे विवाह को चार माह हुए हैं लेकिन सच बताऊं तो मुझे उससे बहुत प्यार है और मैं उसे किसी भी पीड़ा में नहीं देख सकता इसलिये मुझे लगता है कि शायद उसे सहवास में भी अगर ऐसा ही कष्ट हुआ तो मै अपने आपको जीवन भर अपराधी मानता रहूंगा। आप मेरी स्थिति समझ रहे होंगे मेरी सहायता करें जिंदगी भर आपका उपकार नहीं भूलूंगा। यहां एक लेडी डॉक्टर ने उसकी बीमारी का नाम SPASMODIC DYSMENORRHOEA बताया है।
राजन सिंह, सतना
राजन जी,मैं आपकी पत्नी की स्थिति को समझ रहा हूं कि उन्हें इतनी पीड़ा सहन करनी पड़ रही है और निःसंदेह यह समस्या उन्हें मासिक धर्म की शुरूआत से ही होगी लेकिन हमारे परिवारों में अक्सर बहन बेटियां इन तकलीफ़ों को सहन करती जाती हैं और किसी से बताती नहीं हैं खास तौर पर उन परिवारों में जहां मां या बड़ी बहन न हों तब ज्यादा परेशानी होती है। आप भी अब परेशान न हों और उन्हें नियमित रूप से मासिक पाली आने से चार दिन पूर्व इन औषधियों का सेवन कराएं फिर मासिक पाली शुरू हो जाने पर बंद कर दें, इसी प्रकार फिर अगले माह पुनः ऐसा ही करें व इस प्रक्रिया को छह माह तक जारी रखें आप यकीन मानिये कि आपकी पत्नी की सारी समस्या स्थायी तौर पर हल हो जाएगी और आपका वैवाहिक जीवन आप सामान्य तरीके से बिता सकते हैं बस दवाएं शुरू तो करें-
१ . भोजन से आधा घंटा पहले हिंग्वादि चूर्ण दो ग्राम गर्म जल से दें।
२ . नष्टपुष्पान्तक रस एक गोली + रजोदोषहरी बटी दो गोली + योगराज गुग्गुलु दो गोली की एक मात्रा बनाएं और इसे महारास्नादि काढ़े के साथ निगलवा दें। ये मात्रा दिन में तीन बार सुबह-दोपहर-शाम को दें। खाली पेट दवा न दें।
३ . भोजन के आधा घंटा बाद दशमूलारिष्ट + कुमार्यासव को १०-१० मिली. लेकर समान भाग जल मिला कर पिलाएं।
४ . रात में सोने से पहले अजमोदादि चूर्ण दो ग्राम गर्म जल से दें।
प्रणाम
मैं अपनी पत्नी की समस्या को लेकर बहुत चिंतित हूं। उसकी उम्र २४ साल व बदन इकहरा है। उसे मासिक पाली(M.C.) में बहुत दर्द होता है। मासिक धर्म शुरू होने से एक दिन पहले से वह दर्द से तड़पने लगती है नाभि के निचले हिस्से में भयंकर कुचलने-मसलने जैसा दर्द बताती है। दूसरे दिन तक पेनकिलर्स लेने से कम होता जाता है लेकिन तब तक वह अधमरी सी हालत में आ जाती है। मेरे विवाह को चार माह हुए हैं लेकिन सच बताऊं तो मुझे उससे बहुत प्यार है और मैं उसे किसी भी पीड़ा में नहीं देख सकता इसलिये मुझे लगता है कि शायद उसे सहवास में भी अगर ऐसा ही कष्ट हुआ तो मै अपने आपको जीवन भर अपराधी मानता रहूंगा। आप मेरी स्थिति समझ रहे होंगे मेरी सहायता करें जिंदगी भर आपका उपकार नहीं भूलूंगा। यहां एक लेडी डॉक्टर ने उसकी बीमारी का नाम SPASMODIC DYSMENORRHOEA बताया है।
राजन सिंह, सतना
राजन जी,मैं आपकी पत्नी की स्थिति को समझ रहा हूं कि उन्हें इतनी पीड़ा सहन करनी पड़ रही है और निःसंदेह यह समस्या उन्हें मासिक धर्म की शुरूआत से ही होगी लेकिन हमारे परिवारों में अक्सर बहन बेटियां इन तकलीफ़ों को सहन करती जाती हैं और किसी से बताती नहीं हैं खास तौर पर उन परिवारों में जहां मां या बड़ी बहन न हों तब ज्यादा परेशानी होती है। आप भी अब परेशान न हों और उन्हें नियमित रूप से मासिक पाली आने से चार दिन पूर्व इन औषधियों का सेवन कराएं फिर मासिक पाली शुरू हो जाने पर बंद कर दें, इसी प्रकार फिर अगले माह पुनः ऐसा ही करें व इस प्रक्रिया को छह माह तक जारी रखें आप यकीन मानिये कि आपकी पत्नी की सारी समस्या स्थायी तौर पर हल हो जाएगी और आपका वैवाहिक जीवन आप सामान्य तरीके से बिता सकते हैं बस दवाएं शुरू तो करें-
१ . भोजन से आधा घंटा पहले हिंग्वादि चूर्ण दो ग्राम गर्म जल से दें।
२ . नष्टपुष्पान्तक रस एक गोली + रजोदोषहरी बटी दो गोली + योगराज गुग्गुलु दो गोली की एक मात्रा बनाएं और इसे महारास्नादि काढ़े के साथ निगलवा दें। ये मात्रा दिन में तीन बार सुबह-दोपहर-शाम को दें। खाली पेट दवा न दें।
३ . भोजन के आधा घंटा बाद दशमूलारिष्ट + कुमार्यासव को १०-१० मिली. लेकर समान भाग जल मिला कर पिलाएं।
४ . रात में सोने से पहले अजमोदादि चूर्ण दो ग्राम गर्म जल से दें।
गांजा,भांग,शराब आदि के नशे से जिंदगी बर्बाद कर ली है........
Published :
1/06/2009 05:40:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
Dear Sir,
main apne jivan se nirash ho chuka hun. shayad mujh jaise ka jeena hi bekar hai. meri kahani suniye aur ho sake to mujhe bacha lijiye.. bachapan me hi GUTKHA aur BHANG khane ki aadat lag gayi, karib 10 sal tal GUTKHA aur BHANG khane ke baad chhod diya. pura muh nahi khulta hai ho sakta hai muh mein cancer ho gaya ho. ab CIGRETT ME GANJA bhar kar pine ki lat lag chuki hai. last 2 years se CIGARET , GANJA AUR DARU ka sewan kar raha hun. sach puchhiye to ab mera LING bhi khada nahi hota. BIWI hai uske samne bar-bar sharm se gardan jhuk jati hai. NASHA chhodana chahata hu lekin chhod nahi pa raha hun. mere ek pair me hamesha dard bana rahta hai. har 30 minute bad PESHAB lag jata hai. bar -bar peshab karne jana padata hai. kya main NAPUNSAK ban chuka hun? ab to ATMHATYA karne ka man karta hai. mere dost ne apke baare mein bataya to mujhse raha nahi gaya. unhi ke madhyam se apni jindagi apke hawale kar raha hun. agar bacha lenge to bacha lijiye... nahi to ab andh era hi dikhai de raha hai.. jindagi ko bhulane chala tha ab khud ko bhul chuka hun.
yours
DIPAK
भाईसाहब आपकी समस्या के बारे में इतना बताना चाहता हूं कि आप यदि आत्म-नियंत्रण नहीं रखेंगे तो आप खुद को दवा खाने से भी रोक लेंगे। एक हाथ से दवा खाते रहना और दूसरे हाथ से जहर खाते रहना तो एकदम घोर मूर्खता है इसलिये आवश्यक है कि आप स्वयं पर अभ्यास से नशे को कम करने का प्रयास करें और इसी अभ्यास के साथ औषधियां लेना जारी रखिये ताकि जल्द से जल्द ठीक हो सकें। आप निम्न दवाओं को लीजिये-
१ . आरोग्यवर्धिनी वटी एक-एक गोली सुबह-दोपहर-शाम जल के साथ लीजिये।
२ . गोक्षुरादि गुग्गुलु एक गोली + मकरध्वज बटी एक गोली + रस सिंदूर १२५ मिलीग्राम को मिला कर एक मात्रा बना लीजिये और इसे दिन में तीन बार अश्वगंधारिष्ट के दो चम्मच के साथ सेवन करें।
३ . कौंचा पाक एक-एक चम्मच दिन में दो बार दूध के साथ सेवन करें।
दवाएं खाली पेट न लें। औषधि सेवन करने के दौरान यदि आप मांसाहार का सेवन करते हों तो उसे बंद कर दें। इन दवाओं का सेवन धैर्यपूर्वक करें क्योंकि यदि आप अगर चाहें कि आपने अपने शरीर का जो भयंकर नुकसान इतने समय में करा है वह मात्र कुछ दिन में पूरा हो जाए तो यह संभव नहीं है इसलिये कम से कम एक माह दवाएं लेने के बाद ही किसी परिवर्तन की उम्मीद करें,इस उपचार को कम से कम तीन माह तक लीजिये। अधिक तेल-मसाले का सेवन न करें। निराश न हों आप अवश्य ही स्वस्थ हो जाएंगे।
main apne jivan se nirash ho chuka hun. shayad mujh jaise ka jeena hi bekar hai. meri kahani suniye aur ho sake to mujhe bacha lijiye.. bachapan me hi GUTKHA aur BHANG khane ki aadat lag gayi, karib 10 sal tal GUTKHA aur BHANG khane ke baad chhod diya. pura muh nahi khulta hai ho sakta hai muh mein cancer ho gaya ho. ab CIGRETT ME GANJA bhar kar pine ki lat lag chuki hai. last 2 years se CIGARET , GANJA AUR DARU ka sewan kar raha hun. sach puchhiye to ab mera LING bhi khada nahi hota. BIWI hai uske samne bar-bar sharm se gardan jhuk jati hai. NASHA chhodana chahata hu lekin chhod nahi pa raha hun. mere ek pair me hamesha dard bana rahta hai. har 30 minute bad PESHAB lag jata hai. bar -bar peshab karne jana padata hai. kya main NAPUNSAK ban chuka hun? ab to ATMHATYA karne ka man karta hai. mere dost ne apke baare mein bataya to mujhse raha nahi gaya. unhi ke madhyam se apni jindagi apke hawale kar raha hun. agar bacha lenge to bacha lijiye... nahi to ab andh era hi dikhai de raha hai.. jindagi ko bhulane chala tha ab khud ko bhul chuka hun.
yours
DIPAK
भाईसाहब आपकी समस्या के बारे में इतना बताना चाहता हूं कि आप यदि आत्म-नियंत्रण नहीं रखेंगे तो आप खुद को दवा खाने से भी रोक लेंगे। एक हाथ से दवा खाते रहना और दूसरे हाथ से जहर खाते रहना तो एकदम घोर मूर्खता है इसलिये आवश्यक है कि आप स्वयं पर अभ्यास से नशे को कम करने का प्रयास करें और इसी अभ्यास के साथ औषधियां लेना जारी रखिये ताकि जल्द से जल्द ठीक हो सकें। आप निम्न दवाओं को लीजिये-
१ . आरोग्यवर्धिनी वटी एक-एक गोली सुबह-दोपहर-शाम जल के साथ लीजिये।
२ . गोक्षुरादि गुग्गुलु एक गोली + मकरध्वज बटी एक गोली + रस सिंदूर १२५ मिलीग्राम को मिला कर एक मात्रा बना लीजिये और इसे दिन में तीन बार अश्वगंधारिष्ट के दो चम्मच के साथ सेवन करें।
३ . कौंचा पाक एक-एक चम्मच दिन में दो बार दूध के साथ सेवन करें।
दवाएं खाली पेट न लें। औषधि सेवन करने के दौरान यदि आप मांसाहार का सेवन करते हों तो उसे बंद कर दें। इन दवाओं का सेवन धैर्यपूर्वक करें क्योंकि यदि आप अगर चाहें कि आपने अपने शरीर का जो भयंकर नुकसान इतने समय में करा है वह मात्र कुछ दिन में पूरा हो जाए तो यह संभव नहीं है इसलिये कम से कम एक माह दवाएं लेने के बाद ही किसी परिवर्तन की उम्मीद करें,इस उपचार को कम से कम तीन माह तक लीजिये। अधिक तेल-मसाले का सेवन न करें। निराश न हों आप अवश्य ही स्वस्थ हो जाएंगे।
रविवार, जनवरी 04, 2009
मेरी समस्या थायराइड की है
Published :
1/04/2009 11:12:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब नमस्कार मेरी समस्या थायराइड की है, आपको अपनी रिपोर्ट्स भेज रहा हूं। चमड़ी के नीचे सूजन सी बनी रहती है, ताकत एकदम कम हो गयी है,भौंहों के बाल भी कम हो गये हैं, भूख कम हो गयी है और कब्जियत रहती है, खून में हीमोग्लोबिन कम हो गया है, याददाश्त कमजोर हो गयी है, बदन में शिथिलता बनी रहती है,सैक्सुअल लाइफ़ भी एकदम खत्म हो चुकी है, जीभ कुछ मोटी सी लगती है,नाखून अपने आप टूट जाते हैं, हाथ पैर ठंडे बने रहते हैं गरमी में रहने का मन करता है। मुझे डाक्टर जो दवाएं दे रहे हैं वो हैं--
1 Dried extract of thyroid 2 Thyroxin sodium 1mg. twice a day 3 Steroides 4 Vitamin B-12
मैं इन दवाओं से तंग आ गया हूं लेकिन डाक्टर कहते हैं कि ये दवाएं जीवन भर लेनी पड़ेंगी क्योंकि इन्हें बंद करते ही मेरी हालत खराब होने लगती है। क्या आयुर्वेद में मेरे लिये कोई उपाय है कि जिससे मैं पूरी तरह से स्वस्थ हो सकूं? मेरी उम्र 46 साल है। बीमारी का नाम एक बार मैंने डाक्टर से पूछा था तो उन्होंने Myxoedema बताया था।
संगम आव्हाड,शारजाह
संगम जी, आपकी सारी रिपोर्ट्स को देखा और समझा। आप एलोपैथी के डाक्टरों की मजबूरी समझिये कि जब उनके पास इलाज है ही नहीं तो वो क्या कर सकते हैं तो जो उन्हें समझ में आता है वे आपको बताते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार आपकी सहायता करने की कोशिश करते हैं। कोई चिकित्सक अपने मरीज का बुरा नहीं चाहता। लीजिये आपकी समस्या का आयुर्वेद में जो समाधान है वो आपकी सेवा में प्रस्तुत है। इन दवाओं को आप नियमित रूप से लगभग चालीस दिन तक लें और फिर चालीस दिन तक बंद रखें इसके बाद फिर से चालीस दिन तक लें और चालीस दिन बंद कर दें ऐसा तीन बार करिये ताकि आपकी समस्या का स्थायी उपचार हो जाए। निम्न औषधियां लीजिये-
१ . रास्नादि गुग्गुलु १ गोली + कैशोर गुग्गुलु १ गोली + पुनर्नवा मण्डूर १ गोली दिन में तीन बार एक चम्मच दशमूलारिष्ट + एक चम्मच पुनर्नवादि काढ़े के साथ लीजिये।
२ . धात्रीलौह २५० मिग्रा. + प्रवाल पिष्टी १२५ मिग्रा.+ श्रंग भस्म १२५ मिग्रा. + अभ्रक भस्म(शतपुटी) १२५ मिग्रा. + अर्जुन घनबटी १ गोली को मिला कर एक मात्रा बनाएं व इस एक मात्रा को अश्वगंधारिष्ट के साथ पहली दवा के लेने के आधे घंटे बाद लीजिये दिन में दो बार।
३ . रात में भोजन के बाद हरड़ का चूर्ण एक चम्मच गर्म जल से लीजिये।
४ . हृदयार्णव रस एक-एक गोली सुबह शाम अर्जुनारिष्ट के एक चम्मच के साथ लीजिये। इस दवा को दूसरी दवा के साथ ही ले सकते हैं।
मांसाहार का सेवन न करें साथ ही बाजारू पेय पदार्थों का सेवन भी न करें। ठंडी और बासी खाने की चीजों का इस्तेमाल न करें।
1 Dried extract of thyroid 2 Thyroxin sodium 1mg. twice a day 3 Steroides 4 Vitamin B-12
मैं इन दवाओं से तंग आ गया हूं लेकिन डाक्टर कहते हैं कि ये दवाएं जीवन भर लेनी पड़ेंगी क्योंकि इन्हें बंद करते ही मेरी हालत खराब होने लगती है। क्या आयुर्वेद में मेरे लिये कोई उपाय है कि जिससे मैं पूरी तरह से स्वस्थ हो सकूं? मेरी उम्र 46 साल है। बीमारी का नाम एक बार मैंने डाक्टर से पूछा था तो उन्होंने Myxoedema बताया था।
संगम आव्हाड,शारजाह
संगम जी, आपकी सारी रिपोर्ट्स को देखा और समझा। आप एलोपैथी के डाक्टरों की मजबूरी समझिये कि जब उनके पास इलाज है ही नहीं तो वो क्या कर सकते हैं तो जो उन्हें समझ में आता है वे आपको बताते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार आपकी सहायता करने की कोशिश करते हैं। कोई चिकित्सक अपने मरीज का बुरा नहीं चाहता। लीजिये आपकी समस्या का आयुर्वेद में जो समाधान है वो आपकी सेवा में प्रस्तुत है। इन दवाओं को आप नियमित रूप से लगभग चालीस दिन तक लें और फिर चालीस दिन तक बंद रखें इसके बाद फिर से चालीस दिन तक लें और चालीस दिन बंद कर दें ऐसा तीन बार करिये ताकि आपकी समस्या का स्थायी उपचार हो जाए। निम्न औषधियां लीजिये-
१ . रास्नादि गुग्गुलु १ गोली + कैशोर गुग्गुलु १ गोली + पुनर्नवा मण्डूर १ गोली दिन में तीन बार एक चम्मच दशमूलारिष्ट + एक चम्मच पुनर्नवादि काढ़े के साथ लीजिये।
२ . धात्रीलौह २५० मिग्रा. + प्रवाल पिष्टी १२५ मिग्रा.+ श्रंग भस्म १२५ मिग्रा. + अभ्रक भस्म(शतपुटी) १२५ मिग्रा. + अर्जुन घनबटी १ गोली को मिला कर एक मात्रा बनाएं व इस एक मात्रा को अश्वगंधारिष्ट के साथ पहली दवा के लेने के आधे घंटे बाद लीजिये दिन में दो बार।
३ . रात में भोजन के बाद हरड़ का चूर्ण एक चम्मच गर्म जल से लीजिये।
४ . हृदयार्णव रस एक-एक गोली सुबह शाम अर्जुनारिष्ट के एक चम्मच के साथ लीजिये। इस दवा को दूसरी दवा के साथ ही ले सकते हैं।
मांसाहार का सेवन न करें साथ ही बाजारू पेय पदार्थों का सेवन भी न करें। ठंडी और बासी खाने की चीजों का इस्तेमाल न करें।
गुरुवार, जनवरी 01, 2009
गैस ट्रबल से परेशान हूं....
Published :
1/01/2009 10:28:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
Dr. Saheb mera naam mahendra singh hai. mere pet mai hamesha gas bahut banati hai. pahale to mahine do mahine mai hoti thee ab to hamesha pet mai gurgur rahati hai. kabhi-kabhi khatti Dakarei bhi aati hai. thora bahut kabj ki shikayat bhi rahati hai. or kabhi-kabhi sir bhari tatha ankhon mei jalan bhi rahati hai. pet mai gas rukane par bahut dard hota hai. bahut pareshan ho gaya hnu kripaya samadhan batayan.tambaku tatha dhumrapan ki bhi aadat bhi hai. subaha se sham tak baithane ki hi Duti hai ghumane phirane ka time nahi rahata
mahendra bisht.
महेन्द्र जी आप यदि ये बताते कि आपकी दिनचर्या क्या है तो कुछ आहार-विहार संबंधी निर्देश दे सकता था लेकिन कोई बात नहीं। आप निम्न औषधियां एक माह तक सेवन करें आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा--
१ . आक(मदार नीला या सफेद कोई भी चलेगा) के सूखे हुए फूल १० ग्राम + लहसुन १० ग्राम + काली मिर्च ढ़ाई ग्राम + अजवायन ढ़ाई ग्राम + काला नमक ढ़ाई ग्राम + अदरख १० ग्राम + थाइमोल(ये अजवायन का सत्व होता है जो कि आयुर्वेदिक दवाएं बेचने वालों के पास आसानी से मिल जाता है) ५ ग्राम + सोंठ ढ़ाई ग्राम + छोटी पीपर ढ़ाई ग्राम + सेंधानमक ढ़ाई ग्राम + हींग एक ग्राम इन सबको मिला कर एक कर लें और एक चम्मच गर्म जल से भोजन के बाद दोनो समय लीजिये आपकी समस्या खत्म हो जाएगी।
mahendra bisht.
महेन्द्र जी आप यदि ये बताते कि आपकी दिनचर्या क्या है तो कुछ आहार-विहार संबंधी निर्देश दे सकता था लेकिन कोई बात नहीं। आप निम्न औषधियां एक माह तक सेवन करें आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा--
१ . आक(मदार नीला या सफेद कोई भी चलेगा) के सूखे हुए फूल १० ग्राम + लहसुन १० ग्राम + काली मिर्च ढ़ाई ग्राम + अजवायन ढ़ाई ग्राम + काला नमक ढ़ाई ग्राम + अदरख १० ग्राम + थाइमोल(ये अजवायन का सत्व होता है जो कि आयुर्वेदिक दवाएं बेचने वालों के पास आसानी से मिल जाता है) ५ ग्राम + सोंठ ढ़ाई ग्राम + छोटी पीपर ढ़ाई ग्राम + सेंधानमक ढ़ाई ग्राम + हींग एक ग्राम इन सबको मिला कर एक कर लें और एक चम्मच गर्म जल से भोजन के बाद दोनो समय लीजिये आपकी समस्या खत्म हो जाएगी।
बहन चंद्रलेखा शर्मा की ढेरों समस्याएं.....
Published :
1/01/2009 05:54:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
dear dr.
you solved lots of problem and lots of people happy god bless you, please help me i am begging for that.
dr. i been married 22 years since my wife been sick her problems are folowing.
she dont get hungry no aptite
dizzinyness
if she eat something she throw up vomit after some time
nouzia
ashthma she cant cook she hate any smells anything perfume agarbatti etc
she complaint that all food is stuck in chest and after she vomit
she got fever but no timing day or evening or night
and headache most of time migrane etc
she did not sleep at all
she get some blue scars on her body day or night it happens some time and main problem is she get
cut on her vigina 2 times per month some time before pms or some time after pms and we cant make sex
i got same thing i got cut wthought intercourse it been happing with us sinnce we got married. she is 42 and iam 56
i am sugar patient no sex power and we cant make sex cause her cut in her vagina sometime i have cut too.
so please help me what i supose to do can you save us or what you think we able to make baby.
THANKS
ललित शर्मा
भाई ललित शर्मा जी, अपके द्वारा भेजी गयी अत्यंत विस्तरित रिपोर्ट्स के गहन अध्ययन व लाक्षणिकता को जान समझ कर इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि चंद्रलेखा बहन पित्त के बढ़ जाने से इन तमाम लक्षणों से परेशान हैं आप बिलकुल परेशान न हों जब तक बीमारियों का मूल कारण समझ में नहीं आता तब तक सुझाई गयी औषधि मात्र अंधेरे में तीर की भांति होती है। आप उन्हें निम्न औषधियां दीजिये-
१ . स्वर्ण सूतशेखर रस १ गोली + चंद्रकला रस १ गोली + अग्नि संदीपन रस १ गोली सुबह दोपहर शाम पर्पटाद्यारिष्ट के एक चम्मच के साथ निगलवाएं।
२ . गिलोय सत्व २५० मिलीग्राम + प्रवाल पिष्टी २५० मिलीग्राम + कामदुधा रस(मौक्तिक) १२५ मिलीग्राम अम्रतारिष्ट के दो चम्मच के साथ दें दिन में दो बार सुबह और शाम को पहली दवा के दस मिनट बाद दे सकते हैं।
३ .आधा चाय का चम्मच अविपत्तिकर चूर्ण दिन में दो बार ठंडे पानी से दें।
४ . गुलाब शर्बत का सेवन दिन में तीन बार दो - दो चम्मच करा करें।
इस उपचार को एक माह जारी रख कर आप पुनः संपर्क करें आशा है पर्याप्त आराम हो जाएगा। ईश्वर आप लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करें।
आपकी समस्या के बारे में अगले पोस्ट में लिखने वाला हूं। धन्यवाद
you solved lots of problem and lots of people happy god bless you, please help me i am begging for that.
dr. i been married 22 years since my wife been sick her problems are folowing.
she dont get hungry no aptite
dizzinyness
if she eat something she throw up vomit after some time
nouzia
ashthma she cant cook she hate any smells anything perfume agarbatti etc
she complaint that all food is stuck in chest and after she vomit
she got fever but no timing day or evening or night
and headache most of time migrane etc
she did not sleep at all
she get some blue scars on her body day or night it happens some time and main problem is she get
cut on her vigina 2 times per month some time before pms or some time after pms and we cant make sex
i got same thing i got cut wthought intercourse it been happing with us sinnce we got married. she is 42 and iam 56
i am sugar patient no sex power and we cant make sex cause her cut in her vagina sometime i have cut too.
so please help me what i supose to do can you save us or what you think we able to make baby.
THANKS
ललित शर्मा
भाई ललित शर्मा जी, अपके द्वारा भेजी गयी अत्यंत विस्तरित रिपोर्ट्स के गहन अध्ययन व लाक्षणिकता को जान समझ कर इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि चंद्रलेखा बहन पित्त के बढ़ जाने से इन तमाम लक्षणों से परेशान हैं आप बिलकुल परेशान न हों जब तक बीमारियों का मूल कारण समझ में नहीं आता तब तक सुझाई गयी औषधि मात्र अंधेरे में तीर की भांति होती है। आप उन्हें निम्न औषधियां दीजिये-
१ . स्वर्ण सूतशेखर रस १ गोली + चंद्रकला रस १ गोली + अग्नि संदीपन रस १ गोली सुबह दोपहर शाम पर्पटाद्यारिष्ट के एक चम्मच के साथ निगलवाएं।
२ . गिलोय सत्व २५० मिलीग्राम + प्रवाल पिष्टी २५० मिलीग्राम + कामदुधा रस(मौक्तिक) १२५ मिलीग्राम अम्रतारिष्ट के दो चम्मच के साथ दें दिन में दो बार सुबह और शाम को पहली दवा के दस मिनट बाद दे सकते हैं।
३ .आधा चाय का चम्मच अविपत्तिकर चूर्ण दिन में दो बार ठंडे पानी से दें।
४ . गुलाब शर्बत का सेवन दिन में तीन बार दो - दो चम्मच करा करें।
इस उपचार को एक माह जारी रख कर आप पुनः संपर्क करें आशा है पर्याप्त आराम हो जाएगा। ईश्वर आप लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करें।
आपकी समस्या के बारे में अगले पोस्ट में लिखने वाला हूं। धन्यवाद
मंगलवार, दिसंबर 30, 2008
आयुर्वेद में मल्टीविटामिन्स का विकल्प
Published :
12/30/2008 07:51:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डाक्टर साहब
प्रणाम
मैं एक एलोपैथी चिकित्सक हूं और आपसे जानना चाहता हूं कि जिस तरह से किसी भी बीमारी के बाद आयी हुई कमजोरी के बाद आधुनिक चिकित्सा में हम लोग मल्टीविटामिन्स और खनिजों के बने कैप्सूल आदि देते हैं ताकि मरीज अशक्त न महसूस करे तो क्या आयुर्वेद में भी इसका कोई विकल्प है?
Dr.Ajay singh,Jhunsi
प्रिय डा.अजय जी, आयुर्वेद में सामान्य अथवा बीमारी के बाद आयी हुई भीषण कमजोरी को दूर करने के लिये जो योग दे कर सैकड़ों बार परीक्षण करा गया है वह आपकी सेवा में प्रस्तुत है--
सितोपलादि चूर्ण १०० ग्राम + आमलकी रसायन ५० ग्राम + शतावरी चूर्ण ५० ग्राम + मुलहठी का चूर्ण ५० ग्राम इस सबको मिला कर इसमें २५० ग्राम शहद मिला लें तो यह चटनी जैसा बन जाएगा अब आप इसे अपने मरीजों को निर्भय हो कर दे सकते हैं। इसे दिन में तीन बार एक-एक चम्मच दूध के साथ दीजिये। आप स्वयं देख लेंगे कि यह योग सिंथेटिक विटामिन्स व खनिजों के कैप्सूल से कहीं लाख गुना बेहतर परिणाम देता है। कम से कम दो माह सेवन कराने से आश्चर्यजनक लाभ होता है।
प्रणाम
मैं एक एलोपैथी चिकित्सक हूं और आपसे जानना चाहता हूं कि जिस तरह से किसी भी बीमारी के बाद आयी हुई कमजोरी के बाद आधुनिक चिकित्सा में हम लोग मल्टीविटामिन्स और खनिजों के बने कैप्सूल आदि देते हैं ताकि मरीज अशक्त न महसूस करे तो क्या आयुर्वेद में भी इसका कोई विकल्प है?
Dr.Ajay singh,Jhunsi
प्रिय डा.अजय जी, आयुर्वेद में सामान्य अथवा बीमारी के बाद आयी हुई भीषण कमजोरी को दूर करने के लिये जो योग दे कर सैकड़ों बार परीक्षण करा गया है वह आपकी सेवा में प्रस्तुत है--
सितोपलादि चूर्ण १०० ग्राम + आमलकी रसायन ५० ग्राम + शतावरी चूर्ण ५० ग्राम + मुलहठी का चूर्ण ५० ग्राम इस सबको मिला कर इसमें २५० ग्राम शहद मिला लें तो यह चटनी जैसा बन जाएगा अब आप इसे अपने मरीजों को निर्भय हो कर दे सकते हैं। इसे दिन में तीन बार एक-एक चम्मच दूध के साथ दीजिये। आप स्वयं देख लेंगे कि यह योग सिंथेटिक विटामिन्स व खनिजों के कैप्सूल से कहीं लाख गुना बेहतर परिणाम देता है। कम से कम दो माह सेवन कराने से आश्चर्यजनक लाभ होता है।
सोमवार, दिसंबर 29, 2008
पिछले १५ सालों अनजान व्याधियों से परेशान हूँ
Published :
12/29/2008 05:44:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डॉक्टर साहब को चरण स्पर्श,
आपका ब्लॉग देखकर साहब मुझे लगता है कि आप मेरे लिए मसीहा बनकर आए हैं। क्योंकि मैं पिछले १५ सालों अनजान व्याधियों से परेशान हूँ मेरी परेशानी ही कुछ ऐसी है कि जिसे ना तो किसी को बता सकता मेरी उम्र ३४ साल है और मैं अपनी याददाश्त को लेकर बहुत परेशान हूं मैं हर चीज भूल जाता हूं। कभी कभी सिर भारी रहता है और थकान 24 घंटे थकान रहती है जलन और आखें लाल भी हो जाती हैं। बहुत कोशिश के बाद काम में जी लगता है, बस २४ घंटे लेटे रहने का मन करता है देखने में सेहत ठीक लगती है पर थोड़ा सा काम करते थकावट हो जाती है . कोई भी काम बोझ की तरह पड़ा रहता है ऐसा लगता है किसी ने छाती पर पत्थर रख दिया हो , तात्कालिक याददाश्त बिल्कुल कम है। आजकल यह होने लगा है कि कोई मेरे से बात कर रहा होता है पर मैं अपने ही विचारों में खोया रहता हूं पूछ दे तो दिमाग ब्लैंक हो जाता अचानक ऐसा हो गया कि मूल बात कहीं छूट गयी, बच्चों से ही पूछना होता है कि हम क्या बात कर रहे थे। मेरी शादी १४ साल पहले हुई थी. शादी के बाद तीन दिनों तक मैं पत्नी से सहवास करने में असफल रहा. काफी कोशिशों के बाद चोथे दिन जैसे तैसे मैं पत्नी की साथ सम्भोग करने में सफल रहा. परन्तु तब से लेकर आज तक मैं अपनी पत्नी से संतोषदायक सहवास कभी नही कर पाया. मेरे लिंग में पर्याप्त कठोरता नही आ पाती . कभी शीघ्रपतन हो जाता है. कभी कठोरता आ भी जाती है तो वीर्य स्खलन से पहले लिंग ढीला हो जाता है. बहुत से डाक्टर को दिखाया पर कोई नतीजा नहीं निकला।. एक एम.डी. ने मेरे रोग का नाम CFS (Fibromyalgia) बताया है जिसका कोई कारगर इलाज नहीं होता है एक न्यूरोलाजिस्ट ने इसे (ANEXITY NEUROSIS ) बताया है हरिद्वार के रामदेव जी के आश्रम के एक चिकित्सक ने इसे उन्माद बताया, मैं प्रतिदिन दस सिगरेट पी जाता हूं लेकिन आदत हो गयी है जो छूट नहीं रही है जरूरी प्रीकॉशन(सावधानियां) और परहेज भी बतावें और समुचित मार्गदर्शन दें. मेल कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया है. इसके लिए क्षमा चाहता हूं.
सधन्यवाद
अनाम
भाईसाहब आपकी सारी समस्या को विस्तार से पढ़ने समझने के बाद मैं जान पा रहा हूं कि आप वाकई बहुत परेशान हैं। सबसे पहले तो मैं आयुर्वेद के उन छद्मचिकित्सकों की भरपूर भर्त्सना करना चाहता हूं जो अपनी बेवकूफ़ी के कारण रोगी के प्राण ले लेते हैं और अंधेरे में तीर चलाते हुए आयुर्वेद को बदनाम करते हैं ,बाबा रामदेव महाराज का नाम बिक रहा है आयुर्वेद की मिट्टी पलीद हो रही है उनके नाम पर।
आपकी समस्या को देखते ही आयुर्वेद कॊ जरा सा भी समझने वाला जान जाएगा कि आपकी समस्या का मूल कारण कफ़ विकार है, मुझे हलका सा आक्रोश है उन मूढ़ चिकित्सकों पर जो आयुर्वेद के त्रिदोष के सिद्धांत को छोड़ कर पेटेंट दवाओं के तीर चलाते रहते हैं। आपकी देह में कफ़ विकार के चलते अवलम्बक कफ़(आधुनिक चिकित्सा शास्त्र का एसिटिल कोलीन?) व साधक पित्त (आधुनिक चिकित्सा शास्त्र का एड्रीनलीन?) दूषित हो चला है। आप निम्न आहार-विहार से परहेज करें--
दिन में सोना, व्यायाम न करना, मीठे, ठंडे व बासी भोजन न करें, केक-पेस्ट्री बिस्किट, चायनीज व्यंजन, बाजारू साफ़्टड्रिंक्स, घी, तैलीय पदार्थ, मछली(सभी जलीय जंतु) न खाएं, सिंघाड़ा, नारियल, कद्दू, लौकी(बेलों पर लगने वाली सब्जियां फलादि), उड़द, लोबिया, जौ, गेंहू, दूध-दही, चावल से बने खाद्य पदार्थ यानि कि आपको कुछ भी ऐसा नहीं खाना-पीना है या आचरण करना है जिससे कि कफ़ कुपित हो।
आप नियमित रूप से कठोर व्यायाम, सूखी मालिश, प्यास व नींद के वेग को रोकना, उपवास करना अपने अभ्यास में लाएं। शहद का अधिकतासे सेवन करिये। किसी आयुर्वेदिक पंचकर्म करने वाले चिकित्सक से मिल कर वमन करिये ।
निम्न औषधि लीजिये-
१. ताम्र भस्म एक रत्ती(१२५ मिलीग्राम)+ शतपुटी अभ्रक भस्म एक रत्ती + शंख भस्म एक रत्ती मिला कर सुबह दोपहर शाम को एक एक खुराक वासादि क्वाथ के दो चम्मच के साथ सेवन करें।
२. हरिद्रादि चूर्ण आधा चम्मच दिन में दो बार शहद के साथ चाटिए।
३ . श्रंगाराभ्र रस एक-एक गोली शहद के साथ दिन में तीन बार लीजिये व ऊपर से गर्म फीका दूध दो घूंट पी लीजिये(दो घूंट से ज्यादा न लें)। एक माह के बाद आप इसी औषधि को मलाई के साथ एक माह तक लीजिये और फिर आयुषवेद को सूचित करिये।
कोई भी दवा खाली पेट न लें।
आपका ब्लॉग देखकर साहब मुझे लगता है कि आप मेरे लिए मसीहा बनकर आए हैं। क्योंकि मैं पिछले १५ सालों अनजान व्याधियों से परेशान हूँ मेरी परेशानी ही कुछ ऐसी है कि जिसे ना तो किसी को बता सकता मेरी उम्र ३४ साल है और मैं अपनी याददाश्त को लेकर बहुत परेशान हूं मैं हर चीज भूल जाता हूं। कभी कभी सिर भारी रहता है और थकान 24 घंटे थकान रहती है जलन और आखें लाल भी हो जाती हैं। बहुत कोशिश के बाद काम में जी लगता है, बस २४ घंटे लेटे रहने का मन करता है देखने में सेहत ठीक लगती है पर थोड़ा सा काम करते थकावट हो जाती है . कोई भी काम बोझ की तरह पड़ा रहता है ऐसा लगता है किसी ने छाती पर पत्थर रख दिया हो , तात्कालिक याददाश्त बिल्कुल कम है। आजकल यह होने लगा है कि कोई मेरे से बात कर रहा होता है पर मैं अपने ही विचारों में खोया रहता हूं पूछ दे तो दिमाग ब्लैंक हो जाता अचानक ऐसा हो गया कि मूल बात कहीं छूट गयी, बच्चों से ही पूछना होता है कि हम क्या बात कर रहे थे। मेरी शादी १४ साल पहले हुई थी. शादी के बाद तीन दिनों तक मैं पत्नी से सहवास करने में असफल रहा. काफी कोशिशों के बाद चोथे दिन जैसे तैसे मैं पत्नी की साथ सम्भोग करने में सफल रहा. परन्तु तब से लेकर आज तक मैं अपनी पत्नी से संतोषदायक सहवास कभी नही कर पाया. मेरे लिंग में पर्याप्त कठोरता नही आ पाती . कभी शीघ्रपतन हो जाता है. कभी कठोरता आ भी जाती है तो वीर्य स्खलन से पहले लिंग ढीला हो जाता है. बहुत से डाक्टर को दिखाया पर कोई नतीजा नहीं निकला।. एक एम.डी. ने मेरे रोग का नाम CFS (Fibromyalgia) बताया है जिसका कोई कारगर इलाज नहीं होता है एक न्यूरोलाजिस्ट ने इसे (ANEXITY NEUROSIS ) बताया है हरिद्वार के रामदेव जी के आश्रम के एक चिकित्सक ने इसे उन्माद बताया, मैं प्रतिदिन दस सिगरेट पी जाता हूं लेकिन आदत हो गयी है जो छूट नहीं रही है जरूरी प्रीकॉशन(सावधानियां) और परहेज भी बतावें और समुचित मार्गदर्शन दें. मेल कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया है. इसके लिए क्षमा चाहता हूं.
सधन्यवाद
अनाम
भाईसाहब आपकी सारी समस्या को विस्तार से पढ़ने समझने के बाद मैं जान पा रहा हूं कि आप वाकई बहुत परेशान हैं। सबसे पहले तो मैं आयुर्वेद के उन छद्मचिकित्सकों की भरपूर भर्त्सना करना चाहता हूं जो अपनी बेवकूफ़ी के कारण रोगी के प्राण ले लेते हैं और अंधेरे में तीर चलाते हुए आयुर्वेद को बदनाम करते हैं ,बाबा रामदेव महाराज का नाम बिक रहा है आयुर्वेद की मिट्टी पलीद हो रही है उनके नाम पर।
आपकी समस्या को देखते ही आयुर्वेद कॊ जरा सा भी समझने वाला जान जाएगा कि आपकी समस्या का मूल कारण कफ़ विकार है, मुझे हलका सा आक्रोश है उन मूढ़ चिकित्सकों पर जो आयुर्वेद के त्रिदोष के सिद्धांत को छोड़ कर पेटेंट दवाओं के तीर चलाते रहते हैं। आपकी देह में कफ़ विकार के चलते अवलम्बक कफ़(आधुनिक चिकित्सा शास्त्र का एसिटिल कोलीन?) व साधक पित्त (आधुनिक चिकित्सा शास्त्र का एड्रीनलीन?) दूषित हो चला है। आप निम्न आहार-विहार से परहेज करें--
दिन में सोना, व्यायाम न करना, मीठे, ठंडे व बासी भोजन न करें, केक-पेस्ट्री बिस्किट, चायनीज व्यंजन, बाजारू साफ़्टड्रिंक्स, घी, तैलीय पदार्थ, मछली(सभी जलीय जंतु) न खाएं, सिंघाड़ा, नारियल, कद्दू, लौकी(बेलों पर लगने वाली सब्जियां फलादि), उड़द, लोबिया, जौ, गेंहू, दूध-दही, चावल से बने खाद्य पदार्थ यानि कि आपको कुछ भी ऐसा नहीं खाना-पीना है या आचरण करना है जिससे कि कफ़ कुपित हो।
आप नियमित रूप से कठोर व्यायाम, सूखी मालिश, प्यास व नींद के वेग को रोकना, उपवास करना अपने अभ्यास में लाएं। शहद का अधिकतासे सेवन करिये। किसी आयुर्वेदिक पंचकर्म करने वाले चिकित्सक से मिल कर वमन करिये ।
निम्न औषधि लीजिये-
१. ताम्र भस्म एक रत्ती(१२५ मिलीग्राम)+ शतपुटी अभ्रक भस्म एक रत्ती + शंख भस्म एक रत्ती मिला कर सुबह दोपहर शाम को एक एक खुराक वासादि क्वाथ के दो चम्मच के साथ सेवन करें।
२. हरिद्रादि चूर्ण आधा चम्मच दिन में दो बार शहद के साथ चाटिए।
३ . श्रंगाराभ्र रस एक-एक गोली शहद के साथ दिन में तीन बार लीजिये व ऊपर से गर्म फीका दूध दो घूंट पी लीजिये(दो घूंट से ज्यादा न लें)। एक माह के बाद आप इसी औषधि को मलाई के साथ एक माह तक लीजिये और फिर आयुषवेद को सूचित करिये।
कोई भी दवा खाली पेट न लें।
बुधवार, दिसंबर 24, 2008
पत्नी का ब्लड प्रेशर एकदम नीचा रहता है सैक्स की भी इच्छा नहीं होती है
Published :
12/24/2008 08:41:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब नमस्कार
मेरी पत्नी का ब्लड प्रेशर एकदम नीचा रहता है जिससे उसे बहुत परेशानी होती है। वह इकहरे बदन की है उसका वजन भी काफ़ी कम है। उसकी उम्र अड़तीस साल है। उसको सैक्स की भी इच्छा बिलकुल नहीं होती है। खून में हीमोग्लोबिन भी बहुत कम है। कुछ आयुर्वेदिक दवा बताइये।
अविनाश राजाध्यक्ष,कोच्चि
अविनाश जी,आपने अपनी पत्नी की समस्या को बहुत विस्तार से लिखा है व कई रिपोर्ट्स भेजी हैं उन सब रिपोर्ट्स को देख कर गहराई से समझने के बाद आपकी पत्नी के लिये निम्न दवा लिख रहा हूं।
१ . रससिंदूर १० ग्राम + लौह भस्म १० ग्राम + बंग भस्म १० ग्राम + स्वर्णमाक्षिक भस्म १० ग्राम + शुद्ध कुचला २० ग्राम + त्रिकटु २० ग्राम + अश्वगंधा २० ग्राम; इन सबको बहुत मजबूत हाथों से कसकर घोंट लीजिए जिससे कि रस सिंदूर की चमक समाप्त हो जाए। अब इस औषधि में से २५० मिलीग्राम की मात्रा की एक खुराक बनाएं। सुबह-शाम शहद के साथ एक-एक मात्रा चटाएं। इससे कुछ ही दिनों में उनकी सारी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। इस उपचार को कम से कम चालीस दिन तक अवश्य दीजिये।
मेरी पत्नी का ब्लड प्रेशर एकदम नीचा रहता है जिससे उसे बहुत परेशानी होती है। वह इकहरे बदन की है उसका वजन भी काफ़ी कम है। उसकी उम्र अड़तीस साल है। उसको सैक्स की भी इच्छा बिलकुल नहीं होती है। खून में हीमोग्लोबिन भी बहुत कम है। कुछ आयुर्वेदिक दवा बताइये।
अविनाश राजाध्यक्ष,कोच्चि
अविनाश जी,आपने अपनी पत्नी की समस्या को बहुत विस्तार से लिखा है व कई रिपोर्ट्स भेजी हैं उन सब रिपोर्ट्स को देख कर गहराई से समझने के बाद आपकी पत्नी के लिये निम्न दवा लिख रहा हूं।
१ . रससिंदूर १० ग्राम + लौह भस्म १० ग्राम + बंग भस्म १० ग्राम + स्वर्णमाक्षिक भस्म १० ग्राम + शुद्ध कुचला २० ग्राम + त्रिकटु २० ग्राम + अश्वगंधा २० ग्राम; इन सबको बहुत मजबूत हाथों से कसकर घोंट लीजिए जिससे कि रस सिंदूर की चमक समाप्त हो जाए। अब इस औषधि में से २५० मिलीग्राम की मात्रा की एक खुराक बनाएं। सुबह-शाम शहद के साथ एक-एक मात्रा चटाएं। इससे कुछ ही दिनों में उनकी सारी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। इस उपचार को कम से कम चालीस दिन तक अवश्य दीजिये।
सोमवार, दिसंबर 22, 2008
कामशक्तिवर्धक दवाऒ के सेवन से स्वप्नदोष की समस्या होने लगी है
Published :
12/22/2008 02:27:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डाक्टर साहब
नमस्ते
मैंने चिकित्सक के सुझाव से कुछ कामशक्तिवर्धक दवाएं लेना शुरू करा क्योंकि मैंने बताया था कि मुझे शुक्राणुओं की गतिशीलता से संबंधित समस्या थी। अब दवाओं के सेवन से मुझे स्वप्नदोष की समस्या होने लगी है। सप्ताह में दो तीन बार मैं इस समस्या से दो-चार हो रहा हूं मेहरबानी करके मेरी सहायता करिये।
अनाम
भाई,आपने जिन भी कामशक्तिवर्धक दवाओं का सेवन करा है उन्हीं का परिणाम है कि आप स्वप्न दोष से परेशान हो रहे हैं क्योंकि धारण क्षमता है नहीं और आप हैं कि वजन उठाए जा रहे हैं आप उन दवाओं को एक सप्ताह तक बंद करें और इस औषधि का सेवन करें फिर उसके बाद पुनः उन दवाओं का सेवन प्रारंभ करें-
१ . त्रिफला चूर्ण १०० ग्राम + हल्दी चूर्ण(बाजारू न ले कर स्वयं खड़ी हल्दी पिसवाएं) १५ ग्राम + धनिया चूर्ण १५ ग्राम + कपूर २ ग्राम इन सबको अच्छी तरह से मिला लें और उसमें इतना शहद मिलाएं कि वह च्यवनप्राश जैसा अवलेह बन जाए। इसमें चांदी के चार वर्क मिला लीजिए और सुबह-शाम एक-एक चम्मच दूध के साथ चाट लिया करें।
नमस्ते
मैंने चिकित्सक के सुझाव से कुछ कामशक्तिवर्धक दवाएं लेना शुरू करा क्योंकि मैंने बताया था कि मुझे शुक्राणुओं की गतिशीलता से संबंधित समस्या थी। अब दवाओं के सेवन से मुझे स्वप्नदोष की समस्या होने लगी है। सप्ताह में दो तीन बार मैं इस समस्या से दो-चार हो रहा हूं मेहरबानी करके मेरी सहायता करिये।
अनाम
भाई,आपने जिन भी कामशक्तिवर्धक दवाओं का सेवन करा है उन्हीं का परिणाम है कि आप स्वप्न दोष से परेशान हो रहे हैं क्योंकि धारण क्षमता है नहीं और आप हैं कि वजन उठाए जा रहे हैं आप उन दवाओं को एक सप्ताह तक बंद करें और इस औषधि का सेवन करें फिर उसके बाद पुनः उन दवाओं का सेवन प्रारंभ करें-
१ . त्रिफला चूर्ण १०० ग्राम + हल्दी चूर्ण(बाजारू न ले कर स्वयं खड़ी हल्दी पिसवाएं) १५ ग्राम + धनिया चूर्ण १५ ग्राम + कपूर २ ग्राम इन सबको अच्छी तरह से मिला लें और उसमें इतना शहद मिलाएं कि वह च्यवनप्राश जैसा अवलेह बन जाए। इसमें चांदी के चार वर्क मिला लीजिए और सुबह-शाम एक-एक चम्मच दूध के साथ चाट लिया करें।
शनिवार, दिसंबर 20, 2008
स्तनों में बहुत ढीलापन आ गया है
Published :
12/20/2008 08:56:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डाक्टर साहब, मेरी उम्र ३८ साल है, मेरे दो बच्चे हैं। मेरे स्तनों में बहुत ढीलापन आ गया है। इससे मेरा सौन्दर्य प्रभावित हो रहा है आपसे मैं कुछ आयुर्वेद की औषधि जानना चाहती हूं जिससे कि मैं अपने खोए हुये शारीरिक सौन्दर्य को दोबारा पा सकूं। धन्यवाद
रश्मि अरोरा,सागर(म.प्र.)
रश्मि बहन, स्तनों में ढीलापन आ जाने के कारण आपका शारीरिक सौन्दर्य प्रभावित हो रहा है मैं आपको जो उपचार बता रहा हूं उससे बहुत सारी अन्य बहनें भी लाभान्वित होंगी
१ . मालिश के लिए तेल बनाने के लिये बनाने के लिये ये तरीका अपनाएं
जायफ़ल ५ ग्राम + कुटकी ३ ग्राम + असगंध १० ग्राम + लज्जालु ४ ग्राम + हल्दी ५ ग्राम + दारुहल्दी ५ ग्राम + चम्पापुष्प २० ग्राम + घी १० ग्राम + तिल तैल २० ग्राम + पानी १००० ग्राम ; इस पूरे मिश्रण को अच्छे तरीके से पका लें ताकि सारा पानी जल जाए और बस तेल ही बचे कुल ७०-८० ग्राम तेल बचेगा इस तेल की दिन में तीन बार हल्के हाथ से मालिश करी जाए.
२ . खाने के लिये इस प्रकार लड्डू बनाएं
त्रिफला ५० ग्राम + त्रिकुट ५० ग्राम + कालाजीरा २५ ग्राम + सफ़ेद जीरा २५ ग्राम + धनिया ५० ग्राम + अजवायन ५० ग्राम + सेंधा नमक २५ ग्राम + काला नमक २५ ग्राम + नागरमोथा ५० ग्राम + कायफल ४० ग्राम + पुष्करमूल ५० ग्राम + काकड़ासिंगी ५० ग्राम + तालीसपत्र ५० ग्राम + तेजपत्र ५० ग्राम + दालचीनी ५० ग्राम + छोटी इलायची २५ ग्राम + केशर २० ग्राम + गुड़ ५०० ग्राम + मेंथी १००० ग्राम;
इस मिश्रण से २०-२५ ग्राम वजन के लड्डू बना लीजिये और प्रतिदिन दो लड्डू सुबह शाम खाकर दूध से लें
रश्मि अरोरा,सागर(म.प्र.)
रश्मि बहन, स्तनों में ढीलापन आ जाने के कारण आपका शारीरिक सौन्दर्य प्रभावित हो रहा है मैं आपको जो उपचार बता रहा हूं उससे बहुत सारी अन्य बहनें भी लाभान्वित होंगी
१ . मालिश के लिए तेल बनाने के लिये बनाने के लिये ये तरीका अपनाएं
जायफ़ल ५ ग्राम + कुटकी ३ ग्राम + असगंध १० ग्राम + लज्जालु ४ ग्राम + हल्दी ५ ग्राम + दारुहल्दी ५ ग्राम + चम्पापुष्प २० ग्राम + घी १० ग्राम + तिल तैल २० ग्राम + पानी १००० ग्राम ; इस पूरे मिश्रण को अच्छे तरीके से पका लें ताकि सारा पानी जल जाए और बस तेल ही बचे कुल ७०-८० ग्राम तेल बचेगा इस तेल की दिन में तीन बार हल्के हाथ से मालिश करी जाए.
२ . खाने के लिये इस प्रकार लड्डू बनाएं
त्रिफला ५० ग्राम + त्रिकुट ५० ग्राम + कालाजीरा २५ ग्राम + सफ़ेद जीरा २५ ग्राम + धनिया ५० ग्राम + अजवायन ५० ग्राम + सेंधा नमक २५ ग्राम + काला नमक २५ ग्राम + नागरमोथा ५० ग्राम + कायफल ४० ग्राम + पुष्करमूल ५० ग्राम + काकड़ासिंगी ५० ग्राम + तालीसपत्र ५० ग्राम + तेजपत्र ५० ग्राम + दालचीनी ५० ग्राम + छोटी इलायची २५ ग्राम + केशर २० ग्राम + गुड़ ५०० ग्राम + मेंथी १००० ग्राम;
इस मिश्रण से २०-२५ ग्राम वजन के लड्डू बना लीजिये और प्रतिदिन दो लड्डू सुबह शाम खाकर दूध से लें
शुक्रवार, दिसंबर 19, 2008
मुझे ब्रेन-हैमरेज तक होने की संभावना है........
Published :
12/19/2008 09:35:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब नमस्ते
मेरा ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ा रहता है नींद भी नहीं आती है बेचैनी बनी रहती है, मेरी उम्र छियालीस साल है और मैं पेशे से वकील हूं। निजी डाक्टर ने जो दवा दी है तो उनका कहना है कि वह दवा आजीवन लेना होगी अन्यथा मेरी स्थिति ऐसी भयानक है कि मुझे ब्रेन-हैमरेज तक होने की संभावना से भी इंकार नहीं करा जा सकता है। मैं आजीवन अंग्रेजी दवा नहीं खाना चाहता हूं अतः मेरी मदद करिये और कोई कारगर आयुर्वेदिक दवा बताएं जिससे कि रोग ही समाप्त हो जाए न कि जिन्दगी भर के लिये व्यसन की तरह से दवा खानी पड़े। धन्यवाद
एड.राजाराम आचार्य,सागर
वकील साहब,आपने अपनी जो रिपोर्ट्स भेजी हैं वो वाकई देख कर मुझे यह आश्चर्य है कि आप अपने आप को इतने समय तक कैसे संतुलित रख पाए किंतु अब इन लक्षणों को आप सरलता से न लें और न ही नजरअंदाज करे। आप अपनी अंग्रेजी दवा का प्रयोग बंद कर दीजिये क्योंकि वह दवा वाकई में उपचार न होकर मात्र एक छलावा है जो कि लक्षण का शमन कर देती है कारण का निवारण नहीं करती हैं। आप निम्न आयुर्वेदिक उपचार लीजिये जिससे आपके दिल और दिमाग दोनो को पुष्टि मिलेगी-
१ . सर्पगन्धामूल का सूक्ष्म चूर्ण ६० ग्राम + खरल करा हुआ रससिंदूर २४ ग्राम + प्रवाल पिष्टी ४० ग्राम + अकीक पिष्टी ४० ग्राम इन सभी द्रव्यों को एक साथ कस कर खरल करवा लीजिये। सुबह-शाम एक ग्राम की मात्रा औषधि ले कर सारस्वतारिष्ट चार चम्मच में शहद मिला कर लीजिये। दवा खाली पेट न लें।
२ . रस सिंदूर १० ग्राम + जहरमोहरा पिष्टी १० ग्राम + वंशलोचन १० ग्राम + शुद्ध करी गाय के घी में भूंनी हुई भांग १० ग्राम + सर्पगन्धा १० ग्राम + ज्योतिषमती(मालकांगनी) १० ग्राम + बचा १० ग्राम + जटामांसी १० ग्राम + अश्वगंधा १० ग्राम + पीपरामूल १० ग्राम + छोटी इलायची के बीज १० ग्राम ; इन सभी द्रव्यों को मजबूत हाथों से कस कर घोंट लें व २५० मिलीग्राम की मात्रा बना लीजिये।
यह दवा एक मात्रा + रसराज रस एक गोली + एक चम्मच ब्राह्म रसायन को खमीरा गावजबां अम्बरी के साथ सुबह-शाम पहली दवा के आधे घंटे बाद लें।
यकीन मानिये कि न सिर्फ़ यह दवा आपकी ब्लड-प्रेशर की बीमारी को कुछ माह में छूमंतर कर देगी बल्कि आपकी याददाश्त पर भी अनुकूल प्रभाव दर्शाएगी इस लिहाज से यह दवा आपके साथ ही तमाम अन्य पत्रकार,वकील,अध्यापक,विद्यार्थियों के लिए भी समान रूप से लाभदायक है। इस दवा का सेवन तीन माह तक करें।
मंगलवार, दिसंबर 16, 2008
मोटापा कम होने के बाद त्वचा ढीली हो गयी है
Published :
12/16/2008 09:51:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
How to tighten up loose skin after weight loss.
(वजन कम करने के बाद त्वचा में आया ढीलेपन में कसाव किस तरह से लाया जा सकता है?)
कपिलदेव शर्मा
कपिल जी, शायद आपके द्वारा करा गया प्रश्न बहुत सारे लोगों का सवाल होगा जो कि वजन कम करने के लिये अनर्गल तरीके अपना कर जैसे कि ऐसी औषधियों का सेवन करना जो कि भूख मार देती हैं या फिर खुद ही डायटिंग के नाम पर भूखा रहना। इस विषय में स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि आपमें से कई एक का अनुभव होगा कि खाना एकदम कम खाने के बाद भी शरीर स्थूल,थुलथुला सा होता जाता है क्योंकि भोजन का आपके मोटापे से कोई सीधा संबंध नहीं है। आप निम्न उपचार लीजिये-
१ . रजत भस्म आधी रत्ती + सिद्ध चंद्रोदय आधी रत्ती दिन में दो बार सुबह-शाम एक चम्मच शहद व दो चम्मच घी के मिश्रण में मिला कर चाट लीजिये,औषधि खाली पेट न लें।
२ . मकरध्वज बटी एक-एक सुबह शाम मीठे गुनगुने दूध से लीजिये।
इस तरह देह पुनः कसाव में आ जाएगी साथ ही ध्यान रखिए कि सप्ताह में एक बार महानारायण तेल से हलके हाथ से मालिश करवाये।
सोमवार, दिसंबर 15, 2008
मायग्रेन का दर्द है
Published :
12/15/2008 10:57:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
सर नमस्ते,मेरी उम्र २२ साल है और मैं इंजीनियरिंग का छात्र हूं। करीब चार माह से मेरे आधे सिर में ऐसा दर्द होता है जो कुछ समय बाद असहनीय सा होने लगता है, महसूस होता है कि सिर के अंदर रोलर चल रहा है। पेन किलर ले लेने पर दर्द बंद हो जाता है लेकिन फिर कुछ समय बाद दो तीन दिन में शुरू हो जाता है। हमारे फ़ैमिली डाक्टर ने बताया कि यह मायग्रेन का दर्द है। वो पेन किलर्स दवाएं ब्रूफ़ेन आदि भी उन्होंने ही दी हैं क्या आयुर्वेद में स्थायी इलाज है?
राघव आचार्य,टीकमगढ़
राघव जी,आपके फैमिली डाक्टर ने सही बताया है कि यह मायग्रेन (migraine) का दर्द है। यदि यह रोग बढ़ जाए तो सबसे पहले इससे आंखे और फिर कान प्रभावित होते हैं। आप निम्न उपचार लीजिये, पेन किलर्स तात्कालिक लाभ देते हैं स्थायी नहीं अतः उन दवाओं को बंद कर दीजिये-
१ . चंद्रकान्त रस २-२ गोली सुबह-शाम शहद से चाट लीजिये और फिर इसके बाद ऊपर से करीब १५ मिली. पथ्यादि काढ़ा पी लीजिये। खाली पेट दवा न लीजिये।
२ . सुबह खाली पेट शौचादि से निपटने के बाद गर्म जलेबी को दही के साथ नाश्ता करिये।
इस उपचार को लगातार एक माह तक कम से कम लीजिये ताकि स्थायी हल प्राप्त हो सके। अनावश्यक रात्रि जागरण न करें, बासी भोजन न करें, बाजारू ड्रिंक्स से परहेज करें साथ ही अधिक मसालेदार आहार न लें।
राघव आचार्य,टीकमगढ़
राघव जी,आपके फैमिली डाक्टर ने सही बताया है कि यह मायग्रेन (migraine) का दर्द है। यदि यह रोग बढ़ जाए तो सबसे पहले इससे आंखे और फिर कान प्रभावित होते हैं। आप निम्न उपचार लीजिये, पेन किलर्स तात्कालिक लाभ देते हैं स्थायी नहीं अतः उन दवाओं को बंद कर दीजिये-
१ . चंद्रकान्त रस २-२ गोली सुबह-शाम शहद से चाट लीजिये और फिर इसके बाद ऊपर से करीब १५ मिली. पथ्यादि काढ़ा पी लीजिये। खाली पेट दवा न लीजिये।
२ . सुबह खाली पेट शौचादि से निपटने के बाद गर्म जलेबी को दही के साथ नाश्ता करिये।
इस उपचार को लगातार एक माह तक कम से कम लीजिये ताकि स्थायी हल प्राप्त हो सके। अनावश्यक रात्रि जागरण न करें, बासी भोजन न करें, बाजारू ड्रिंक्स से परहेज करें साथ ही अधिक मसालेदार आहार न लें।
मंगलवार, दिसंबर 09, 2008
बेटे की याददाश्त बढ़ाने के लिये क्या करें?
Published :
12/09/2008 10:53:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब नमस्ते, मेरे बेटे की उम्र अठारह साल है और वो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये प्रयास कर रहा है। पिछले महीने से मैं देख रही हूं कि वह बहुत चिड़चिड़ा सा हो गया है उसे अक्सर चक्कर आ जाते हैं, कल मैंने उसे अपने घर में ही मौजूद ब्लडप्रेशर नापने वाले यंत्र से देखा तो उसका ब्लड प्रेशर भी सामान्य से अधिक था। क्या यह प्रतियोगिता के तनाव के कारण है? क्या आप कोई ऐसी दवा बता सकते हैं जिससे कि उसे पढ़ा हुआ याद रह सके और वह शांत रहे?
अनीता शंकर,इलाहाबाद
अनीता बहन, आप ने सही अनुमान लगाया कि बच्चे के दिमाग पर प्रतियोगी परीक्षा का ही दबाव है। यह हाल आजकल लगभग हर बच्चे का है। आप बच्चे को निम्न औषधि योग सेवन कराएं और यकीन मानिये कि उसकी सारी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। विद्यार्थियों के लिये तो यह योग बेजोड़ है-
१. रजत सिंदूर ५ ग्राम + रजत भस्म ५ ग्राम + शतपुटी अभ्रक भस्म १० ग्राम + स्वर्णमाक्षिक भस्म १० ग्राम + गिलोय सत्व १० ग्राम + सर्पगन्धा घनसत्व १० ग्राम + अश्वगन्धा घनसत्व १० ग्राम + शंखपुष्पी घनसत्व १० ग्राम + ब्राम्ही घनसत्व १० ग्राम + बच घनसत्व १० ग्राम + जटामांसी घनसत्व १० ग्राम
इन सभी को मजबूत हाथों से कस कर घुटाई करवा लीजिये। इसके बाद इसकी ५०० मिलीग्राम की मात्रा की पुड़िया बना लीजिये। एक-एक पुड़िया सुबह शाम सारस्वतारिष्ट के दो चम्मच के साथ दीजिये। इस दवा से मस्तिष्क का उत्तम पोषण होता है। इसका सेवन लम्बे समय तक भी करवाया जा सकता है अत्यंत उपयोगी औषधि है।
अनीता शंकर,इलाहाबाद
अनीता बहन, आप ने सही अनुमान लगाया कि बच्चे के दिमाग पर प्रतियोगी परीक्षा का ही दबाव है। यह हाल आजकल लगभग हर बच्चे का है। आप बच्चे को निम्न औषधि योग सेवन कराएं और यकीन मानिये कि उसकी सारी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। विद्यार्थियों के लिये तो यह योग बेजोड़ है-
१. रजत सिंदूर ५ ग्राम + रजत भस्म ५ ग्राम + शतपुटी अभ्रक भस्म १० ग्राम + स्वर्णमाक्षिक भस्म १० ग्राम + गिलोय सत्व १० ग्राम + सर्पगन्धा घनसत्व १० ग्राम + अश्वगन्धा घनसत्व १० ग्राम + शंखपुष्पी घनसत्व १० ग्राम + ब्राम्ही घनसत्व १० ग्राम + बच घनसत्व १० ग्राम + जटामांसी घनसत्व १० ग्राम
इन सभी को मजबूत हाथों से कस कर घुटाई करवा लीजिये। इसके बाद इसकी ५०० मिलीग्राम की मात्रा की पुड़िया बना लीजिये। एक-एक पुड़िया सुबह शाम सारस्वतारिष्ट के दो चम्मच के साथ दीजिये। इस दवा से मस्तिष्क का उत्तम पोषण होता है। इसका सेवन लम्बे समय तक भी करवाया जा सकता है अत्यंत उपयोगी औषधि है।
हस्तमैथुन किया उसके कारण मुझे शीघ्रपतन की समस्या हो गयी
Published :
12/09/2008 08:38:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
नमस्कार सर,
मेरी कुछ महीनों के बाद शादी होने वाली है बचपन से लेकर अब तक जो गलतियां करी यानि कि हस्तमैथुन किया उसके कारण मुझे शीघ्रपतन की समस्या हो गयी है। मात्र दो-तीन सेकेंड में ही वीर्य स्खलन हो जाता है। क्या इसका इलाज संभव है क्योंकि मैंने तमाम इश्तेहार देखे हैं लेकिन ऐसे लोगों से सम्पर्क करने में डर भी लगता है साथ ही सुना है कि ऐसे लोग ब्लैकमेल भी करते हैं। मैंने तो बहुत सारे सैक्सोलाजिस्ट के लेख अखबारों में पढ़े हैं कि हस्तमैथुन से कोई नुकसान नहीं होता लेकिन मुझे तो अब भयंकर कमजोरी भी लगती है समझ नहीं आता कि क्या सच है? आप मेरी मदद करिए ताकि मेरा वैवाहिक जीवन सुखमय रहे।
सुनील व बहुत सारे पीड़ित भाई
भाईसाहब आप सभी लोगों से एक निवेदन है कि मेरी बात को जरा गौर से समझिये कि क्या वो माली अक्लमंद है जो कि हजारों फूलों का इत्र खींच कर नाली में बहा दे ठीक वैसी ही बेवकूफ़ी हस्तमैथुन करना है। दुष्ट किस्म के लोग जो हस्तमैथुन की वकालत करते हैं कि इससे कुछ नुकसान नहीं होता मैं उनके लिये बस भगवान से सही बुद्धि की प्रार्थना ही कर सकता हूं भुगतना तो आप लोगों को पड़ रहा है। आप लोग तत्काल इस भयंकर हानिकारक आदत को छोड़ने के लिये प्रयास करिए और निम्न औषधि लीजिये।
१ . धनिया का चूर्ण (जो कि सब्जी तरकारी में मिलाया जाता है हरा धनिया न लें) २५ ग्राम + कपूर ५ ग्राम + मिश्री ५० ग्राम ; इन सबको बारीक घोंट लीजिये और एक टाइट ढक्कन की शीशी में रख लीजिये। सुबह-शाम आधा चाय का चम्मच पानी से निगल लें। खाली पेट न लें।
२ . मकरध्वज बटी १ गोली सुबह-दोपहर-शाम शहद मिला कर मीठे करे गये दूध के साथ लीजिये।
पहली दवा का सेवन पंद्रह दिन तक करने के बाद पंद्रह दिन तक बंद कर दें लेकिन दूसरी दवा का सेवन लगातार करिये। कम से कम तीन माह तक यह उपचार लीजिये ताकि पुनः शक्ति हासिल हो सके। कब्जियत न रहने दें इसके लिये यदि जरूरत हो तो आवश्यतानुसार त्रिफला चूर्ण का सेवन करें।
मेरी कुछ महीनों के बाद शादी होने वाली है बचपन से लेकर अब तक जो गलतियां करी यानि कि हस्तमैथुन किया उसके कारण मुझे शीघ्रपतन की समस्या हो गयी है। मात्र दो-तीन सेकेंड में ही वीर्य स्खलन हो जाता है। क्या इसका इलाज संभव है क्योंकि मैंने तमाम इश्तेहार देखे हैं लेकिन ऐसे लोगों से सम्पर्क करने में डर भी लगता है साथ ही सुना है कि ऐसे लोग ब्लैकमेल भी करते हैं। मैंने तो बहुत सारे सैक्सोलाजिस्ट के लेख अखबारों में पढ़े हैं कि हस्तमैथुन से कोई नुकसान नहीं होता लेकिन मुझे तो अब भयंकर कमजोरी भी लगती है समझ नहीं आता कि क्या सच है? आप मेरी मदद करिए ताकि मेरा वैवाहिक जीवन सुखमय रहे।
सुनील व बहुत सारे पीड़ित भाई
भाईसाहब आप सभी लोगों से एक निवेदन है कि मेरी बात को जरा गौर से समझिये कि क्या वो माली अक्लमंद है जो कि हजारों फूलों का इत्र खींच कर नाली में बहा दे ठीक वैसी ही बेवकूफ़ी हस्तमैथुन करना है। दुष्ट किस्म के लोग जो हस्तमैथुन की वकालत करते हैं कि इससे कुछ नुकसान नहीं होता मैं उनके लिये बस भगवान से सही बुद्धि की प्रार्थना ही कर सकता हूं भुगतना तो आप लोगों को पड़ रहा है। आप लोग तत्काल इस भयंकर हानिकारक आदत को छोड़ने के लिये प्रयास करिए और निम्न औषधि लीजिये।
१ . धनिया का चूर्ण (जो कि सब्जी तरकारी में मिलाया जाता है हरा धनिया न लें) २५ ग्राम + कपूर ५ ग्राम + मिश्री ५० ग्राम ; इन सबको बारीक घोंट लीजिये और एक टाइट ढक्कन की शीशी में रख लीजिये। सुबह-शाम आधा चाय का चम्मच पानी से निगल लें। खाली पेट न लें।
२ . मकरध्वज बटी १ गोली सुबह-दोपहर-शाम शहद मिला कर मीठे करे गये दूध के साथ लीजिये।
पहली दवा का सेवन पंद्रह दिन तक करने के बाद पंद्रह दिन तक बंद कर दें लेकिन दूसरी दवा का सेवन लगातार करिये। कम से कम तीन माह तक यह उपचार लीजिये ताकि पुनः शक्ति हासिल हो सके। कब्जियत न रहने दें इसके लिये यदि जरूरत हो तो आवश्यतानुसार त्रिफला चूर्ण का सेवन करें।
सोमवार, दिसंबर 08, 2008
पिता जी को प्रोस्टेट ग्लैण्ड कैंसर है
Published :
12/08/2008 08:36:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डाक्टर साहब
प्रणाम
मेरे पिता जी को प्रोस्टेट ग्लैण्ड कैंसर बताया गया है और इसलिये आपरेशन करके अंडकोश निकालने का डाक्टरों ने निर्णय लिया है। आपरेशन की तारीख ठीक एक माह बाद तय करी गयी है। उन्हें उठने बैठने में बहुत तकलीफ है, करवट लेने में भयंकर कष्ट होता है। बुखार रहता है, नींद नहीं आती, भूख भी न के बराबर है बहुत ही अधिक बेचैनी है। परिवार में किसी की भी सहमति नहीं बन पा रही है कि बाबूजी का आपरेशन कराया जाए और वो खुद भी आपरेशन के लिये तैयार नहीं हैं। अपनी पत्नी के सुझाव से मैंने तमाम सर्च करके आयुषवेद को ढूंढा और उम्मीद बनती नजर आ रही है। हम सब को आयुर्वेद पर पूरा भरोसा है। बाबा रामदेव के क्लिनिक पर जान पर वहां के डाक्टर ने दबी जबान में आपरेशन की सलाह दे डाली इससे उनके प्रति बहुत निराशा हुई। अल्कलाइन फ़ास्फेट्स 178 तक आ गया है और एसिड फ़ास्फेट्स 30 तक आ गया है। सारी रिपोर्ट्स आपको भेज रहा हूं देख लीजिये और कोई आयुर्वेदिक उपचार सुझाइये। अग्रिम धन्यवाद
द्वारकानाथ सोनी,मथुरा
द्वारकानाथ जी,आप आयुर्वेद के प्रति श्रद्धा रखते हैं इसके लिये आयुषवेद परिवार आपके प्रति आदर का भाव रखता है। किसी एक चिकित्सक के मना करने से सारा आयुर्वेद तो निष्क्रिय नहीं हो जाएगा। आपके बाबूजी की सारी रिपोर्ट्स गहराई से देख समझ ली हैं आप उन्हें निम्न औषधियां दें-
१ . कांचनार गुग्गुल १ गोली + आरोग्यवर्धिनी १ गोली + लाक्षा पंचामृत १ गोली इन सबकी एक मात्रा बनाएं और दिन में दो बार गाय के दूध से दीजिये।
२ . पुनर्नवाष्टक घन २ गोली + रसांजन घन २ गोली को पुनर्नवाष्टक क्वाथ के साथ दिन में दो बार निगलवाएं।
३ . वृहत वात चिंतामणि रस १ गोली + पंचरत्न रस आधा रत्ती(६५ मिलीग्राम) + श्रंगभस्म २ रत्ती + नागार्जुनाभ्र २ रत्ती + प्रवाल पंचामृत २ रत्ती + स्वर्णबंग १ रत्ती इन सबकी एक मात्रा बनाएं; दिन में दो बार शहद के साथ चटाएं।
ध्यान रखिये कि कोई भी दवा खाली पेट न दें। यदि अपेक्षित सुधार महसूस हो तो आपरेशन न करवा कर दोबारा रिपोर्ट्स निकलवाएं।
रविवार, दिसंबर 07, 2008
मेरी सहेली के सौन्दर्य का राज क्या है?
Published :
12/07/2008 10:15:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
सर नमस्ते,मैं आपसे बड़ा अजीब सा सवाल करने जा रहीं हूं प्लीज हंसियेगा मत। मेरी उम्र उन्नीस साल है, मेरी एक सहेली है मै उसे बचपन से चिढ़ाती आयी हूं। वो एकदम सूखी मरियल काली सी, चूसे हुए आम जैसी लगती थी गाल पिचके हुए और होंठॊ पर पपड़िया उखड़ती हुई लेकिन मैं देख रही हूं कि पिछले दो माह से अचानक उसने पता नहीं कौन सी आयुर्वेदिक दवा खाना शुरू करी है उस पर बहार सी आ गई है, होंठ गुलाबी हो चले हैं बदन में भराव सा आ गया है और रंग सांवला होने के बाद भी बहुत सुंदर लगने लगी है बल्कि रंग भी काफ़ी साफ हो गया है। मैंने उससे लाख पूछा लेकिन वह दुष्ट बताती ही नहीं है क्या आप बता सकते हैं कि हमेशा बीमार सी लगने वाली मेरी सहेली अचानक फूल की तरह कैसे खिल उठी है? उसके सौन्दर्य का रहस्य क्या हो सकता है?
संजना परमार,ग्वालियर
संजना जी,पहली बात तो ये कि यदि आप अपनी ही सहेली से ईर्ष्या करेंगी तो आप स्वस्थ नहीं रह पाएंगी मन ही मन कुढ़ती रहेंगी। खुशमिजाज बनी रहिये और अपनी सहेली से प्यार करिये आखिरकार वो आपकी सहेली ही तो है। मैं ये तो नहीं जानता कि वो कौन सी आयुर्वेदिक औषधि ले रही है लेकिन लीजिये मैं आपको एक औषधि योग बता रहा हूं जिसका प्रभाव ठीक वैसा ही रहेगा। -
१ . रजत सिंदूर २.५ ग्राम + चांदी भस्म २.५ ग्राम + शतपुटी अभ्रक भस्म २.५ ग्राम + शतपुटी लौह भस्म २.५ + स्वर्ण माक्षिक भस्म ५ ग्राम + प्रवाल भस्म १० ग्राम इन सबको मिला कर इस मिश्रण में शतावर का चूर्ण २५ ग्राम मिला कर एक बार फिर घॊंट लीजिये। कुल पचास ग्राम औषधि की १०० बराबर वजन की पुड़िया बना लीजिये और सुबह-शाम एक पुड़िया शहद के साथ मिला कर चाट लीजिये बस सौन्दर्य की उसी बहार का आनन्द आप भी महसूस करेंगी।
२ . भोजन के बाद दिन में दो बार अशोकारिष्ट दो चम्मच का सेवन करिये।
खट्टी और तली हुई चीजें मत खाइये और फिर देखिये आपका शरीर भी सुगठित और सेहतमंद हो जाएगा। यह योग एक उत्तम कोटि का रक्तवर्धक व रक्तशोधक है, आपके भी होंठ गुलाबी और गाल भरे दिखने लगेंगे।
संजना परमार,ग्वालियर
संजना जी,पहली बात तो ये कि यदि आप अपनी ही सहेली से ईर्ष्या करेंगी तो आप स्वस्थ नहीं रह पाएंगी मन ही मन कुढ़ती रहेंगी। खुशमिजाज बनी रहिये और अपनी सहेली से प्यार करिये आखिरकार वो आपकी सहेली ही तो है। मैं ये तो नहीं जानता कि वो कौन सी आयुर्वेदिक औषधि ले रही है लेकिन लीजिये मैं आपको एक औषधि योग बता रहा हूं जिसका प्रभाव ठीक वैसा ही रहेगा। -
१ . रजत सिंदूर २.५ ग्राम + चांदी भस्म २.५ ग्राम + शतपुटी अभ्रक भस्म २.५ ग्राम + शतपुटी लौह भस्म २.५ + स्वर्ण माक्षिक भस्म ५ ग्राम + प्रवाल भस्म १० ग्राम इन सबको मिला कर इस मिश्रण में शतावर का चूर्ण २५ ग्राम मिला कर एक बार फिर घॊंट लीजिये। कुल पचास ग्राम औषधि की १०० बराबर वजन की पुड़िया बना लीजिये और सुबह-शाम एक पुड़िया शहद के साथ मिला कर चाट लीजिये बस सौन्दर्य की उसी बहार का आनन्द आप भी महसूस करेंगी।
२ . भोजन के बाद दिन में दो बार अशोकारिष्ट दो चम्मच का सेवन करिये।
खट्टी और तली हुई चीजें मत खाइये और फिर देखिये आपका शरीर भी सुगठित और सेहतमंद हो जाएगा। यह योग एक उत्तम कोटि का रक्तवर्धक व रक्तशोधक है, आपके भी होंठ गुलाबी और गाल भरे दिखने लगेंगे।
शनिवार, दिसंबर 06, 2008
सर्वाइकल स्पोन्डिलायटिस हुआ है
Published :
12/06/2008 08:40:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डा.साहब,नमस्ते
मैं पिछले कुछ महीनों से गर्दन के पीछे के हिस्से में दर्द व अकड़न महसूस करती हूं। यदि गरदन हिलाने का या घुमाने का प्रयास करती हूं तो दर्द ज्यादा हो जाता है। आपको रिपोर्ट्स भेज रही हूं। बताया गया है कि मुझे सर्वाइकल स्पोन्डिलायटिस हुआ है जबकि एक वैद्य ने मुझे मुख अलग ही नाम बताया था बीमारी का "मनियास्तम्भ" या ऐसा ही कुछ; किंतु मेरे पति ने उनसे इलाज नहीं करवाया कि बिना किसी परीक्षण के क्या ये शक्ल देख कर बीमारी बताएगा,मेरे पति आधुनिक विचारों के हैं। सर्दी के मौसम के कारण शायद ज्यादा तकलीफ़ है। डाक्टर कहते हैं कि गले में पट्टा(कालर) बांधना पड़ेगा। मैं मर जाउंगी लेकिन पट्टा न बंधवाऊंगी। मेरी सहायता करें ताकि आयुर्वेदिक दवा से बीमारी जड़ से समाप्त हो जाए।
अलका रोहिल्ला,आगरा
अलका बहन,आपकी बीमारी को जिस वैद्य ने बताया था वह बिल्कुल सही है उसे आयुर्वेद में "मन्यास्तम्भ" और आधुनिक चिकित्सा में सर्वाइकल स्पोन्डिलायटिस ही कहते हैं,आधुनिकता में आकर अपनी पारंपरिक चिकित्सा का अनादर करना सही नहीं है। लीजिये मैं भी आपको वैसा ही इलाज बता रहा हूं जैसा कि शायद वो वैद्य जी बताते।
१ . धतूरे के बीज १२ ग्राम + रेवंदचीनी ८ ग्राम + सोंठ ७ ग्राम + गर्म तवे पर फ़ुलाई हुई सफ़ेद फिटकरी ६ ग्राम + इसी तरह फ़ुलाया हुआ सुहागा ६ ग्राम + बबूल का गोंद ६ ग्राम इन सब औषधियों को बारीक पीस लें और धतूरे के पत्तों के रस से गीला करके उड़द के दाने के (१२५ मिलीग्राम) बराबर गोलियां बना लीजिए। इस गोली को दिन में केवल एक बार गर्म जल से लीजिये दोपहर का भोजन करने के बाद ही लें काली पेट दवा हरगिज न लें।
२ वातगजांकुश रस १ गोली दिन में दो बार सुबह-शाम दशमूल क्वाथ के दो चम्मच के साथ लें।
३. आभादि गुग्गुलु १ गोली दिन में दो बार सुबह-शाम रास्नादि क्वाथ के दो चम्मच के साथ लें।
४. महामाष तेल की तीन-तीन बूंदे दोनो कानों व नाक में सुबह-शाम डालिये।
तीखे भोजन से सख्त परहेज करिये। आपकी समस्या मात्र एक माह में किधर गायब हो जाएगी आपको आश्चर्य होगा और पहले ही दिन से लाभ प्रतीत होन लगेगा।
शुक्रवार, दिसंबर 05, 2008
इच्छा होते हुए भी लैंगिक उत्थान ही नहीं होता है क्या ये नपुंसकता है?
Published :
12/05/2008 02:26:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डाक्टर जी नमस्ते
मेरी उम्र पैंतालीस साल है। नौकरीपेशा आदमी हूं। पिछले छह माह से मैंने पाया है कि मन में इच्छा होते हुए भी शरीर साथ नहीं देता यानि कि लैंगिक उत्थान ही नहीं होता है। जबकि सब कुछ सामान्य है लेकिन ये धीरे-धीरे उत्तेजना का स्तर कम होता चला गया और अब अंग में उत्तेजना ही नहीं होती तो सहवास तो संभव ही नहीं है। वियाग्रा जैसी दवाएं तो बहुत मंहगी हैं साथ ही अब उनके दुष्परिणाम भी पता चलने लगे हैं। मुझे अक्सर कफ़ की शिकायत रहती है। सारा शरीर शिथिल होता जा रहा है। कुछ उपाय बताइये। मैं कोई नशा नहीं करता हूं। घरेलू जीवन नीरस हो चला है स्त्रियोचित लज्जा के कारण पत्नी कुछ कहती नहीं पर उसे भी तो इच्छा होती होगी। मेरी मदद करिये।
अनाम
भाईसाहब,मैं आप की समस्या समझ रहा हूं। आपने काफ़ी विस्तार से पत्र लिखा है। उसका कुछ अंश ही प्रकाशित किया जा रहा है। पुरुषांग में उत्साह की कमी या एकदम न होना आपकी समस्या है। आप निम्न औषधि दो माह तक सर्दियों में ले लीजिये-
१ . मल्ल सिंदूर ५ ग्राम + अतुलशक्तिदाता योग ५ ग्राम + शुद्ध कुचला का चूर्ण ५ ग्राम + शुद्ध विषबीज ५ ग्राम + असली अकरकरा ५ ग्राम + जायफ़ल ५ ग्राम + जावित्री ५ ग्राम + लौंग ५ ग्राम + शुद्ध शिलाजीत २० ग्राम + त्रिबंग भस्म २० ग्राम + शुद्ध कौंच के बीज २० ग्राम; इन सभी दवाओं को मजबूत हाथों से कम से कम दो घंटे तक इतना घोंटियेकि मल्ल सिंदूर की सारी चमक समाप्त हो जाए। इसके बाद इसमें देसी पान के पत्तों का रस २५ मिली. + धतूरे के फूलों का रस २५ मिली. + सेमल मूसली का काढ़ा २५ मिली मिला कर एक बार फिर से कस कर रगड़िये और हल्का सा सूखने लगे तो २५० मिलीग्राम की गोलियां बना कर छाया में सुखा लीजिये। सुबह - शाम एक एक गोली गर्म दूध में शहद मिला कर लीजिये। ध्यान रखिये कि इस दौरान जब आप दवा का सेवन कर रहे हैं दूध, घी, मक्खन, मलाई, रबड़ी, पेड़ा, बादाम, पिस्ता, ताजे फल, केला आदि का खूब सेवन करिये क्योंकि यह एक बहुत तीव्र प्रभाव वाली औषधि है। यदि खाने में लापरवाही करी तो हानि होगी।
२ . कब्जियत न रहे और पेट सही साफ बना रहे इसके लिये बादाम का एक चम्मच तेल रात को सोते समय मीठे दूध में मिला कर लीजिये।
आपकी कफ़ की समस्या भी एकदम समाप्त हो जाएगी।
एक विशेष बात कि पैंतीस साल से कम उम्र के लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिये साथ ही यदि ब्लड प्रेशर अधिक रहता हो या पित्त की शिकायत रहती हो तब भी इसका सेवन न करें।
मेरी उम्र पैंतालीस साल है। नौकरीपेशा आदमी हूं। पिछले छह माह से मैंने पाया है कि मन में इच्छा होते हुए भी शरीर साथ नहीं देता यानि कि लैंगिक उत्थान ही नहीं होता है। जबकि सब कुछ सामान्य है लेकिन ये धीरे-धीरे उत्तेजना का स्तर कम होता चला गया और अब अंग में उत्तेजना ही नहीं होती तो सहवास तो संभव ही नहीं है। वियाग्रा जैसी दवाएं तो बहुत मंहगी हैं साथ ही अब उनके दुष्परिणाम भी पता चलने लगे हैं। मुझे अक्सर कफ़ की शिकायत रहती है। सारा शरीर शिथिल होता जा रहा है। कुछ उपाय बताइये। मैं कोई नशा नहीं करता हूं। घरेलू जीवन नीरस हो चला है स्त्रियोचित लज्जा के कारण पत्नी कुछ कहती नहीं पर उसे भी तो इच्छा होती होगी। मेरी मदद करिये।
अनाम
भाईसाहब,मैं आप की समस्या समझ रहा हूं। आपने काफ़ी विस्तार से पत्र लिखा है। उसका कुछ अंश ही प्रकाशित किया जा रहा है। पुरुषांग में उत्साह की कमी या एकदम न होना आपकी समस्या है। आप निम्न औषधि दो माह तक सर्दियों में ले लीजिये-
१ . मल्ल सिंदूर ५ ग्राम + अतुलशक्तिदाता योग ५ ग्राम + शुद्ध कुचला का चूर्ण ५ ग्राम + शुद्ध विषबीज ५ ग्राम + असली अकरकरा ५ ग्राम + जायफ़ल ५ ग्राम + जावित्री ५ ग्राम + लौंग ५ ग्राम + शुद्ध शिलाजीत २० ग्राम + त्रिबंग भस्म २० ग्राम + शुद्ध कौंच के बीज २० ग्राम; इन सभी दवाओं को मजबूत हाथों से कम से कम दो घंटे तक इतना घोंटियेकि मल्ल सिंदूर की सारी चमक समाप्त हो जाए। इसके बाद इसमें देसी पान के पत्तों का रस २५ मिली. + धतूरे के फूलों का रस २५ मिली. + सेमल मूसली का काढ़ा २५ मिली मिला कर एक बार फिर से कस कर रगड़िये और हल्का सा सूखने लगे तो २५० मिलीग्राम की गोलियां बना कर छाया में सुखा लीजिये। सुबह - शाम एक एक गोली गर्म दूध में शहद मिला कर लीजिये। ध्यान रखिये कि इस दौरान जब आप दवा का सेवन कर रहे हैं दूध, घी, मक्खन, मलाई, रबड़ी, पेड़ा, बादाम, पिस्ता, ताजे फल, केला आदि का खूब सेवन करिये क्योंकि यह एक बहुत तीव्र प्रभाव वाली औषधि है। यदि खाने में लापरवाही करी तो हानि होगी।
२ . कब्जियत न रहे और पेट सही साफ बना रहे इसके लिये बादाम का एक चम्मच तेल रात को सोते समय मीठे दूध में मिला कर लीजिये।
आपकी कफ़ की समस्या भी एकदम समाप्त हो जाएगी।
एक विशेष बात कि पैंतीस साल से कम उम्र के लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिये साथ ही यदि ब्लड प्रेशर अधिक रहता हो या पित्त की शिकायत रहती हो तब भी इसका सेवन न करें।
मेरा भी वैवाहिक जीवन बर्बाद है शीघ्रपतन के कारण....
Published :
12/05/2008 01:20:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय सर नमस्ते
पिछली पोस्ट पढ़ कर साहस कर रहा हूं वरना सोचता था कि शायद आप उत्तर नहीं देंगे। मुझे उत्तेजना होती और इन्द्री में कड़ापन भी होता है लेकिन परेशानी ये है कि दो या दीन स्ट्रोक्स में ही वीर्य निकल जाता है। मैं एक नामचीन न्यूजपेपर में सलाह देने वाले सैक्सोलाजिस्ट के पास से तीन महीने से दवाएं ले रहा हूं जो कि बहुत मंहगी हैं लेकिन कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा बल्कि वीर्य निकलने के बाद बहुत कमजोरी सी महसूस होने लगी है। कभी-कभी आंखों के आगे अंधेरा सा छा जाता है। मैं खाने पीने में कोई कसर नहीं रखता पौष्टिक आहार लेता हूं। कोई नशा नहीं करता हूं।
अनाम
भाईसाहब,मैं आप की समस्या को समझ रहा हूं इसलिये अधिक विस्तार में न जाकर सीधे आपकी समस्या के लिये दवा सुझा रहा हूं-
१ . चन्द्रोदय १० ग्राम + बंग भस्म १० ग्राम + असली केसर १० ग्राम + जायफ़ल १० ग्राम + असली अकरकरा १० ग्राम + जावित्री १० ग्राम + लौंग का चूर्ण १० ग्राम + दालचीनी १० ग्राम + खुरासानी अजवायन १० ग्राम + गाय के घी में भून कर शुद्ध करी हुई भांग १०० ग्राम; इन सबको खूब घुटाई करें जब तक कि चंद्रोदय की चमक समाप्त न हो जाए फिर इस मिश्रण में धतूरे के ताजे फूलों की पंखड़ियां २० ग्राम मिला कर घॊंट कर २५० मिलीग्राम वजन की गोलियां बना लें। सहवास से ढाई-तीन घंटे पहले एक गोली शहद से मीठे करे दूध के साथ लीजिये। ध्यान रहे कि दवा खाली पेट न लें और साथ ही अत्यंत पौष्टिक आहार लें।
२ . कब्जियत न रहे और पेट सही साफ बना रहे इसके लिये बादाम का एक चम्मच तेल रात को सोते समय मीठे दूध में मिला कर लीजिये।
पिछली पोस्ट पढ़ कर साहस कर रहा हूं वरना सोचता था कि शायद आप उत्तर नहीं देंगे। मुझे उत्तेजना होती और इन्द्री में कड़ापन भी होता है लेकिन परेशानी ये है कि दो या दीन स्ट्रोक्स में ही वीर्य निकल जाता है। मैं एक नामचीन न्यूजपेपर में सलाह देने वाले सैक्सोलाजिस्ट के पास से तीन महीने से दवाएं ले रहा हूं जो कि बहुत मंहगी हैं लेकिन कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा बल्कि वीर्य निकलने के बाद बहुत कमजोरी सी महसूस होने लगी है। कभी-कभी आंखों के आगे अंधेरा सा छा जाता है। मैं खाने पीने में कोई कसर नहीं रखता पौष्टिक आहार लेता हूं। कोई नशा नहीं करता हूं।
अनाम
भाईसाहब,मैं आप की समस्या को समझ रहा हूं इसलिये अधिक विस्तार में न जाकर सीधे आपकी समस्या के लिये दवा सुझा रहा हूं-
१ . चन्द्रोदय १० ग्राम + बंग भस्म १० ग्राम + असली केसर १० ग्राम + जायफ़ल १० ग्राम + असली अकरकरा १० ग्राम + जावित्री १० ग्राम + लौंग का चूर्ण १० ग्राम + दालचीनी १० ग्राम + खुरासानी अजवायन १० ग्राम + गाय के घी में भून कर शुद्ध करी हुई भांग १०० ग्राम; इन सबको खूब घुटाई करें जब तक कि चंद्रोदय की चमक समाप्त न हो जाए फिर इस मिश्रण में धतूरे के ताजे फूलों की पंखड़ियां २० ग्राम मिला कर घॊंट कर २५० मिलीग्राम वजन की गोलियां बना लें। सहवास से ढाई-तीन घंटे पहले एक गोली शहद से मीठे करे दूध के साथ लीजिये। ध्यान रहे कि दवा खाली पेट न लें और साथ ही अत्यंत पौष्टिक आहार लें।
२ . कब्जियत न रहे और पेट सही साफ बना रहे इसके लिये बादाम का एक चम्मच तेल रात को सोते समय मीठे दूध में मिला कर लीजिये।
गुरुवार, दिसंबर 04, 2008
दांतो में हमेशा टीस मारता हुआ दर्द होता रहता है,पायरिया है
Published :
12/04/2008 10:00:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब नमस्ते
मेरे दांतो में हमेशा टीस मारता हुआ दर्द होता रहता है,मसूढ़ों से मवाद(pus) और खून आता है, मसूढ़े एकदम पिलपिले से हो गये हैं, मुंह से बदबू भी बहुत आती है। लोग कहते हैं कि पायरिया हो गया है। मैंने नीम की दातुन करने की कोशिश करी तो ज्यादा खून आने लगा तब मैंने घबरा कर दातुन करना छोड़ दिया। आयुर्वेदिक इलाज बताइये। धन्यवाद
रंजन निगम,कानपुर
रंजन जी,बेफिक्र हो जाइये और धैर्य से इस दवा का सेवन करें। जब तक सही स्थिति न हो जाए नीम की दातुन आपको नुक्सान ही करेगी और मसूढ़े छील देगी जिससे अधिक खून आएगा ।
१ . गंधक रसायन ५ ग्राम + आरोग्यवर्धिनी बटी ५ ग्राम + कसीस भस्म ५ ग्राम + शुभ्रा(फिटकरी) भस्म ५ ग्राम + सोना गेरू १० ग्राम + त्रिफला चूर्ण २० ग्राम; इन सबको घोंट करके मिला लीजिये। इस पूरी दवा की बराबर वजन की कुल इक्कीस पुड़िया बना लीजिये। सुबह - दोपहर - शाम को एक-एक पुड़िया एक कप पानी में घोल कर मुंह में भर कर जितनी देर रख सकें रखिये फिर उसे निगल लीजिये। मात्र सात दिनों में ही आपकी सारी समस्या छूमंतर हो जाएगी।
मेरे दांतो में हमेशा टीस मारता हुआ दर्द होता रहता है,मसूढ़ों से मवाद(pus) और खून आता है, मसूढ़े एकदम पिलपिले से हो गये हैं, मुंह से बदबू भी बहुत आती है। लोग कहते हैं कि पायरिया हो गया है। मैंने नीम की दातुन करने की कोशिश करी तो ज्यादा खून आने लगा तब मैंने घबरा कर दातुन करना छोड़ दिया। आयुर्वेदिक इलाज बताइये। धन्यवाद
रंजन निगम,कानपुर
रंजन जी,बेफिक्र हो जाइये और धैर्य से इस दवा का सेवन करें। जब तक सही स्थिति न हो जाए नीम की दातुन आपको नुक्सान ही करेगी और मसूढ़े छील देगी जिससे अधिक खून आएगा ।
१ . गंधक रसायन ५ ग्राम + आरोग्यवर्धिनी बटी ५ ग्राम + कसीस भस्म ५ ग्राम + शुभ्रा(फिटकरी) भस्म ५ ग्राम + सोना गेरू १० ग्राम + त्रिफला चूर्ण २० ग्राम; इन सबको घोंट करके मिला लीजिये। इस पूरी दवा की बराबर वजन की कुल इक्कीस पुड़िया बना लीजिये। सुबह - दोपहर - शाम को एक-एक पुड़िया एक कप पानी में घोल कर मुंह में भर कर जितनी देर रख सकें रखिये फिर उसे निगल लीजिये। मात्र सात दिनों में ही आपकी सारी समस्या छूमंतर हो जाएगी।
लिंग में उत्तेजना नहीं वैवाहिक जीवन सत्यानाश हो रहा है।
Published :
12/04/2008 09:20:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
सर, ऐसी परिस्थिति में हूं कि रहा भी नहीं जा रहा है और कहा भी नहीं जा रहा है। बहुत हिम्मत जुटा कर लिख रहा हूं मेरी नयी-नयी शादी हुई है लेकिन मैंने ये पाया कि मेरे लिंग में पर्याप्त कठोरता नहीं आती कि मैं सफल सहवास कर सकूं। इस प्रश्न को अश्लील मान कर ऐसा न हो कि आप उत्तर न दें। अगर किसी सैक्सोलाजिस्ट के पास जाता हूं तो ये लोग किसी ब्लैकमेलर से कम नहीं होते। मेहरबानी करके यदि दवा सुझाएं तो उसकी कीमत का भी ध्यान रखें कि ज्यादा कीमती न हो। मुझे कोई और बीमारी नहीं है और न ही कोई व्यसन है मैं शराब आदि नहीं पीता हूं न ही मांसाहारी हूं।
अनाम
भाई,आपकी समस्या गम्भीर है न कि अश्लील इसलिये उत्तर देना आवश्यक है। सांसारिक संबंधों के वैवाहिक जीवन का निर्वाह करने की आधार ऊर्जा काम ही है। आप निराश न हों इन दवाओं का लगातार कम से कम एक माह तक तो सेवन करें ही। मात्र पहले ही दिन से आपको प्रभाव दिखने लगेगा-
१. सिद्ध मकरध्वज ५ ग्राम + वैक्रान्त भस्म ५ ग्राम + कुक्कुटाण्डत्वक भस्म १० ग्राम + अश्वगंधा का चूर्ण ४० ग्राम; इस पूरी साठ ग्राम औषधि में पहले मकरध्वज और भस्मों को बहुत कस कर घोंट लीजिये ताकि उनकी चमक समाप्त हो जाए फिर अश्वगंधा मिला कर घुटाई करें। इस मिश्रण की कुल चालीस बराबर खुराकें बना लीजिये। हलके गर्म दूध में शहद मिला कर एक-एक पुड़िया सुबह शाम लीजिये। जब दवा की पुड़िया मुंह में डालें तब थोड़ी सी मिश्री मुंह में रख लें ताकि दवा आसानी से घुल कर अंदर चली जाए मुंह में चिपके नहीं।
२ . कब्जियत न रहे इस लिये रात में सोने से एक घंटे पहले दो चम्मच त्रिफला चूर्ण गर्म जल में घोल कर सेवन करें।
अनाम
भाई,आपकी समस्या गम्भीर है न कि अश्लील इसलिये उत्तर देना आवश्यक है। सांसारिक संबंधों के वैवाहिक जीवन का निर्वाह करने की आधार ऊर्जा काम ही है। आप निराश न हों इन दवाओं का लगातार कम से कम एक माह तक तो सेवन करें ही। मात्र पहले ही दिन से आपको प्रभाव दिखने लगेगा-
१. सिद्ध मकरध्वज ५ ग्राम + वैक्रान्त भस्म ५ ग्राम + कुक्कुटाण्डत्वक भस्म १० ग्राम + अश्वगंधा का चूर्ण ४० ग्राम; इस पूरी साठ ग्राम औषधि में पहले मकरध्वज और भस्मों को बहुत कस कर घोंट लीजिये ताकि उनकी चमक समाप्त हो जाए फिर अश्वगंधा मिला कर घुटाई करें। इस मिश्रण की कुल चालीस बराबर खुराकें बना लीजिये। हलके गर्म दूध में शहद मिला कर एक-एक पुड़िया सुबह शाम लीजिये। जब दवा की पुड़िया मुंह में डालें तब थोड़ी सी मिश्री मुंह में रख लें ताकि दवा आसानी से घुल कर अंदर चली जाए मुंह में चिपके नहीं।
२ . कब्जियत न रहे इस लिये रात में सोने से एक घंटे पहले दो चम्मच त्रिफला चूर्ण गर्म जल में घोल कर सेवन करें।
बुधवार, दिसंबर 03, 2008
मेरा दोस्त पागल हो गया है उसे बचा लीजिये
Published :
12/03/2008 05:19:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
सर,मैंने सर्च इंजनों से तलाश कर-करके आयुषवेद का पता निकाला और मुझे उम्मीद है कि समस्या का समुचित हल मिल जाएगा। मैं अपने बचपन के दोस्त के घर लगभग बारह साल बाद उस जगह पोस्टिंग पर आया तो देखा कि मेरा दोस्त पागलों जैसी हालत में है। उसके माता-पिता ने बताया कि उसकी नवविवाहिता पत्नी के साथ किन्ही अपराधियों ने बलात्कार करा व उसकी हत्या कर दी। उस घटना के बाद मेरे मित्र ने अठारह दिन तक शोक की हालत में खाना नहीं खाया और फिर उसके बाद से आज तक कई साल से यही हाल है कि वह अकेले बैठ कर चिल्लाता रोता और गालियां देता रहता है। नींद न के बराबर है। मेरे सुंदर से दोस्त की हालत पर मुझे रोना आ गया, उसकी त्वचा एकदम रूखी सी झुर्रीदार हो गयी है रंग सांवला हो गया है एकदम दुबला हो गया है। मुझे लगता है कि यदि कुछ समय यही हाल रहा तो मेरा दोस्त मर जाएगा। सरकारी अस्पताल से उपचार कराया लेकिन कोई लाभ न हुआ बल्कि उन दवाओं से भूख एकदम मर गयी है अब तो बड़ा आग्रह करके खिलाना पड़ता है। मुझे पहचान कर उसने सारी कहानी बड़े आक्रोश में बतायी रह-रह कार दांत पीसता है। मेहरबानी करें कोई उपचार बताएं मुझसे उसकी हालत देखी नहीं जाती।
अंजन श्रीवास्तव,बलराम पुर
अंजन जी,आयुषवेद परिवार को आपके मित्र की दुखद परिस्थितियों के चलते उससे सहानुभूति है। विश्वास रखिये कि आपके मित्र की हालत सुधर जाएगी और वह सामान्य जीवन जी सकेगा। घटना के बाद जो शोक उपजा और उस हालत में इतने दिनों तक उपवास ने देह में वात को कुपित कर दिया जिसका दुष्परिणाम सामने है। आप उन्हें प्यार से मना कर निम्न दवाएं दें-
१ . उन्माद गजकेशरी रस एक-एक गोली सुबह-दोपहर-शाम एक चम्मच गाय के घी तथा दो चम्मच शहद के साथ मिला कर चटा दें।
२. सुबह-दोपहर-शाम इस दवा को देने के आधे घंटे बाद महारास्नादि काढ़े के दो-दो चम्मच पिलाइये।
इस उपचार को न्यूनतम छह माह तक दें वैसे तो सप्ताह भर में ही सुधार दिखने लगेगा। एक माह बाद पुनः सम्पर्क करिये ताकि आगे के सुधार के अनुसार उपचार बताया जा सके।
अंजन श्रीवास्तव,बलराम पुर
अंजन जी,आयुषवेद परिवार को आपके मित्र की दुखद परिस्थितियों के चलते उससे सहानुभूति है। विश्वास रखिये कि आपके मित्र की हालत सुधर जाएगी और वह सामान्य जीवन जी सकेगा। घटना के बाद जो शोक उपजा और उस हालत में इतने दिनों तक उपवास ने देह में वात को कुपित कर दिया जिसका दुष्परिणाम सामने है। आप उन्हें प्यार से मना कर निम्न दवाएं दें-
१ . उन्माद गजकेशरी रस एक-एक गोली सुबह-दोपहर-शाम एक चम्मच गाय के घी तथा दो चम्मच शहद के साथ मिला कर चटा दें।
२. सुबह-दोपहर-शाम इस दवा को देने के आधे घंटे बाद महारास्नादि काढ़े के दो-दो चम्मच पिलाइये।
इस उपचार को न्यूनतम छह माह तक दें वैसे तो सप्ताह भर में ही सुधार दिखने लगेगा। एक माह बाद पुनः सम्पर्क करिये ताकि आगे के सुधार के अनुसार उपचार बताया जा सके।
मेनोपाज़(menopause) की स्थिति से गुजर रही हूं
Published :
12/03/2008 01:37:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डियर डाक्टर रूपेश
मैं इस समय मेनोपाज़(menopause) की स्थिति से गुजर रही हूं। मासिक धर्म अनियमित हो चला है और धीरे-धीरे करके कुछ समय में बंद हो जाएगा। मैं मानसिक तौर पर तो जरा भी डिस्टर्ब नहीं हूं पर कमर, घुटनों में बहुत तेज़ दर्द होता रहता है मैं एलोपैथी की दवाएं नहीं खाना चाहती हूं। मैं इकहरे शरीर की हूं। कुछ कमजोरी भी प्रतीत होती है। क्या इस उमर में कुछ वजन बढ़ाया जा सकता है? आयुर्वेद से कुछ बताइये।
रजनी चंद्रा,बिजनौर
रजनी बहन,आप परेशान न हों, आपको ऐलोपैथी की दवाएं नहीं खाना पडे़गी। आप इस योग को लीजिये-
अश्वगंधा चूर्ण १०० ग्राम + मेथीदाना पीसा हुआ १०० ग्राम + सोंठ २५ ग्राम + विधारा चूर्ण १०० ग्राम ; इन सबको बारीक करके शीशी में भर कर रख लें और सुबह नाश्ते के बाद व शाम को चाय के बाद एक चम्मच इस मिश्रण को हलके गर्म पानी से लीजिये। यकीन मानिये कि यदि आप इसका सेवन तीन माह तक कर लेती हैं तो आपके रजोसमाप्ति से संबंधित परेशानियां से खत्म हो ही जाएंगी साथ ही जो दर्द है वह गायब हो जाएगा और आपका वजन भी बढ़ेगा। यह अत्यंत लाभदायक योग है आप अपने जैसी अन्य महिलाओं को भी इसका लाभ लेने के लिये सुझा सकती हैं।
मैं इस समय मेनोपाज़(menopause) की स्थिति से गुजर रही हूं। मासिक धर्म अनियमित हो चला है और धीरे-धीरे करके कुछ समय में बंद हो जाएगा। मैं मानसिक तौर पर तो जरा भी डिस्टर्ब नहीं हूं पर कमर, घुटनों में बहुत तेज़ दर्द होता रहता है मैं एलोपैथी की दवाएं नहीं खाना चाहती हूं। मैं इकहरे शरीर की हूं। कुछ कमजोरी भी प्रतीत होती है। क्या इस उमर में कुछ वजन बढ़ाया जा सकता है? आयुर्वेद से कुछ बताइये।
रजनी चंद्रा,बिजनौर
रजनी बहन,आप परेशान न हों, आपको ऐलोपैथी की दवाएं नहीं खाना पडे़गी। आप इस योग को लीजिये-
अश्वगंधा चूर्ण १०० ग्राम + मेथीदाना पीसा हुआ १०० ग्राम + सोंठ २५ ग्राम + विधारा चूर्ण १०० ग्राम ; इन सबको बारीक करके शीशी में भर कर रख लें और सुबह नाश्ते के बाद व शाम को चाय के बाद एक चम्मच इस मिश्रण को हलके गर्म पानी से लीजिये। यकीन मानिये कि यदि आप इसका सेवन तीन माह तक कर लेती हैं तो आपके रजोसमाप्ति से संबंधित परेशानियां से खत्म हो ही जाएंगी साथ ही जो दर्द है वह गायब हो जाएगा और आपका वजन भी बढ़ेगा। यह अत्यंत लाभदायक योग है आप अपने जैसी अन्य महिलाओं को भी इसका लाभ लेने के लिये सुझा सकती हैं।
गर्भाशय की दुर्बलता के कारण गर्भ धारण नहीं हो रहा,prolapse of uterus है
Published :
12/03/2008 01:11:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब नमस्कार
मेरी पत्नी को गर्भाशय की दुर्बलता के कारण गर्भ धारण नहीं हो रहा है। लेडी डाक्टर ने उसे prolapse of uterus नामक बीमारी बताई है और कहा है कि आपरेशन करवाना पडेगा। योनि एकदम ढीली है मेरी पत्नी ने बताया कि ऐसा महसूस होता है कि योनि की अंदरूनी दोनो दीवारें एक दूसरे पर फिसल रही हों। तेज चुभन जैसा दर्द होता है जो कि सीढी चढ़ने-उतरने पर ज्यादा हो जाता है। सफेद पानी(लिकोरिया) की भी शिकायत है। मैं आपरेशन नहीं करवा सकता पैसे की समस्या है पत्नी की हालत दिन ब दिन कमजोर होती जा रही है। कुछ उपाय बताइए ताकि आपरेशन न करवाना पड़े। धन्यवाद
अनाम
भाईसाहब,पहली बात तो मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि आपरेशन की कोई जरूरत नहीं है आप उसकी चिंता बिलकुल न करें। इन दवाओं को प्रयोग बताई जा रही विधि से करवाएं, सब ठीक हो जाएगा।
माजूफल + मुलायम सुपारी + सुपारी के फूल + बड़ी इलायची + कचूर + धाय के फूल + तज + छोटी हरड़ + फिटकरी + गुलाब के फूल + बड़ी हरड़ का बक्कल + गुड़मार; इन सभी चीजों को बराबर वजन से लेकर (अनुमानतः २५ ग्राम प्रत्येक लीजिये) बारीक चूर्ण कर लें , सभी फूल सूखे लें वरना पीसने में दिक्कत होगी। इस मिश्रित चूर्ण में से २० ग्राम लेकर स्वच्छ मलमल के कपड़े में बांध कर इतनी बड़ी पोटली जैसी बनाएं कि उसे योनि के मार्ग से गर्भाशय के मुख पर रखा जा सके। पोटलॊ पर बांधा हुआ धागा योनि से बाहर रखें ताकि निकालने में कोई परेशानी न हो। ये पोटली ऐसे समय पर रखें कि कम से कम तीन घंटे तो वह अंदर रह सके। प्रत्येक बार नया कपड़ा प्रयोग करें। इस उपचार को कम से कम एक माह तक दीजिये इस दौरान सीढी पर चढ़ना-उतरना और सहवास से बचाव करें। आश्चर्यजनक परिणाम सामने आयेंगे, किसी अन्य औषधि की कोई आवश्यकता नहीं है। मिर्च-मसालेदार भोजन से परहेज करें।
मेरी पत्नी को गर्भाशय की दुर्बलता के कारण गर्भ धारण नहीं हो रहा है। लेडी डाक्टर ने उसे prolapse of uterus नामक बीमारी बताई है और कहा है कि आपरेशन करवाना पडेगा। योनि एकदम ढीली है मेरी पत्नी ने बताया कि ऐसा महसूस होता है कि योनि की अंदरूनी दोनो दीवारें एक दूसरे पर फिसल रही हों। तेज चुभन जैसा दर्द होता है जो कि सीढी चढ़ने-उतरने पर ज्यादा हो जाता है। सफेद पानी(लिकोरिया) की भी शिकायत है। मैं आपरेशन नहीं करवा सकता पैसे की समस्या है पत्नी की हालत दिन ब दिन कमजोर होती जा रही है। कुछ उपाय बताइए ताकि आपरेशन न करवाना पड़े। धन्यवाद
अनाम
भाईसाहब,पहली बात तो मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि आपरेशन की कोई जरूरत नहीं है आप उसकी चिंता बिलकुल न करें। इन दवाओं को प्रयोग बताई जा रही विधि से करवाएं, सब ठीक हो जाएगा।
माजूफल + मुलायम सुपारी + सुपारी के फूल + बड़ी इलायची + कचूर + धाय के फूल + तज + छोटी हरड़ + फिटकरी + गुलाब के फूल + बड़ी हरड़ का बक्कल + गुड़मार; इन सभी चीजों को बराबर वजन से लेकर (अनुमानतः २५ ग्राम प्रत्येक लीजिये) बारीक चूर्ण कर लें , सभी फूल सूखे लें वरना पीसने में दिक्कत होगी। इस मिश्रित चूर्ण में से २० ग्राम लेकर स्वच्छ मलमल के कपड़े में बांध कर इतनी बड़ी पोटली जैसी बनाएं कि उसे योनि के मार्ग से गर्भाशय के मुख पर रखा जा सके। पोटलॊ पर बांधा हुआ धागा योनि से बाहर रखें ताकि निकालने में कोई परेशानी न हो। ये पोटली ऐसे समय पर रखें कि कम से कम तीन घंटे तो वह अंदर रह सके। प्रत्येक बार नया कपड़ा प्रयोग करें। इस उपचार को कम से कम एक माह तक दीजिये इस दौरान सीढी पर चढ़ना-उतरना और सहवास से बचाव करें। आश्चर्यजनक परिणाम सामने आयेंगे, किसी अन्य औषधि की कोई आवश्यकता नहीं है। मिर्च-मसालेदार भोजन से परहेज करें।
मल से खून और पस(मवाद) आता है,बीमारी का नाम ulcerative colitis है।
Published :
12/03/2008 12:12:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
सर नमस्ते
मेरी उम्र ४६ साल है। मुझे आंतो में जख्म हैं जिसके कारण मल से खून और पस(मवाद) आता है और बहुत दर्द होता है पहले मुझे पेट में जलन रहा करती थी लेकिन अब जलन के साथ में भयंकर दर्द भी रहता है। कुछ लोगों ने बताया कि इसे ग्रहणी रोग कहते हैं। हास्पिटल में मुझे बीमारी का नाम ulcerative colitis (अल्सरेटिव कोलायटिस) बताया है। तकलीफ़ करीब दो माह से है उर दवाएं खाते रहने के बाद भी रत्ती भर अंतर महसूस नहीं होते दिख रहा है। क्या मैं जीवित बचूंगा? क्या आयुर्वेद में इसका इलाज है?
जयेश हडकर,ठाणे(महाराष्ट्र)
जयेश जी, जैसा कि आपने अपनी मल,रक्त व मूत्र की रिपोर्ट की स्कैन करी हुई प्रति भेजी है। देख कर मैं आपके रोग की गम्भीरता व आपकी तकलीफ़ को समझ रहा हूं। यदि आयु शेष है तो फिर दवाएं अवश्य असर करती हैं पर आप हौसला रखें और निम्न दवाएं लीजिये -
कुटज छाल का चूर्ण(यदि घनसत्व मिले तो दवा तेजी से असर करती है) ४ ग्राम(घनसत्त्व २ ग्राम) + शुद्ध वंशलोचन १ ग्राम + लौह भस्म १ ग्राम + शीतल(कबाब)चीनी १ ग्राम + छोटी इलायची १ ग्राम इन सब को बारीक पीस कर रखें
इसमें से एक ग्राम दवा की मात्रा मट्ठे या जल के साथ दिन में दो बार सुबह शाम दें यदि हो सके तो तुलसी के पत्ते के काढ़े को दिन में दो बार दो-दो चम्मच पिलाएं।
आप यह दवा तीन माह तक लगातार लें इस औषधि से आपको पहले ही दिन से आराम महसूस होने लगेगा।
मेरी उम्र ४६ साल है। मुझे आंतो में जख्म हैं जिसके कारण मल से खून और पस(मवाद) आता है और बहुत दर्द होता है पहले मुझे पेट में जलन रहा करती थी लेकिन अब जलन के साथ में भयंकर दर्द भी रहता है। कुछ लोगों ने बताया कि इसे ग्रहणी रोग कहते हैं। हास्पिटल में मुझे बीमारी का नाम ulcerative colitis (अल्सरेटिव कोलायटिस) बताया है। तकलीफ़ करीब दो माह से है उर दवाएं खाते रहने के बाद भी रत्ती भर अंतर महसूस नहीं होते दिख रहा है। क्या मैं जीवित बचूंगा? क्या आयुर्वेद में इसका इलाज है?
जयेश हडकर,ठाणे(महाराष्ट्र)
जयेश जी, जैसा कि आपने अपनी मल,रक्त व मूत्र की रिपोर्ट की स्कैन करी हुई प्रति भेजी है। देख कर मैं आपके रोग की गम्भीरता व आपकी तकलीफ़ को समझ रहा हूं। यदि आयु शेष है तो फिर दवाएं अवश्य असर करती हैं पर आप हौसला रखें और निम्न दवाएं लीजिये -
कुटज छाल का चूर्ण(यदि घनसत्व मिले तो दवा तेजी से असर करती है) ४ ग्राम(घनसत्त्व २ ग्राम) + शुद्ध वंशलोचन १ ग्राम + लौह भस्म १ ग्राम + शीतल(कबाब)चीनी १ ग्राम + छोटी इलायची १ ग्राम इन सब को बारीक पीस कर रखें
इसमें से एक ग्राम दवा की मात्रा मट्ठे या जल के साथ दिन में दो बार सुबह शाम दें यदि हो सके तो तुलसी के पत्ते के काढ़े को दिन में दो बार दो-दो चम्मच पिलाएं।
आप यह दवा तीन माह तक लगातार लें इस औषधि से आपको पहले ही दिन से आराम महसूस होने लगेगा।
सोमवार, दिसंबर 01, 2008
हाथों और पैरों के जोड़ों में सूजन व तेज चुभने जैसा दर्द …….
Published :
12/01/2008 06:31:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
सर नमस्कार
मेरी माता जी की उम्र ५२ साल है उन्हें हाथों और पैरों के जोड़ों में सूजन व तेज चुभने जैसा दर्द होता रहता है। इस बीमारी के कारण उन्हें चलने तक में बहुत दिक्कत होती है। ये बीमारी लगभग सात-आठ साल से उन्हें परेशान कर रही है। कोई आयुर्वेदिक इलाज बताइये
समीर पंडा,भुवनेश्वर
समीर जी, आपने अपनी माता जी की तमाम रिपोर्ट्स भेजी हैं उन्हें देख कर बीमारी को अच्छे तरीके से समझने के बाद मैं इस नतीजे पर हूं कि आप उन्हें निम्न दवाएं दीजिये-
१ . कैशोर गुग्गुलु २ गोली + पुनर्नवा गुग्गुलु २ गोली + गोक्षुरादि गुग्गुलु २ गोली ; इन सब गोलियों को पीस लें व ऐसी एक खुराक बनाएं। इस तरह की मिश्रित दवा की खुराक को दिन में तीन बार शहद के साथ चटाइये। माताजी को यह दवा कम से कम तीन माह तक लेना होगा।
मेरी माता जी की उम्र ५२ साल है उन्हें हाथों और पैरों के जोड़ों में सूजन व तेज चुभने जैसा दर्द होता रहता है। इस बीमारी के कारण उन्हें चलने तक में बहुत दिक्कत होती है। ये बीमारी लगभग सात-आठ साल से उन्हें परेशान कर रही है। कोई आयुर्वेदिक इलाज बताइये
समीर पंडा,भुवनेश्वर
समीर जी, आपने अपनी माता जी की तमाम रिपोर्ट्स भेजी हैं उन्हें देख कर बीमारी को अच्छे तरीके से समझने के बाद मैं इस नतीजे पर हूं कि आप उन्हें निम्न दवाएं दीजिये-
१ . कैशोर गुग्गुलु २ गोली + पुनर्नवा गुग्गुलु २ गोली + गोक्षुरादि गुग्गुलु २ गोली ; इन सब गोलियों को पीस लें व ऐसी एक खुराक बनाएं। इस तरह की मिश्रित दवा की खुराक को दिन में तीन बार शहद के साथ चटाइये। माताजी को यह दवा कम से कम तीन माह तक लेना होगा।
रविवार, नवंबर 30, 2008
छह-सात साल से जुका़म है साइनुसायटिस नामक बीमारी बताई है
Published :
11/30/2008 05:41:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डा.साहब
नमस्ते
मुझे लगभग छह सात सालों से हमेशा जुका़म बना रहता है, नाक बहती रहती है, ऐसा लगता है कि अंदर कुछ फंसा हुआ है, अक्सर खांसी भी आती है और कम मात्रा में बलगम भी छूटता है। सिर हमेशा भारी बना रहता है। जब पढ़ने के लिये सिर नीचे को झुकाता हूं तो लगता है कि अंदर कुछ भरा है जो बाहर आना चाहता है लेकिन ऐसा होता नहीं। मैं बौत परेशान हूं मेरी मदद करिये सुना है कि आयुर्वेद में मौत के अलावा हर बीमारी का इलाज है।
संतराम कोरी,झांसी
संतराम जी आपने बिलकुल सही सुना है। ठंडी चीजों का सेवन बिलकुल बंद करके इन दवाओं को लीजिये-
१ . सितोपलादि चूर्ण २ ग्राम + त्रिभुवन कीर्ति रस एक गोली + लक्ष्मी विलास रस(नारदीय)एक गोली + श्रंग भस्म दो रत्ती(यानि २५० मिग्रा.) + रस सिंदूर एक रत्ती + गोदन्ती भस्म दो रत्ती : इन सभी को मिला कर एक खुराक बना लीजिये व दिन में शहद के साथ मिला कर तीन बार सुबह-दोपहर-शाम चाटिये।
२ . षड्बिन्दु तेल की छह बूंदें नाक के दोनो छेदों में डालिये सुबह - शाम।
३ . हरिद्रा खण्ड आधा चम्मच दिन में दो बार सेवन करें। ऊपर से गुनगुना गर्म जल पी लीजिये।
इस औषध को तीन माह तक लीजिये फिर जीवन भर कभी आपको इस तरह की समस्या न होगी।
नमस्ते
मुझे लगभग छह सात सालों से हमेशा जुका़म बना रहता है, नाक बहती रहती है, ऐसा लगता है कि अंदर कुछ फंसा हुआ है, अक्सर खांसी भी आती है और कम मात्रा में बलगम भी छूटता है। सिर हमेशा भारी बना रहता है। जब पढ़ने के लिये सिर नीचे को झुकाता हूं तो लगता है कि अंदर कुछ भरा है जो बाहर आना चाहता है लेकिन ऐसा होता नहीं। मैं बौत परेशान हूं मेरी मदद करिये सुना है कि आयुर्वेद में मौत के अलावा हर बीमारी का इलाज है।
संतराम कोरी,झांसी
संतराम जी आपने बिलकुल सही सुना है। ठंडी चीजों का सेवन बिलकुल बंद करके इन दवाओं को लीजिये-
१ . सितोपलादि चूर्ण २ ग्राम + त्रिभुवन कीर्ति रस एक गोली + लक्ष्मी विलास रस(नारदीय)एक गोली + श्रंग भस्म दो रत्ती(यानि २५० मिग्रा.) + रस सिंदूर एक रत्ती + गोदन्ती भस्म दो रत्ती : इन सभी को मिला कर एक खुराक बना लीजिये व दिन में शहद के साथ मिला कर तीन बार सुबह-दोपहर-शाम चाटिये।
२ . षड्बिन्दु तेल की छह बूंदें नाक के दोनो छेदों में डालिये सुबह - शाम।
३ . हरिद्रा खण्ड आधा चम्मच दिन में दो बार सेवन करें। ऊपर से गुनगुना गर्म जल पी लीजिये।
इस औषध को तीन माह तक लीजिये फिर जीवन भर कभी आपको इस तरह की समस्या न होगी।
शनिवार, नवंबर 29, 2008
ये "घनसत्व" क्या हैं?
Published :
11/29/2008 07:54:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय सर
नमस्ते
आपने पिछले एक सवाल के उत्तर में जो कि बालों के झड़ने की समस्या के बारे में था बताया है कि कुछ जड़ी-बूटियों के घनसत्व लेना हैं। मैने अपने शहर के आयुर्वेदिक दवाओं के विक्रेताओं से बात करी तो उन्हॊने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है वो कुछ अलग ही दवाएं बेचने की कोशिश करते हैं। आप बताइये कि ये "घनसत्व" क्या हैं? क्या इन्हें घर पर बनाया जाता है या अगर कहीं से खरीद सकते हैं तो दुकान का पता दीजिये। धन्यवाद
अजेय वाचस्पति,प्रतापगढ़(यू.पी.)
अजेय जी घनसत्व का अर्थ है उस वनस्पति के सत्व को निकाल कर उसे गाढ़ा करते-करते सुखा कर चूर्ण रूप में बना लेना। असल में कई बार नाजुक तबियत के आधुनिक लोग आयुर्वेद में बताए गये चूर्ण आदि की ज्यादा मात्रा जैसे एक चम्मच लेना पसंद नहीं करते अतः ऐसे लोगों के लिये घनसत्व एक बेहतर विकल्प होते हैं जो चूर्ण के स्थान पर लिये जा सकते हैं। एक चम्मच चूर्ण के स्थान पर एक चुटकी घनसत्व लेने से भी वही प्रभाव मिल जाता है क्योंकि ये उस वनस्पति के सत्व रूप में होता है। ये अत्यधिक "पोटेन्टाइज्ड" होते हैं। कुछ बड़ी कम्पनियां इन घनसत्वों को कैप्सूल के रूप में बना कर भारी मुनाफ़ा कमा कर मरीजो की जेबें काट रही हैं, आप साधारणतया इन्हें घर पर नहीं बना सकते जैसे कोई आपसे कहें कि चाय को इतना उबालिये कि वह चूर्ण रूप में आपको मिल जाए तो वह चाय का घनसत्व होगा इसलिये ये एक श्रमसाध्य कठिन कार्य है जिसके लिये अनुभवी लोगों की जरूरत होती है। आयुषवेद परिवार ने अपने आत्मीयजनों की इस समस्या को दूर करने के लिये आपके आवश्यकता के लिये वनस्पतियों के घनसत्व बनाने की व्यवस्था भी जुटा ली है अतः यदि आप किन्हीं घनसत्वों को चाहें तो आयुषवेद परिवार उन्हें अपनी देखरेख में आपके लिये बनवा देगा।
नमस्ते
आपने पिछले एक सवाल के उत्तर में जो कि बालों के झड़ने की समस्या के बारे में था बताया है कि कुछ जड़ी-बूटियों के घनसत्व लेना हैं। मैने अपने शहर के आयुर्वेदिक दवाओं के विक्रेताओं से बात करी तो उन्हॊने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है वो कुछ अलग ही दवाएं बेचने की कोशिश करते हैं। आप बताइये कि ये "घनसत्व" क्या हैं? क्या इन्हें घर पर बनाया जाता है या अगर कहीं से खरीद सकते हैं तो दुकान का पता दीजिये। धन्यवाद
अजेय वाचस्पति,प्रतापगढ़(यू.पी.)
अजेय जी घनसत्व का अर्थ है उस वनस्पति के सत्व को निकाल कर उसे गाढ़ा करते-करते सुखा कर चूर्ण रूप में बना लेना। असल में कई बार नाजुक तबियत के आधुनिक लोग आयुर्वेद में बताए गये चूर्ण आदि की ज्यादा मात्रा जैसे एक चम्मच लेना पसंद नहीं करते अतः ऐसे लोगों के लिये घनसत्व एक बेहतर विकल्प होते हैं जो चूर्ण के स्थान पर लिये जा सकते हैं। एक चम्मच चूर्ण के स्थान पर एक चुटकी घनसत्व लेने से भी वही प्रभाव मिल जाता है क्योंकि ये उस वनस्पति के सत्व रूप में होता है। ये अत्यधिक "पोटेन्टाइज्ड" होते हैं। कुछ बड़ी कम्पनियां इन घनसत्वों को कैप्सूल के रूप में बना कर भारी मुनाफ़ा कमा कर मरीजो की जेबें काट रही हैं, आप साधारणतया इन्हें घर पर नहीं बना सकते जैसे कोई आपसे कहें कि चाय को इतना उबालिये कि वह चूर्ण रूप में आपको मिल जाए तो वह चाय का घनसत्व होगा इसलिये ये एक श्रमसाध्य कठिन कार्य है जिसके लिये अनुभवी लोगों की जरूरत होती है। आयुषवेद परिवार ने अपने आत्मीयजनों की इस समस्या को दूर करने के लिये आपके आवश्यकता के लिये वनस्पतियों के घनसत्व बनाने की व्यवस्था भी जुटा ली है अतः यदि आप किन्हीं घनसत्वों को चाहें तो आयुषवेद परिवार उन्हें अपनी देखरेख में आपके लिये बनवा देगा।
बुधवार, नवंबर 26, 2008
जांच करवाने पर मुझे दिल का मरीज बताया गया.....
Published :
11/26/2008 09:58:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब, नमस्ते
मेरी उम्र ४२ साल है। मुझे बहुत घबराहट होती है। चक्कर आते रहते हैं। दिल बहुत तेजी से धड़कता रहता है। भूख एकदम कम लगती है। आंखों में कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि गर्म धुंआ सा निकल रहा है। जांच करवाने पर मुझे दिल का मरीज बताया गया है। कोई आयुर्वेदिक उपचार बतायें। धन्यवाद
विनम्र के.जैन,राठ
विनम्र जी आप चिंतित न हों जल्द ही आप अपने आपको स्वस्थ महसूस करेंगे बस ये दवा की कुछ खुराक लेने भर की देर है। आप इस दवा को इस तरह से बनाकर लें..
१ . अर्जुन की छाल का चूर्ण ६० ग्राम + स्वर्णमाक्षिक भस्म १० ग्राम + अकीक पिष्टी १० ग्राम + मुक्ताशुक्ति पिष्टी १० ग्राम + शुद्ध सूखा शिलाजीत १० ग्राम + जहरमोहरा खताई पिष्टी १० ग्राम + लोह भस्म १० ग्राम इन सब को मिला कर कस कर घोंट लीजिये और ५०० मिलीग्राम की पुड़ियां बना लें जो कि आपके लिये एक खुराक होगी। इस दवा को एक-एक पुड़िया दिन में तीन बार अर्जुनारिष्ट के दो चम्मच के साथ लीजिये। दवा खाली पेट न लें।
२ . अर्जुन घृत एक-चौथाई चाय का चम्मच दिन में दो बार सुबह-शाम लीजिये।
आप मात्र दो माह लगातार औषधियां ले लीजिये आजीवन आपको दिल की कोई तकलीफ़ उम्मीद है कि होगी ही नहीं।
मेरी उम्र ४२ साल है। मुझे बहुत घबराहट होती है। चक्कर आते रहते हैं। दिल बहुत तेजी से धड़कता रहता है। भूख एकदम कम लगती है। आंखों में कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि गर्म धुंआ सा निकल रहा है। जांच करवाने पर मुझे दिल का मरीज बताया गया है। कोई आयुर्वेदिक उपचार बतायें। धन्यवाद
विनम्र के.जैन,राठ
विनम्र जी आप चिंतित न हों जल्द ही आप अपने आपको स्वस्थ महसूस करेंगे बस ये दवा की कुछ खुराक लेने भर की देर है। आप इस दवा को इस तरह से बनाकर लें..
१ . अर्जुन की छाल का चूर्ण ६० ग्राम + स्वर्णमाक्षिक भस्म १० ग्राम + अकीक पिष्टी १० ग्राम + मुक्ताशुक्ति पिष्टी १० ग्राम + शुद्ध सूखा शिलाजीत १० ग्राम + जहरमोहरा खताई पिष्टी १० ग्राम + लोह भस्म १० ग्राम इन सब को मिला कर कस कर घोंट लीजिये और ५०० मिलीग्राम की पुड़ियां बना लें जो कि आपके लिये एक खुराक होगी। इस दवा को एक-एक पुड़िया दिन में तीन बार अर्जुनारिष्ट के दो चम्मच के साथ लीजिये। दवा खाली पेट न लें।
२ . अर्जुन घृत एक-चौथाई चाय का चम्मच दिन में दो बार सुबह-शाम लीजिये।
आप मात्र दो माह लगातार औषधियां ले लीजिये आजीवन आपको दिल की कोई तकलीफ़ उम्मीद है कि होगी ही नहीं।
बेटे को मुंबई में आने पर छींक-सर्दी-ज़ुकाम चालू हो जाता है
Published :
11/26/2008 09:35:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
sir mera ladka 17 sal ka hai use lagbhag 3 sal pahle garmi me chink aur jukam chalu hua thi tab maine kuch dactaro ko bataya tha dr. davai deta tha thik ho jata tha lekin 1 ya 2 din ke bad vapis chalu ho jata tha fir garmi jaise khatam hui chink aur jukam bina davai ke thik ho gaye fir dusare sal vapis garmi aate hi vapis chalu jo abhi tak thik nahi hua sal bhar pahle mai faimily ke sath kashmir gaya tha thandi me ham log sara din barf par khelte the vo time mai ladke ko bilkul chink ya jukam nahi hua fir 5 - 6 mahine pahale mai rajasthan gaya tha 15 din ruka tha use bilkul jukam nahi hua fir jaise mumbai aaya to chalu . matlab ladka mumbai se bahar koi bhi sijan me rahata hai chahe sardi garmi barish ya barf girti ho use jukam bilkul nahi ya nahi ke barabar rahta hai par jaise mumbai aaya ki vapis jukam chalu . abhi use chik to nahi ke barabar aa rahi hai par jukam sara din aur rat ko bhi rahata hai kabhi kabhi to rat ko jagkar bhi rumal lekar nak se chu chu karta hai maine 1 sal pahale elarji ke dr. ko dikhaya tha usane sab test karvaye the to bataya tha ki ladke ko jami hui mitti jise parpadi kahte hai aur pollution ke elargi hai so ladke ka room jaha sota hai roj pura dhone ka, daily chadar aur bistar dhone ka, room me roj davai chantane ka, room me 1 bhi kakroch ya machchar nahi hona chahiye, udad dal nahi khane ka,baki keval ghar ka khana khane ka, bahar se nimn chij bhi nahi khane ka jaise juce, sandvich, khana matlab bahar ka kuch bhi khana nahi khane ka aur usne kaha ki mai 3 sal ka couse deta hu usase thik ho jayega varna dhire-dhire ladke ko shvas ki problem ho sakti hai fir uske kahane par mai vo davai dehli se aashtreliyan company dvara taiyar karvai jo alag alag color me thi week me 3 bar jibh ke niche 1 bund dalne ko kaha tha maine 1 sal vo dr.se ilaj karvaya par koi fayda nahi hua please bataye kya karana chahiye kyoki ladka ghar me hi rahta hai bahar bhi nahi jata college bhi bahut kam jata hai puchane par bataya ki papa sabke samne nak se aavaj hone par mere ko bahut kharab lagata hai so mai college nahi jaunga . please aap pura read kare aur advise de kya karna chahiye from surendra daga mumbai
आत्मन भाई सुरेन्द्र जी
आपके बच्चे की समस्या को पूरी गम्भीरता से समझा है। मैं मानता हूं कि ये समस्या इतनी गहरी नहीं है जितनी कि परिस्थितियों के कारण आपको प्रतीत हो रही है उसका कारण है कि आप "स्पेश्लिस्ट डाक्टर्स" के चंगुल में फंस गये। वैसे मैंने ये देखा है कि मुंबई के लोगों की जीवन शैली ऐसी है कि वे कुछ भी होने पर पहले फैमिली डाक्टर फिर उससे न सम्हलने पर स्पेश्लिस्ट के पास भागते हैं और जिंदगी भर के लिये उनके ग्राहक बन जाते हैं। आप परेशान न हों। आपके बेटे को मुंबई के आर्द्र(humid) वातावरण के कारण कफ़ विकार हो जाता है आप इन औषधियों को उसे लगभग तीन माह तक दीजिए ताकि उसके शरीर में इस विकार के प्रति प्रतिरोध बन सके कि यदि स्थान और वातावरण बदले तो भी उसके स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े.......
१ . शुद्ध वत्सनाभ १ ग्राम + समीरपन्नग रस २ ग्राम + वज्राभ्रक भस्म शतपुटी ३ ग्राम + टंकण भस्म ४ ग्राम + श्रंग भस्म ५ ग्राम + मुक्ताशुक्ति पिष्टी १० ग्राम; इन सब को मिला कर इसमें आगे लिखी औषधियों का रस या काढ़ा डाल कर सुखा लें
....... सोमलता, स्वर्णक्षीरी, आक(मदार) के पत्तों का रस
इस औषधि की २५० मिलीग्राम के वजन की गोलियां बना लें व सुबह शाम एक-एक गोली हलके गर्म फीके दूध से दीजिये।
यह दवा यदि आप तैयार न कर सकें किसी वैद्य से तैयार करवा लें अन्यथा आयुषवेद परिवार को aayushved@gmail.com पर सूचित करें क्योंकि आपके बेटे का कैरियर शर्मिंदगी के कारण कालेज न जा पाने से खराब हो सकता है, इस बात का अवश्य ध्यान दें। आयुषवेद दल एक सेवाभावी लोगों का परिवार है जो न मिल पाने वाली आयुर्वेदिक औषधियों को अत्यंत शुद्धता व शास्त्रोक्त पद्धति से बना कर मात्र उत्पादन मूल्य पर स्पीड पोस्ट से उनके घर पर उपलब्ध करा देता है। बाजारू औषधियों जो यदि मूल्यवान हैं तो शुद्ध होंगी इस बात का भरोसा कर पाना बहुत मुश्किल होता है। यदि आपको ये औषधियां नहीं मिलती हैं या अधिक मंहगी प्रतीत होती हैं तो हमें अवश्य बताइये। इस उपचार के बाद आपका बेटा जो चाहे खा सकता है क्योंकि शरीर में रोग के प्रति प्रतिकार शक्ति विकसित हो चुकी होगी, जिंदगी भर किसी परहेज की आवश्यकता नहीं होगी कि ये खाओ ये मत खाओ वैसे स्वस्थ रहना है तो जुबान पर नियंत्रण आवश्यक है।
आत्मन भाई सुरेन्द्र जी
आपके बच्चे की समस्या को पूरी गम्भीरता से समझा है। मैं मानता हूं कि ये समस्या इतनी गहरी नहीं है जितनी कि परिस्थितियों के कारण आपको प्रतीत हो रही है उसका कारण है कि आप "स्पेश्लिस्ट डाक्टर्स" के चंगुल में फंस गये। वैसे मैंने ये देखा है कि मुंबई के लोगों की जीवन शैली ऐसी है कि वे कुछ भी होने पर पहले फैमिली डाक्टर फिर उससे न सम्हलने पर स्पेश्लिस्ट के पास भागते हैं और जिंदगी भर के लिये उनके ग्राहक बन जाते हैं। आप परेशान न हों। आपके बेटे को मुंबई के आर्द्र(humid) वातावरण के कारण कफ़ विकार हो जाता है आप इन औषधियों को उसे लगभग तीन माह तक दीजिए ताकि उसके शरीर में इस विकार के प्रति प्रतिरोध बन सके कि यदि स्थान और वातावरण बदले तो भी उसके स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े.......
१ . शुद्ध वत्सनाभ १ ग्राम + समीरपन्नग रस २ ग्राम + वज्राभ्रक भस्म शतपुटी ३ ग्राम + टंकण भस्म ४ ग्राम + श्रंग भस्म ५ ग्राम + मुक्ताशुक्ति पिष्टी १० ग्राम; इन सब को मिला कर इसमें आगे लिखी औषधियों का रस या काढ़ा डाल कर सुखा लें
....... सोमलता, स्वर्णक्षीरी, आक(मदार) के पत्तों का रस
इस औषधि की २५० मिलीग्राम के वजन की गोलियां बना लें व सुबह शाम एक-एक गोली हलके गर्म फीके दूध से दीजिये।
यह दवा यदि आप तैयार न कर सकें किसी वैद्य से तैयार करवा लें अन्यथा आयुषवेद परिवार को aayushved@gmail.com पर सूचित करें क्योंकि आपके बेटे का कैरियर शर्मिंदगी के कारण कालेज न जा पाने से खराब हो सकता है, इस बात का अवश्य ध्यान दें। आयुषवेद दल एक सेवाभावी लोगों का परिवार है जो न मिल पाने वाली आयुर्वेदिक औषधियों को अत्यंत शुद्धता व शास्त्रोक्त पद्धति से बना कर मात्र उत्पादन मूल्य पर स्पीड पोस्ट से उनके घर पर उपलब्ध करा देता है। बाजारू औषधियों जो यदि मूल्यवान हैं तो शुद्ध होंगी इस बात का भरोसा कर पाना बहुत मुश्किल होता है। यदि आपको ये औषधियां नहीं मिलती हैं या अधिक मंहगी प्रतीत होती हैं तो हमें अवश्य बताइये। इस उपचार के बाद आपका बेटा जो चाहे खा सकता है क्योंकि शरीर में रोग के प्रति प्रतिकार शक्ति विकसित हो चुकी होगी, जिंदगी भर किसी परहेज की आवश्यकता नहीं होगी कि ये खाओ ये मत खाओ वैसे स्वस्थ रहना है तो जुबान पर नियंत्रण आवश्यक है।
रविवार, नवंबर 23, 2008
क्या लेना ठीक है वसंत कुसुमाकर या मकरध्वज वटी?
Published :
11/23/2008 01:20:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
सुभ प्रभात, बसंत कुसुमाकर व नव्रत्न क्ल्प के बारे मे लिखा दुबारा धन्यवाद, कृपया सलाह दे मै 47 का हू, मेरा touring job हैं, इसलिऐ पेट खराब रहता है, परेज नहि रह पाता है मुझे बसंत व मकरध्वज vati मे से क्या लेना चाहीये, ओर कैसे ? कृप्या बताये. नमस्कार
vishnu k. gupta ( vishnukgupta@webdunia.com)
विष्णु जी, वसंत कुसुमाकर रस व मकरध्वज वटी में से यदि आपके कार्य व दिनचर्या के अनुरूप लेना चाहें तो आपके लिये मकरध्वज वटी ही श्रेष्ठ है क्योंकि जब आप किसी ऐसे कार्य पर होते हैं कि आपको change of water तथा change of climate का लगातार सामना करना पड़ता है साथ ही यात्रा करने के कारण सोने जागने का समय आदि भी अनियमित हो जाता है तो ऐसे में मकध्वज वटी आपके शरीर में इन परिवर्तनों तथा विषमताओं के प्रति एक प्रतिरोध उपजा देती है कि आप इनसे संबद्ध विकारों से पीड़ित नहीं होते साथ ही आपका पाचन व स्वास्थ्य सबल बना रहता है। यह स्वर्ण, पारे व अभ्रक की शक्ति का मिश्रित एक अति उपयोगी प्रभावी योग है। इसकी एक माह की खुराक का उत्पादन मूल्य १४०० रु. पड़ता है। यदि आप इसे उपयोग के लिये मंगवाना चाहें तो इस मूल्य में डाकखर्च जोड़ कर जो रकम बने उसका आधा हमें भेज दें जैसे ही उक्त राशि आयुषवेद को प्राप्त होगी आपकी औषधि आपको वी.पी.पी. से तत्काल भेज दी जाएगी। चूंकि आयुषवेद व्यवसायिक संगठन न होकर एक सेवाभावी संगठन है जो कि आपको मात्र उत्पादन मूल्य पर दवाएं उपलब्ध बना कर भेजता है। इसलिये आयुषवेद दल के इस कार्य में सहयोग करें। एक विशेष बात और ध्यान मे रखिये कि आयुषवेद दल आपको जिस मूल्य पर दवा आपके घर पर भेज देता है वह बाजार में मिलने वाली मात्र प्रचार से प्रसिद्ध हुई दवाओं से लगभग आधा ही पड़ता है जिसमें कि आयुषवेद की शुद्धता व विश्वसनीयता का भरोसा भी शामिल रहता है।
vishnu k. gupta ( vishnukgupta@webdunia.com)
विष्णु जी, वसंत कुसुमाकर रस व मकरध्वज वटी में से यदि आपके कार्य व दिनचर्या के अनुरूप लेना चाहें तो आपके लिये मकरध्वज वटी ही श्रेष्ठ है क्योंकि जब आप किसी ऐसे कार्य पर होते हैं कि आपको change of water तथा change of climate का लगातार सामना करना पड़ता है साथ ही यात्रा करने के कारण सोने जागने का समय आदि भी अनियमित हो जाता है तो ऐसे में मकध्वज वटी आपके शरीर में इन परिवर्तनों तथा विषमताओं के प्रति एक प्रतिरोध उपजा देती है कि आप इनसे संबद्ध विकारों से पीड़ित नहीं होते साथ ही आपका पाचन व स्वास्थ्य सबल बना रहता है। यह स्वर्ण, पारे व अभ्रक की शक्ति का मिश्रित एक अति उपयोगी प्रभावी योग है। इसकी एक माह की खुराक का उत्पादन मूल्य १४०० रु. पड़ता है। यदि आप इसे उपयोग के लिये मंगवाना चाहें तो इस मूल्य में डाकखर्च जोड़ कर जो रकम बने उसका आधा हमें भेज दें जैसे ही उक्त राशि आयुषवेद को प्राप्त होगी आपकी औषधि आपको वी.पी.पी. से तत्काल भेज दी जाएगी। चूंकि आयुषवेद व्यवसायिक संगठन न होकर एक सेवाभावी संगठन है जो कि आपको मात्र उत्पादन मूल्य पर दवाएं उपलब्ध बना कर भेजता है। इसलिये आयुषवेद दल के इस कार्य में सहयोग करें। एक विशेष बात और ध्यान मे रखिये कि आयुषवेद दल आपको जिस मूल्य पर दवा आपके घर पर भेज देता है वह बाजार में मिलने वाली मात्र प्रचार से प्रसिद्ध हुई दवाओं से लगभग आधा ही पड़ता है जिसमें कि आयुषवेद की शुद्धता व विश्वसनीयता का भरोसा भी शामिल रहता है।
शनिवार, नवंबर 22, 2008
दांयी किडनी में 5मिमी. व 6मिमी. आकार के स्टोन(पथरी)
Published :
11/22/2008 11:43:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
सर नमस्ते,मेरी दांयी किडनी में 5मिमी. व 6मिमी.आकार के स्टोन(पथरी) है। कोई अच्छा इलाज बताएं या दवा भेजने की कृपा करें।
धन्यवाद
मोहन,दादरी(गौतमबुद्ध नगर)
मोहन जी, आप परेशान न हों बस इन दवाओं को दो माह तक सेवन कर के पुनः जांच एक्स रे या अन्य विधि से करवा लें पथरी जादू की तरह से घुल कर गायब हो जाएंगी। यदि आयुषवेद से औषधि मंगवाना चाहें तो हमें e-mail कर दीजिये। आयुषवेद दल द्वारा बनायी दवाएं बाजारू दवाओं से अधिक विश्वसनीय, शुद्ध व मूल्य में अपेक्षाकृत कम ही होती है।
१ . हजरुल यहूद भस्म एक रत्ती + कलमी शोरा एक रत्ती + जवाखार एक रत्ती + मूत्र कृच्छान्तक रस एक गोली + गोक्षुरादि गुग्गुल एक गोली + श्वेत पर्पटी एक रत्ती इन दवाओं की एक मात्रा बना लें और सुबह शाम ठंडे पानी से सेवन करें।
पथ्य पूर्वक रहें तो पथरी दोबारा बनेगी ही नहीं अन्यथा दोबारा बन जाती है। घिया लौकी, तोरई, टिण्डा, कद्दू, मूली, मूंग की दाल, अरहर तथा कुल्थी की दाल, दूध, संतरा, पपीता, अनार, तरबूज का अधिक सेवन दवा लेने के समय हितकर रहता है।
धन्यवाद
मोहन,दादरी(गौतमबुद्ध नगर)
मोहन जी, आप परेशान न हों बस इन दवाओं को दो माह तक सेवन कर के पुनः जांच एक्स रे या अन्य विधि से करवा लें पथरी जादू की तरह से घुल कर गायब हो जाएंगी। यदि आयुषवेद से औषधि मंगवाना चाहें तो हमें e-mail कर दीजिये। आयुषवेद दल द्वारा बनायी दवाएं बाजारू दवाओं से अधिक विश्वसनीय, शुद्ध व मूल्य में अपेक्षाकृत कम ही होती है।
१ . हजरुल यहूद भस्म एक रत्ती + कलमी शोरा एक रत्ती + जवाखार एक रत्ती + मूत्र कृच्छान्तक रस एक गोली + गोक्षुरादि गुग्गुल एक गोली + श्वेत पर्पटी एक रत्ती इन दवाओं की एक मात्रा बना लें और सुबह शाम ठंडे पानी से सेवन करें।
पथ्य पूर्वक रहें तो पथरी दोबारा बनेगी ही नहीं अन्यथा दोबारा बन जाती है। घिया लौकी, तोरई, टिण्डा, कद्दू, मूली, मूंग की दाल, अरहर तथा कुल्थी की दाल, दूध, संतरा, पपीता, अनार, तरबूज का अधिक सेवन दवा लेने के समय हितकर रहता है।
बुखार की भयंकर स्थिति बार-बार आ जाती है
Published :
11/22/2008 11:18:00 pm
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
मेरी पत्नी को इन समस्याओं के चलते मैंने अस्पताल में दिखाया वहां एडमिट भी रखा गया पर जब कुछ दिन बाद घर आयी तो फिर सब वैसा ही होने लगा है। उपाय बताएं -
मुख्य लक्षण
(1) बुखार-107/105 (2) पेट में जलन के साथ दांयी तरफ़ दर्द (3) सिर व आंख में दर्द (4) हड्डियों में दर्द (5)उल्टी आती है (6) मासिक धर्म की गड़बड़ी
BLOOD REPORT
NE EPI CELL--2/3
FC--5700
HB--9.5
ESR--18
PCV--31
PLATELET COUNT--19
P-68 L-30 E-2
HIV--NEG.
MP--NEG.
FBS--93
URER--20
CRERT--0.9
SR BILL--1.3
SUPT--18
SUOT--30
दी गई दवाएं
(A)--CHOLOROQUINE PHOSPHATE 250mg
(B)--PROCHLORPERAZINE MALEATE I.P. 5mg
(C)RANITIDINE
(D)--PHENIRAMINE MALEATE I.P.25mg
(E)--ANEMIDOX( capsule of vitamins with iron)
(F)--MALA--N
सौरभ अस्थाना,मुंबई
प्रिय सौरभ, आपने जो रिपोर्ट साथ में भेजी है व टेलीफोन पर बात करी है उस आधार पर बहू को निम्न उपचार दें औषधियां लिख रहा हूं, यह वात पैत्तिक विकार की उपस्थिति है -
१ . सर्वज्वर हर लौह ( यह सामान्य व स्वर्णमिश्रित दो प्रकार का आता है किंतु स्वर्ण मिश्रित योग मंहगे होते है व आपातकालीन स्थिति में प्रयोग करे जाते हैं अतः अभी सामान्य ही योग लें) एक गोली + गिलोय सत्त्व दो रत्ती(२५० मिग्रा.) को अमृतारिष्ट के दो चम्मच के साथ दिन में तीन बार दें।
२ . मकरध्वज बटी एक गोली सुबह-शाम भोजन के बाद मिश्री मिले दूध के साथ दें ताकि रोग के कारण आयी व विटामिनों की कमी से आयी कमजोरी दूर हो जाए।
मुख्य लक्षण
(1) बुखार-107/105 (2) पेट में जलन के साथ दांयी तरफ़ दर्द (3) सिर व आंख में दर्द (4) हड्डियों में दर्द (5)उल्टी आती है (6) मासिक धर्म की गड़बड़ी
BLOOD REPORT
NE EPI CELL--2/3
FC--5700
HB--9.5
ESR--18
PCV--31
PLATELET COUNT--19
P-68 L-30 E-2
HIV--NEG.
MP--NEG.
FBS--93
URER--20
CRERT--0.9
SR BILL--1.3
SUPT--18
SUOT--30
दी गई दवाएं
(A)--CHOLOROQUINE PHOSPHATE 250mg
(B)--PROCHLORPERAZINE MALEATE I.P. 5mg
(C)RANITIDINE
(D)--PHENIRAMINE MALEATE I.P.25mg
(E)--ANEMIDOX( capsule of vitamins with iron)
(F)--MALA--N
सौरभ अस्थाना,मुंबई
प्रिय सौरभ, आपने जो रिपोर्ट साथ में भेजी है व टेलीफोन पर बात करी है उस आधार पर बहू को निम्न उपचार दें औषधियां लिख रहा हूं, यह वात पैत्तिक विकार की उपस्थिति है -
१ . सर्वज्वर हर लौह ( यह सामान्य व स्वर्णमिश्रित दो प्रकार का आता है किंतु स्वर्ण मिश्रित योग मंहगे होते है व आपातकालीन स्थिति में प्रयोग करे जाते हैं अतः अभी सामान्य ही योग लें) एक गोली + गिलोय सत्त्व दो रत्ती(२५० मिग्रा.) को अमृतारिष्ट के दो चम्मच के साथ दिन में तीन बार दें।
२ . मकरध्वज बटी एक गोली सुबह-शाम भोजन के बाद मिश्री मिले दूध के साथ दें ताकि रोग के कारण आयी व विटामिनों की कमी से आयी कमजोरी दूर हो जाए।
मकरध्वज बटी के विशिष्ट उपयोग व गुणधर्म
Published :
11/22/2008 07:13:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)

बहुत सारे पाठकों के पत्र इस विषय में आए कि इस महौषधि के बारे में विस्तार से बताया जाए। अतः इस पर जो जानकारियां पहले दी जा चुकी हैं उनसे आगे बढ़ते हैं।
विभिन्न पुरुष व स्त्री रोगों पर :
अ . सामान्य कमजोरी व ठंड के मौसम में शक्ति संचय करने के लिये
ब . सर्दी, खांसी, जुकाम की अवस्था में
स . मधुमेह(डायबिटीज) के कारण आयी कमजोरी में
द . कैल्शियम व विभिन्न विटामिनों की कमी की अवस्था में
च . रक्त की कमी के कारण आयी कमजोरी में
छ . स्मरण शक्ति की कमी(अत्यधिक वीर्यनाश के कारण) की अवस्था में
मात्र पुरुष रोगों पर :
अ . स्वप्नदोष की अवस्था में
ब . प्रमेह की अवस्था में
स . शीघ्रपतन की अवस्था में
द . हस्तमैथुन के कारण आयी नपुंसकता की अवस्था में
च . स्तम्भन(रुकावट) की कमी की अवस्था में
छ . धातुस्राव की अवस्था में
मात्र स्त्री रोगों पर :
अ . प्रदर(लिकोरिया) के कारण आयी भीषण कमजोरी की अवस्था में
ब . कामशीतलता(सेक्स में दिलचस्पी न होना) की अवस्था में
स . कमर दर्द की अवस्था में
बुढ़ापे के रोगों पर :
अ . बुढ़ापे के कारण आयी शारीरिक कमजोरी की अवस्था में
ब . बढ़ती उम्र के कारण आयी सेक्स दुर्बलता की अवस्था में
स . सेक्स की इच्छा होने पर भी लिंग में कड़ापन न आने की अवस्था में
द . भूख न लगना, अनियमित पाचन की अवस्था में
च . बुढ़ापे के कारण आयी याददाश्त की कमजोरी की अवस्था में
इस महौषधि को अनेक रोगों की स्थितियों में अलग-अलग अनुपानों यानि दूध, शहद, मक्खन, घी अथवा अन्य औषधियों के साथ लेने से बहुत ही विशेष प्रभाव देखने में आते हैं जिसका निर्णय वैद्य द्वारा दी सलाह से ही करना चाहिये।
गुरुवार, नवंबर 20, 2008
गंजापन व अवांछित बालों की समस्या
Published :
11/20/2008 05:45:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डाक्टर साहिब
नमस्ते
आशा करता हूँ कि आप प्रभु कृपा से सकुशल होंगे । आगे समाचार है कि आपके द्वारा भेजी गई दवा मुझे कल (19-11-2008) मिल गई है । आपका बहुत बहुत धन्यवाद । मैंने अपने दोस्त के बारे में आपसे पूछा था । परन्तु आपने अभी प्रकाशित नहीं किया (एक मेरे दोस्त जिसकी उम्र लगभग 36 वर्ष है उनको गंजेपन की शिकायत है और उनके बालों में बहुत सिकरी है और ऐसे चमकती है जैसे कि सफेद पाऊडर लगा हो बाल भी बहुत झड़ गये हैं वह किया करें जिससे उनकी सिकरी चली जाये और नये बालों से सिर का गंजापन खत्म हो जाये । एक बात और मेरी पत्नी वैक्सिंग कर के बालो को हटाती है क्या कोई आयुर्वेदिक इलाज है?
नवीन गुप्ता, मोहाली
आत्मन नवीन जी
प्रणाम
ईश्वर की दया से हम सब कुशलता से हैं। आपके मित्र के बारे में समस्या का हल प्रकाशित न कर पाने के लिये क्षमा चाहता हूं। सिकरी(रूसी) अथवा डैन्ड्रफ़ के कारण बालों का झड़ना आजकल एक आम समस्या बन गयी है जाहिर है कि वे तमाम उपचार ले भी चुके होंगे। उनके लिये समाधन लिख रहा हूं।
१. आंवला घनसत्व + हरड़ घनसत्व + मुलैहठी घनसत्व + भृंगराज घनसत्व २०-२० ग्राम ले कर इस मिश्रण में २० ग्राम स्वर्णमाक्षिक भस्म मिला कर इसकी एक ग्राम मात्रा दिन में दो बार ठंडे जल के साथ लीजिये(इस दवा को बीज निकाले हुए खाली मुनक्के या खाली कैप्सूल में भर कर लिया जा सकता है)
२. भृंगराज + आंवला + मिश्री + साबुत काले तिल २५-२५ ग्राम मिला कर रख लें व इस योग को भी एक-एक ग्राम मात्रा दिन में दो बार ठंडे जल के साथ लीजिये।
३. बालों में तेल इस समय लगाने का कोई उपयोग नहीं होता बल्कि समस्या उलझती ही जाती है अतः रात में (अथवा यदि शिफ़्ट ड्यूटी करते हों तो जब सोने का समय हो) बालों की जड़ों में उंगली के पोरों से हल्के तरीके से पंचतिक्त घृत लगायें(इतना अधिक नहीं कि चूने-टपकने लगे)और सुबह मुल्तानी मिट्टी या एलोवेरा शैम्पू से धो लें।
इस उपचार को नियमित रूप से न्यूनतम छह माह तक करा जाए तब आप देखेंगे कि नए काले छोटे-छोटे बाल खल्वाट त्वचा पर उग रहे हैं। चूंकि यह एक जिद्दी रोग है अतः बिना हताश हुए इलाज करना पड़ता है, यदि हम औषधियों से यह अपेक्षा रखें कि जो बाल कई बरसों में गिर गये हैं वे दवा लेते ही चमत्कारिक रूप से पुनः उग आएंगे तो यह बचपना ही होगा। घैर्य रखना ही इस उपचार का सबसे बड़ा धनात्मक पक्ष है।
शेष आपने बहन जी के बारे में लिखा है कि वे अवांछित बालों को वैक्सिंग से हटाती हैं तो इसका उपचार आप पेज के दांयी तरफ दिये लेबलों में "अवांछित बाल" पर क्लिक करके देख सकते हैं। एक बार वैक्सिंग करने के बाद यदि ये उपचार ले लिये जाए तो तीन-चार बार ऐसा कर लेने पर वहां के बाल स्थायी रूप से उगना ही खत्म हो जाते हैं। यदि कोई समस्या विशेष हो तो अवश्य सूचित करें।
नमस्ते
आशा करता हूँ कि आप प्रभु कृपा से सकुशल होंगे । आगे समाचार है कि आपके द्वारा भेजी गई दवा मुझे कल (19-11-2008) मिल गई है । आपका बहुत बहुत धन्यवाद । मैंने अपने दोस्त के बारे में आपसे पूछा था । परन्तु आपने अभी प्रकाशित नहीं किया (एक मेरे दोस्त जिसकी उम्र लगभग 36 वर्ष है उनको गंजेपन की शिकायत है और उनके बालों में बहुत सिकरी है और ऐसे चमकती है जैसे कि सफेद पाऊडर लगा हो बाल भी बहुत झड़ गये हैं वह किया करें जिससे उनकी सिकरी चली जाये और नये बालों से सिर का गंजापन खत्म हो जाये । एक बात और मेरी पत्नी वैक्सिंग कर के बालो को हटाती है क्या कोई आयुर्वेदिक इलाज है?
नवीन गुप्ता, मोहाली
आत्मन नवीन जी
प्रणाम
ईश्वर की दया से हम सब कुशलता से हैं। आपके मित्र के बारे में समस्या का हल प्रकाशित न कर पाने के लिये क्षमा चाहता हूं। सिकरी(रूसी) अथवा डैन्ड्रफ़ के कारण बालों का झड़ना आजकल एक आम समस्या बन गयी है जाहिर है कि वे तमाम उपचार ले भी चुके होंगे। उनके लिये समाधन लिख रहा हूं।
१. आंवला घनसत्व + हरड़ घनसत्व + मुलैहठी घनसत्व + भृंगराज घनसत्व २०-२० ग्राम ले कर इस मिश्रण में २० ग्राम स्वर्णमाक्षिक भस्म मिला कर इसकी एक ग्राम मात्रा दिन में दो बार ठंडे जल के साथ लीजिये(इस दवा को बीज निकाले हुए खाली मुनक्के या खाली कैप्सूल में भर कर लिया जा सकता है)
२. भृंगराज + आंवला + मिश्री + साबुत काले तिल २५-२५ ग्राम मिला कर रख लें व इस योग को भी एक-एक ग्राम मात्रा दिन में दो बार ठंडे जल के साथ लीजिये।
३. बालों में तेल इस समय लगाने का कोई उपयोग नहीं होता बल्कि समस्या उलझती ही जाती है अतः रात में (अथवा यदि शिफ़्ट ड्यूटी करते हों तो जब सोने का समय हो) बालों की जड़ों में उंगली के पोरों से हल्के तरीके से पंचतिक्त घृत लगायें(इतना अधिक नहीं कि चूने-टपकने लगे)और सुबह मुल्तानी मिट्टी या एलोवेरा शैम्पू से धो लें।
इस उपचार को नियमित रूप से न्यूनतम छह माह तक करा जाए तब आप देखेंगे कि नए काले छोटे-छोटे बाल खल्वाट त्वचा पर उग रहे हैं। चूंकि यह एक जिद्दी रोग है अतः बिना हताश हुए इलाज करना पड़ता है, यदि हम औषधियों से यह अपेक्षा रखें कि जो बाल कई बरसों में गिर गये हैं वे दवा लेते ही चमत्कारिक रूप से पुनः उग आएंगे तो यह बचपना ही होगा। घैर्य रखना ही इस उपचार का सबसे बड़ा धनात्मक पक्ष है।
शेष आपने बहन जी के बारे में लिखा है कि वे अवांछित बालों को वैक्सिंग से हटाती हैं तो इसका उपचार आप पेज के दांयी तरफ दिये लेबलों में "अवांछित बाल" पर क्लिक करके देख सकते हैं। एक बार वैक्सिंग करने के बाद यदि ये उपचार ले लिये जाए तो तीन-चार बार ऐसा कर लेने पर वहां के बाल स्थायी रूप से उगना ही खत्म हो जाते हैं। यदि कोई समस्या विशेष हो तो अवश्य सूचित करें।
मंगलवार, नवंबर 18, 2008
वसंतकुसुमाकर रस व नवरत्न कल्पामृत रस
Published :
11/18/2008 10:37:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
we want information for 'BASANT KUSUMAKER and NAVRATNA KALPAMIRUT'
pl. send me what is the use,benefit in HINDI
thanks in advance
vishnu k. gupta
Vishnuk Gupta
वसंतकुसुमाकर रस : - यह रस दिल को बल देने वाला, बलवर्धक, उत्तेजक,बाजीकरण,रसायन,मांसधातु बढ़ाने वाला है। स्त्री-पुरुष के जननएन्द्रिय सम्बन्धी विकारों पर इसका बहुत अच्छा प्रभाव होता है। मधुमेह, बहुमूत्र और हर तरह के प्रमेह, नामर्दी, सोमरोग,श्वेतप्रदर,योनि तथा गर्भाशय की खराबी, वीर्य का पतला होना, शुक्राणु संबंधी विकार, वीर्य संबंधी सभी शिकायतों को जल्दी दूर कर शरीर में नयी स्फूर्ति पैदा करता है। वीर्य की कमी से होने वाले क्षयरोग की यह बहुत उत्तम दवा है। दिल और फेफड़ों को इससे बल मिलता है। दिल की कमजोरी, शूल तथा मस्तिष्क की कमजोरी, भ्रम,याददाश्त की कमी, नींद न आना आदि विकारों को यह रस तत्काल दूर करता है। पुराने रक्तपित्त,कफ़ खांसी, श्वास,संग्रहणी,क्षय, रक्तप्रदर,श्वेतप्रदर,रक्त की कमी, बुढ़ापे के विकार तथा रोग छूटने के बाद आयी कमजोरी में इस रस का प्रयोग बहुत मुफ़ीद है। मधुमेह की यह प्रसिद्ध औषधि है। छोटी आयु में हस्तमैथुन,गुदामैथुन आदि से यदि वीर्यनाश करा हो या अधिक स्त्री प्रसंग से वीर्य पतला हो चला हो तो ऐसे में स्त्री विषयक चिंतन मात्र से ही वीर्यपात हो जाता है ,इस स्थिति में यह रस जादू की तरह से असर दिखाता है। इसके सेवन से वीर्य वाहिनी शिरा में वीर्य धारण करने की क्षमता बढ़ती है। पुराने नकसीर(नाक से रक्त आना) में यह बहुत प्रभावी तरीके से असर दिखाता है। जिस स्त्री को अधिक मात्रा रजःस्राव और अधिक दिन तक होता है उसके लिये भी यह औषधि अत्यंत उपयोगी है। ऐसी स्त्रियों को यदि जरा सा भी कट-छिल जाए तो रक्त का प्रवाह बंद होने में दिक्कत होती है। बुढ़ापे जब सारी इन्द्रियां शिथिल हो जाती हैं और सबसे ज्यादा शरीर के अन्दरूनी अवयव में ढीलापन आ जाता है,आंते कार्य करने में शिथिलता दर्शाने लगती हैं तब पाचन ठीक तरीके से नहीं हो पाता है। इस स्थिति का प्रभाव दिल एवं फेफड़ॊ पर विशेषतः पड़ता है। इन्द्रियों की शक्ति बढ़ाने के लिये,रस-रक्तादि धातुओं को बढ़ाने ,दिल,फेफड़ो व मस्तिष्क को सबल बनाने,शारीरिक कान्ति बढ़ाने,शुक्र व ओज को बढ़ाकर स्वास्थ्य को स्थिरता प्रदान करने के लिये यह परम उत्तम रसायन है। इस रस का लेने के तरीके में भेद से अनेक प्रकार से उपयोग करा जाता है।
नवरत्न कल्पामृत रस: - यह रस एक उत्तम रसायन महौषधि है। इसका एक वर्ष तक कल्प के रूप में भी प्रयोग करा जाता है। यह रस वातहर, वातानुलोमक,पित्तशामक,विषनाशक,रक्तप्रसादक,मस्तिष्क पुष्टिकर व दिल को बल देने वाला है। यह रस-रक्तादि धातुओं को पुष्ट व सबल करता है। ओज की बढ़ोत्तरी करता है। मुखमंडल की कान्ति बढ़ाता है। बवासीर, प्रमेह, मधुमेह, क्षय, जीर्णज्वर, श्वास-कास, मूत्राघात, मूत्र में मवाद(पूय) आना, जीर्णवात रोग, आमवात, उदावर्त, गैस बनना, अंदरूनी घाव, अर्बुद(कैंसर), कण्ठमाला, मदात्यय, दिल के रोग, विसूचिकादि की जीर्णावस्था में शक्ति प्रदान करने के लिये व विजातीय धातुकणों को बाहर निकालने के लिये यह मुख्य औषधि माना जाता है। यह समस्त इन्द्रियों, शारीरिक अवयवों, नाड़ियों मे भीतर मल, आम, मेद, विष, कीटाणु या अन्यान्य विजातीय द्रव्यों के संचय को रोक कर उन्हें बाहर निकाल देता है। चयापचय(मेटाबालिक) क्रिया को नियमित कर देता है। वात नाड़ियों, दिल, मस्तिष्क, किडनी एवं लीवर आदि इन्द्रियों को बहुत सबल बना देता है। तन्द्रा, आलस्य, शान्त नींद न आना, किसी कार्य में मन न लगना, मष्तिष्क में घड़ी के समान ठक-ठक सा महसूस होना, चक्कर आना, थोड़े से परिश्रम से बहुत थकान आ जाना जैसी स्थितियों में यह रस बहुत प्रभावी है। यह रस जीर्णवात रोग, आमवात, सन्धिवात, जीर्णसुजाक, फिरंगरोग, कण्ठमाला, अन्तर्विद्रधि अदि रोगों में बेहद प्रभावशाली है। यह सप्त धातुपोषक व वर्धक है। विभिन्न रोगों से जर्जर हो जाने वाले रोगियों पर जब मैंने इसका प्रभाव देखा तो वह चमत्कारिक था एकदम दुबले व बलहीन हुए मरीज पुनः भले चंगे होकर जीवन यापन करने लगे किन्तु यह एक अत्यंत मंहगी औषधि है क्योंकि इसमें माणिक्य, नीलम, पन्ना, पुखराज, वैदूर्य, गोमेद, मोती जैसे कीमती द्रव्यों की पिष्टियां मिलायी जाती हैं साथ ही स्वर्ण भस्म तथा शिलाजीत का भी समावेश होता है अतः बेहद आवश्यक है कि यह किसी विश्वस्नीय स्थान या व्यक्ति से ही लिया जाए अन्यथा नकली मिल जाने पर लाभ नहीं होता व व्यर्थ ही आयुर्वेद का नाम बदनाम होता है।
pl. send me what is the use,benefit in HINDI
thanks in advance
vishnu k. gupta
Vishnuk Gupta
वसंतकुसुमाकर रस : - यह रस दिल को बल देने वाला, बलवर्धक, उत्तेजक,बाजीकरण,रसायन,मांसधातु बढ़ाने वाला है। स्त्री-पुरुष के जननएन्द्रिय सम्बन्धी विकारों पर इसका बहुत अच्छा प्रभाव होता है। मधुमेह, बहुमूत्र और हर तरह के प्रमेह, नामर्दी, सोमरोग,श्वेतप्रदर,योनि तथा गर्भाशय की खराबी, वीर्य का पतला होना, शुक्राणु संबंधी विकार, वीर्य संबंधी सभी शिकायतों को जल्दी दूर कर शरीर में नयी स्फूर्ति पैदा करता है। वीर्य की कमी से होने वाले क्षयरोग की यह बहुत उत्तम दवा है। दिल और फेफड़ों को इससे बल मिलता है। दिल की कमजोरी, शूल तथा मस्तिष्क की कमजोरी, भ्रम,याददाश्त की कमी, नींद न आना आदि विकारों को यह रस तत्काल दूर करता है। पुराने रक्तपित्त,कफ़ खांसी, श्वास,संग्रहणी,क्षय, रक्तप्रदर,श्वेतप्रदर,रक्त की कमी, बुढ़ापे के विकार तथा रोग छूटने के बाद आयी कमजोरी में इस रस का प्रयोग बहुत मुफ़ीद है। मधुमेह की यह प्रसिद्ध औषधि है। छोटी आयु में हस्तमैथुन,गुदामैथुन आदि से यदि वीर्यनाश करा हो या अधिक स्त्री प्रसंग से वीर्य पतला हो चला हो तो ऐसे में स्त्री विषयक चिंतन मात्र से ही वीर्यपात हो जाता है ,इस स्थिति में यह रस जादू की तरह से असर दिखाता है। इसके सेवन से वीर्य वाहिनी शिरा में वीर्य धारण करने की क्षमता बढ़ती है। पुराने नकसीर(नाक से रक्त आना) में यह बहुत प्रभावी तरीके से असर दिखाता है। जिस स्त्री को अधिक मात्रा रजःस्राव और अधिक दिन तक होता है उसके लिये भी यह औषधि अत्यंत उपयोगी है। ऐसी स्त्रियों को यदि जरा सा भी कट-छिल जाए तो रक्त का प्रवाह बंद होने में दिक्कत होती है। बुढ़ापे जब सारी इन्द्रियां शिथिल हो जाती हैं और सबसे ज्यादा शरीर के अन्दरूनी अवयव में ढीलापन आ जाता है,आंते कार्य करने में शिथिलता दर्शाने लगती हैं तब पाचन ठीक तरीके से नहीं हो पाता है। इस स्थिति का प्रभाव दिल एवं फेफड़ॊ पर विशेषतः पड़ता है। इन्द्रियों की शक्ति बढ़ाने के लिये,रस-रक्तादि धातुओं को बढ़ाने ,दिल,फेफड़ो व मस्तिष्क को सबल बनाने,शारीरिक कान्ति बढ़ाने,शुक्र व ओज को बढ़ाकर स्वास्थ्य को स्थिरता प्रदान करने के लिये यह परम उत्तम रसायन है। इस रस का लेने के तरीके में भेद से अनेक प्रकार से उपयोग करा जाता है।
नवरत्न कल्पामृत रस: - यह रस एक उत्तम रसायन महौषधि है। इसका एक वर्ष तक कल्प के रूप में भी प्रयोग करा जाता है। यह रस वातहर, वातानुलोमक,पित्तशामक,विषनाशक,रक्तप्रसादक,मस्तिष्क पुष्टिकर व दिल को बल देने वाला है। यह रस-रक्तादि धातुओं को पुष्ट व सबल करता है। ओज की बढ़ोत्तरी करता है। मुखमंडल की कान्ति बढ़ाता है। बवासीर, प्रमेह, मधुमेह, क्षय, जीर्णज्वर, श्वास-कास, मूत्राघात, मूत्र में मवाद(पूय) आना, जीर्णवात रोग, आमवात, उदावर्त, गैस बनना, अंदरूनी घाव, अर्बुद(कैंसर), कण्ठमाला, मदात्यय, दिल के रोग, विसूचिकादि की जीर्णावस्था में शक्ति प्रदान करने के लिये व विजातीय धातुकणों को बाहर निकालने के लिये यह मुख्य औषधि माना जाता है। यह समस्त इन्द्रियों, शारीरिक अवयवों, नाड़ियों मे भीतर मल, आम, मेद, विष, कीटाणु या अन्यान्य विजातीय द्रव्यों के संचय को रोक कर उन्हें बाहर निकाल देता है। चयापचय(मेटाबालिक) क्रिया को नियमित कर देता है। वात नाड़ियों, दिल, मस्तिष्क, किडनी एवं लीवर आदि इन्द्रियों को बहुत सबल बना देता है। तन्द्रा, आलस्य, शान्त नींद न आना, किसी कार्य में मन न लगना, मष्तिष्क में घड़ी के समान ठक-ठक सा महसूस होना, चक्कर आना, थोड़े से परिश्रम से बहुत थकान आ जाना जैसी स्थितियों में यह रस बहुत प्रभावी है। यह रस जीर्णवात रोग, आमवात, सन्धिवात, जीर्णसुजाक, फिरंगरोग, कण्ठमाला, अन्तर्विद्रधि अदि रोगों में बेहद प्रभावशाली है। यह सप्त धातुपोषक व वर्धक है। विभिन्न रोगों से जर्जर हो जाने वाले रोगियों पर जब मैंने इसका प्रभाव देखा तो वह चमत्कारिक था एकदम दुबले व बलहीन हुए मरीज पुनः भले चंगे होकर जीवन यापन करने लगे किन्तु यह एक अत्यंत मंहगी औषधि है क्योंकि इसमें माणिक्य, नीलम, पन्ना, पुखराज, वैदूर्य, गोमेद, मोती जैसे कीमती द्रव्यों की पिष्टियां मिलायी जाती हैं साथ ही स्वर्ण भस्म तथा शिलाजीत का भी समावेश होता है अतः बेहद आवश्यक है कि यह किसी विश्वस्नीय स्थान या व्यक्ति से ही लिया जाए अन्यथा नकली मिल जाने पर लाभ नहीं होता व व्यर्थ ही आयुर्वेद का नाम बदनाम होता है।
बुधवार, नवंबर 12, 2008
बिजली जैसी ताकत प्रदान करने वाला महाशक्तिशाली योग
Published :
11/12/2008 01:35:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)

यह सभी वर्गों के पुरुषों के लिये अत्यंत उत्तम स्वास्थ्यवर्धक वटी ( टैबलेट) है जो कि बेहद प्रभावी तथा बहुमूल्य जड़ी-बूटियों का बेहतरीन मिश्रण करके बनाई गयी है। इसमें शुद्ध शिलाजीत, मकरध्वज, बंग भस्म, अभ्रक भस्म २०० पुटी, जायफल, लवंग, कर्पूर, इलायची, अश्वगंधा, शुद्ध व उच्च कोटि के काश्मीरी केसर(ज़ाफ़रान) का योग दुर्लभ व बिजली जैसी ताकत प्रदान करने वाला महाशक्तिशाली योग है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को जिन चमत्कारिक औषधियों के कारण संसार भर में जाना व सम्मान करा जाता है उनमें से शिलाजीत तथा मकरध्वज प्रमुख हैं। इन्हीं अनुपम रसायनों के मिश्रण से इस महौषधि को तैयार करा गया है। इनके अतिरिक्त जिन औषधियों का व्यवहार इसमें करा गया है वे भी अत्यंत प्रभावशाली व असरकारक हैं। इस योग के प्रभाव से वीर्य संबंधी सारे विकारों एवं रोगों में आश्चर्यजनक लाभ होता है। ये जादुई असर समेटे गोलियां भोजन को पचाकर रस आदि शरीर की सप्त धातुओं को क्रमशः सुधारती हुई देह की अंतिम धातु "वीर्य" का शुद्ध स्थिति में निर्माण करती हैं जिससे कि शरीर में नवजीवन व स्फूर्ति का संचार होता है। जो व्यक्ति शिलाजीत और मकरध्वज के गुणों के बारे में जानते हैं वे इस औषधि के प्रभाव के बारे में जरा भी संदेह नहीं कर सकते हैं। ये अनुपान भेद(दवा लेने के तरीके से यानि दूध, शहद, पानी, मलाई, मक्खन आदि) से अनेक रोगों को तत्काल दूर करने में सहायक हैं। प्रमेह के साथ होने वाली खांसी, सर्दी, जुकाम, कमर दर्द, भूख की एकदम कमी, स्मरण शक्ति यानि याददाश्त की कमी जैसी व्याधियां इस महौषधि के सेवन से दूर हो जाती हैं। इसके सेवन से शरीर पुष्ट हो जाता है साथ ही भूख लगने लगती है व पाचन सही तरीके से होने लगता है। इस प्रकार जो व्यक्ति अनेक औषधियां लगातार सेवन कर करके दवाओं का गोदाम बन गये हैं वे सभी बाजारू दवाएं छोड़ कर यदि मात्र इसी दवा का सर्दियों से मौसम में नियमित रूप से सेवन कर लें तो किसी दूसरी दवा की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है। चढ़ती जवानी में जब शरीर में हारमोनल परिवर्तन होते हैं यानि कि बचपन से जवानी में इन्सान कदम रखता है तो जब शरीर में वीर्य का प्रत्यक्ष प्रादुर्भाव होता है तो मानव देह में वह ताकत है जो कि शरीर में एक नए निर्माण की क्षमता पैदा करती है तो उसे सम्हाल पाना एक कठिन कार्य होता है जो कि सभी के वश में नहीं होता इसी कारण यह महाशक्ति हस्तमैथुन आदि के द्वारा देह से बाहर निकल जाती है। जब पारिवारिक जीवन को सही ढंग से चलाने के लिये उस वीर्य रूपी महाशक्ति की आवश्यकता पड़ती है तब तक खजाना खाली हो चुका होता है यानि जवानी आते-आते ही अच्छे-खासे जवान के चेहरे की रौनक और चमक गायब हो जाती है, संभोग के समय वीर्य संबंधी परेशानियां मुंह फाड़ कर सुरसा की भांति खड़ी हो जाती हैं और वैवाहिक जीवन का सत्यानाश हो जाता है। उम्र बढ़ने पर देह में निर्बलता का आना एक सहज सी प्रक्रिया है जो कि मेटाबालिक क्रियाओं के फलस्वरूप होता है और रोग प्रतिरोध क्षमता कम होने लगती है किन्तु यह महौषधि उस लुप्त होती शक्ति को पुनः उत्तेजित कर मनुष्य को सबल और निरोगी बनाए रखती है।
इस महौषधि को अनेक समस्याओं में प्रयोग करा जा सकता है जैसे कि स्वप्न दोष(Night fall)या रात्रि में सोते समय अपने आप ही अंडकोश के स्राव का निकल जाने पर इसे सुबह-शाम दो गोली गुनगुने गर्म दूध में मिश्री(खड़ी साखर) मिला कर लेने से कुछ समय में यह रोग जड़ से समाप्त हो जाता है। शीघ्रपतन(Premature ejaculation) यानि संभोग काल में बहुत जल्दी ही बिना संतुष्टि हुए वीर्य का निकल जाने पर इस महौषधि की दो गोली को रूमी मस्तंगी एक रत्ती(१२५ मिलीग्राम) + छह रत्ती सफेद मूसली के साथ गुठली निकाले छुहारे के बीच रख कर चबा लें और ऊपर से मिश्री मिला गुनगुना गर्म दूध पिएं तो मात्र कुछ ही समय में चमत्कार हो जाता है और निर्बल सा महसूस करने वाला रोगी बलिष्ठ बन जाता है।
इसी प्रकार इस महान औषधि को अपने वैद्यजी या डाक्टर की सलाह से तमाम रोगों में प्रयोग करके एक नया ऊर्जा से भरा जीवन जी सकते हैं। यदि स्वस्थ व्यक्ति भी एक-एक गोली दूध के साथ रोजाना ले तो एक अत्युत्तम सर्वश्रेष्ठ अनुपम टानिक की तरह से यह औषधि कार्य करती है।
गुरुवार, नवंबर 06, 2008
पथरी के दो केस
Published :
11/06/2008 06:53:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
आदरणीय डाक्टर साहब,
नमस्ते
मैं आपसे आज पथरी के दो रोगीयों के बारे में इलाज जानना चाहता हूँ एक तो मेरे मामा जी है जिनकी उम्र लगभग 40 वर्ष है उन्हे गुर्दे में पथरी रहती है वह तीन- चार बार पथरी के लिए आप्रेशन करवा चूके हैं परन्तु उनको अब फिर पथरी हो गई है ऐसे ही मेरी बहन की बेटी हैं (भांजी) इसकी उम्र 10 वर्ष के लगभग है उसे बलैडर में पथरी हो गई । तो उसके लिए ईलाज क्या करें । धन्यवाद सहित ।
आपका आभारी
नवीन गुप्ता, मोहाली
प्रिय नवीन भाईसाहब
पहले आपके मामाजी के बारे में लिखता हूं। जैसा कि आपने बताया कि वे तीन-चार बार शल्य चिकित्सा करवा चुके हैं किंतु फिर से पथरी हो जाती है। ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि जाना जाए कि मूल कारण क्या है, संभव है कि उनके खानपान की आदतें ऐसी हों जो कि बार-बार पथरी बन जाती है अथवा गुर्दे ही इस स्थिति में हों कि सम्यक कार्य न कर पा रहे हों। जो दवाएं लिख रहा हूं उन्हें लगातार छह माह तक सेवन कराइये।
१ . बहुत तेज दर्द होने पर ही ये दवाएं दीजिये किंतु घर पर अवश्य रखिये क्योंकि कब तेज दर्द होने लगेगा ये तो पता नहीं रहता है। शूलवज्रिणी वटी १ गोली + महाशूलहर रस १ गोली शहद से चटा दें और उसके ऊपर से तुरंत ही पच्चीस बूंद अहिफेनासव बराबर हल्के गर्म पानी में मिला कर पिला दें, दर्द में जल्दी ही राहत मिलेगी।
२ .हजरुलयहूद भस्म १० ग्राम + शुभ्रा भस्म १० ग्राम + जवाखार १० ग्राम + सुहागा १० ग्राम + कलमी शोरा १० ग्राम +नवसादर १० ग्राम + सफ़ेद जीरा १० ग्राम + बड़ी इलायची के बीज १० ग्राम + कबाब चीनी १० ग्राम इन सभी दवाओं को एकत्र कर बहुत कस कर घॊंट लीजिये और फिर इस मिश्रण में से दो ग्राम की मात्रा लेकर सुबह- शाम गोक्षुरादि क्वाथ के दो चम्मच से सेवन करें।
इन दवाओं के सेवन से उनकी समस्या हमेशा के लिये समाप्त हो जाएगी।
अब आपकी भांजी के बारे में बताता हूं।
बहुत तेज दर्द होने की स्थिति में उसे ये दवा दें।
१ . शूलवज्रिणी वटी आधी गोली + महाशूलहर रस आधी गोली + वृक्कशूलान्तक रस आधी गोली तीनों को मिला कर एक खुराक बनाएं व शहद से चटा दें और उसके ऊपर से तुरंत ही पंद्रह बूंद अहिफेनासव बराबर हल्के गर्म पानी में मिला कर पिला दें।
२ . बच्ची को सुबह नाश्ता तथा दोपहर का भोजन करा दें, इसके बाद उसे कुछ खाने को न दें बस प्यास लगने पर पानी दे सकते हैं। रात में सात बजे के आस पास उसे चार छोटे चम्मच शुद्ध जैतून का तेल पिलाएं फिर पंद्रह मिनट बाद एक चम्मच नींबू का रस पिलाएं। इसी तरह से बारी बारी से चार छोटे चम्मच शुद्ध जैतून का तेल पिलाएं फिर पंद्रह मिनट बाद एक चम्मच नींबू का रस पिलाएं जब लगभग सौ मिलीलीटर तक तेल पी ले तो बंद कर दें(कई बार रोगी ५० मिली. ही पी पाता है और उल्टी करने लगता है इस बात से परेशान न हों)। यही क्रम आप लगभग सात दिन तक चलाएं।
३ . कुटकी चार ग्राम + शंख भस्म १ ग्राम + मंडूर भस्म १ ग्राम में २० मिली गोमूत्र + २० मिली पुनर्नवासव + २० मिली मकोय का रस मिलाएं और कस कर घॊंट लें ताकि सूख कर गोली बनने लायक हो जाए इस की १२५ मिग्रा. की गोलियां बना कर धूप में सुखा लीजिये व एक एक गोली पानी के साथ सुबह नाश्ते के बाद रोज दीजिये।
यह उपचार मात्र पंद्रह दिन कर लेने से गाल-ब्लेडर की पथरी से मुक्ति मिल जाएगी। यदि पथरी यूरिन-ब्लैडर में है तो मामा जी को बतायी दवाएं बच्ची की उम्र के अनुसार आधी मात्रा में दीजिये। एक माह बाद एक्स-रे परीक्षण या सोनोग्राफ़ी करवा कर देख लीजिये, शत-प्रतिशत आराम आ जाएगा। यह दवाएं हजारों रोगियों को लाभ दे चुकी हैं अनुभूत हैं।
नमस्ते
मैं आपसे आज पथरी के दो रोगीयों के बारे में इलाज जानना चाहता हूँ एक तो मेरे मामा जी है जिनकी उम्र लगभग 40 वर्ष है उन्हे गुर्दे में पथरी रहती है वह तीन- चार बार पथरी के लिए आप्रेशन करवा चूके हैं परन्तु उनको अब फिर पथरी हो गई है ऐसे ही मेरी बहन की बेटी हैं (भांजी) इसकी उम्र 10 वर्ष के लगभग है उसे बलैडर में पथरी हो गई । तो उसके लिए ईलाज क्या करें । धन्यवाद सहित ।
आपका आभारी
नवीन गुप्ता, मोहाली
प्रिय नवीन भाईसाहब
पहले आपके मामाजी के बारे में लिखता हूं। जैसा कि आपने बताया कि वे तीन-चार बार शल्य चिकित्सा करवा चुके हैं किंतु फिर से पथरी हो जाती है। ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि जाना जाए कि मूल कारण क्या है, संभव है कि उनके खानपान की आदतें ऐसी हों जो कि बार-बार पथरी बन जाती है अथवा गुर्दे ही इस स्थिति में हों कि सम्यक कार्य न कर पा रहे हों। जो दवाएं लिख रहा हूं उन्हें लगातार छह माह तक सेवन कराइये।
१ . बहुत तेज दर्द होने पर ही ये दवाएं दीजिये किंतु घर पर अवश्य रखिये क्योंकि कब तेज दर्द होने लगेगा ये तो पता नहीं रहता है। शूलवज्रिणी वटी १ गोली + महाशूलहर रस १ गोली शहद से चटा दें और उसके ऊपर से तुरंत ही पच्चीस बूंद अहिफेनासव बराबर हल्के गर्म पानी में मिला कर पिला दें, दर्द में जल्दी ही राहत मिलेगी।
२ .हजरुलयहूद भस्म १० ग्राम + शुभ्रा भस्म १० ग्राम + जवाखार १० ग्राम + सुहागा १० ग्राम + कलमी शोरा १० ग्राम +नवसादर १० ग्राम + सफ़ेद जीरा १० ग्राम + बड़ी इलायची के बीज १० ग्राम + कबाब चीनी १० ग्राम इन सभी दवाओं को एकत्र कर बहुत कस कर घॊंट लीजिये और फिर इस मिश्रण में से दो ग्राम की मात्रा लेकर सुबह- शाम गोक्षुरादि क्वाथ के दो चम्मच से सेवन करें।
इन दवाओं के सेवन से उनकी समस्या हमेशा के लिये समाप्त हो जाएगी।
अब आपकी भांजी के बारे में बताता हूं।
बहुत तेज दर्द होने की स्थिति में उसे ये दवा दें।
१ . शूलवज्रिणी वटी आधी गोली + महाशूलहर रस आधी गोली + वृक्कशूलान्तक रस आधी गोली तीनों को मिला कर एक खुराक बनाएं व शहद से चटा दें और उसके ऊपर से तुरंत ही पंद्रह बूंद अहिफेनासव बराबर हल्के गर्म पानी में मिला कर पिला दें।
२ . बच्ची को सुबह नाश्ता तथा दोपहर का भोजन करा दें, इसके बाद उसे कुछ खाने को न दें बस प्यास लगने पर पानी दे सकते हैं। रात में सात बजे के आस पास उसे चार छोटे चम्मच शुद्ध जैतून का तेल पिलाएं फिर पंद्रह मिनट बाद एक चम्मच नींबू का रस पिलाएं। इसी तरह से बारी बारी से चार छोटे चम्मच शुद्ध जैतून का तेल पिलाएं फिर पंद्रह मिनट बाद एक चम्मच नींबू का रस पिलाएं जब लगभग सौ मिलीलीटर तक तेल पी ले तो बंद कर दें(कई बार रोगी ५० मिली. ही पी पाता है और उल्टी करने लगता है इस बात से परेशान न हों)। यही क्रम आप लगभग सात दिन तक चलाएं।
३ . कुटकी चार ग्राम + शंख भस्म १ ग्राम + मंडूर भस्म १ ग्राम में २० मिली गोमूत्र + २० मिली पुनर्नवासव + २० मिली मकोय का रस मिलाएं और कस कर घॊंट लें ताकि सूख कर गोली बनने लायक हो जाए इस की १२५ मिग्रा. की गोलियां बना कर धूप में सुखा लीजिये व एक एक गोली पानी के साथ सुबह नाश्ते के बाद रोज दीजिये।
यह उपचार मात्र पंद्रह दिन कर लेने से गाल-ब्लेडर की पथरी से मुक्ति मिल जाएगी। यदि पथरी यूरिन-ब्लैडर में है तो मामा जी को बतायी दवाएं बच्ची की उम्र के अनुसार आधी मात्रा में दीजिये। एक माह बाद एक्स-रे परीक्षण या सोनोग्राफ़ी करवा कर देख लीजिये, शत-प्रतिशत आराम आ जाएगा। यह दवाएं हजारों रोगियों को लाभ दे चुकी हैं अनुभूत हैं।
सोमवार, नवंबर 03, 2008
मेरी नाक से भयंकर दुर्गंध आती है
Published :
11/03/2008 04:05:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
डाक्टर साहब,नमस्ते
मेरी उम्र बीस साल है। मैं एक छात्र हूं। पिछले तीन माह से मुझे नाक के दोनो तरफ़ अंदर कुछ रेंगता सा प्रतीत होता था। मैंने E.N.T. चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने बताया कि दर्द और ऐसे एहसास का कारण मेरी विचित्र बीमारी है। मुझे बताया गया कि मुझे पीनस नामक रोग है। मेरी नाक से भयंकर दुर्गंध आती है। मुझे बताया गया कि अंदर शायद कीड़े भी हैं इसलिये आपरेशन करना पड़ेगा। मेहरबानी करके कोई आयुर्वेदिक इलाज बताइये।
जैनेन्द्र सनोई,ओरछा
जैनेन्द्र जी, आपकी बीमारी से होने वाली परेशानी को हम समझते हैं। आप निम्न उपचार लीजिये और ईश्वर की दया से आप जल्दी ही स्वस्थ हो जाएंगे।
१ . आरोग्यवर्धिनी बटी १ टैबलेट सुबह-शाम जल से लें।
२ . कपूर और शुद्ध तारपीन का तेल बराबर मात्रा में लेकर एक कांच की शीशी में भर कर कस कर ढक्कन लगा दें और तेज धूप में इस शीशी को दो घंटे रख दें तो सारा कपूर तेल में मिश्रित हो जाएगा। आब इस दवा की चार-चार बूंदें दोनो नाक के छिद्रों में सुबह-शाम डालें।
पूरा विश्वास है कि मात्र चार या पांच दिन में आपको आराम हो जाएगा। पूर्ण लाभ के लिये कम से कम पंद्रह दिन तक अवश्य दवा लें।
मेरी उम्र बीस साल है। मैं एक छात्र हूं। पिछले तीन माह से मुझे नाक के दोनो तरफ़ अंदर कुछ रेंगता सा प्रतीत होता था। मैंने E.N.T. चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने बताया कि दर्द और ऐसे एहसास का कारण मेरी विचित्र बीमारी है। मुझे बताया गया कि मुझे पीनस नामक रोग है। मेरी नाक से भयंकर दुर्गंध आती है। मुझे बताया गया कि अंदर शायद कीड़े भी हैं इसलिये आपरेशन करना पड़ेगा। मेहरबानी करके कोई आयुर्वेदिक इलाज बताइये।
जैनेन्द्र सनोई,ओरछा
जैनेन्द्र जी, आपकी बीमारी से होने वाली परेशानी को हम समझते हैं। आप निम्न उपचार लीजिये और ईश्वर की दया से आप जल्दी ही स्वस्थ हो जाएंगे।
१ . आरोग्यवर्धिनी बटी १ टैबलेट सुबह-शाम जल से लें।
२ . कपूर और शुद्ध तारपीन का तेल बराबर मात्रा में लेकर एक कांच की शीशी में भर कर कस कर ढक्कन लगा दें और तेज धूप में इस शीशी को दो घंटे रख दें तो सारा कपूर तेल में मिश्रित हो जाएगा। आब इस दवा की चार-चार बूंदें दोनो नाक के छिद्रों में सुबह-शाम डालें।
पूरा विश्वास है कि मात्र चार या पांच दिन में आपको आराम हो जाएगा। पूर्ण लाभ के लिये कम से कम पंद्रह दिन तक अवश्य दवा लें।
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गुग्गुल
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