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रविवार, मार्च 29, 2009

पित्त संबंधी परेशानियां बनी रहती हैं

आदरणीय सर जी नमस्ते, मेरा स्वभाव बहुत गर्म है हमेशा पित्त संबंधी परेशानियां बनी रहती हैं, गुस्सा बहुत आता है, पसीना आता रहता है जिस मौसम में लोग कांपते रहते हैं मुझे सर्दी नहीं लगती है, छाती में जलन हुआ करती है कभी कभी लगता है कि पेट में तेज़ाब सा भर गया हो। तमाम जेलुसिल टाइप की दवाएं पीता रहता हूं लेकिन थोड़ी ही देर तक जलन शान्त होती है फिर शुरू हो जाती है। डर है कि कहीं अल्सर न हो जाए। कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये जो सस्ता भी हो। धन्यवाद
संजय पचौरी, जबलपुर
संजय जी आपने अपनी समस्याओं को लेकर बहुत लम्बा सा मेल भेजा था जिसमें से मुख्य बातें यहां सवाल के रूप में ली जा रही हैं। आप की समस्या का हल प्रस्तुत है जो कि मंहगा नहीं है क्योंकि स्वास्थ्य से बढ़कर भला इस दुनिया में क्या है, लीजिये आप निम्न औषधि लें-
१ . बाजार में मिलने वाला सादा गुलकंद जो कि आपको पान-तंबाकू का होलसेल सामान बेचने वालों के पास से मिल जाएगा वह चार सौ ग्राम ले लीजिये + शुद्ध शहद २०० ग्राम + बीज निकाला हुआ मुनक्का २०० ग्राम + बादाम की गिरी १५० ग्राम,इसे रात को पानी में भिगो लीजिये ताकि नर्म हो जाए + सौंफ का चूर्ण ५० ग्राम + वंशलोचन(इसे तवाशीर भी कहते हैं) २० ग्राम + गिलोय सत्व १० ग्राम +लौह भस्म ५ ग्राम + सतपुटी अभ्रक भस्म ५ ग्राम + स्वर्णमाक्षिक भस्म ५ ग्राम + प्रवाल पिष्टी ५ ग्राम
इन सबको मिक्सर में डाल कर एक जान कर लीजिये। एक-एक चम्मच दिन में दो बार गाय के ठंडे दूध से लीजिये। विश्वास रखिये कि आपकी तमाम समस्याएं छूमंतर हो जाएंगी। इसका सेवन आप एक सप्ताह करके ही चमत्कार देख सकते हैं ज्यादा समय तक लेने से कोई हानि नहीं बल्कि लाभ ही होता है।