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गुरुवार, मार्च 13, 2008

नींद गायब है इस कारण पागल न हो जाऊं ......

डाक्टर साहब मैं पेशे से वकील हूं । आप अंदाज लगा सकते हैं कि मैं किस कदर मानसिक श्रम करता हूं और चौबीसो घंटे मानसिक दबाव बना रहता है । इस मानसिक उद्वेग और उत्तेजना के चलते नींद गायब है और अब लगता है कि कहीं इस कारण पागल न हो जाऊं । एलोपैथी की दवा "डायजेपाम" के दुष्प्रभावों से वाकिफ़ हूं इसलिये हिम्मत नहीं होती लेने की । कोई नशा नहीं करता हूं । कोई कारगर इलाज बताइये ताकि डायजेपाम ए बच सकूं क्योंकि एलोपैथी वाले डाक्टर को दिखाया तो उसने यही दवा लिख दी है । मेरी उम्र ५९ वर्ष है ।
एडवोकेट नरेन्द्र सिंह,आगरा
सिंह साहब आपकी तकलीफ़ भली प्रकार से समझ रहा हूं । चलिये सीधे आपका उपचार बताता हूं..
१ . चिन्तामणि चतुर्मुख रस आधी गोली(१२५ मिलीग्राम की गोली को तोड़ कर आधा कर लें यानि लगभग ६१ मिलीग्राम ) + वातकुलान्तक रस १ गोली + माहेश्वर रसायन १ ग्राम ,इन सबको मिला कर एक चम्मच शहद से दिन में दो बार चाटें ।
२ . संभव है कि यह दवा मंहगी लगे तो एकदम सरल और सस्ता उपाय बताता हूं ,तीन ग्राम भांग को गाय के घी में डाल कर पका लीजिए और उस घी को छान लीजिए । इस घी की दोनो पैरों के तलवों में हलके हाथ से मालिश करिये ।
३ . दिन में दो बार चंद्रासव + अश्वगंधारिष्ट को मिला कर दो दो चम्मच लें (अगर चंद्रासव नहीं मिलता है तो अश्वगंधारिष्ट ही लिया जा सकता है )
४ . सर्पगन्धा चूर्ण ५० ग्राम + रस सिन्दूर ३ ग्राम ,इस कुल ५३ ग्राम दवा को रस सिन्दूर की चमक समाप्त होने तक घुटवा लें अधिकतम दस मिनट लगेंगे । एक-एक रत्ती दवा दिन में तीन बार गाय के दूध से लें (ध्यान रहे दवा खाली पेट न लें)
५ . यदि अनिद्रा के साथ रक्तचाप भी बढ़ा हो तो ऊपर लिखी दवा में थोड़ा बदलाव करेंगे ,सर्पगन्धा चूर्ण ५० ग्राम + जहरमोहरा पिष्टी ६ ग्राम + प्रवाल पिष्टी ६ ग्राम + गिलोय सत्व ६ ग्राम ,इन सबको लेकर कस कर खरल करा लें । आधा-आधा ग्राम मात्रा दिन में तीन बार गुलकंद के साथ लीजिए । (सर्पगन्धा को स्थानीय भाषा में सफ़ेद चांद,छोटी चांदड़,धवल बरुआ नामों से भी जाना जाता है)
६ . सोंठ + छोटी पीपर + काली मिर्च + पीपरामूल इन सबको समभाग लेकर बारीक पीस लीजिए । चूर्ण में शहद मिला कर २५० मिलीग्राम की गोलियां बना लें और ऊपर से इन गोलियों को सोंठ के बारीक चूर्ण में लपेट लें ताकि ये आपस में चिपकें नहीं । दिन में तीन बार २-२ गोलियां लीजिए ।
इनके नियमित प्रयोग से आपको अच्छी नींद तो आयेगी ही और साथ में मस्तिष्क भी पित्त की शान्ति के कारण ठंडा रहेगा । जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाइए और ईश्वर को धन्यवाद करिए ।

शनिवार, मार्च 01, 2008

चक्कर आना

डॉक्टर साहब मैं एक प्राइवेट कोचिंग क्लास चलाता हूं । सुबह छह बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक और फिर दो बजे से लेकर रात नौ बजे तक लगातार ट्यूशन पढ़ाता हूं । करीब दो माह पहले मलेरिया हुआ था जो कि चार दिन में ठीक हो गया किंतु कमजोरी बनी रहती है । कुछ सप्ताह भर से ऐसा प्रतीत होता है मानो शरीर कांप रहा हो ,चारों ओर की चीजे घूम रही हैं ,एकाएक खड़े होने पर आंखो के सामने कुछ देर के लिये अंधेरा छा जाता है ,दो-तीन बार तो मैं संभल न सका और गिर भी पड़ा । दिल की धड़कने एकदम तेज हो जाती हैं ,कब्जियत बनी रहती है ,पेशाब कम और गर्म सा आता है ।
जय प्रकाश सिंह
कळंबोली(नई मुंबई)
भाईसाहब ,आयुर्वेद के अनुसार आपकी बीमारी को "भ्रमरोग" कहते हैं । इसके तमाम कारण होते हैं किन्तु आपको यह मलेरिया के दौरान जो आपने भरपूर क्लोरोक्विन की टैबलेट्स खाईं हैं उनका पश्चप्रभाव तथा अत्यधिक मानसिक श्रम के कारण मिलेजुले असर से है । रजोगुण युक्त पित्त एवं वायु से भ्रम की उत्पत्ति होती है,"पैत्तिके भ्रम एव च " ऐसा कहा गया है । सर्वप्रथम जरूरी है कि आपकी कोष्ठ शुद्धि कराई जाये जिसके लिये आप बड़ी हरड़ का चूर्ण छह ग्राम गर्म जल से रात को सोते समय लें ।
१ . जहरमोहरा ,मुक्ताशुक्ति भस्म,वंशलोचन,छोटी इलायची के बीजों का चूर्ण सबको बराबर मात्रा में ले कर सूक्ष्म कर लीजिए और सुबह दोपहर शाम आधा-आधा ग्राम दवा को आंवले के मुरब्बे के साथ लें ।
२ . लघ्वानंद रस एक गोली + रसराज रस एक चौथाई गोली की मिश्रित मात्रा को जटामांसी के दो ढक्कन काढ़े के साथ दिन में दो बार दें ।
३ . चिन्तामणि चतुर्मुख रस एक गोली(१२५ मिग्रा) + प्रवालपिष्टी २५० मिग्रा + मुक्ताशुक्ति भस्म १२५ मिग्रा को शहद के साथ चाट कर ऊपर से मिश्री मिला हुआ दूध २५० मिली. पी लें ।
४ . दशमूलारिष्ट + अश्वगंधारिष्ट दोनों को मिला कर २-२ बड़े चम्मच समान मात्रा में मिला कर भोजनोपरान्त दिन में दो बार लें ।
इन सभी उपायों में से कोई भी एक उपाय जो सस्ता और सुलभ जान पड़े ,प्रयोग करिये और फिर से पूरी ऊर्जा के साथ बच्चों को पढ़ाने में जुट जाइए ।