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यह सभी वर्गों के पुरुषों के लिये अत्यंत उत्तम स्वास्थ्यवर्धक वटी ( टैबलेट) है जो कि बेहद प्रभावी तथा बहुमूल्य जड़ी-बूटियों का बेहतरीन मिश्रण ...
कुछ सुझाव
शनिवार, फ़रवरी 23, 2008
शराब छोड़ने के साधुओं के आजमाए नुस्खे
दूसरा यह कि शिमला मिर्च(कैप्सिकम) जो कि मोटी-मोटी होती हैं व खाने में तीखी नहीं होती व सब्जी बनाने में प्रयोग करी जाती हैं ,ले लीजिए और उनका जूसर से रस निकाल लीजिए व इस रस का सेवन दिन में दो बार आधा कप नाश्ते या भोजन के बाद करें । आप चमत्कारिक रूप से पाएंगे कि आपकी शराब की तलब अपने आप घटने लगी है और एक दिन आप खुद ही पीने से इंकार कर देते हैं चाहे कोई कितना भी दबाव क्यों न डाले । ये दोनो उपाय सन्यासियों के आजमाए हुए हैं जोकि लोगों की शराब छुड़ाने के प्रसिद्ध रहे हैं ।
तीसरा तरीका उनके लिये है जो कि शिवाम्बु सेवन के पक्ष में हैं मैं यहां शिवाम्बु की महिमा नहीं बताउंगा क्योंकि वह एक विशाल विषय है और साथ ही कदाचित यहां उचित भी नहीं है । इतना जान लीजिए कि शिवाम्बु स्वमूत्र(अपने ही पेशाब) को कहते हैं । सुबह उठ कर यदि बीच की धार का सेवन करा जाए तो कुछ समय बाद स्वतः ही शराब के सेवन से अरुचि होने लगती है ।
शुक्रवार, फ़रवरी 22, 2008
शराब छोड़ना चाहता हूं .....
डाक्टर साहब, मेरा एक सवाल है। शराब छोड़ना चाहता हूं पर छोड़ नहीं पाता। सुबह कसम खा लेता हूं रोज कि नहीं पीनी। शाम होते ही सिर भारी होने लगता है और तलब महसूस होने लगती है। कोई ऐसी दवा या तरकीब बतायें ताकि शराब की तलब महसूस न हो।दूसरा सवाल है कि अगर मैं पिछले 15 साल से लगभग रोजाना पांच पैग दारू पी रहा हूं तो मेरा लीवर इस वक्त किस स्थिति में होगा। इसे ठीक रखने के क्या क्या देसी उपाय हो सकते हैं। मैं बहुत झिझकते हुए ये सवाल पूछ रहा हूं। कृपया उत्तर विस्तार से देने की कृपा करें। आपका आभारी रहूंगा। विनय, नई दिल्ली
**आत्मन मित्र,आपने अपनी जो स्थिति बताई उससे दुःख हुआ कि आपको दुर्भाग्य से शराब जैसी गन्दी चीज का व्यसन है लेकिन अब एक आशा की किरण दिख रही है क्योंकि आपने स्वयं ही अपने स्वास्थ्य के विषय में चिन्ता प्रकट करी है । आपकी अपने स्वास्थ्य के प्रति यही चिन्ता एक दिन आप्को अपने भीतर छिपे एक नये इंसान से मिलवाएगी जो पूर्णतः निर्व्यसनी होने के साथ बलिष्ठ एमं दूसरे शराब के लती लोगों को राह दिखाने वाला होगा । आपने लिखा है कि बहुत झिझकते हुए सवाल पूंछ रहा हूं ,अरे मेरे भाई जब शराब पीने में नहीं झिझकते हो तो उसे छोड़ने का विचार तो बहुत स्वागत योग्य है उसमें कैसा हिचकिचाना या झिझकना ।
पहली बात कि यदि आप यह मानते हैं कि आप जो कर रहे हैं वह गलत और नुक्सानदेह है तो फिर जान लीजिए कि आपने पहली परीक्षा तो सौ प्रतिशत अंको से उत्तीर्ण कर ली है । आप शराब छोड़ने के लिए कसम मत खाइए क्योंकि आपने स्वयं लिखा है कि आप रोज सुबह कसम खाते हैं और शाम को फिर कसम टूट जाती है इससे शराब तो नहीं छूटती बल्कि मन में खुद के कमजोर इच्छाशक्ति का होने का बोध जरूर आ जाता है । इसलिए आज से शराब छोड़ने की कसम खाना बिलकुल बंद कर दीजिये । अब हम मुद्दे की बात करते हैं कि जिससे आप जान सकें कि आपके शरीर में ऐसा क्या होता है कि जानते हुए भी कि ऐसा करना नुक्सानदेह है आप सब भूल कर शराब पी लेते हैं जिसे आपने तलब का नाम दिया है । इसके लिए पहले मैं आपको शराब से होने वालए नुक्सान बताउंगा जिससे कि आप को यह समझ आएगा कि आप अपना सर्वनाश अपने ही हाथों से कर रहे हैं ,तब तलब को भी जीतना आसान होगा क्योंकि आप एक समझदार इंसान हैं जो भला बुरा समझता है । हो सकता है कि आपको ऐसे भी लोग मिले हों जिनमें कुछ डाक्टर भी हों जो कि कम मात्रा में ली गयी शराब को बुरा नहीं बल्कि लाभदायक मानते हैं ऐसे लोग आपको दुनिया भर के उदाहरण दे डालते हैं कि अमुक औषधि में एल्कोहाल है और वह फ़लां रोग में फ़ायदा करती है जबकि उसमें तो एल्कोहाल का अनुपात तुम्हारी शराब से कहीं बहुत ज्यादा है या फिर अरे होम्योपैथी की अधिकतर दवाओं का आधार ही एल्कोहाल है या आयुर्वेद की कितनी दवाओं मे एल्कोहाल कंटेंट है वगैरह-वगैरह....... । यकीन मानिए कि ऐसे दोस्तों से बड़ा आपके परिवार और आपका कोई शत्रु नहीं है ।
शराब के लम्बे समय तक सेवन करने से आपको लीवर यानि कि यकृत में जो परेशानियां होती हैं पहले उन्हें जान लीजिए फिर आगे उपचार आदि सब बताता चलता हूं । आपका लीवर और किडनी शरीर के ऐसे अंग हैं जो कि आपके शरीर के इनपुट और आउटपुट को नियंत्रित रखते हैं । शुरूआती दौर में में शराब पीने से लीवर में दाह जैसी अनुभूति होती है लेकिन आप इसे शराब के साथ लिये गये नमकीन या काजू आदि के पाचन में उलझा कर नजरअंदाज कर जाते हैं और धीरे-धीरे जब कुछ माह बीत जाते हैं तब आपको पता चलता है कि पहले जिस शराब को आप बस थकान या मानसिक तनाव दू्र करने के लिये पी रहे थे उसकी मात्रा बढ़ती जा रही है । पहले तो एक ही पैग में काम चल जाता था अब दो पैग लेना पड़ रहा है ,इस तरह धीरे से यह आपके शरीर में पहले मेहमान बन कर आती है और फिर आपके मन और देह दोनो पर काबिज़ हो जाती है और कसमों का टूटना शुरू हो जाता है । आपके लीवर की पोर्टल वेन(portal vein) की छोटी-छोटी शाखाएं और आस-पास के संयोजक यानि जोड़ने वाले तंतु या ऊतक (tissues) रोगग्रस्त होकर नष्ट होना प्रारंभ हो जाते हैं । जानिए कि टिश्यूज़ क्या हैं ? किसी मकान में जैसे ईंट ,पत्थर ,मिट्टी ,चूना या सीमेंट व रंग का इस्तेमाल होता है वैसे ही आपके शरीर मे निर्माण में रस ,रक्त ,मांस ,अस्थि ,मेद ,मज्जा ,और शुक्र का उपयोग होता है ।इनकी कायनात या समष्टि ही यह आपका शरीर है । अक्सर आप जिस रोग से घेरे जा रहे होते हैं वह है "सिरोसिस ऒफ़ लीवर" (Cirrhosis of liver) । इस रोग में लीवर के ऊपरी ऊतक नष्ट हो जाते हैं व लीवर कड़ा और सिकुड़ा हुआ हो जाता है तथा आकार में छोटा पड़ जाता है । यह अवस्था इसलिये होती है कि लीवर में रक्त वाहिनी नलिकाओं में बाधा आने लगती है । फलतः जो लक्षण आपके शरीर पर दिखते हैं उनमें आपको बहुत कमजोरी महसूस होना ,आंख-मुंह बैठने लगते हैं ,पसलियां बाहर दिखने लगतीं हैं ,लीवर में तेज़ असहनीय दर्द होता है और चूंकि रक्तवाहिनियां अवरुद्ध हो चुकी होती हैं तो लीवर पर सूजन आने लगती है ,प्लीहा(spleen) भी बढ़ जाती है ,छाती और पेट के ऊपर की नसें फूलकर उभर आती हैं । इसी क्रम में आप दवा भी खा लेते हैं और शराब का सेवन भी जारी रखते हैं और धीरे-धीरे जब आप सुबह उठते हैं तो जी मचलाता रहता है या कभी तो उल्टी भी हो जाती है ,सारी-सारी रात नींद नहीं आती और करवटें बदलते रात बीत जाती है ,पेट में गड़बड़ी रहने लगती है ,पेट फूला हुआ सा प्रतीत होने लगता है साथ ही हल्का सा बुखार बना रहने लगता है । मूत्र की मात्रा कम होने लगती है ,पैर सूजने लगते हैं और पेट में पानी भरकर जलोदर रोग होने की स्थिति हो जाती है ।
मुंह और लैट्रिन से रक्त आ सकता है ,दिमाग़ी वहम होने लगते हैं जैसे कि आप बेहोश हो जाएं और अण्ट-शण्ट प्रलाप करने लगें जैसे कि आपकी पत्नी और बच्चे आपको मार डालना चाहते हैं वगैरह-वगैरह...,फिर मूर्च्छा गहराने लगती है और इसी हालत में मौत आपको घेर लेती है । इस तरह आपके भीतर की हजारों अच्छाइयां बस आपकी एक कमजोर आदत के कारण आपके साथ चली जाती हैं । आपको ऐसा बोलने वाले भी मिल जाते होंगे कि यार मौत तो एक दिन आनी ही है तो क्यों न मजे कर के मरें ,मन क्यों मारा जाए , मरते तो वो भी हैं जो शराब नहीं पीते हैं , लीवर सिरोसिस तो शराब न पीने वालों को भी हो सकता है इत्यादि....। सबसे पहले तो ऐसे लोगों से सम्पर्क सीमित कर दीजिए ताकि अनावश्यक बातों का जहर दिमाग में न आए । आपको होने वाल रोग सिरोसिस ऒफ़ लीवर प्रायः चार तरह का होता है :-
१. एट्रोफिक सिरोसिस(Atrophic cirrhosis) , २. हाइपरट्रोफिक सिरोसिस(Hypertrophic cirrhosis) , ३. फैटी सिरोसिस(Fatty cirrhosis) ,४. ग्लाइसोनिअन सिरोसिस(Glysonian cirrhosis) .
आज आपने जाना कि आपकी पसंदीदा शराब जो इस समय गिलास में है वह कितनी जानलेवा है ,कल आगे बताउंगा कि आप इस नामुराद से कैसे पीछा छुड़ा सकते हैं................
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आप इन औषधियों को मात्र उत्पादन मूल्य पर हमसे मंगवा सकते हैं
अग्निकुमार रस
अर्शोघ्नी बटी
आनंद भैरव रस
अजीर्ण कंटक रस
अर्शकुठार रस
आमवातेश्वर रस
आमवातारि रस
अश्वकंचुकी(घोड़ाचोली)रस
अग्नितुंडी बटी
अमरसुंदरी बटी
आरोग्यवर्धिनी
बटी
आमलकी रसायन
इच्छाभेदी रस
उपदंश कुठार रस
उन्माद गजकेशरी
रस
एकांगवीर रस
एलादि वटी
कनकसुंदर रस
कफ़कुठार रस
कुष्ठकुठार रस
कफ़केतु रस
कुमारकल्याण रस
कामदुधा रस
कृव्यादि रस
कफ़कर्तरी रस
कल्पतरू रस
कामधेनु रस
कृमिकुठार रस
कृमिमुग्दर रस
कफ़चिंतामणि रस
कांकायन बटी
कन्यालोहादि बटी
खैरसार बटी
खदिरादि बटी
गंधक बटी
गंधक रसायन
गर्भपाल रस
गुड़मार बटी
गुल्मकुठार रस
ग्रहणीकपाट रस
ग्रहणी गजेन्द्र
रस
चंद्रप्रभा बटी
चतुर्भुज रस
चंद्रामृत रस
चंदनादि बटी
चंद्रान्शु रस
चतुर्मुख रस
चित्रकादि बटी
चिंतामणि
चतुर्मुख रस
चंद्रकला रस
चिंतामणि रस
चौंसठ प्रहरी
पीपल
जवाहरमोहरा
दंतोद्भेदगदान्तक
रस
हिंगुलेश्वर रस
हृदयार्णव रस
हिंग्वादि बटी,
ज्वरांकुश रस
जयमंगल रस
लघुमालिनी बसंत
रस
लहशुनादि बटी
लवंगादि बटी
लक्ष्मीनारायण रस
लक्ष्मीविलास रस
लक्ष्मीनारायण
रस(नारदीय)
लाई रस
लीलाविलास रस
लोकनाथ रस
मधुमेहनाशिनी बटी
महाज्वरांकुश रस
महाशंख बटी
महामृत्युंजय रस
महावात विध्वंसन
रस
महालक्ष्मी विलास
रस
मकरध्वज बटी
मन्मथाभ्र रस
मूत्रकृच्छान्तक
रस
मरिच्यादि बटी
मृत्युन्जय रस
नृपतिवल्लभ रस
नागार्जुनाभ्र रस
नष्टपुष्पान्तक
रस
नित्यानंद रस
पीयूषवल्ली रस
पूर्ण चंद्र रस
प्रदररिपु रस,
प्रवाल पंचाम्रत
रस
प्रतापलंकेश्वर
रस
प्रमेहगज केशरी
रस
पुष्पधन्वा रस
प्रदरारि रस
प्रदरान्तक रस
रसपीपरी रस
रसराज रस
रामबाण रस
रजःप्रवर्तिनी
बटी,
रसादि रस
रक्तपित्तान्तक
रस
संजीवनी बटी
संशमनी बटी
समीरपन्नग रस
सारिवादि बटी
सर्पगंधाघन बटी
सूतशेखर रस
श्रंगाराभ्र रस
स्मृतिसागर रस
सिद्धप्राणेश्वर
रस
सोमनाथ रस
शिलाजीत बटी,
शिलाजित्वादि बटी
शिलासिंदूर बटी,
शिरःशूलादिवज्र
रस
शिरोवज्र रस
शूलवज्रिणी बटी
शंख बटी
शंकर बटी
शूलगजकेशरी रस
श्वास कुठार रस,
श्वासकास
चिंतामणि रस
शीतांशु रस
शुक्रमात्रिका
बटी
त्रिभुवन कीर्ति
रस
त्रिमूर्ति रस,
त्रैलोक्य
चिंतामणि रस
तारकेश्वर रस
बोलबद्ध रस
ब्राह्मी बटी
वात गजांकुश रस
वातकुलान्तक रस
बसंत कुसुमाकर रस
वृहत वातगजांकुश
रस
वृहत बंगेश्वर रस
विरेचन बटी
वृहत वातचिंतामणि
रस
वृहत
गर्भचिंतामणि रस
वीर्यशोधन बटी
वृद्धिबाधिका बटी
व्योषादि बटी
विषतिंदुक बटी
व्याधिहरण रसायन,
वृहत कामचूड़ामणि
रस
योगेन्द्र रस
अभ्रक भस्म
(साधारण,शतपुटी,सहस्त्रपुटी)
अकीक पिष्टी/भस्म
हजरुलयहूद
भस्म/पिष्टी
गोदन्ती भस्म
जहरमोहरा खताई
भस्म/पिष्टी,
कुक्कुटाण्डत्वक
भस्म
कहरवा पिष्टी
कान्तसार लौह
भस्म
कपर्द(वराटिका)भस्म
कासीस भस्म
लौह भस्में
(तीन
प्रकार)
मण्डूर भस्म
श्रंग भस्म
मुक्ताशुक्ति
भस्म/पिष्टी,
नाग भस्म
प्रवाल
पिष्टी/भस्म
शंख भस्म
शुभ्रा(स्फटिका)
भस्म
स्वर्णमाक्षिक
भस्म
ताम्र भस्म
टंकण भस्म
त्रिबंग भस्म
बंग भस्म
यशद भस्म
कासीस गोदन्ती
भस्म
संगेजराहत भस्म
संगेयेशव
भस्म/पिष्टी
गोमेदमणि
भस्म/पिष्टी
माणिक्य
भस्म/पिष्टी
मुक्ता(मोती)भस्म/पिष्टी
नीलम भस्म/पिष्टी
पुखराज
भस्म/पिष्टी
चांदी(रजत)भस्म
पन्ना(तार्क्ष्य)भस्म/पिष्टी
लाजावर्त
भस्म/पिष्टी
अम्लपित्तान्तक
लौह
चंदनादि लौह
(ज्वर
व प्रमेह)
ताप्यादि लौह
(रजत/बिना
रजत)
धात्री लौह
नवायस लौह
प्रदरारि लौह
प्रदरान्तक लौह
पुनर्नवादि
मण्डूर
विषमज्वरान्तक
लौह
सर्वज्वरहर लौह
सप्तामृत लौह
शिलाजित्वादि लौह
यक्रदप्लीहारि
लौह
रक्तपित्तान्तक
लौह
शोथारि लौह
मेदोहर विडंगादि
लौह
अमृतादि गुग्गुल
आभा गुग्गुल
कांचनार गुग्गुल
कैशोर गुग्गुल,
गोक्षुरादि
गुग्गुल
पुनर्नवादि
गुग्गुल
लाक्षादि गुग्गुल
पंचतिक्तघृत
गुग्गुल
रास्नादि गुग्गुल
सप्तविंशतिको
गुग्गुल
सिंहनाद गुग्गुल,
त्रयोदशांग
गुग्गुल
त्रिफला गुग्गुल
योगराज गुग्गुल
महायोगराज
गुग्गुल
वातारि गुग्गुल,
मेदोहर(नवक)
गुग्गुल
अभ्रक पर्पटी
स्वर्ण पर्पटी
बोल पर्पटी
लौह पर्पटी
प्राणदा पर्पटी
ताम्र पर्पटी
पंचामृत पर्पटी
विजय पर्पटी
रस पर्पटी
शीतल पर्पटी
श्वेत पर्पटी
मकरध्वज
चंद्रोदय
मल्ल सिंदूर
मल्ल चंद्रोदय
रस सिंदूर
शिला सिंदूर
स्वर्णबंग
ताल सिंदूर
रसमाणिक्य,
शिलाजीत(गीला/सूखा)
स्वर्णबंग क्षार