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सोमवार, मई 11, 2009
जड़ी-बूटी,एलोपैथी,आयुर्वेदिक,एक्युपंचर सभी किए गए,दोनो पैरोँ मेँ भयंकर दर्द रहता है
Published :
5/11/2009 09:23:00 am
Author :
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
सर नमस्कार।मेरी मम्मी की उम्र लगभग 38 साल है।उन्हेँ लगभग 3 साल से दोनो पैरोँ मेँ भयंकर दर्द रहता है,दर्द ऐँड़ी से शुरु होता है फिर सूजन आ जाता है जो पूरे शरीर मेँहो जाता है।नसेँ मुड़ी हुई लगती है।जिस वजह से न चल पाती हैँ न ही उठ पाती हैँ।फिर बुखार आ जाता है।पैरोँ के उँगलियोँ मेँ तथा जोड़ोँ मेँ कोई गाँठ नही है।दर्द के वजह से सूजन जरुर हो जाता है।अभी साल भर से साथ मेँ अगर चलती हैँ तो कमर से कट-कट की आवाज आती है।इलाज मेँ हर प्रकार से जड़ी-बूटी,एलोपैथी,आयुर्वेदिक,एक्युपंचर सभी किए गए हैँ,कोई कहते हैँ गठिया हैँ कोई आर्थराइटिस कोई वात हैँ।समझ मेँ नहीँ आता है क्या है।हम लोग हार चुके हैँ ,क्या मम्मीजी कभी पूरी तरह से ठीक हो पाएंगी ?दवाई मेँ Nimesulide या Diclofenac sodium दिन मेँ 3 बार देना पड़ता है साथ मेँ इंजेक्शन भी। 3 सालोँ से लीवर और किडनी का क्या हाल हुआ होगा ?हम सभी इस बीमारी से अपना आपा खो चुके हैँ क्या करेँ?इस बीमारी की शुरुवात कैसे हुई ये बताना चाहुँगा, बरसात के दिनोँ मेँ खेती सम्भालना पड़ता है मम्मीजी खेत के पानी मेँ 5-6 घंटे तक रही थी।शाम से पैर के पंजो व ऐड़ी मेँ दर्द हुआ फिर सूजन और अभी ये गंभीर स्थिति है।मैँ स्वंय ऐलोपैथी का युवा डाँक्टर हुँ और इस बीमारी से हार चुका हुँ।क्या मम्मीजी पूरी तरह से पहले जैसी ठीक हो जाएँगी ? इसका ईलाज जरुर बताएँ डाँक्टर साहब मैँ आपका जिँदगी भर आभारी रहूँगा।
डाँ॰वीरेँद्र पालके(पी॰एम॰एच॰एम॰)
कवर्धा (छत्तीसगढ़)
प्रिय डा.वीरेन्द्र जी, हिम्मत हार कर बैठ जाने से समस्याएं हल नहीं होती हैं एक चिकित्सक को आखिरी दम तक प्रयत्नशील रहना चाहिये। आपकी माता जी के विषय में आपने जैसा लिखा है कि तमाम उपचार लिये जा चुके हैं, ये लक्षण शत-प्रतिशत वात संबंधी विकार के ही हैं किन्तु कोई लाभ नहीं हुआ तो इसका सीधा सा अर्थ है कि आपको सही चिकित्सक नहीं मिले या सही और शुद्ध औषधियां नहीं मिली होंगी; जरा विश्वास रख कर इस उपचार को दीजिए-
१. शुन्ठी गुग्गुल एक गोली + योगराज गुग्गुल एक गोली + महायोगराज गुग्गुल एक गोली दिन में तीन बार गर्म जल से दीजिये।
२. वैश्वारनर चूर्ण तीन ग्राम रात में एक बार गर्म दूध के साथ दीजिए
३. अश्वगंधा चूर्ण तीन ग्राम दिन में दो बार जल से दीजिये।
४. समीरपन्नग रस एक एक गोली दिन में दो बार शहद से दीजिये।
५. रास्नासप्तक क्वाथ तीस मिली. दिन में दो बार दीजिये।
६. बलातेल+ एरण्ड तेल मिला कर इससे सप्ताह में एक बार एनिमा दीजिए।
इस उपचार को तीन माह तक दीजिये और ध्यान रहे कि कब्जियत न होने पाए वैसे तो औषधि व्यवस्था ऐसी है कि ऐसा नहीं होगा किन्तु कई बार रोगी क्रूरकोष्ठी होने पर ऐसा पाया गया है। बासी भोजन से परहेज करें।
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