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Saturday, May 31, 2008

मुझे बताया कि स्टमक में घाव हैं,आपरेशन न करवाना पड़े.....

डाक्टर साहब,मेरी उम्र पैंतालीस साल है, पिछले एक माह से मुझे epigastrium के पास तीखा सा दर्द होता है जो कि कभी तो रहता है और कभी गायब हो जाता है। यह दर्द एक ही जगह पर रहता है, विशेष तौर पर भोजन के बाद १५ मिनट से २ घंटे तक दर्द बढ़ता रहता है अगर कुछ कठोर सा खाना जैसे कि रोटी आदि खाया तो ज्यादा दर्द हो जाता है और यदि सत्तू या जूस वगैरह लिया तो कम रहता है। कभी कभी उलटी हो जाने पर दर खत्म हो जाता है, दर्द के साथ जलन सी भी महसूस होती है। भूख तो लगती है लेकिन ज्यादा खाने की हिम्मत नहीं होती है। कमजोरी आती जा रही है। पेट के बीचोबीच में यदि डाक्टर ने दबा कर देखा तो बहुत तेज दर्द होता है, यहां के डाक्टर ने टैस्ट के बाद मुझे बताया कि स्टमक में घाव हैं। आप कोई ऐसी दवा बताईये कि मुझे आपरेशन न करवाना पड़े, मुझे आपरेशन के बारे में सोच कर ही भय लगता है और वो भी पेट का आपरेशन तो और भी भयंकर होगा। मेरी मदद करिये।
राज अवस्थी, बरुआसागर
राज भाईसाहब आपको आपरेशन करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी इस लिये भयभीत न हों। यदि आपके आमाशय में घव है तो ये कोई जानलेवा या लाइलाज बीमारी नहीं है बस होता ये है कि आप पेट के असहनीय दर्द से घबरा जाते हैं। अब आप निम्न औषधियों को नियम से लीजिये और चिंतामुक्त हो जाइये साथ ही दर्द से भी मुक्ति मिल जाएगी, इस उपचार से किसी भी कारण हुआ आमाशय घाव या व्रण भर जाएगा और उसके बनने का कार्ण भी समाप्त हो जाएगा। बस ध्यान रखिये कि आपका भोजन कम से कम पंद्रह दिन तक तरल हो ठोस आहार न लें बस पंद्रह दिन की ही तो बात है फिर उसके बाद धीरे-धीरे हल्का भोजन लेना शुरू करियेगा। दूध और घी ले सकते हैं,शहद लीजिये,अण्डे यदि खाते हों तो ले सकते हैं पर एक से ज्यादा नहीं वो भी दूध में घोल कर लें। गर्म दूध न लें हानिकारक है इस लिये ठण्डा किया हुआ दूध लेना हितकर है। बाजारू साफ़्ट ड्रिंक्स हर्गिज़ न लें।
१ . पहले चार दिन तक सुबह-दोपहर-शाम-रात को ये दवा लें -- सर्वांगसुन्दर रस ४ रत्ती + मण्डूर भस्म ४ रत्ती + शुक्ति भस्म ४ रत्ती मिला लें व ये हो गई आपकी एक दिन की खुराक जिसे चार बराबर हिस्सों में करके एक माशा सौंफ़ के चूर्ण+ भुना जीरा का चूर्ण ४ रत्ती के साथ मिला कर आपको शहद के साथ चाटना है। भोजन के बाद कुमार्यासव नं. १ दो चम्मच पियें ।
२ . चार दिन बाद पांचवे दिन से दवा परिवर्तित करिये व ये दवा लेना शुरू करें -- सूतशेखर रस(साधारण) २५० मिग्रा. + कामदुधा रस(साधारण) ५०० मिग्रा. + यशद भस्म १०० मिग्रा. + जहरमोहरा पिष्टी २५० मिग्रा. + आमलकी रसायन ५०० मिग्रा. + शंख भस्म २५० मिग्रा. + मुक्ताशुक्ति पिष्टी २५० मिग्रा. + प्रवाल पंचामृत(मुक्ता युक्त) ५० मिग्रा. ; इस पूरी दवा की एक खुराक करें व इसे सुबह दोपहर शाम को तीन बार शहद के साथ लीजिये और इसके दस मिनट बाद जीरा जल पी लीजिये। जीरा जल बनाने के लिये तीन ग्राम जीरा लेकर बारीक पीसिये और लगभग १०० मिली जल में डाल कर दस मिनट के लिये रख दीजिये तथा फिर पतले कपड़े से छान लीजिये बस हो गया आपका जीरा जल तैयार, अब आप इसका सेवन कर सकते हैं परंतु हर बार ताजा ही बनाएं।
इस औषधि व्यवस्था को दो माह तक प्रयोग और यकीन करिये कि आपकी बीमारी ठीक हो जाएगी अगर प्रतीत हो तो दो माह और इस्तेमाल कर लीजिये लम्बे समय तक भी यदि आप दवाएं लें नुकसान नहीं होगा

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Sunday, May 25, 2008

डायाफ्राम के नीचे दाहिने हिस्से में कुछ फूला सा महसूस होता है.....

सर,नमस्ते
मेरी उम्र २७ साल है लगभग नौ दस साल पहले मैं पीलिया से पीड़ित हुआ था। उपचार लेने के बाद पीलिया तो ठीक हो गया लेकिन एक नई समस्या तब से पीछा नहीं छोड़ रही है। मेरे पेट में नाभि के ऊपर डायाफ्राम के नीचे दाहिने हिस्से में कुछ फूला सा महसूस होता है। खाने के बाद लगता है कि खाना वहां पर ही अटक गया है, झुकने या उस स्थान को दबाने पर मुंह में अनपचा भोजन आ जाता है, ऐसा लगता है कि डकार आ जाए तो कदाचित राहत मिल जाएगी किन्तु डकार आती ही नहीं,ये उभरा हिस्सा दबाने पर दर्द नहीं करता है,कब्जियत बनी रहती है, गले में कफ़ रहता है जो कि खखारने पर पारदर्शी से बलगम के रूप में निकल आता है और ये कदाचित मीठा सा प्रतीत होता है बाकी तमाम उपद्रव आपको मैं फोन पर बता चुका हूं। परीक्षा नजदीक है इसलिये जरा त्वरित उपचार बताएं ताकि स्वस्थ होकर परीक्षा दे सकूं। धन्यवाद..
सौरभ,वाराणसी
सौरभ भाई, आपकी समस्या के बारे में समझा कि किस तरह से तमाम व्यवसायिक लोग आपके ऊपर आयुर्वेद से लेकर एलोपैथी के अनेक प्रयोग कर चुके हैं। सच तो ये है कि जब हम अपने ऊपर अनेक परीक्षण करवा चुके होते हैं तब हमारा ध्यान हमारे आसपास मौजूद ईश्वर की दी अनमोल चीजों से हट जाता है। बिना किसी भूमिका के आपको उपचार बता रहा हूं जिसे आपको वर्धमान क्रम में लेना है लेकिन उससे पहले आप पहले पंद्रह दिन सितोपलादि चूर्ण दो-दो ग्राम सुबह शाम शहद के साथ लीजिये फिर उसके बाद आप आधा ग्राम से शुरू ग्वारपाठा(एलोवेरा,घीग्वार) रोज आधा ग्राम बढ़ाते जाइये। इस प्रकार से आप जब रोज दोपहर के भोजन के बाद एलोवेरा का सेवन करें तो इस क्रम में यह मात्रा बढ़ कर दस ग्राम तक आ जाए तो इसके उलटे क्रम में मात्रा घटाना शुरू कर दीजिये और फिर आधा ग्राम पर आने के बाद पंद्रह दिन के लिये बंद कर दीजिये और फिर इसी क्रम में लीजिये ऐसी पूरी प्रक्रिया तीन बार दोहराइये आपकी बीमारी जड़ से गायब हो जाएगी।

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Friday, May 16, 2008

मुझे खूनी बवासीर है तथा गुदा में एक मस्सा भी है।

डाक्टर साहब नमस्ते,मेरी आयु २८ वर्ष है। डा.साहब जी मेरी परेशानी यह है कि मुझे खूनी बवासीर है तथा गुदा में एक मस्सा भी है। पेट में ज्यादातर कब्ज रहती है और मेरा पेट भी भारी होता जा रहा है। जब कब्ज हो जाती है तो पाखाना के समय काफी खून जाता है। अतः आपसे निवेदन है कि कोई अच्छी सी दवाई देने की कृपा करें। जिससे कि मुझे इस रोग से मुक्ति मिल जाए। मैं आपका सदा आभारी रहूंगा।
विपिन, उत्तर प्रदेश
विपिन भाई, मैं आपकी तकलीफ़ को भली प्रकार से समझ रहा हूं कि आप कितनी तकलीफ़ से गुजर रहे हैं। सच तो ये है कि आपकी मुख्य समस्या खूनी बवासीर न हो कर कब्जियत है और इसी के कारण आपको खूनी बवासीर हुई है। अब बेफिक्र हो जाइए क्योंकि अब न तो कब्ज की समस्या रहेगी और न ही बवासीर रहने वाली है; दर्द, मस्सा, खून जादू की तरह से गायब हो जाएगा बस आप इन दवाओं को नियम से लीजिये और दवा के सेवन के दौरान मिर्च-मसालेदार आहार, मांसाहार बंद कर दें व बाजारू भोजन से परहेज करें।
१ . रात्रि भोजन के बाद में एक चम्मच गंधर्व हरीतकी चूर्ण को गर्म जल से लें। ये नित्य प्रति पंद्रह दिन तक लें।
२ . सोलहवें दिन से इस दवा से स्थान पर इसी प्रकार से इतनी ही मात्रा में त्रिफ़ला चूर्ण लेना प्रारंभ करें और ऊपर बताई दवा बंद कर दें।
३ . इन्ही दवाओं के साथ ही दिन में तीन बार अर्शकुठार रस एक गोली + अर्शोघ्नी बटी एक गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लें।
४. नीम के तेल १०० मिली+ १० ग्राम पिपरमिंट + २० ग्राम कपूर मिला कर रख लें मिश्रित होने के बाद दो भाग कर लें एक भाग से एक-एक बूंद बताशे में भर कर दिन में तीन बार जल से लें तथा दूसरा भाग मल त्याग करने के बाद गुदा के प्रभावित स्थान पर लगाएं यदि कदाचित जलन हो तो उसे एक दो दिन सहन कर लीजिये फिर जलन न होगी।
५ . शुभ्रा भस्म आधा-आधा ग्राम दिन में तीन बार ठंडे दूध से लें ।

६. मेदोहर गुग्गुलु दो-दो गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लें।

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