रविवार, फ़रवरी 19, 2017

प्रशन :- सर जी मै मेरी अभी अभी नयी नयी शादी हुई है। मैं जैसे ही संभोग करना शुरू करता हूं कुछ ही सेकेंड में चिपचिपा सा पदार्थ मेरे लिंग से निकलने लगता है जो कि पानी जैसा होता होता है और मेरे लिंग का तनाव बिलकुल समाप्त हो जाता है बिना वीर्य निकले ही लिंग पूरी तरहा शिथिल हो जाता है और फिर मैं संभोग करने में अक्षम हो जाता हूं ये कौन सी बिमारी है और क्या ये ठीक हो सकती है कृपया इलाज बतायें ।
                                                                                                  शिवराज सिंग उम्र ३२ वर्ष हरियाणा
                                       
उत्तर :-  भाई शिवराज जी ये एक जटिल रोग है जो थोडा लंबा इलाज लेने पर निश्चित रूप से ठीक हो जाता है । वीर्य को होल्ड करने वाली नसे जब अपनी क्षमता खो देती है तो वाह बिना किसी प्रयास के पतला होकर रिसने लगता है वीर्य का रिसावं होते ही लिंग शिथिल हो जाता है और हं सेक्स करने में असमर्थ हो जाते हैं इसमें आपको वीर्य को गाढा करने वाली और लिंग को द्रढ बनाने वाली औषधियों का सेवन करना चाहिये आप जरूर ठीक हो जायेंगे चिंता मत किजीये ।नीचे लेखी हुई दवाये ले शकते हैं आप
१ > आवळा  पाऊडर एक चम्मच रोज पानी से
२>तालमखाना मिश्री और गोखरू चूर्ण मिळकर एक चम्मच रोज
३> स्वर्ण युक्त शिलाजीत एक  टेबलेट रोज पानी से
४>अशवगंधा चांदी युक्त एक गोली पानी से
५>शुक्रवल्लभ रस वीर्य को गाडा करने के लिये एक गोली  रोज
६>चंद्रप्रभा वटी शाम को २ गोली
७>वृष्य वटी नाश्ते के बाद एक गोली
८>धातुपौष्टिक चूर्ण रोज एक चम्मच
९>सवर्णयुक्त मकरध्वज एक गोली रोज नाश्ते बाद
१०> १ग्राम केशर में १० मिलीअशवगंधा तेल ,श्रीगोपाल तेल १० मिली ,मालकांगनी तेल १० मिली ,कलौजी तेल १० मिली ,निर्गुंडी तेल १० मिली ,जायफळ पाऊडर १ग्राम ,दालचिनी पाऊडर १ ग्राम ,लौग तेल ५मिली ,सवर्ण वांगेशवर भसम एक ग्राम सबको मिलाकर घोंट लें और लिंग पर नहाने के बाद १० मिनटं तक मालिश करे

यदि दिन में समय मिले तो दो बार क्रीम लगायें,  यदि कोई भी शंका या परेशानी हो तो आप सीधे मुझसे ई-मेल (aayushved@gmail.com) या मोबाइल नंबर 09224359159 पर संपर्क करें।  

गुरुवार, जनवरी 05, 2017

सर नमस्कार।मेरी मम्मी की उम्र लगभग 38 साल है।उन्हेँ लगभग 3 साल से दोनो पैरोँ मेँ भयंकर दर्द रहता है,दर्द ऐँड़ी से शुरु होता है फिर सूजन आ जाता है जो पूरे शरीर मेँहो जाता है।नसेँ मुड़ी हुई लगती है।जिस वजह से न चल पाती हैँ न ही उठ पाती हैँ।फिर बुखार आ जाता है।पैरोँ के उँगलियोँ मेँ तथा जोड़ोँ मेँ कोई गाँठ नही है।दर्द के वजह से सूजन जरुर हो जाता है।अभी साल भर से साथ मेँ अगर चलती हैँ तो कमर से कट-कट की आवाज आती है।इलाज मेँ हर प्रकार से जड़ी-बूटी,एलोपैथी,आयुर्वेदिक,एक्युपंचर सभी किए गए हैँ,कोई कहते हैँ गठिया हैँ कोई आर्थराइटिस कोई वात हैँ।समझ मेँ नहीँ आता है क्या है।हम लोग हार चुके हैँ ,क्या मम्मीजी कभी पूरी तरह से ठीक हो पाएंगी ?दवाई मेँ Nimesulide या Diclofenac sodium दिन मेँ 3 बार देना पड़ता है साथ मेँ इंजेक्शन भी। 3 सालोँ से लीवर और किडनी का क्या हाल हुआ होगा ?हम सभी इस बीमारी से अपना आपा खो चुके हैँ क्या करेँ?इस बीमारी की शुरुवात कैसे हुई ये बताना चाहुँगा, बरसात के दिनोँ मेँ खेती सम्भालना पड़ता है मम्मीजी खेत के पानी मेँ 5-6 घंटे तक रही थी।शाम से पैर के पंजो व ऐड़ी मेँ दर्द हुआ फिर सूजन और अभी ये गंभीर स्थिति है।मैँ स्वंय ऐलोपैथी का युवा डाँक्टर हुँ और इस बीमारी से हार चुका हुँ।क्या मम्मीजी पूरी तरह से पहले जैसी ठीक हो जाएँगी ? इसका ईलाज जरुर बताएँ डाँक्टर साहब मैँ आपका जिँदगी भर आभारी रहूँगा।डाँ॰वीरेँद्र पालके(पी॰एम॰एच॰एम॰)कवर्धा (छत्तीसगढ़)

प्रिय डा.वीरेन्द्र जी, हिम्मत हार कर बैठ जाने से समस्याएं हल नहीं होती हैं एक चिकित्सक को आखिरी दम तक प्रयत्नशील रहना चाहिये। आपकी माता जी के विषय में आपने जैसा लिखा है कि तमाम उपचार लिये जा चुके हैं, ये लक्षण शत-प्रतिशत वात संबंधी विकार के ही हैं किन्तु कोई लाभ नहीं हुआ तो इसका सीधा सा अर्थ है कि आपको सही चिकित्सक नहीं मिले या सही और शुद्ध औषधियां नहीं मिली होंगी; जरा विश्वास रख कर इस उपचार को दीजिए-
१. शुन्ठी गुग्गुल एक गोली + योगराज गुग्गुल एक गोली + महायोगराज गुग्गुल एक गोली दिन में तीन बार गर्म जल से दीजिये।
२. वैश्वारनर चूर्ण तीन ग्राम रात में एक बार गर्म दूध के साथ दीजिए
३. अश्वगंधा चूर्ण तीन ग्राम दिन में दो बार जल से दीजिये।
४. समीरपन्नग रस एक एक गोली दिन में दो बार शहद से दीजिये।
५. रास्नासप्तक क्वाथ तीस मिली. दिन में दो बार दीजिये।
६. बलातेल+ एरण्ड तेल मिला कर इससे सप्ताह में एक बार एनिमा दीजिए।
इस उपचार को तीन माह तक दीजिये और ध्यान रहे कि कब्जियत न होने पाए वैसे तो औषधि व्यवस्था ऐसी है कि ऐसा नहीं होगा किन्तु कई बार रोगी क्रूरकोष्ठी होने पर ऐसा पाया गया है। बासी भोजन से परहेज करें।