शुक्रवार, फ़रवरी 15, 2013

womans problem

प्रश्न:- डा. साहाब मेरी उम्र 26 वर्ष है ।मैं एक नौकरी करनेवाली युवती हु। पिछ्ले तीन सालों से मैं श्वेत प्रदर की समस्या से पिडीत हु। दो तीन बार आयुर्वेदिक, होमिओपथीक,और अग्रेंजी दवाओं के कोर्स किये जब तक दवा का प्रभाव रहता तब तक आराम मिलता है ।उसके बाद फ़िरसे वही विकार प्रकट होने लगते है।ये रोग क्यों होता है ? और इसका क्या सचमुच कोई स्थायी इलाज है ?
उत्तर:-
आदरणीय़ बहनजी आयुषवेद परीवार मैं आपका स्वागत है ।भारतीय समाज मैं बहुत बार डर कि वजह से अपने रोग और अपनए गुप्त समस्याए छिपायी जाती है ।लेकीन घर पर इंटरनेट आ जाने से बिना किसीसे मिले बगेर समस्या समाधान पा सकते है ।
श्वेत प्रदर का अर्थ योनि मार्ग से चिकना चिपचिपा सा पदार्थ लगातार निकलता रहता है ।
जिससे योनिमार्ग मैं खुजलाहट चिपचिपाहट एवम दर्द व जलन होता है।किसी किसी महिलाओं योनि तेज दुर्गध आती है। श्वेत प्रदर का दुसरा नाम लिकोरिआ भी है।श्वेतप्रदर की वजह से महिलाओं को कमरदर्द ,सरदर्द बैचेनी चिड्चिडापन घबराहट भी हो सकती है ।कभी कभी योनिमार्ग के आसपास और फ़ुन्सीया भी होती है। श्वेत प्रदर के कारण अत्याधिक मात्रा में कफ़ बननेवाला भोजन ,अधिक चिन्ता ,क्रोध, शोक ,भय आदी होना ।अत्याधिक गर्भस्त्राव होना ,अत्याधिक पित्तवर्धक भोजन करना ज्यादा कामोत्तेजक चिंतन करना कामुक फ़िल्में देखना ।गंदी पुस्तको का वाचन करना । अत्याधिक मैथुन करना इसके मुख्य कारण है।
आजकल की युवा लड्की आधुनिकता की दौड मैं बेहोष होकर दौडती है ।अपनी सहेली या मित्रों को मिलनेपर अश्लील पुस्तके और फ़िल्में देखती है।जिससे उनकी कामशक्ती दिर्घ होती है ।और वे अपरीक्त कामेच्छा को शांन्ती करती हस्थमैथुन की शिकार होती है। आज की दौड मैं श्वेत प्रदर या ल्युकोरीया ये मुख्य कारण है एक सर्वे के मुताबिक भारत के ९०% नारी श्वेत प्रदर का शिकार होति है ।
परहेज:-
१] जल्दी पचनेवाला एवं साधारण भोजन खायें।
२]रात्री मे अधिक देर तक ना जगे।
३]गेंहु, दुध,घी,मुगदाल,चावल, मेथी,अगुंर,आमला केला ,दुधी ,लौंकी आदी सेवन करे।
बाह्य चिकित्सा:-
तुरटी को पानी में घोलकर योनि पर दिन मैं ३ बार सोक लो।
तुरटी भस्म एक तोला [१०ग्रम], औंदुबर कि छाल १ तोला ,साफ़ मुलायम कपडे मे लेकर छोटी पोट्ली बनाकर रात्री में योनि के भीतर रखे ।सुबह निकालकर फ़ेंक दे।
आयुर्वेदीक :-
पुष्पानुग चुर्ण १ मासा, गोदन्ती भस्म ४रत्ती कुकुटाण्ड्त्वक भस्म २ रत्ती,प्रदरात्मक् लोह ४ रत्ती,त्रिवंगभस्म, शतावर चुर्ण१ मास, शुक्ति भस्म २ रत्ती स्वर्ण माषिक भस्म २ रत्ती सबकी मात्रावत पुडिया बनाकर १-१ चावल जैसे घोल दो।
इस औषधि को दो माह तक लगातार लेने के बाद मुझे दोबारा रिपोर्ट्स भेजें व सम्पर्क करें यदि किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो आप मुझे मेरे मोबाइल (09224359159) पर किसी भी समय या मेरे ईमेल aayushved@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं। यदि औषधियाँ मिलने में परेशानी हो तो सूचित करें ।जीवन में मन की शक्तियों का इस्तेमाल हमें जरूर करना चाहिये कैसे ? जानने के लिये देखिये मेरी लिखी दूसरी वेबसाईट बस इस लिंक पर click करें । www.mindhypnotism.com

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